Posts for 2019-02

Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 01 2019 12:45:29 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

एल्बम - राईट टू रिकॉल के मुद्दों पर चुनावी उम्मीदवारी एवं विज्ञापन
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(20) गुजरात समाचार पत्र में राहुल चिमनभाई मेहता द्वारा पानी के मीटर पर दिया गया विज्ञापन -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1620432921408271>;
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(19) राहुल चिमनभाई मेहता का चुनावी विज्ञापन -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1469239686527596>;
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(18) हर्षद कुमार का चुनावी उम्मीदवारी का विवरण -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1461268193991412>;
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(17) जीएसटी पर राहुल चिमनभाई मेहता का विज्ञापन -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1312075395577360>;
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(16) राहुल चिमनभाई मेहता ने इंडियन एक्सप्रेस में विज्ञापन दिया है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1317064998411733>;
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(15) दिल्ली नगर निगम में राईट टू रिकॉल उमीदवार - नेहा जी मोंगा
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1248633405254893>;
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(14) राईट टू रिकॉल के मुद्दे पर गोंडा विधानसभा क्षेत्र में प्रकाशित विज्ञापन-
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1195769160541318>;
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(13) गोंडा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1194074594044108>;
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(12) राइट टू रिकॉल पर राम रक्षा पाठक जी गोंडा विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी है।
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1188924697892431>;
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(11) गोंडा विधानसभा के खैरा में चुनाव प्रचार -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1188923974559170>;
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(10) गोंडा सदर सीट से "रक्षा राम पाठक" का चुनावी नामांकन स्वीकृत -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1185196561598578>;
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(09) गाजियाबाद सीट से उमीदवार राकेश जी सूरी का विज्ञापन -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1184372775014290>;
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(08) 19 दिसम्बर 2016 को पेड दैनिक भास्कर में दिए गए विज्ञापन से सम्बंधित सम्पूर्ण विवरण :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1150168471768054>;
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(07) भास्कर हिंदी दैनिक में दिए गए विज्ञापन के अंशदाताओं का ब्यौरा :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1147621115356123>;
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(06) विज्ञापन के लिए कार्टून बनाने के लिए चित्रकार केजी कदम का आभार :
<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1133790890072479&set=a.584288358356071.1073741825.100003247365514&type=3&theater>;
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(05) राईट टू रिकॉल ग्रुप भीलवाड़ा द्वारा 'भीलवाड़ा भास्कर' में विज्ञापन दिया गया :
<https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1132775560174012&set=a.778193075632264.1073741827.100003247365514&type=3&theater>;
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(04) नोट बंदी पर दिए गए विज्ञापन के अंशदाताओ की सूची :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1132097596908475>;
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(03) जिला स्तर पर विज्ञापन प्रकाशन हेतु नकदी जुटाने के लिए प्रस्तावित रूपरेखा :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/802389529879285>;
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(02) अंशदान संग्रह के लिए केंद्रीकृत प्रणाली बनाम राईट टू रिकॉल ग्रुप की विकेंद्रीकृत व्यवस्था :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/797801813671390>;
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(01) भीलवाड़ा पत्रिका और भीलवाड़ा भास्कर के मुख्य पृष्ठ पर ज्यूरी सिस्टम का विज्ञापन दिया गया :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/796836247101280>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 01 2019 20:52:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

घुसपेठियो पर पोस्ट्स की सूची ; एल्बम – बांग्लादेशी , रोहिंग्या एवं इस्लामी कट्टरपंथी
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(21) NRC ड्राफ्ट का बांग्लादेशी घुसपेठियो को "खदेड़ने" से कोई लेना देना नहीं है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1728863313898564>;
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(20) पाकिस्तान से आये हुए हिन्दू विस्थापितों से संघ के नेता हफ्ता वसूल रहे है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1628896280561935>;
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(19) कैसे मोदी साहेब जम्मू इस्लामिस्ट कट्टरपंथियों के हवाले कर रहे है !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1604267113024852>;
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(18) कुछ 500 हिन्दू परिवार पाकिस्तान से भागकर हिन्दुस्तान में शरण लेने आये थे।
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1574310252687205>;
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(17) संघ का बंगाल में मुस्लिम सम्मलेन -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1502489916535906>;
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(16) बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए कानूनी ड्राफ्ट -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1454131491371749>;
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(15) टू चाइल्ड पॉलीसी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट-
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1453245174793714>;
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(14) कर्नाटक से संघ के विधायक टीपू जयंती समारोह में शिरकत कर रहे है !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1443748245743407>;
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(13) टू चाइल्ड पॉलीसी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का अपडेटेड संस्करण :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1421852621266303>;
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(12) भागवत अब घुसपेठियो को "शरणार्थी" साबित करने की कोशिस कर रहे है !
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1405280876256811>;
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(11) पिछले 3 साल में कितने बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ा गया है = शून्य
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1394639010654331>;
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(10) बांग्लादेशी घुसपैठियो के बचाव में दिए जाने वाला सामान्य तर्क एवं उसका जवाब
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1394234357361463>;
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(09) रोहिंग्यों की खिलाफत करने वाले बांग्लादेशी घुसपेठियो पर खामोश क्यों है ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1393703090747923>;
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(08) दिल्ली एनसीआर में 500 रोहिंग्ये ( बर्मा के बंगलादेशी घुसपेठीये ) रह रहे है !
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1380804505371115>;
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(07) यदि हम सत्ता में रहे तो कश्मीर में इस्लाम समृद्ध होगा - बीजेपी !
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1346002905517942>;
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(06) बर्मा से निकाले गए 94 बांग्लादेशी मुस्लिम रोहिंग्ये घुसपैठिये चैन्नई में बसे !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1325584527559780>;
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(05) मोदी साहेब टू चाइल्ड पॉलिसी को मनी बिल कह के लागू कर सकते है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1250584808393086>;
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(04) मोदी साहेब ने आदेश दिया है कि, वे बांग्लादेश-बर्मा के घुसपैठियो को जम्मू में बसने दे :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1141754475942787>;
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(03) आधार कार्ड - बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ने की एक्सक्लुसिव योजना :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/914112162040354>;
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(02) कश्मीरी पंडितो के पुनर्वास के लिए आर्थिक पैकेज नाकाफी है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/848161158635455>;
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(01) 2011 की जनगणना के अनुसार किस तहसील, गांव एवं वार्ड में हिन्दू, मुस्लिम और ईसाइयो की आबादी कितनी है ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/803621423089429>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Feb 02 2019 18:55:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कारगिल युद्ध ऐसी घटना है जिसे आधार में रखकर आप पूरी दुनिया की वास्तविक राजनीति और भारत की सभी समस्याओ की जड़ को समझ सकते है।

