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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Nov 01 2021 19:59:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनावी फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए प्रस्ताव :
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चुनाव लड़ने की मौजूदा व्यवस्था में इस तरह के प्रावधान है जो छोटी पार्टियों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों की परेशानी में अतिरिक्त इजाफा करते है, जबकि बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को अतिरिक्त लाभ पहुंचाते है। यह प्रस्तावित क़ानून छोटे उम्मीदवारों एवं बड़े उम्मीदवारों के बीच किये जा रहे इस पक्षपात में कमी लाएगा।
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स्पष्टीकरण ड्राफ्ट का हिस्सा नहीं है। स्पष्टीकरण नागरिको एवं कार्यकर्ताओ की सामान्य जानकारी के लिए जोड़े गए है।
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-----ड्राफ्ट का प्रारम्भ-----
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(1) सांसद / विधायक / पार्षद / सरपंच के चुनावी फॉर्म (जिसे आज नाम निर्देशन पत्र या नोमिनेशन फॉर्म कहा जाता है) में से प्रस्तावक का कॉलम हटाया जाएगा, और उम्मीदवार को चुनावी फॉर्म भरने के लिए किसी भी प्रस्तावक की जरूरत नहीं होगी।
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(a) स्पष्टीकरण :
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(a1) इस समय यह प्रावधान है कि, रजिस्टर्ड पार्टियों (छोटी पार्टियाँ) के उम्मीदवारों को 10 प्रस्तावको का ब्यौरा भरना होता है, जबकि मान्यता प्राप्त पार्टियों (बड़ी पार्टियाँ) को सिर्फ 1 प्रस्तावक चाहिए। कई मामलो में छोटी पार्टियों के उम्मीदवारों को 10 प्रस्तावक नहीं मिल पाते है, और उनका फॉर्म ख़ारिज हो जाता है। अत: 10 प्रस्तावको की अनिवार्यता को निकाल दिया गया है, ताकि छोटी पार्टियों के उम्मीदवारों के फॉर्म ख़ारिज होने की संख्या में कमी आये।
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(a2) कई बार RO उम्मीदवार से सभी 10 प्रस्तावको को उसके सामने पेश करने को कहता है। ज्यादातर मामलो में प्रस्तावक कलेक्टर की कचहरी में आने से कतराते है, और उनके उपस्थित नहीं होने पर RO फॉर्म ख़ारिज कर देता है। बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को इस समस्या का सामना नहीं करना होता, क्योंकि उन्हें सिर्फ 1 ही प्रस्तावक को ही साथ में ले जाना होता है। जो कि कोई मुश्किल कार्य नहीं।
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(2) यदि उम्मीदवार पहली बार चुनाव लड़ रहा है और यदि एफिडेविट में कोई कमी है तो RO एफिडेविट के आधार पर किसी व्यक्ति की उम्मीदवारी को ख़ारिज नहीं कर सकेगा। उम्मीदवार ने एफिडेविट को जैसे भी भरा है, RO को एफिडेविट स्वीकार करना होगा। यदि एफिडेविट में कोई कमी है, तो RO एफिडेविट पर अनुपयुक्त (Defective) और यदि एफिडेविट में कोई कमी नहीं है तो RO एफिडेविट पर उपयुक्त (appropriate) अंकित करेगा। किन्तु RO अनुपयुक्त एफिडेविट के आधार पर व्यक्ति की उम्मीदवारी को ख़ारिज नहीं कर सकेगा।
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(3) यदि उम्मीदवार दूसरी बार चुनाव लड़ रहा है, और पूर्व चुनाव में उसके द्वारा भरा गया एफिडेविट अनुपयुक्त था, तो उम्मीदवार को इस बार उपयुक्त (appropriate) एफिडेविट दाखिल करना होगा। यदि दूसरी बार में भी उम्मीदवार जो एफिडेविट दाखिल करता है वह अनुपयुक्त पाया जाता है तो RO अनुपयुक्त एफिडेविट के आधार पर व्यक्ति की उम्मीदवारी ख़ारिज कर सकेगा। दूसरी बार चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार चाहे तो 1 से अधिक एफिडेविट (अधिकतम 4) दाखिल कर सकता है।
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(b) स्पष्टीकरण :
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(b1) एफिडेविट को जानबुझकर इतना जटिल एवं दुरूह ढंग से डिजाइन किया गया है, कि इसे निर्दोष रूप से भरने के लिए काफी कौशल की जरूरत होती है। बड़ी पार्टियों के उम्मीदवार इसके लिए वकीलों की सेवाएं लेते है, और फॉर्म भरकर जमा करवा देते है। वकील आम तौर पर एक फॉर्म भरने का 10 से 20 हजार चार्ज करता है, जो कि छोटी पार्टी के उम्मीदवार के लिए काफी बड़ी राशि है। अत: छोटी पार्टी के उम्मीदवार को फॉर्म स्वयं ही भरना होता है, और अभ्यास न होने के कारण एफिडेविट ख़ारिज हो जाता है।
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(b2) हर चुनाव में दोषपूर्ण एफिडेविट के कारण ख़ारिज किये जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या काफी बड़ी है, और चूंकि वे लगातार एफिडेविट को और भी जटिल बनाते जा रहे है अत: ख़ारिज किये जाने वाले उम्मीदवारों की यह संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है।
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(4) यदि उम्मीदवार का चुनावी फॉर्म या एफिडेविट ख़ारिज हो जाता है, तो RO जमा की गयी जमानत राशि में से 20% की कटौती करके शेष राशि उम्मीदवार को लौटा देगा।
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(5) एक बार चुनावी फॉर्म जमा करवाने के बाद उम्मीदवार अपने फॉर्म को किसी भी स्थिति में वापिस नहीं ले सकेगा।
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(c) स्पष्टीकरण : फॉर्म वापिस लेने की प्रक्रिया होने के कारण काफी धांधली होती है। कई मामलो में व्यक्ति अपने समर्थको को इकट्ठा करके चुनाव में निर्दलीय के रूप में खड़ा हो जाता है, और बाद में बड़े प्रतिद्वंदी उम्मीदवार से डील करके अपना फॉर्म उठा लेता है। कई बार ऐसा भी होता है कि बड़ा प्रतिद्वंदी उम्मीदवार छोटे उम्मीदवार पर दबाव बनाकर / धमका कर उसे बिठा देता है। अत: हमने फॉर्म वापिस लेने की प्रक्रिया ही ख़त्म कर दी है। जब उम्मीदवार फॉर्म भरे तब सोच समझ कर भरें। और एक बार फॉर्म भरने के बाद उसे किसी भी तरह वापिस नहीं किया जा सकेगा। इससे गंभीर उम्मीदवार मैदान में बने रहेंगे और महज राजनैतिक समीकरण बनाने के लिए फॉर्म भरने वाले उम्मीदवारों की संख्या में कमी आएगी।
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(6) 1 उम्मीदवार एक ही चुनावी फॉर्म भरेगा। उम्मीदवार ऐसी 3 पार्टियों के नाम वरीयता क्रम में लिख सकेगा जिन पार्टियों से वह चुनाव लड़ना चाहता है। चौथा विकल्प निर्दलीय का होगा। यदि व्यक्ति निर्दलीय पर टिक मार्क करता है, और यदि व्यक्ति किसी भी पार्टी का टिकेट (फॉर्म A) प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो RO व्यक्ति को निर्दलीय के रूप में उम्मीदवार घोषित कर देगा। यदि व्यक्ति ने निर्दलीय टिक मार्क नहीं किया है, और यदि व्यक्ति किसी भी पार्टी का टिकेट (फॉर्म A) प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो RO व्यक्ति की उम्मीदवारी ख़ारिज कर देगा।
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(d) स्पष्टीकरण : मौजूदा प्रावधान यह है कि एक व्यक्ति 4 फॉर्म भर सकता है। किन्तु हमने फॉर्म ख़ारिज करने की प्रक्रिया ही हटा दी है, अत: उम्मीदवार को 4 फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं रहेगी। मौजूदा व्यवस्था में यदि कोई उम्मीदवार किसी पार्टी से चुनाव लड़ता है तो उसे पार्टी का फॉर्म भरना पड़ता है, और यदि पार्टी का टिकेट (फॉर्म A) RO के पास नहीं पहुँचता है और यदि उसने निर्दलीय उम्मीदवारी के लिए अलग से फॉर्म नहीं भरा है तो तो उसकी उम्मीदवारी ख़ारिज हो जाती है।
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उपरोक्त धारा यह प्रावधान करती है कि वह एक ही फॉर्म में पार्टी एवं निर्दलीय दोनों के विकल्प भर सकेगा। यदि उसे पार्टी का टिकेट नहीं मिलता है और उसने निर्दलीय पर टिक किया है तो वह स्वत: ही निर्दलीय उम्मीदवार घोषित हो जाएगा।
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(यह ड्राफ्ट अपूर्ण है। इसमें और भी धाराएं जोड़ी जानी शेष है।)
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 02 2021 14:10:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

