Pawan Jury BhilwaraRj
चुनाव लड़ने के कारण किस तरह हमारे कैपेन मेथड में निर्णायक सुधार आये :
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कुछ चीजे ऐसी होती है, जिन्हें सिर्फ सोचकर नहीं समझा जा सकता, जब तक कि उन्हें खुद से करके न देखा जाए। देश के राजनैतिक प्रशासनिक परिदृश्य को वास्तविक रूप से समझने में चुनाव लड़ने की कितनी बड़ी भूमिका है, इसे लिखकर नहीं समझाया जा सकता। इसके महत्त्व को आप तभी समझ पाते है जब आप चुनाव लड़ते है।
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चुनाव लड़ने से हमारे केम्पेन मेथड में किस तरह से सुधार आया उसके कुछ उदाहरण मैंने निचे लिखे है। यदि मैंने चुनाव नहीं लड़ा होता तो मैं इन्हें शायद ही कभी समझ पाता।
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(1) 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले जब मैं चुनावी पैम्पलेट तैयार कर रहा था तो मुझे लग रहा था कि, ग्रामीण अंचल के नागरिको को राईट टू रिकॉल लफ्ज का मतलब समझने में परेशानी आएगी। हमें ऐसा टाइटल चाहिए था जिसका मतलब श्रोता पढ़ने के साथ ही समझ सके। लगभग 2 हफ्तों में मुझे वोट वापिस लेने का अधिकार शब्द सूझा और मैंने इसे शीर्षक बनाया।
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वोट वापस लेने का अधिकार अपेक्षाकृत सुबोध और सरल शब्द था। और इससे हमारे प्रचार के माध्यम में काफी सुधार आया। यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता तो मुझे यह लफ्ज शायद ही कभी सूझता। क्योंकि 2014 से 2018 के बीच मुझे यह कभी नहीं सूझा था। इसी शब्द को पकड़कर वोट वापसी शब्द निकला। यह शब्द और भी ज्यादा सुबोध था। अत: पश्चात् हमने वोट वापसी शब्द को सभी ड्राफ्ट में शामिल किया।
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(2) 2019 लोकसभा चुनावों के दौरान जब मैं पैम्पलेट तैयार कर रहा था तो मुझे पेम्पलेट में एक से अधिक ड्राफ्ट शामिल करने थे, ताकि अधिक से अधिक कार्यकर्ताओ के मुद्दों को संबोधित किया जा सके। लेकिन एक से अधिक ड्राफ्ट शामिल करने से पेम्पलेट लम्बा हो जा रहा था। विधानसभा चुनावो में पेम्पलेट 24 पेज का था, और मैं अब इसे 16 पेज का बनाना चाहता था। ताकि उसी राशि में ज्यादा पेम्पलेट छापे जा सके।
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इसी दौरान ड्राफ्ट मर्ज करने का विचार आया और हमने जिला स्तर के सभी अधिकारियों (पुलिस अधिकारी, शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, मिलावट रोक अधिकारी, जज) को एक ही ड्राफ्ट (REDO) में शामिल कर दिया। इससे कैम्पेन मेथड में काफी सुधार हुआ। पेम्पलेट की लागत में भी कमी आयी।
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(3) लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक जगह पर कुछ नागरिको ने हमसे मुझसे पूछा कि, हम अपना वोट वापिस कैसे लेंगे। प्रचार के दौरान ही मेरे दिमाग में यह आया कि वोट वापसी की एंट्री आदि के लिए डायरी / पासबुक होना चाहिए। प्राथमिक शब्द डायरी था। राहुल भाई से चर्चा के दौरान उनको सूझा कि डायरी की जगह पर पासबुक शब्द ज्यादा सटीक रहेगा। इस तरह वोट वापसी पासबुक केम्पेन में जुड़ा। पासबुक ने कैम्पेन को काफी आसान बनाया।
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(4) 2020 के पार्षद चुनाव से पहले तक हमारे पास बैनर का फोर्मेट नहीं था। हमने भीलवाड़ा में 2015 में लगभग 20 बड़े छोटे बैनर लगाए थे, जिनका नागरिको पर असर लगभग शून्य रहा था। असर इसीलिए नहीं हुआ था, क्योंकि इनमें कोई चित्र नहीं था। पार्षद चुनावों से पहले जब हमने प्रचार सामग्री (पेम्पलेट, बैनर आदि) पर विचार करना शुरू किया तो सबसे बड़ी समस्या बैनर को लेकर थी।
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यदि होर्डिंग / बैनर पर कोई फोटो न हो तो इसकी पाठक / दर्शक संख्या बेहद गिर जाती है। चूंकि पेड मीडिया पार्टियों का प्रचार व्यक्ति केन्द्रित होता है, अत: उनके बैनर / होर्डिंग आदि पर वे बड़े बड़े चेहरे छाप देते है। लेकिन ड्राफ्ट केन्द्रित आन्दोलन होने के कारण हम चेहरा नहीं छाप सकते थे। इसी दौरान हमें हाथ में पासबुक लिए व्यक्ति का चित्र लगाने का विचार आया। और के जी कदम जी ने यह चित्र इतने सटीक ढंग से उकेरा कि बैनर के लिए हमारी चेहरे की तलाश ख़त्म हो गयी। इस तरह चुनाव लड़ने के कारण ही हमें बैनर का फोर्मेट मिला।
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मैं राजनीती एवं चुनावी राजनीती का अंतर समझता था, और इस बात से भलीभांति परिचित था कि चुनावी राजनीती में उतरे बिना राजनीती पर तबसरा करना एक प्रकार का मनोरंजन या टाइम पास बन कर रह जाता है। जिससे कोई बदलाव नहीं आता। किन्तु जब तक मैंने चुनाव नहीं लड़ा था, तब तक मैं चुनाव लड़ने के महत्त्व को गहराई से नहीं समझ पाया था।
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दरअसल, मैं चुनाव लड़ने के कारण विकसित होने वाली राजनैतिक समझ से परिचित नहीं था। चूंकि राहुल भाई चुनाव लड़ चुके थे, और वे चुनाव लड़ने से विकसित होने वाली “राजनैतिक समझ” से परिचित थे अत: वे लगातार चुनाव लड़ने पर जोर देते रहे।
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यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना थी कि, हमारे पास न तो वोट वापसी टर्म होती, न पासबुक होती और न ही बैनर का फोर्मेट होता। और यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता तो निश्चित रूप से हमारे पास ड्राफ्ट उस फोर्मेट में नहीं होते जिस फोर्मेट में हम इन्हें मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री को भेज पा रहे है।
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बहरहाल, वास्तविक राजनीति को समझने में चुनाव लड़ना कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसे सिर्फ चुनाव लड़कर ही समझा जा सकता है। मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि यदि वे राजनीति/ प्रशासन को वास्तविक अर्थो में समझना चाहते है, उन्हें चुनाव अवश्य लड़ना चाहिए। इससे आप राजनीति के बारे में ऐसी बहुत सी बातें समझ पायेंगे जिन्हें चुनाव लड़े बिना समझा नहीं जा सकता।
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