( दिए गए विवरणों में से ज्यादातर की भिन्न भिन्न स्त्रोतों से पुष्टि की जा सकती है। पुष्टि के लिए गूगल करें। यह व्यक्ति के कॉमन सेन्स पर निर्भर करता है कि वह इन तथ्यों से क्या निष्कर्ष निकालता है और क्या सबक लेना चाहता है। )
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कारगिल युद्ध का असली कारण पोकरण-2 था : वाजपेयी जी ने 1998 में परमाणु परिक्षण के आदेश दिए थे। परमाणु परिक्षण के कारण अमेरिका नाराज हो गया और उसने भारत को सबक सिखाना तय किया।
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(1) कारगिल युद्ध भारत एवं अमेरिका के बीच लड़ा गया था , जिसमे पाकिस्तान एवं भारत की हार हुयी और अमेरिका युद्ध जीत गया !!

सूचना : अमेरिका ने पाकिस्तान को हाई एलटीट्युड हेलिकोप्टर एवं अन्य साजो सामान दिए ताकि वे भारतीय चौकियो पर चढ़ सके। अमेरिका ने भारत का सेटेलाईट भी बंद करवाया , ताकि हेलिकोप्टर के स्मोक सिग्निचेर , हिट सिग्निचेर और मेटल ऑब्जेक्ट को ट्रेस न किया जा सके। चीन एवं रूस के सेटेलाईट को इस बात की खबर थी कि पाकिस्तान बड़े पैमाने पर फ़्लाइंग एक्टिविटी कर रहा है , पर सभी भारत को सबक सिखाना चाहते थे , अत: उन्होंने हमें सूचना नहीं दी !!

सबक : यदि कोई देश अपनी सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कदम उठाता है तो दुनिया के सभी ताकतवर देश उसे गिराने और दबाने के लिए एक जुट हो जाते है।
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(2) कारगिल युद्ध में हमारी मिसाइलो में लगे हुए टाइमर्स ने काम करना बंद कर दिया था और मिसाइले बेकार हो गयी थी !! हमने ये टाइमर्स रूस से लिए थे।

सूचना : आयातित हथियारों में और उनके स्पेयर पार्ट्स में किल स्विच होते है, और इनका निर्माता यदि इन्हें एक्टिवेट कर दे तो हथियार काम करना बंद कर देता है। यही वजह है कि हथियार निर्माता देश चाहता है कि अन्य देश उनके बनाए हथियार इस्तेमाल करें। रूस को परमाणु परिक्षण अच्छा नहीं लगा और उन्होंने हमें सबक सिखाने के लिए मिसाइलो के टाइमर बंद कर दिए। 1984 फाकलेंड वार में भी जब अर्जेन्टाइना ने फ़्रांस से आयातित एक्सोसेट मिसाइल का प्रयोग करके ब्रिटेन का युद्ध पोत उड़ा दिया था तो मार्गरेट थेचर ने फ़्रांस के राष्ट्रपति को धमकाया था कि यदि उन्होंने एक्सोसेट मिसाइलो के किल कोड नहीं दिए तो वे अर्जेंटिना पर परमाणु हमला कर देगी !! जब 2008 में इसरायली प्लेन सीरिया पर हमला करने आये तो रूस के रडार ने काम करना बंद कर दिया। जब प्लेन बमबारी करके लौट गए तो रडार फिर से काम करने लगा !! यह खुला हुआ रहस्य है कि मोसाद ने भारी पैसा देकर रडार का किल कोड खरीद लिया था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने रडार को निष्क्रिय करने में किया !!

सबक : यदि हमें आत्मनिर्भर सेना बनानी है तो हथियारों के निर्माण में "मेड इन इंडिया मेड बाय इंडियन्स " की नीति अपनानी चाहिए। भारत के 80% हथियार आयातित है , और जो 20% हथियार स्वदेशी है उनमे भी 60% पुर्जे आयातित है !!! मतलब हमने अपनी सेना को ऐसे हथियार पकड़ा रखे है जिसके बटन किन्ही दुसरे देशो के पास है। यदि अमेरिकी कम्पनियां भारत में आकर हथियार बनाएगी तो भी हालात जस के तस रहेंगे।
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(3) भारत के पास लेजर गाइडेड बम नहीं थे और अमेरिका, फ़्रांस , रूस , ब्रिटेन ने हमें ये बम देने से इनकार कर दिया था !!