BrMb Chaitanya Kumar BrActivist:

जूरी कोर्ट और वोटवापसी पासबुक आदि कानून के मुद्दे पर 278 लोगों ने अपना समर्थन दिया और कई हजार लोगों तक इस कानून की सूचना पहुंची

चरण सिंह जी को धन्यवाद, बहुत ही अच्छा प्रयास
#VoteVapsi #JuryCourt

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 02 2021 18:25:04 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

1998 में जब सचिन तेंदुलकर डॉन ब्रेडमैन से मिले थे तो पेड इण्डिया टुडे ने ब्रेडमेन-तेंदुलकर पर एक स्टोरी प्रकाशित की थी। टाइटल था - दिग्गज और उसका अवतार !!
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स्टोरी की दूसरी पंक्ति कहती थी -- तब ब्रेडमेन सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही नहीं बल्कि उन सभी देशो का बदला लेने वाले अवतार बन गए थे, जहाँ जहाँ ब्रिटिश रूल था !!
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मुझे तब भी ये बड़ा अजीब लगा था कि, कॉलोनियल रूल का बदला लेने की भरपाई वे उन्हें क्रिकेट में हराकर कर रहे थे !! और काफी बाद में समझ आया कि, दरअसल पेड मीडिया द्वारा इसे इस तरह क्यों प्रस्तुत किया जाता है !!!
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(*) जहाँ तक स्टोरी की बात है। मैंने तब तक मुख्य धारा के किसी भी मीडिया में इतनी हास्यास्पद स्टोरी नहीं पढ़ी थी। सचिन को नायक की तरह उभारने के लिए लेखक ने यह साबित करने की असफल कोशिश की थी कि सचिन का खेल डॉन के समकक्ष है !! यही वो समय था जब से पेड मीडिया ने सचिन को क्रिकेट का भगवान पुकारना शुरू किया था। इसके लिए ब्रेडमेन की मुहर की जरूरत थी। अत: ब्रेडमेन से यह कहलवाया गया कि - सचिन मेरी तरह खेलता है !!
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Sachin Avg 45.40, Don Avg 99.94
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(ब्रेडमेन अपनी अंतिम पारी में 4 रन बना लेते तो भगवान बन जाते, लेकिन सचिन 55 रन पीछे होने के बावजूद पेड मीडिया द्वारा भगवान् बना दिए गए थे !!)
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Sumit Gurgaon HrActivist:

हिंदी में पढ़ने के लिए नीचे जाएं

1986 Football world cup and Falkland War 1982

In 1986 , football quarter final world cup match was played between Argentina & England and few years ago both countries had fought a war on territorial claims over Falkland islands. The war was won by England.

The football match was portrayed by news Media as a revenge match for Argentina to avenge the loss in the war.

Wikipedia page also shows this rivalry in the background of falkland war

<https://en.m.wikipedia.org/wiki/Argentina_v_England_(1986_FIFA_World_Cup)>;

The match was won by Argentina in which footballer Maradona scored 2 goals out of which 1 goal famously called the "Hand of God" goal was scored by him with his hand. ( as per football rules one cannot touch the ball with hands . )

But the referees of the match may have deliberately overseen this error.

The match may have been fixed/scripted beforehand.

Why it may have been fixed/scripted ( only Narcotest of players and organisers can truly confirm this fixing ) :-

1. To cool down the argentinian public so that they are just satisfied with the sports win and do not think about real avenging by taking back the Falkland islands .

2. Argentinian youth and children focus more on time wasting activities like commercial sports and take it as a career ( by promoting fake ideals like Maradona ). instead of focusing on maths science education so as to improve their economy and military.

These fake ideals through their lifestyle also promote degeneracy like drugs , alcohol, adultery etc

3. Sports win often causes fake feel good factor in public so that focus can be removed from real issues like poverty , corruption, weakening military etc.

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Similar analogy in India-

One can ofter hear following statements amongst sports fan like cricket-

1. " we have avenged the 200 years rule of British by defeating them in cricket matches "

2. England the origin of cricket has not won cricket world cup ( they finally won 50 over WC in 2019)

3. " we have never lost to Pak in cricket world cup "

These statements are often given by famous sports and political personalities. E.g.

1. Sachin tendulkar saying after 2011 WC semi final that we have defeated Pak 5 times in a row now

2. mauka mauka ad during 2015 world cup in which it was shown india making fun of pakistan on this fact

( such statements & ads also increase hate amongst public of both countries against each other )

3. 26/11 attack: Tendulkar remembers how security-forces inspired Team in 2008

<https://www.newsbytesapp.com/news/sports/sachin-tendulkar-on-2008-chennai-test-post-26-11/story>;
( fake patriotism by sachin )

Watch speech by Rajiv Dixit ji to know fake patriotism of sportsmen.

<https://youtu.be/fNCm7T-kLGY>;

4. Former USA President Obama had once said that economic activities take a stand still during cricket match because indians living in USA love watching sachin tendulkar play.

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More expose and truth and solution in other posts

1986 फुटबॉल विश्व कप और फ़ॉकलैंड युद्ध 1982

1986 में, फुटबॉल विश्व कप मैच अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच खेला गया था और कुछ साल पहले दोनों देशों ने फ़ॉकलैंड द्वीपों पर क्षेत्रीय दावों पर युद्ध लड़ा था। युद्ध इंग्लैंड ने जीता था।

फ़ुटबॉल मैच को समाचार मीडिया द्वारा युद्ध में हार का बदला लेने के लिए अर्जेंटीना के लिए एक बदला मैच के रूप में चित्रित किया गया था।

विकिपीडिया पृष्ठ इस प्रतिद्वंद्विता को फ़ॉकलैंड युद्ध की पृष्ठभूमि में भी दिखाता है

<https://en.m.wikipedia.org/wiki/Argentina_v_England_(1986_FIFA_World_Cup)>;

मैच अर्जेंटीना ने जीता था जिसमें फुटबॉलर माराडोना ने 2 गोल किए थे, जिसमें से 1 गोल "हैंड ऑफ गॉड" के नाम से प्रसिद्ध गोल उनके द्वारा अपने हाथ से किया गया था। (फुटबॉल के नियमों के अनुसार कोई गेंद को हाथों से नहीं छू सकता है।)

लेकिन हो सकता है कि मैच के रेफरी ने जानबूझकर इस गलती को देख लिया हो।

मैच पहले से फिक्स/स्क्रिप्टेड हो सकता है।

यह फिक्स/स्क्रिप्टेड क्यों हो सकता है (केवल खिलाड़ियों और आयोजकों के नारकोटेस्ट ही इस फिक्सिंग की पुष्टि कर सकते हैं) :-

1. अर्जेंटीना की जनता को शांत करने के लिए ताकि वे खेल की जीत से संतुष्ट हों और फ़ॉकलैंड द्वीपों को वापस ले कर वास्तविक बदला लेने के बारे में न सोचें।

2. अर्जेंटीना के युवा और बच्चे व्यावसायिक खेलों जैसी समय बर्बाद करने वाली गतिविधियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं और इसे करियर के रूप में लेते हैं (मैराडोना जैसे नकली आदर्शों को बढ़ावा देकर)। गणित विज्ञान की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय ताकि उनकी अर्थव्यवस्था और सेना में सुधार हो सके।

ये नकली आदर्श अपनी जीवन शैली के माध्यम से नशा, शराब आदि को भी बढ़ावा देते हैं

3. खेल की जीत अक्सर सार्वजनिक रूप से नकली फील गुड फैक्टर का कारण बनती है ताकि गरीबी, भ्रष्टाचार, कमजोर सेना आदि जैसे वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके।

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भारत में समान समानता-

क्रिकेट जैसे खेल प्रेमियों के बीच निम्नलिखित कथन अक्सर सुनने को मिलते हैं-

1. "हमने क्रिकेट मैचों में अंग्रेजों को हराकर 200 साल के शासन का बदला लिया है"

2. क्रिकेट की उत्पत्ति इंग्लैंड ने क्रिकेट विश्व कप नहीं जीता है (उन्होंने अंततः 2019 में विश्व कप जीत हासिल की)

3. "क्रिकेट विश्व कप में हम पाकिस्तान से कभी नहीं हारे"

ये बयान अक्सर प्रसिद्ध खेल और राजनीतिक हस्तियों द्वारा दिए जाते हैं। उदा.

1. सचिन तेंदुलकर 2011 WC सेमीफाइनल के बाद कह रहे हैं कि हमने अब तक लगातार 5 बार पाक को हराया है

2. 2015 विश्व कप के दौरान मौका मौका का विज्ञापन जिसमें भारत को इस बात पर पाकिस्तान का मजाक उड़ाते दिखाया गया था

(ऐसे बयान और विज्ञापन दोनों देशों की जनता में एक दूसरे के खिलाफ नफरत भी बढ़ाते हैं)

3. 26/11 हमला: तेंदुलकर को याद है कि कैसे 2008 में सुरक्षा बलों ने टीम को प्रेरित किया था

<https://www.newsbytesapp.com/news/sports/sachin-tendulkar-on-2008-chennai-test-post-26-11/story>;
(सचिन की झूठी देशभक्ति)

खिलाड़ियों की नकली देशभक्ति जानने के लिए राजीव दीक्षित जी का भाषण देखें।

<https://youtu.be/fNCm7T-kLGY>;

4. संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने एक बार कहा था कि क्रिकेट मैच के दौरान आर्थिक गतिविधियां स्थिर रहती हैं क्योंकि यूएसए में रहने वाले भारतीय सचिन तेंदुलकर को खेलते देखना पसंद करते हैं।

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अन्य पोस्ट में अधिक एक्सपोज और सच्चाई और समाधान