सूचना : पर्वत पर बैठे पाकिस्तानियों को उड़ाने के लिए हमें लेसर गाइडेड बमों की आवश्यकता थी। लेसर गाइडेड बम सिर्फ 6 देश ही बनाते है। इन सभी देशो ने भारत को लेजर गाइडेड बम देने से इंकार कर दिया। और इसी वजह से हमें अपने सैनिको को पहाड़ चढ़ने को कहना पड़ा, जिसकी वजह से 450 सैनिक शहीद हो गए। यदि हमें लेजर गाइडेड बम मिल जाते तो भारत के एक भी सैनिक की जान नहीं जाती !! इस्राएल से हमारा सैन्य समझौता होने के कारण इस्राएल ने हमें हथियारों की काफी मदद दी , और इसके लिए हमें इस्राएल का शुक्रगुजार होना चाहिए। किन्तु इस्राएल ने भी हमें तत्काल मदद नहीं दी और लेसर गाईडेड बम हमें काफी बाद में मिले थे। वजह इस्राएल पर अमेरिकी दबाव था, और इस्राएल को भी यह सुनिश्चित करना चाहता था कि भारत अब सैन्य क्षमता नहीं बढ़ाएगा। अमेरिका से सिग्नल मिलने तक इस्राएल हमें इतनी सैन्य मदद देता रहा कि हम युद्ध में टिके रह सके। किन्तु निर्णायक मदद हमें जून में ही मिली थी।

सबक : भारत को अपने हथियार खुद बनाने की जरूरत है। हम पराये देशो के भरोसे पर सेना नहीं चला सकते। क्योंकि जब युद्ध होगा तो हथियार बनाने वाली कम्पनियां हथियार देने के एवज में तरह तरह की शर्तें लगाती है या फिर हथियारों के दाम 10 गुना कर देती है !!
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(4) मदद मांगने के लिए वाजपेयी ने तब मोदी साहेब को अमेरिका भेजा था। मोदी साहेब की यह विजिट गुप्त थी !!

सूचना : भारत के पास हथियार नहीं थे और अमेरिका देने को राजी भी नहीं था। शर्ते तय करने के लिए तब मोदी साहेब को भेजा गया। यदि किसी ऑफिशियल को भेजा जाता तो मीडिया में बवाल हो सकता था। तब मोदी साहेब किसी पद पर नहीं थे, अत: मोदी साहेब वहां जाकर हमारे राजदूत से मिले। राजदूत उन्हें विश्व बैंक और आई एम ऍफ़ के अधिकारियों के पास ले गए। वहां मदद के बदले में शर्तें तय की गयी। मुख्य शर्त यह थी कि भारत अपना सैन्य परमाणु कार्यक्रम हमेशा के लिए बंद कर देगा। भारत ने 2008 में 123 एग्रीमेंट कर के ऐसा किया। इसके अलावा कुछ अन्य शर्तें जैसे - बीमा , मीडिया आदि में एफडीआई आदि। बदले में हमें लेसर गाईडेड बम मिले।

सबक : अन्तराष्ट्रीय राजनीति में कोई किसी का दोस्त नही होता। यदि हममें अपने हितो की रक्षा करने का बल नहीं है तो कोई अन्य देश हमें बचाने नहीं आएगा। और जब वे आयेंगे तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी होती है। हथियारों के बदले हमें अपनी अर्थव्यवस्था अमेरिकियों के हवाले करनी पड़ी , अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करना पड़ा , और नतीजे में आज अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां एक के बाद एक अर्थव्यवस्था के हमारे सभी क्षेत्रो को टेक ओवर कर रही है !!
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(5) युद्ध विराम की स्क्रिप्ट भी अमेरिका ने लिखी थी !! भारत और पाकिस्तान सिर्फ इसका अनुसरण कर रहे थे !!!

30 जून 1999 को मोदी साहेब ने अमेरिका से भारत के लिए उड़ान भरी , 2 जुलाई को नवाज शरीफ को क्लिंटन ने तलब किया , 3 जुलाई को शरीफ पाकिस्तान के लिए रवाना हुए, 4 जुलाई यानी कि अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर क्लिंटन ने रात को 2 बजे वाजपेयी को युद्ध विराम करने और पाकिस्तान को सेफ पैसेज देने के लिए कहा। 4 जुलाई रात 3 बजे वाजपेयी ने ये आदेश जनरल को दिए और सुबह 4 जुलाई सुबह 4 बजे जनरल ने युद्ध विराम की घोषणा की।

सूचना : हम टीवी पर जो गोला बारी देख रहे थे, वह युद्ध का मैदान नहीं था। असली युद्ध का मैंदान अमेरिका के वातानुकूलित कक्ष थे। जो वहां अमेरिका ने तय किया वही युद्ध का नतीजा था। युद्ध शुरू भी अमेरिका ने कराया था , और अपनी शर्ते मनवाकर ख़त्म भी अमेरिका ने करवाया। इस तरह भारत और पाकिस्तान यह युद्ध हार गए और अमेरिका जीत गया।

सूचना : मीडिया ख़बरें छुपाने का कारोबार है। यदि आपको सच्ची ख़बरें चाहिए तो कम से कम एक स्त्रोत है जिसके लिए गारंटी के साथ कहा जा सकता है कि वह आपको सच्ची ख़बरें नहीं बतायेगा। और वह स्त्रोत मीडिया है।
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(6) कारगिल की सबसे ऊँची चोटी पॉइंट 5353 हमें छोडनी पड़ी !! यह आज भी पाकिस्तान के कब्जे में है !!

सूचना : लेह लद्धाख राजमार्ग पर इस चोटी से सीधे निशाना लगाया जा सकता है। अमेरिका ने इस छोटी पर लेसर गाइडेड बम इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। इस तरह तावान के रूप में हमें यह चोटी छोडनी पड़ी। रणनीतिक रूप से यह चोटी बेहद महत्त्वपूर्ण है। भारत अगले 12 वर्षो तक इस चोटी पर पुन कब्ज़ा करने के लिए प्रयास करता रहा। 2012 में सेना के अधिकारियो ने रिपोर्ट किया कि ज्योग्राफिक स्थिति के कारण इस चोटी को कब्जे में लेना लगभग असंभव है। मनमोहन सिंह जी 2012 में अधिकृत रूप से कारगिल युद्ध बंद करने के आदेश जारी किये।

सबक : यदि आप राजनीति को समझना चाहते है तो सेना एवं हथियारों के महत्त्व को समझने का प्रयास करें। पूरी राजनीति सेना एवं हथियारों के इर्द गिर्द घूमती है। पेड मीडिया राजनीति को चिल्लर मुद्दों से जोड़ कर दिखाने का धंधा करता है। समाजशात्र , अर्थशास्त्र , राजनीति शास्त्र के सभी सवालों के जवाब आपको सिर्फ सेना एवं हथियारों में ही मिलेंगे , शेष सब महत्त्वहीन है।
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समाधान ?