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 02 2021 19:18:39 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि कोई चिकन टिक्का मसाला खाने से बचना चाहता है तो उसे पनीर टिक्का मसाला खा लेना चाहिए।
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एक समय की बात है जब किसी बादशाह ने यह आदेश निकाला था कि उसके राज्य में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को चिकन टिक्का मसाला खाना ही पड़ेगा। और राजा के कर्मचारी घर घर जाकर बिल चेक करते थे कि उन्होंने चिकेन टिक्का मसाला खाया है या नहीं। जिनके पास बिल नहीं होता था, फिर राजा के कर्मचारी उन्हें जबरदस्ती चिकेन टिक्का मसाला खिलाते थे।
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राज्य के कुछ नागरिको को चिकन टिक्का मसाला नहीं खाना था, और वे राजाज्ञा का उलंघन करके किसी परेशानी में भी नहीं फंसना चाहते थे। तो उन्होंने एक उपाय किया। वे किसी भी पास रेस्टोरेंट में जाकर पनीर टिक्का मसाला खाते थे, और रेस्टोरेंट से चिकेन टिक्का मसाला का बिल ले लेते थे। और जब राजकीय कर्मचारी उनसे पूछते थे तो उन्हें वे चिकेन टिक्का मसाला का बिल दिखा देते थे !!
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इस तरह पनीर टिक्का मसाला खाने की वजह से वे चिकेन टिक्का मसाला खाने से बच पाए। किन्तु कई नागरिको ने पनीर टिक्का मसाला नहीं खाया, और नतीजे में उन्हें बाद में राजकीय कर्मचारियों द्वारा जबरदस्ती चिकेन टिक्का मसाला खिलाया गया !!
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सबक यह है कि - यदि कोई व्यक्ति चिकेन टिक्का मसाला खाने से बचना चाहता है तो उसे पनीर टिक्का मसाला खा लेना चाहिए।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 02 2021 21:25:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आर्यन - समीर वानखेड़े ड्रामा
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(1) अफीम-भांग-गांजे पर प्रतिबन्ध होने के कारण हैरोइन, कोकीन, एक्सटेसी, जैसी रिफाइंड ड्रग्स की खपत बेहद बढ़ जाती है। शराब भी इसमें शामिल है। अफीम-भांग-गांजे के नशे में फुटकर कारोबार है, और इसमें धनिक वर्ग के लिए एकाधिकार बनाकर मोटा मुनाफा बनाने के अवसर नहीं है। लेकिन रिफाइंड ड्रग्स एक संगठित कारोबार है, जिसे नेता-पुलिस-जज माफिया के गठजोड़ से धनिक वर्ग नियंत्रित करता है।
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समाधान : हमारा प्रस्ताव है कि अफीम-भांग-गांजा पर जिला स्तर पर राज्य स्तर पर एवं राष्ट्रिय स्तर पर जनमत संग्रह करवाए जाने चाहिए। जनमत संग्रह में इन पर प्रतिबन्ध उठाने या न उठाने से सम्बंधित प्रश्न रखा जाए। यदि किसी जिले / राज्य / देश के नागरिको का बहुमत अनुमति देता है तो इन पर से प्रतिबन्ध उठा लिया जाना चाहिए। ऐसे जनमत संग्रह में मेरा वोट प्रतिबन्ध उठाने के पक्ष में होगा।
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शराब एवं दवाईयों की खपत बढ़ाने के लिए ब्रिटिश ने भारत में अफीम-गांजा-भांग पर प्रतिबन्ध लगाए थे। इन प्रतिबंधो को हटाने से शराब एवं रिफाइंड ड्रग्स जो कि ज्यादा खतरनाक ड्रग्स है, की खपत में बेहद तेजी से कमी आएगी।
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बीजेपी-कोंग्रेस-आपा एवं इनके सभी कार्यकर्ता, मोदी-सोनिया-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत अफीम-भांग-गांजे पर जनमत संग्रह करवाने के विरोध में है। 'नशा मत करो' के लेक्चर देने वाले सभी आध्यत्मिक गुरु वगेरह भी इस प्रस्ताव के खिलाफ है। उनका कहना है कि हम अपने प्रवचन सुना सुना कर लोगो का नशा छुडवा देंगे, और यह समस्या हल हो जायेगी !! इसलिए वे अपने अनुयायियों को इस कानून की जरूरत के बारे में सूचना नहीं देते।
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जनमत संग्रह जैसी प्रक्रिया संचालित करने के लिए हमने टी सी पी क़ानून का प्रस्ताव किया है, जिसका ड्राफ्ट आप यहाँ देख सकते है – facebook.com/pawan.jury/posts/3173094346142113
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(2) आर्यन खान की गिरफ्तारी, सुनवाई एवं रिहाई का ड्रामा।
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आधा बोलीवुड कोकीन से लेकर कई प्रकार की रिफाइंड ड्रग लेता है। और यह खुली हुई बात है। मंत्रियो के आदेश पर बड़े अधिकारी इन लोगो को पकड़ते है। पकड़े गए इन बड़े लोगो के 100 में 99 मामलो में मंत्री / नेता आदमी की हैसियत के अनुसार पैसा खींच कर उन्हें छोड़ देते है। पुलिस एवं नारकोटिक्स विभाग का यही काम है – बड़े लोगो को नशे के साथ पकड़ो और उनसे पैसा खींच लो।
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इन 100 मामलो में से 1 मामला सौदा न पटने या किसी राजनैतिक वजह से गिरफ्तारी तक पहुँच जाता है, और मामले को निपटाने का बजट बढ़ जाता है। क्योंकि अब फंसने वाले बड़े आदमी को मीडिया कर्मियों एवं जजों को भी भुगतान करना होता है !! तो अदालत में जाने के बाद सबसे ज्यादा पैसा जजों एवं मीडिया कर्मियों की जेब में जाता है। और वे काफी बड़ी राशि वसूलते है।
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आर्यन खान के मामले में भी यही हुआ। कुल मिलाकर शाहरुख़ खान को 50-100 करोड़ का धक्का लगा है, जो उसने मामला रफा दफा करने के लिए मंत्री-जज-मीडिया आदि को चुकाए।
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पेड मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि आर्यन खान के पास से ड्रग बरामद नहीं हुई है। सबूत के नाम पर उनके पास सिर्फ व्हाट्स एप चेट थी !! तो हुआ यह होगा कि ड्रग बरामद होने के बावजूद इसे सौदा पटने के एवज में रिकोर्ड में से निकाल दिया गया, और यह भी हो सकता है कि ड्रग कभी बरामद हुई ही नहीं थी, लेकिन शाहरुख़ से पैसा खींचने के लिए मामले को खड़ा किया गया।
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समाधान : जूरी कोर्ट एवं जूरी के सामने सार्वजनिक नार्को टेस्ट !!
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जूरी कोर्ट आने के बाद इस तरह के मामलो को नागरिको की जूरी सुनेगी। मुंबई की वोटर लिस्ट में से 25 से 55 आयु वर्ग के नागरिको का लोटरी से चयन किया जाएगा और 50 लोगो की जूरी के सामने यह मामला प्रस्तुत होगा। जूरी दोनों पक्षों को सुनने के बाद संदेह के आधार पर वादी-प्रतिवादी का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने के आदेश दे सकती है। और जैसे ही जूरी नार्को टेस्ट के आदेश देगी वैसे ही बिना इंजेक्शन लिए ही शाहरुख़, आर्यन और वानखेड़े सब कुछ सच सच बकना शुरू कर देंगे !!
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इस तरह के संगठित अपराध को जिसमें नेता-अधिकारी-जज-मीडियाकर्मी-वादी-प्रतिवादी सभी मिले हुए हो जूरी के सामने सार्वजानिक नार्को टेस्ट बिना खोलना नामुमकिन है।
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बीजेपी-कोंग्रेस-आपा एवं इनके सभी कार्यकर्ता, मोदी-सोनिया-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत जूरी कोर्ट के विरोध में है। उनका कहना है कि सभी प्रकार के मामले सिर्फ जज को ही सुनने चाहिए और ऐसे आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए।
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प्रस्तावित जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट यहाँ देखें – facebook.com/pawan.jury/posts/3173085952809619
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Nov 04 2021 10:44:17 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

दीपावली पर आतिशबाजी करे, और आतिशबाजी की फ़ोटो / विडियो फ़ेसबुक पर अपलोड करे।
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साथ ही उन नेताओ/ राजनेताओं को चिन्हित करे जो सिर्फ़ दीपमाला / रंगोली के फ़ोटो डाल रहे है, और जानबूझकर आतिशबाजी के फ़ोटो नही डाल रहे है।
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सभी को “आतिशबाजी युक्त दीपावली की शुभकामनाएँ” दें, सिर्फ़ दीपावली की शुभकामनाए नही।
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आतिशबाजी युक्त दिवाली की शुभकामनाएँ ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Nov 04 2021 17:21:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आतिशबाजी युक्त दीपावली की शुभकामनाएँ !! घनघोर आतिशबाजी करके मच्छरों को ख़त्म करने में सहयोग करे। मतलब ज़िम्मेदार नागरिक की तरह पेश आए ।
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#DiwaliWithCrackers
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 05 2021 13:44:19 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Tarun Gochar:

5 नवंबर 2021
नागरिक कर्तव्य दिवस

एक पत्र CM/PM के नाम

हम आप को निर्देशित करते है कि आप
#WOIC
#votewapsipassbook
#EmptyLandTax
#HinduBoard
कानून के ड्राफ्ट्स तो गजट में प्रकशित करे।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 09 2021 12:20:09 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Vibhor Bhardwaj Sharma VrindavanUp:

मैं आगामी उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव का नॉमिनेशन पत्र भरने का अभ्यास कर रहा हूं और मेरा ज्यादातर समय *लागू नहीं* और *शून्य* लिखने में जा रहा है।

ये इलेक्शन कमिशन वाले चाहते भी हैं की लोग चुनाव लड़ें या फिर वहां भी लागू नहीं लिखवाना चाहते हैं।

चुनाव का एक मुद्दा नॉमिनेशन पत्र को आसान करना भी होना चाहिए। 😂

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Nov 09 2021 20:35:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

7 नवम्बर 2016 को नोटबंदी की गयी थी। हम रिकालिस्ट्स ने नवम्बर 2016 में ही नागरिको को यह सूचना देनी शुरू कर दी थी कि -- नोटबंदी एक घोटाला (Scam) है !! जब तक नोटबंदी चलती रही तब तक पेड मीडिया इसका सपोर्ट करता रहा। और 1 वर्ष बाद उन्होंने यह कहना शुरू किया कि नोटबंदी एक भूल थी !! भूल !!!
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और आज 5 साल बाद भी पेड मीडिया इस घोटाले को एक भूल साबित करने में लगा है !! तालाबंदी भी इसी तरह का एक घोटाला था, जिसे पेड मीडिया आज भी भूल ठहराने में लगा है !!
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हम रिकालिस्ट्स ने दिसंबर 2016 में ही नागरिको को इस बारे में सूचित करने के लिए पेड दैनिक भास्कर में इस आशय का विज्ञापन भी दिया था। दिए गए विज्ञापन का पाठ्य विवरण एवं जेपीजी यहाँ देख सकते है --
<https://www.facebook.com/groups/RtrBhilwara/295949524136256/>;
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उल्लेखनीय है कि, पेड दैनिक भास्कर ने अपने पोर्टल से इस विज्ञापन को हटा दिया है !!
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विज्ञापन के विवरण में काले धन को नोटबंदी से जोड़ने की पेड मीडिया की "जादूगरी" पर कार्टून भी शामिल था। कार्टून के लिए चित्रकार / कार्टूनिस्ट Kg Kadam का आभार।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Nov 10 2021 20:42:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

चुनाव लड़ने के कारण किस तरह हमारे कैपेन मेथड में निर्णायक सुधार आये :
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कुछ चीजे ऐसी होती है, जिन्हें सिर्फ सोचकर नहीं समझा जा सकता, जब तक कि उन्हें खुद से करके न देखा जाए। देश के राजनैतिक प्रशासनिक परिदृश्य को वास्तविक रूप से समझने में चुनाव लड़ने की कितनी बड़ी भूमिका है, इसे लिखकर नहीं समझाया जा सकता। इसके महत्त्व को आप तभी समझ पाते है जब आप चुनाव लड़ते है।
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चुनाव लड़ने से हमारे केम्पेन मेथड में किस तरह से सुधार आया उसके कुछ उदाहरण मैंने निचे लिखे है। यदि मैंने चुनाव नहीं लड़ा होता तो मैं इन्हें शायद ही कभी समझ पाता।
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(1) 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मैं चुनावी पैम्पलेट तैयार कर रहा था तो मुझे लग रहा था कि, ग्रामीण अंचल के नागरिको को राईट टू रिकॉल लफ्ज का मतलब समझने में परेशानी आएगी। हमें ऐसा टाइटल चाहिए था जिसका मतलब श्रोता पढ़ने के साथ ही समझ सके। लगभग 2 हफ्तों में मुझे वोट वापिस लेने का अधिकार शब्द सूझा और मैंने इसे शीर्षक बनाया।
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वोट वापस लेने का अधिकार अपेक्षाकृत सुबोध और सरल शब्द था। और इससे हमारे प्रचार के माध्यम में काफी सुधार आया। यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता तो मुझे यह लफ्ज शायद ही कभी सूझता। क्योंकि 2014 से 2018 के बीच मुझे यह कभी नहीं सूझा था। इसी शब्द को पकड़कर वोट वापसी शब्द निकला। यह शब्द और भी ज्यादा सुबोध था। अत: पश्चात् हमने वोट वापसी शब्द को सभी ड्राफ्ट में शामिल किया।
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(2) 2019 लोकसभा चुनावों के दौरान जब मैं पैम्पलेट तैयार कर रहा था तो मुझे पेम्पलेट में एक से अधिक ड्राफ्ट शामिल करने थे, ताकि अधिक से अधिक कार्यकर्ताओ के मुद्दों को संबोधित किया जा सके। लेकिन एक से अधिक ड्राफ्ट शामिल करने से पेम्पलेट लम्बा हो जा रहा था। विधानसभा चुनावो में पेम्पलेट 24 पेज का था, और मैं अब इसे 16 पेज का बनाना चाहता था। ताकि उसी राशि में ज्यादा पेम्पलेट छापे जा सके।
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इसी दौरान ड्राफ्ट मर्ज करने का विचार आया और हमने जिला स्तर के सभी अधिकारियों (पुलिस अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, मिलावट रोक अधिकारी, जज) को एक ही ड्राफ्ट (REDO) में शामिल कर दिया। इससे कैम्पेन मेथड में काफी सुधार हुआ। पेम्पलेट की लागत में भी कमी आयी।
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(3) लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक जगह पर कुछ नागरिको ने हमसे मुझसे पूछा कि, हम अपना वोट वापिस कैसे लेंगे। प्रचार के दौरान ही मेरे दिमाग में यह आया कि वोट वापसी की एंट्री आदि के लिए डायरी / पासबुक होना चाहिए। प्राथमिक शब्द डायरी था। राहुल भाई से चर्चा के दौरान उनको सूझा कि डायरी की जगह पर पासबुक शब्द ज्यादा सटीक रहेगा। इस तरह वोट वापसी पासबुक केम्पेन में जुड़ा। पासबुक ने कैम्पेन को काफी आसान बनाया।
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(4) 2020 के पार्षद चुनाव से पहले तक हमारे पास बैनर का फोर्मेट नहीं था। हमने भीलवाड़ा में 2015 में लगभग 20 बड़े छोटे बैनर लगाए थे, जिनका नागरिको पर असर लगभग शून्य रहा था। असर इसीलिए नहीं हुआ था, क्योंकि इनमें कोई चित्र नहीं था। पार्षद चुनावों से पहले जब हमने प्रचार सामग्री (पेम्पलेट, बैनर आदि) पर विचार करना शुरू किया तो सबसे बड़ी समस्या बैनर को लेकर थी।
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यदि होर्डिंग / बैनर पर कोई फोटो न हो तो इसकी पाठक / दर्शक संख्या बेहद गिर जाती है। चूंकि पेड मीडिया पार्टियों का प्रचार व्यक्ति केन्द्रित होता है, अत: उनके बैनर / होर्डिंग आदि पर वे बड़े बड़े चेहरे छाप देते है। लेकिन ड्राफ्ट केन्द्रित आन्दोलन होने के कारण हम चेहरा नहीं छाप सकते थे। इसी दौरान हमें हाथ में पासबुक लिए व्यक्ति का चित्र लगाने का विचार आया। और के जी कदम जी ने यह चित्र इतने सटीक ढंग से उकेरा कि बैनर के लिए हमारी चेहरे की तलाश ख़त्म हो गयी। इस तरह चुनाव लड़ने के कारण ही हमें बैनर का फोर्मेट मिला।
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मैं राजनीती एवं चुनावी राजनीती का अंतर समझता था, और इस बात से भलीभांति परिचित था कि चुनावी राजनीती में उतरे बिना राजनीती पर तबसरा करना एक प्रकार का मनोरंजन या टाइम पास बन कर रह जाता है। जिससे कोई बदलाव नहीं आता। किन्तु जब तक मैंने चुनाव नहीं लड़ा था, तब तक मैं चुनाव लड़ने के महत्त्व को गहराई से नहीं समझ पाया था।
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दरअसल, मैं चुनाव लड़ने के कारण विकसित होने वाली राजनैतिक समझ से परिचित नहीं था। चूंकि राहुल भाई चुनाव लड़ चुके थे, और वे चुनाव लड़ने से विकसित होने वाली “राजनैतिक समझ” से परिचित थे अत: वे लगातार चुनाव लड़ने पर जोर देते रहे।
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यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना थी कि, हमारे पास न तो वोट वापसी टर्म होती, न पासबुक होती और न ही बैनर का फोर्मेट होता। और यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता तो निश्चित रूप से हमारे पास ड्राफ्ट उस फोर्मेट में नहीं होते जिस फोर्मेट में हम इन्हें मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री को भेज पा रहे है।
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बहरहाल, वास्तविक राजनीति को समझने में चुनाव लड़ना कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसे सिर्फ चुनाव लड़कर ही समझा जा सकता है। मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि यदि वे राजनीति/ प्रशासन को वास्तविक अर्थो में समझना चाहते है, उन्हें चुनाव अवश्य लड़ना चाहिए। इससे आप राजनीति के बारे में ऐसी बहुत सी बातें समझ पायेंगे जिन्हें चुनाव लड़े बिना समझा नहीं जा सकता।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 12 2021 12:48:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