हमें उन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करवाने की जरूरत है जिनके आने से भारत आधुनिक स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करने में सक्षम हो जाएगा। जूरी सिस्टम , राईट टू रिकॉल , woic जैसे क़ानून लागू करके हम अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के भारत में बढ़ते नियंत्रण में कमी ला सकते है।

स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्ताव - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1981902295261330>;
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हथियारबंद नागरिक समाज के लिए प्रस्ताव - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1982766555174904>;

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सन्दर्भ के लिए ये लिंक देखें एवं अन्य विवरणों के लिए गूगल करें :

<https://goo.gl/hvChmC>;
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<https://goo.gl/2oSRzJ>;
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<https://goo.gl/Yvbtif>;
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<https://goo.gl/Am6Upm>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Feb 02 2019 19:05:52 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोहन गांधी की हत्या पर न्यूयार्क टाइम्स ने हेड लाइन दी थी -- "गांधी को एक हिन्दू ने मार दिया" !!

लिंक - <https://goo.gl/seJ8P6>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Feb 03 2019 19:25:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मीडिया कैसे काम करता है।
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टीवी या मीडिया समूह जो भी प्रसारण करते है उसका चयन करने के लिए एक समान्य प्रक्रिया का अनुसरण होता है। निचे वह प्रक्रिया दी गयी है।
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सबसे पहले यह समझना जरुरी है कि टीवी अपना खर्चा कैसे निकालता है ? मतलब वह पैसे कैसे बनाता है ?
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एक आम धारणा यह है कि टीवी विज्ञापन से पैसा बनाता है। जबकि सच्चाई यह है कि टीवी जो कुछ भी दिखाता है , उससे पैसा बनाता है। इसे और भी स्पष्ट रूप से यूँ कह सकते है कि किसी मीडिया समूह की टीवी स्क्रीन एक प्लाट है जो कि 24 घंटे प्रसारण के उपलब्ध है। जिसे जो भी विषय वस्तु दिखानी है , वह उसके लिए पैसा देगा और बतायेगा कि इस विषय को इस तरह और इतने घंटे के लिए दिखाना है। और वह यह भी बतायेगा कि इस विषय को खबर(*) के रूप में दिखाना है , या विज्ञापन के रूप में दिखाना है , आदि आदि। टीवी उससे पैसा लेगा , और वह विषय वस्तु इस तरह के कलेवर में प्रस्तुत करके पेश कर देगा कि पैसा देने वाले व्यक्ति का उद्देश्य पूरा हो जाए।
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(*) यदि आप कोई सूचना खबर का लेबल लगाकर देना चाहते है तो आपको 2 से 4 गुणा तक ज्यादा दाम चुकाने होते है। विज्ञापनों की दरे काफी कम होती है। उदाहरण के लिए मान लीजिये कि कोई अभिनेता सेना को 20 लाख का दान देता है, और अब वह यह जानकारी देश के लोगो तक भी पहुँचाना चाहता है कि मैंने 20 लाख का दान दिया है। तो वह मीडिया से इसे खबर के रूप में दिखाने के लिए कहेगा। मीडिया उससे 1 करोड़ रूपये लेगा और इस बात को खबर के रूप में दिखायेगा कि अमुक अभिनेता ने सेना को 20 लाख का दान दिया है !!
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मैं इसे और भी स्पष्ट करता हूँ :
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मान लीजिये कि A एक पॉलिटिकल स्पोंसर(**) है। A पेड रविश कुमार जी को 2 करोड़ प्रति एपिसोड की दर से 15 एपिसोड के लिए 30 करोड़ का भुगतान करेगा और कहेगा कि प्राइम टाइम पर वे 15 दिन पर नियमित रूप से बेरोजगारी के मुद्दे पर इस तरह का प्रसारण करे कि मोदी साहेब सवालों के घेरे में आये। पेड रविश कुमार जी मेहनत करके रिसर्च करेंगे और बेरोजगारी पर वास्तविक तथ्यों से सजी हुयी रिपोर्ट इस तरह तैयार करेंगे कि बेरोजगारी का मुद्दा उछल कर आये।
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(**) पॉलिटिकल स्पोंसर : जो व्यक्ति समूह राजनैतिक पार्टियों का खर्चा चलाते है , उनके प्रचार के लिए भुगतान करते है और यह सुनिश्चित करते है कि कौनसी पार्टी सत्ता में आएगी। ज्यादातर ये बहुराष्ट्रीय कम्पनियां एवं उद्योगपति होते है। पार्टियों के एजेंडे भी यही बनाते है , और सरकार में आने के बाद यही लोग तय करते है कि सरकार कौनसे क़ानून लागू करेगी और कौनसे नहीं करेगी। प्रत्येक पार्टी के पॉलिटिकल स्पोंसर अलग अलग नही है। पॉलिटिकल स्पोंसरो का समूह सभी पार्टियों को स्पोंसर करता है, और शीर्ष स्तर पर इनमे ज्यादातर हितो का टकराव नहीं होता। इसके अलावा भी अलग अलग छोटे मोटे पॉलिटिकल स्पोंसर होते है, जिनके हितो में वक्ती तौर पर टकराव हो सकता है। किन्तु कोंग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी समेत सभी मुख्य धारा की पार्टियों के सुपर पॉलिटिकल स्पोंसर एक ही है।
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अब 2 एपिसोड प्रसारित करने के बाद पेड रविश कुमार जी श्री अरविन्द केजरीवाल और श्री नितीश कुमार के स्पोंसरो को फोन करके कहेंगे कि बेरोजगारी की सीरिज में हम इन दोनों राज्यों की बदहाली को भी कवर करने वाले है। केजरीवाल जी और नितीश जी के स्पोंसर उन्हें 25-25 लाख के विज्ञापन देने का वादा कर देंगे ताकि वे नितीश जी एवं अरविन्द जी को इसमें न घसीटे। लेकिन यदि A कहता है कि इन दोनों राज्यों को भी कवर करना है और इसके लिए अतिरिक्त भुगतान भी करता है तो पेड रविश कुमार इन दोनों राज्यों को भी कवर करेंगे। पर यदि नितीश के पॉलिटिकल स्पोंसर A को एप्रोच करके उससे सेटलमेंट कर लेते है तो A पेड रविश कुमार जी को कहेगा कि बिहार को कवर न करे।
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इसी तरीके से पॉलिटिकल स्पोंसर B पेड अर्नव पेड गोस्वामी जी और पेड सुधीर चौधरी जी को कुछ दिनों का कॉन्ट्रेक्ट देगा, और उन्हें नियमित दिनों के मुद्दे भी देगा। स्पोंसर A रविश कुमार जी के साथ साथ पेड अर्नव पेड गोस्वामी जी एवं पेड दीपक चौरसिया जी के चेनल पर भी कुछ घंटो के प्लाट खरीदेगा। चूंकि सुधीर चौधरी जी को बेरोजगारी कवर करने के लिए पेमेंट नहीं हुयी है , अत: सुधीर जी बेरोजगारी कवर नहीं करेंगे। यदि उन्हें इंडोनेशिया की बेरोजगारी एवं महंगाई कवर करने के लिए पेमेंट मिल जाती है तो पेड सुधीर चौधरी जी इंडोनेशिया की बेरोजगारी को इस तरह से कवर कर देंगे कि आप भारत की बेरोजगारी को भूल कर इंडोनेशिया की बेरोजगारी पर च्च च्च…च्च करने लगेंगे !!
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इसी दौरान यदि कोई स्पोंसर थोड़ी सी सीरियस कोमेडी करने के लिए भुगतान करता है तो पत्रकार 2000 के नोटों में चिपे इंस्टाल करने की ख़बरें भी चलाने के लिए तैयार हो जायेंगे !!! सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि पेमेंट कितनी की जा रही है।
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अब ये सभी पत्रकार अपनी तैयारी के साथ मंच सजायेंगे।
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डिबेट में आमंत्रित राजनीतिज्ञों, विषय विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ पत्रकारों का चयन :
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अपनी शेली के अनुसार पेड रविश कुमार जी कुछ गंभीर किस्म के ज्ञानी लोगो को फोन करके कहेंगे कि यदि आज आपको टीवी पर आना है तो इस विषय पर बोल सकते है। किन्तु आपको स्टेंड यह लेना है कि बेरोजगारी बढ़ रही है , और इसमें गलती मोदी साहेब की है। आमंत्रित व्यक्ति टीवी पर आकर इसी लाइन पर डिबेट करेगा , क्योंकि वह जानता है कि यदि उसने रविश कुमार जी द्वारा बतायी गयी लाइन नहीं ली तो आइन्दा रविश कुमार जी उसे बुलाने की जगह किसी दुसरे चंगु मंगू को विशेषग्य बनाकर बिठा लेंगे। इसी बीच यदि स्पोंसर A कहता है कि अमुक आदमी को बुलाओ या अमुक आदमी को न बुलाओ तो रविश कुमार जी इन निर्देशों का पालन करेंगे।
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इसी तरह से पेड अर्नव पेड गोस्वामी जी भी अपने स्पोंसर के अनुकूल विशेषग्य चुनेंगे और टीवी पर बिठाकर मुर्गे लड़ायेंगे। स्पोंसर C पेड रजत शर्मा जी को 10 करोड़ का भुगतान करेंगे और बताएँगे कि इस बार आप की अदालत में किसका इंटरव्यू कराना है। स्पोंसर यह भी बतायेगा कि कौनसे सवाल पूछे जायेंगे और कौनसे नहीं पूछे जायेंगे। इंटरव्यू में नेता भी स्पोंसर के निर्देशों का पालन करेगा और किसी विशेष विषय पर वही जवाब देगा। वर्ना स्पोंसर अमुक नेता को स्पोंसर करना बंद कर देगा और टीवी / अख़बार से प्लग खींच लिए जाने पर नेताजी की राजनीति ख़त्म हो जायेगी।
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अमूमन सभी मीडिया समूहों के विशेषग्य लगभग तय होते है , और वे घूम फिर कर उन्हें ही पकड कर लाते है। जो बार बार आते रहते है और जिन्हें आप सिर्फ टीवी की वजह से जानते है उन्हें कभी कभार कुछ खर्चा पानी ( मानदेय ) वगेरह दे दिया जाता है। किन्तु कद वाले विशेषज्ञों को कुछ नहीं दिया जाता। टीवी पर बुलाकर उन्हें जो ख्याति दी जा रही है , वही उनकी पेमेंट है। इस ख्याति की वजह से वे लाखों करोड़ो बना लेते है।
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दरअसल विषय के विशेषग्य नाम की कोई चीज होती नहीं है। मान लीजिये कि देश में किसी विषय के 5,000 विशेषग्य है। किन्तु उन्हें कोई सुनता या पूछता नहीं है। जो टीवी पर आएगा उसी की बात सुनी जाएगी। तो टीवी पर जब उसे बुलाया जाता है तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसकी विशेषग्य राय क्या है , बल्कि फर्क इस बात से पड़ता है कि स्पोंसर उससे क्या कहलाना चाहता है। यदि विशेषग्य स्पोंसर की लाइन नहीं लेता है , तो स्पोंसर उसे बुलाने की जगह ऐसे विशेषग्य को बुलाएगा जो उसकी लाइन पर बोलने को तैयार हो।