All male recallists based in India who have still not finished MLA election form filling learning exercise --- pls DO NOT do any online RTR work.
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I repeat -- DO NOT do any online RTR work
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Because I don't want people who don't want to do necessary but boring work in movement
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Now say if a person has done MLA form filling LEARNING exercise. And a 5 new persons are added to movement via him. Then all 5 new guys will do form filling learning exercise
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But say a person has not done electron form filling learning expercise. And say he adds 500 guys to movement. Then none of these 500 guys will do election form filling learning exercise
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So all male recallists who are based in India and do not want to do election form filling learning exercise are strongky requested not to do any online RTR work

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 12 2021 20:56:22 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

(1) कंगना के पहले तक भारतीय फिल्मों में नायिकाओं को शराब पीते नहीं दिखाया जाता था। यदि किसी महिला को शराब पीते दिखाया जाता तो वह जरायमपेशा / भटकी हुई / नकारात्मक चरित्र वाली होती थी। मेरी जानकारी में कंगना रनौट पहली अभिनेत्री है जिसने वे भूमिकाएं निभाई जिसमें परम्परागत भारतीय परिधान में नायिका / कुलवधु को शराब का सेवन करते हुए दिखाया गया। और उन्होंने कई फिल्मों में ये भूमिकाएं की।
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(2) उन्होने गौ-मांस सेवन को बढ़ावा दिया !!
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ये दो बड़ी वजह रही कि कंगना को पद्म श्री से नवाजा गया। यदि भारत में कांग्रेस सरकार होती तब भी कंगना को यह पुरस्कार मिलता। क्योंकि पेड मीडिया के प्रायोजक [मिशनरीज, अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ] ऐसे लोगो को बढ़ावा देती है जो उनके एजेंडे को आगे धकेलने में सहयोग करें।
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और अधिक विवरण इस पोस्ट में देखें — <https://www.facebook.com/100003247365514/posts/3205212989596915/?d=n>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Nov 14 2021 21:20:35 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

क्या आप कंगना का पद्म श्री रद्द करवाने के लिए पीएम को ट्विट कर सकते है ?
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एक बार पुरस्कार देने के बाद वापिस लेना ठीक बात नहीं है। किन्तु पुरस्कार लेने के बाद यदि पुरुस्कृत व्यक्ति जिम्मेदारी से पेश नहीं आता, और काफी निचे स्तर पर जाकर बयानबाजी करता है तो इससे भारत सरकार (न कि बीजेपी सरकार) द्वारा दिए जाने वाले ऐसे पुरस्कार की गरिमा गिरती है।
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यदि आप मानते है कि कंगना रनौत का सार्वजनिक व्यवहार पद्म श्री की गरिमा के अनुकूल नहीं है, तो पीएम को यह ट्विट भेजे कि उनका पद्म पुरस्कार वापसी लिया जाए।
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जैसे जैसे ट्विट करने वालो की संख्या बढ़ेगी, पीएम पर यह पुरस्कार वापिस लेने का दबाव बनेगा, और यदि यह पुरुस्कार वापिस हो जाता है तो आइन्दा से सभी पद्म पुरस्कार धारक सार्वजनिक जीवन में गरिमा से पेश आयेंगे। और वे व्यक्ति भी गरिमा से पेश आना शुरू कर देंगे, जो ऐसे पुरुस्कारो की दौड़ में शामिल है।
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नोट : कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओ को यह निर्देश भेजे है कि, कंगना का विरोध सिर्फ फेसबुक आदि पर ही करना है, और पीएम को ट्विट नहीं करना है।
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(i) उन्होंने ऐसे निर्देश क्यों भेजे है, इसकी वजह कृपया कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओ से ही पूछे।
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(i) क्या उन्होंने ऐसे कोई निर्देश भेजे है इसका सबूत भी मुझसे न मांगे। आप कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं एवं कार्यकर्ताओ की वाल चेक कर सकते है। वहां आपको पीएम को निर्देश भेजने का ऐसा कोई ट्विट नहीं मिलेगा, और न ट्विट भेजने की ऐसी कोई अपील मिलेगी।
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ट्विट में यह लिखे - #iInstruct - #CancelKanganaPadmaAward . Pls cancel Padma award given to Kangana . #कंगना_का_पद्म_अवार्ड_रद्द_करे . श्रीमती कंगना को दिया गया पद्म अवार्ड रद्द करे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Nov 15 2021 21:46:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Nov 17 2021 20:50:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