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इसी दौरान कभी अचानक सुपर पॉलिटिकल स्पोंसर X परिदृश्य में आता है और प्रत्येक मीडिया समूह को 500 करोड़ का भुगतान करके सभी टीवी चेनल्स के अगले 7 दिन के 24*7 घंटो के प्लाट खरीद लेता है !! अब वह उन्हें निर्देश देता है कि अगले 7 दिन तक सभी चैनलों पर हर समय सिर्फ द अन्ना एवं जनलोकपाल की कथा प्रसारित की जायेगी। अब बेरोजगारी सीरिज और इस तरह की ख़बरें स्थगित हो जायेगी और सभी कैमरे 24 घंटे The Anna को कवर करेंगे।
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क्योंकि X बेहद ताकतवर है , और वास्तविक रूप से मीडिया को पूरी तरह से कंट्रोल करता है। X देश के सारे टीवी चेनलो एवं अखबारों के प्लाट अगले 1 वर्ष तक चार गुना भुगतान करके खरीद सकता है और पूरे देश को किसी भी दिशा में सोचने के लिए बाध्य कर सकता है , नेताओ को चुनाव हरवा सकता है, जीता सकता है आदि आदि। मीडिया के माध्यम से X के पास भारत का सबसे बड़ा वोट बेंक है , अत: सभी नेता टिके रहने के लिए X पर निर्भर करते है। X हथियार , तेल , बैंक , दवाइयाँ , भारी मशीनरी आदि का उत्पादन करने वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको का समूह है।
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यदि सुपर पॉलिटिकल स्पोंसर पीएम से नोट बंदी करवाना चाहता है तो वह इसके लिए मीडिया को भी करोड़ो रूपये का भुगतान करेगा कि नोट बंदी पर सकारात्मक कवरेज दिया जाए। वह सभी अख़बारो को भी पेमेंट करेगा और इसके लिए प्लाट खरीदेगा। सभी विशेषज्ञों एवं स्तम्भ लेखको को भी यह कहा जाएगा कि यदि वे नोटबंदी के खिलाफ लिखेंगे या बोलेंगे तो उन्हें न तो टीवी पर दिखाया जाएगा और न ही उनके कोलम अख़बार में आयेंगे।
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इस तरह स्पोंसर मीडिया का इस्तेमाल करके नोट बंदी के पक्ष में देश व्यापी माहौल बनाएगा। यदि पीएम कोई फैसला लेना चाहते है और X इनकार कर देता है तो पीएम वह फैसला नहीं लेगा। क्योंकि X फैसले का असीमित नकारात्मक कवरेज करवाने के लिए मीडिया को भुगतान करेगा जिससे पीएम को वोटो की भारी क्षति होगी।
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अमूमन सुपर पॉलिटिकल स्पोंसर किसी मुद्दे पर जो लाइन देता है, सभी पॉलिटिकल पार्टियाँ , सभी नेता , सभी कलमकार , सभी कलाकार , सभी विषय विशेषग्य आदि उसी लाइन का अनुसरण करेंगे। यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो आप उन्हें टीवी पर कभी नहीं देख पायेंगे। उदाहरण के लिए भारत को जो रफाल प्लेन बेचे जा रहे है , वे सुपर पॉलिटिकल स्पोंसर समूहों की कम्पनी के है , तो सभी को यह निर्देश दिए जायेंगे कि वे रफाल में रखे गए किल स्विच के बारे में कोई चर्चा नहीं करेंगे।
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कोंग्रेस को भी यह निर्देश दिए जायेंगे कि वे रफाल में सिर्फ घोटाले का मुद्दा उठा सकते है , किल स्विच का नहीं। तो कोंग्रेस रफाल में किल स्विच का मुद्दा नहीं उठाएगी, यदि कोंग्रेस का कोई नेता किल स्विच की बात करेगा तो उसे आइन्दा आप कभी टीवी या अखबार पर नहीं देखेंगे। इस तरह मीडिया में आप जितना भी प्रसारण देखते है वह सभी स्क्रिप्टेड होता है !! टीवी का कोई भी ऐसा लम्हा नहीं है जिसके लिए किसी न किसी के द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा है। बस फर्क यह है कि हमको यह पता नहीं है कि किस खबर को किस रूप में दिखाने के लिए कितनी पेमेंट की गयी है।
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समाचार पत्रों में सिर्फ़ विज्ञापन ही सच्चे होते है — थोमस जेफरसन , अमेरिका के तृतीय राष्ट्रपति 1810.
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सभी राजनैतिक ख़बरों के लिए भुगतान किया जाता है, और सबसे अधिक भुगतान उन खबरो के लिए किया जाता है, जिन्हें दिखाना बेहद ज़रूरी था, किंतु नही दिखाया गया — जेफरसन , 1820.
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जो व्यक्ति समाचार पत्र नही पढ़ता उसके पास ज़्यादा सच्ची ख़बरें होती है — ( कथन किसका है, ठीक से याद नही ) शायद जार्ज बर्नार्ड शॉ का है।
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और अंत में — मीडिया ख़बरें छुपाने के कारोबार में है !!
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दरअसल मीडिया का सही नाम पैड मीडिया है , और सबसे गम्भीर समस्या यह है कि पैड मीडिया में विज्ञान-गणित को छोड़कर कक्षा 1 से मास्टर डिग्री और PHD तक की सभी पाठ्यपुस्तकें शामिल है !!!
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क्या मिडिया को निष्पक्ष या अनपेड बनाया जा सकता है ?

मिडिया सदा से पेड मिडिया रहा है, और ऐसा ही रहेगा। पेड मिडिया को अनपेड मिडिया नहीं बनाया जा सकता, लेकिन सिटीजन पेड मिडिया बनाकर निष्पक्ष मिडिया की स्थापना की जा सकती है।

क्यों पेड मिडिया को अनपेड मिडिया नहीं बनाया जा सकता ?

मिडिया की आय के दो ही स्त्रोत हो सकते है -- १) प्रसारण के दर्शक या पाठक , २) विज्ञापन।

यदि कोई मिडिया समूह सिर्फ पाठको पर निर्भर रहेगा तो अखबार की लागत कई गुना बढ़ जायेगी। जो अखबार आपको 2 रूपये में मिल रहा है, वह आपको 15 रूपये में मिलने लगेगा इससे पाठको और दर्शको की संख्या घटेगी, फलस्वरूप लागत और भी बढ़ जायेगी। अंतत: मिडिया घाटा खाकर बंद हो जाएगा या फिर विज्ञापन स्वीकार करेगा। तब विज्ञापन दाता इस शर्त पर विज्ञापन देना मंजूर करेंगे जब मिडिया समूह उन्हें और उनके समर्थको को नुकसान पहुंचाने वाली खबरों का प्रसारण नही करे। स्पष्ट है, ऐसे हालात में मिडिया कर्मियों से चैनल या अखबार बंद करने की उम्मीद नही की जा सकती अत: वे विज्ञापन दाताओ के हाथ बिक जाएंगे।

इसके अलावा यदि कोई मिडिया समूह नेताओ, या धनिक वर्ग के खिलाफ प्रसारण करता है, तो मौद्रिक नुकसान तो खैर होगा ही, लेकिन सरकार उनके खिलाफ कई प्रकार की जाँचे शुरू करवा कर उन्हें झूठे-सच्चे मुकदमो में फंसा देगी। अंतत मिडिया समूह को अस्तित्व बचाये रखने के लिए सरकार, नेताओ और धनिक वर्ग के एजेंडे पर कार्य करना पड़ेगा। .

फिर कैसे हम निष्पक्ष मिडिया की स्थापना कर सकते है ?

इसके लिए हमें ऐसे मिडिया की आवश्यकता है, जो नागरिको द्वारा पेड हो। अर्थात ऐसे मिडिया हाउस के स्टाफ, वेतन, जमीन तथा संस्थापना आदि से सम्बंधित खर्चे नागरिको द्वारा दिए जाए। तब ऐसे मिडिया को विज्ञापन दाताओ पर निर्भर रहने की कोई आवश्यकता नहीं रह जायेगी, और वह निष्पक्ष रूप से नागरिको के हित में सच्ची खबरों का प्रसारण करेगा। अच्छी बात यह है कि भारत के नागरिको के पास पहले से ही ऐसा मिडिया समूह मौजूद है, लेकिन वह अपना काम ठीक से नहीं कर रहा है। यह मिडिया समूह दूरदर्शन है। दूरदर्शन के पास पूरे देश में जमीन और प्रसारण केंद्र है। इसके स्टाफ, वेतन आदि संचालन से सम्बंधित खर्चे भी नागरिको से वसूल किये गए टैक्स से चुकाए जाते है।

आज दूरदर्शन के संसाधनो और दर्शको का जोड़ देश के सभी निजी चैनलों के संसाधनो और दर्शको की संख्या के जोड़ से ज्यादा है। लेकिन अकूत संपत्ति और पेट भर के दर्शक संख्या होने के बावजूद दूरदर्शन घटिया प्रसारण की पराकाष्ठा को सिर्फ इसीलिए मेन्टेन रखे हुए है, क्योंकि निजी चैनल्स द्वारा दूरदर्शन के प्रसारण को घटिया स्तर का बनाये रखने के लिए घूस दी जाती है। यदि दूरदर्शन अपने संसाधनो का उचित इस्तेमाल करे तो भारत के करोड़ो नागरिको को स्तरीय मनोरंजन और निष्पक्ष खबरें उपलब्ध करवा सकता है। दूरदर्शन अपने खुद के स्पोर्ट्स चैनल, मूवी चैनल्स शुरू कर सकता है, गुणवत्ता प्रधान धारावारिको का फिर से निर्माण शुरू कर सकता है, और हर तरीके से निजी चैनल्स को कड़ी टक्कर दे सकता है। लेकिन दूरदर्शन के घटिया प्रसारण के कारण निजी मिडिया समूहों ने भारत पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है।

दूरदर्शन के पुनर्गठन के लिए प्रस्तावित ढांचा :

हमारा प्रस्ताव है कि -

1. दूरदर्शन को 5 स्वतंत्र चेनलो में विभाजित किया जाए। एक चैनल प्रधानमन्त्री के सीधे नियंत्रण में होगा, तथा अन्य चार अपने अपने स्तर पर स्वतंत्र होंगे। इन सभी चेनल्स के अध्यक्ष को नौकरी से निकालने का अधिकार जनता के पास होगा। ऐसा इसलिए ताकि सच्ची खबरे तथा मूल्य परक मनोरंजन के प्रसारण के लिए प्रतिस्पर्धा बनी रहे। निजी चेनल्स भी मुक्त रूप से प्रसारण के लिए स्वतंत्र होंगे।

2. प्रत्येक राज्य के पास दो चैनल अलग से होंगे। एक फ्री टू एयर तथा एक केबल के माध्यम से प्रसारित होने वाला। दोनो चैनल राज्य के मुख्यमंत्री के सीधे नियंत्रण में होंगे, तथा मुख्यमंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार राज्य के मतदाताओ के पास होगा।

3. राष्ट्रीय और राज्यों के दूरदर्शन विभाग एक दैनिक समाचार पत्र तथा साप्ताहिक पत्रिका भी प्रकाशित करेंगे। इनका पीडीएफ वर्जन भी वेबसाइट पर रखा जाएगा तथा कोई भी समाचार पत्र इस सामग्री को प्रकाशित करने के लिए स्वतंत्र होगा।

4. दूरदर्शन स्टाफ की नियुक्ति प्रक्रिया सिर्फ लिखित परीक्षा के माध्यम से की जायेगी तथा स्टाफ को नैकरी से निकालने का अधिकार नागरिको की ज्यूरी के पास होगा।

5. यदि दूरदर्शन के स्टाफ द्वारा घूस खाकर खबरे दिखाना पाया जाता है तो नागरिको की ज्यूरी उनका सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट ले सकेगी, उन्हें नौकरी से निकाल सकेगी तथा जेल में भेज सकेगी। जिन कर्मचारियों को यह शर्ते मंजूर नहीं होगी, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