नौ सैनिक विद्रोह, आजाद हिन्द फ़ौज, क्रांतिकारियों द्वारा सशस्त्र हमलो का अंदेशा एवं द्वितीय विश्व युद्ध के कारण जब गोरे भारत छोड़कर जाने के लिए बाध्य हुए तो अपने हित सुरक्षित करने के लिए वे अपने वफादारो (नेहरु एवं कोंग्रेस के अन्य शीर्ष नेता) को सत्ता हस्तांतरित कर गए।
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नेहरु एवं कोंग्रेस के शीर्ष नेताओं ने इतिहास की पाठ्य पुस्तको में क्रांतिकारियों के योगदान को नगण्य स्थान दिया, और गोरो को भगाने का सारा क्रेडिट कोंग्रेस के नेताओ को दे दिया।
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बीजेपी=संघ के नेता गोरो को भगाने का क्रेडिट कोंग्रेस को नहीं देना चाहते, किन्तु वे यह भी नहीं चाहते कि यह क्रेडिट क्रांतिकारियों को दिया जाए। क्योंकि यदि यह क्रेडिट क्रांतिकारियों को दिया जाता है तो संघ की भूमिका पर वाजिब सवाल उठने लगते है। उल्लेखनीय है कि संघ ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया था, और वे अधिकृत एवं घोषित रूप से इस आन्दोलन से निस्पृह थे।
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अत: उन्होंने गोरो के भारत छोड़कर जाने का क्रेडिट गोरो को ही देने का फैसला कर लिया है !! वे अब कह रहे है कि हमें आजादी भीख में मिली थी !! भीख में !!! जिसका आशय है कि, गोरे खुद अपनी इच्छा से देश छोड़कर गए थे, और इसमें क्रांतिकारियों का कोई योगदान नहीं था !! उन्होंने एक ही झटके में, अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से लेकर, अहिंसामूर्ती राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस, नेवी रिवोल्ट एवं ऐसे लाखों क्रन्तिक्ररियों के योगदान को उठाकर फेंक दिया है !!
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इस तरह कोंग्रेस ने क्रांतिकारियों के श्रेय को हड़प कर उनके योगदान का अपमान किया, और अब बीजेपी=संघ के नेता, कार्यकर्ता राजनैतिक माइलेज लेने के लिए क्रांतिकारियों के प्रयासों से मिली आजादी को भीख बताकर उनकी शहादत पर थूक रहे है !!
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बीजेपी=संघ के सभी शीर्ष नेता एवं कार्यकर्ता "पद्म श्री कंगना रनौत" के बयान का समर्थन कर रहे है, और अपनी तरफ से इसे पूरी तरह से न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रहे है !!
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शायद बीजेपी=संघ के कार्यकर्ता अब 15 अगस्त को "भीख दिवस" के रूप में मनाना शुरू करें !!
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 19 2021 08:04:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

रोथ्सचाइल्ड के 3 कृषि कानूनों को समाप्त करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पूरे भारत के गुरुद्वारों को मेरा हार्दिक धन्यवाद।
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उनकी विशाल और महत्वपूर्ण भूमिका के बिना, रोथ्सचाइल्ड आदि ने कभी भी तीन कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया होता
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1947 से पहले के स्वतंत्रता आंदोलन में सिखों और गुरुद्वारा ने अहम भूमिका निभाई थी। और उन्होंने 1991 में शुरू हुए और 2014 के बाद बढ़े हुए दूसरे विदेशी वर्चस्व को समाप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

My sincere thanks to Gurudwaras of Punjab, Haryana, Delhi and across India for playing the MOST important role in ending Rothschilde's 3 farm laws.
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Without their huge and importabt role at core, Rothschilde etc would have never taken back three farm laws
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Sikhs and Gurudwara played key role in pre 1947 freedom movement. And they have played pioneering role in in ending second foreign domination that started in 1991 and increased after 2014.

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Fri Nov 19 2021 11:08:51 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मेरी जानकारी में 1951 के बाद यह पहली बार हुआ है जब किसी सरकार ने संसद से पास किसी बिल को सिर्फ़ विरोध के कारण वापिस लिया है।
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और इस लम्बे विरोध के दौरान सरकार अड़ी रही कि - बिल किसी भी सूरत में वापिस नही होंगे !!
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मोदी साहेब पेड मीडिया द्वारा खड़ा किया गया अपना इक़बाल खो चुके है।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Nov 20 2021 08:27:01 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Jury Court:

एक देश एक चुनाव कर दें तो क्या अभी सरकार तीनों कृषि कानून रद्द करती?
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तीनों कृषि कानून सरकार अभी रद्द नहीं करती और किसानों को सड़कों पर पड़े रहने का भी सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर आने वाले कुछ महीनों में चुनाव नही पड़ते।

यह सिर्फ चुनाव की ताकत है जिसके आगे सरकार झुक गयी। मतलब अभी चुनाव आने से सरकार झुकी, अगर पूरे देश मे सभी चुनाव एक साथ कर दिए जाएं जिससे 5 साल में एक बार चुनाव हो तो फिर सरकार जनता की कभी नहीं सुनेगी।
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इसलिए सरकार सब चुनाव एक साथ करा कर 'एक देश, एक चुनाव' के मार्फत जनता के बीच में आने के लिए बचना चाहती है। जिससे देश का विनाश होगा।
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समाधान वोट वापसी पासबुक जूरी ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Nov 21 2021 18:49:36 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

How decision of Shri Gurnam Singh Charuniji to contest ELECTIONS added key push needed to force NaMo / RSS to repeal rothschilde three farm laws
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Since ages, I have said that election-less andlonakari are 100% useless. Particularly the leaders like BRC, awaken and 100s of gyaanies, whose sole activity is to ask activists to confine to awareness raising on points all already know, and those who insist on confining to PIL, dharana etc and then oppose election contesting --- are all useless.
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Gurnaam Singh Charuniji ( and NOT Tikait bhai) had actively started election moves.
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Pls see some newslinks
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(1) google search on "charuni election" --- <https://www.google.com/search?q=charuni+election>;
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(2) oct-2021 --- BKU leader Gurnam Singh Charuni’s detention in Uttar Pradesh’s Meerut causes ripples in Haryana . see <https://www.timesnownews.com/india/haryana-news/article/bku-leader-gurnam-singh-charuni-s-detention-in-uttar-pradesh-s-meerut-causes-ripples-in-haryana/820444>;
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Gurnamji had started working to place candidates in UP as well, along with Punjab and Uttarakhand !!!
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(3) sep-2021 --- Will stand by SKM, but want farmers to contest polls: Charuni . see <https://www.hindustantimes.com/cities/others/will-stand-by-skm-but-want-farmers-to-contest-polls-charuni-101631474963916.html>;
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(4) aug-2021 --- Punjab polls: Charuni joins hands with traders to form political outfit, to be CM face - see <https://www.hindustantimes.com/cities/chandigarh-news/2022-punjab-polls-charuni-joins-hands-with-traders-to-form-political-outfit-to-be-cm-face-101628538377583.html>;
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(5) nov-2021 --- Gurnam Singh Charuni stuck on Punjab polls, names candidates of unnamed parties ---- <https://timesofindia.indiatimes.com/city/amritsar/charuni-stuck-on-punjab-polls-names-candidate-of-unnamed-party/articleshow/87615139.cms>;
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And there are 10s of such links
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And Tikaitbahi was opposing the proposal that Kisan should contest elections !!!
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Pls see --- oct-2021 --- Samyukt Kisan Morcha will oppose BJP in UP polls, won’t support any party: Rakesh Tikait --- <https://theprint.in/india/samyukt-kisan-morcha-will-oppose-bjp-in-up-polls-wont-support-any-party-rakesh-tikait/756342/>;
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This step of Tikait imo was useless. Because congress m akali dal etc all parties in reality were supporting farm laws from behind !! Which is why they didnt call for mass rally to parliament, when Rajsabha MPs were stopped from voting and voicevote alone was used !!!
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But Gurnamji imo RIGHTLY opposed this decision to support congress, akali dal, aap, SP, BSP etc and only oppose RSS.
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So as all parties such as congress rss aap realized that now Kisan may actually put their own candidates, this created a force on all apex leaders and all parties including NaMo and RSS to repeal to farm laws. And Rothschilde too had to accept this defeat on one front
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So all in all. it was ELECTION CONTESTING DECISION which added final push. If farmer leaders had said "see, we will confine to dharana and not contest elections", then imo, chances are higb that NaMo etc would have said "fine, continue your dharana". And if RSS had won elections, then farmer agitation would have suffered a serious let down.
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So lesson for all anti-vaxine, anti-privatization, anti-rothschilde activists is ---- dump the advices of BRC , awaken and 10s of guru to stay away from elections. and pls work to deteaf congress rss aap etc in coming 15-jan-2022 up uttarakhan punjab assembly elections. Only if you pose a serious electoral defeat possibility to rothschilde, then only rosthchilde will tone down his agenda.
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These BRC , awaken etc are simply agents of some AAP or congress or CPM or may be rss etc, and thats why they are asking you to stay away from election field. Which is why they asked activists NOT to contest polls in oct-2020 Biahr assembly or feb-2021 Bengal assembly

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Nov 21 2021 18:52:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

श्री गुरनाम सिंह जी चढ़ूनी को खुले तौर पर आम चुनाव में भाग लेने का आह्वान करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद जबकि यहाँ टिकैत को कोई धन्यवाद नहीं मिलना चाहिए ।
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यह दुख की बात है कि टिकैत जिसने न केवल जानबूझकर देर से आंदोलन मे भाग लिया बल्कि ईतना ही काम किया कि उन्हें सारा हाइलाइट मिल जाये और चढ़ूँनी जी को जीरो कवरेज मिले।
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यहां तक ​​कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान क्षेत्रों में भी गुरुद्वारा ही थे जिन्होंने जमीनी स्तर से लेकर संगठन तक का अधिकांश काम किया और ये सब उन्होंने टिकैत के आंदोलन मे शामिल होने से बहुत पहले ही शुरू कर दिया था
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हमने 1977 के आपातकाल हटाओ आंदोलन में भी ऐसा ही गलत क्रेडिट लेना देखा था जब जेपी और उनके नेताओं के समूह (मुलायम, लालू आदि) ने लगभग सारे क्रेडिट को हड़प लिया था,जहाँ 1975 से 1977 तक जीवित रहने वाले 50% से अधिक कैदी पंजाब में थे और 20% सिख बाहुल्य क्षेत्रों मे से थे और जमीनी स्तर के सारे काम और सारी सजा का सामना उन्होंने ही किया।
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हम कार्यकर्ताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहिए कि इस बार सभी को यह जानकारी दें कि रोथ्सचाइल्ड ने तीन कृषि कानूनों को गुरुद्वारा, सिख, चारुनीजी आदि के कारण ही समाप्त किया है और कांग्रेस सीपीएम या टिकैत जैसे लोगों ने केवल मामुली सी भूमिका निभाई है।
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ये बिल वापस लेने का मुख्य कारण आने वाले चुनाव थे। देश मे यदि चुनाव समाप्त हो जाते हैं, तो सशस्त्र विद्रोह करने को वैधता मिल जायेगी। इसलिए रोथ्सचाइल्ड मे चुनाव खत्म करने की हिम्मत नहीं है। चूंकि भारत में कार्यकर्ताओं के पास नेताओं और/या संगठन के बिना काम करने के लिए आवश्यक जानकारी और कौशल नहीं है इस वजह से रोथस्चाइल्ड के चमचों के खिलाफ लड़ने के लिए एक संगठन की अभी आवश्यकता है और उस संगठन का काम मुख्य रूप से गुरुद्वारों द्वारा किया गया जिसमें चारुनीजी किसानों का चेहरा बनकर उभरे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Nov 25 2021 19:58:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Mukti Kolkatawb Lscandrrp:

I am willing to contest Municipality elections held on 21st December in
Kolkata supporting Right to recall, Jury system, wealth tax, weaponization of commons and referendum.

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Nov 26 2021 06:06:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Vibhor Bhardwaj Sharma VrindavanUp:

I Vibhor Bhardwaj Sharma wish to be a candidate of Right to Recall Party for upcoming MP elections from 17-Mathura and MLA election from 84-Mathura, Uttar Pradesh.

For this I would like to ask for the Permission of Party President Mr. Rahul Chimanbhai Mehta in the comment section under this post.

Once finalised by the party president, I will announce the issues that I want to raise within the Electoral Democracy of Bharat that is India.

Wish me Luck. Jai Hind 🇮🇳🙏🏻🇮🇳

P.S - As I am opening myself for the Public Service through Electoral Politics, Anyone who wish to Contact me can do it on - 8899234007 ( Whatsapp + Calling )

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