राईट टू रिकॉल दूरदर्शन चेयरमेन के इस प्रस्तावित कानून का ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Feb 04 2019 14:10:30 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इंडेक्स पोस्ट ; एल्बम - बैंको का भ्रष्टाचार
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(14) मोदी साहेब हम नागरिको से पूछ रहे है कि आखिर रुपया क्यों गिर रहा है ?
<https://www.facebook.com/pawan.jury/videos/1785715861546642/>;
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(13) एनपीए ( बैंको का डूब खाता ) क्यों लगातार बढ़ रहा है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1539402582844639>;
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(12) पिछले 4 वर्षो में बैंको द्वारा 60,000 करोड़ के 8,000 फौजदारी मुकदमे दर्ज किये गए -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1538930222891875>;
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(11) नीरव मोदी ने जो घपला किया है उसका गबन वर्ष 2017-18 में किया गया था -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1538911222893775>;
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(10) रोटोमेक द्वारा कर्ज खाने का एक और घपला -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1538826516235579>;
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(09) मोदी साहेब के साथ फोटो में नजर आ रहा व्यक्ति नीरव मोदी है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1536339393150958>;
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(08) एयरटेल ने आधार कार्ड के माध्यम से 47 करोड़ की सब्सिडी उड़ाई -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1439969182787980>;
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(07) कागजी विकास दर !!
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1217587181692849>;
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(06) कैसे विजय माल्या जैसे लोग करोड़ो रूपये के कर्जे लेकर खा जाते है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/900612796723624>;
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(05) प्रधानमंत्री महोदय हमारे बैंको की हिस्सेदारी बेच रहे है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/893353514116219>;
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(04) बैंको ने 114,000 करोड़ रूपये डूब खाते में डाल दिए और कोई भी जेल नहीं गया :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/884820701636167>;
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(03) डॉलर का मूल्य 200 रूपये क्यों नहीं होना चाहिए ?
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/822211664563738>;
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(02) राइट-टू-रिकॉल-रिज़र्व बैंक गवर्नर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/814288365356068>;
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(01) मोदी सरकार डिजिटल इंडिया के नाम पर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रहार करने जा रही है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/782561745195397>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Feb 06 2019 11:09:46 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#Eiar5 की कुंजी
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घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का सारांश
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भारत में लगभग 2 से 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठिये अवैध रूप से रह रहे है और इनके पास आधार कार्ड , राशन कार्ड, लाइसेंस, बिजली-पानी के बिल आदि सभी दस्तावेज है। मतदाता सूचियों में भी इनके नाम दर्ज है। ये घुसपेठिये पिछले कई वर्ष से निरंतर भारत में आकर मुख्यतया पूर्वोत्तर वे बसते जा रहे है। इससे धार्मिक जनसँख्या का संतुलन बिगड़ रहा है। चीन, पाकिस्तान, एवं सउदी अरब का समर्थन हासिल होने के कारण ये घुसपेठिये भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यदि इन्हें पडोसी देश हथियारों की मदद पहुँचाने लगेंगे तो भारत को एक भीषण गृह युद्ध का सामना करना पड़ सकता है। निचे जिस कानूनी ड्राफ्ट का सारांश दिया गया है वह पूरे देश में फैले इन घुसपेठियो को चिन्हित करने और इन्हें देश से बाहर निकालने की व्यवस्था करता है।

( टिपण्णी : इस ड्राफ्ट में दो विशेषताएँ है - (A) शीर्ष अधिकारी को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास होगा , ताकि उसे दबाया या ख़रीदा न जा सके। घुसपेठियो की सुनवाई एवं दंड देने की शक्ति नागरिको की जूरी के पास होगी, जज के पास नहीं। )
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(1) प्रधानमंत्री घुसपैठियों के अनुसन्धान के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेंगे, जिसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ( NR ) कहा जाएगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार संबंधित कार्य करने के लिए राज्य रजिस्ट्रारों , जिला रजिस्ट्रारों तथा अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करेगा। भारत के मतदाताओं के पास "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार" की प्रक्रिया होगी, जिससे वे इसे बदल सकेंगे।

(2) प्रधानमंत्री दूरसंचार विभाग को आदेश करेंगे कि वह NR दूरसंचार विभाग से पिछले 2 वर्षों में बांग्लादेश से किये गए और बांग्लादेश को किये गए सभी फ़ोन कॉल्स की सूची प्राप्त करेगा एवं इसकी सहायता से बांग्लादेशी संदिग्धों की सूची बनाएगा |
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(3) कोई भी भारतीय नागरिक निजी या सार्वजनिक रूप से बांग्लादेशी संदिग्धों की सूची दे सकता है, और उसे ये सूची संदेह के आधार पर घटते क्रम में बनानी होगी। यदि सूची में 20% से भी कम त्रुटियाँ हुई, तब राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उस व्यक्ति की इच्छानुसार उसे निजी या सार्वजनिक रूप से पारितोषिक दे सकता है।
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(4) NR अपने विवेक और प्राप्त की गयी श्रेष्ठतम सूचनाओं के आधार पर भारत के प्रत्येक जिले में बांग्लादेशियों की अनुमानित संख्या बताएगा |
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(5) NR बांग्लादेश में एजेंटों की नियुक्ति करेगा। NR अपने एजेंटों से भारत में रह रहे संदिग्धों के बांग्लादेश में निवास कर रहे रक्त संबंधियों के ब्लड ग्रुप और डीएनए नमूनों की जानकारी जुटाने के लिए कहेगा।
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(6) NR संदिग्धों के नाम, चित्र और अन्य जानकारी सरकारी वेबसाइट पर रख सकता है, और उनके बांग्लादेशी संबंधियों के नाम और अन्य जानकारी देने के लिए सभी से निवेदन भी कर सकता है।
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(7) प्रत्येक संदिग्ध की सुनवाई के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रार 30 से 55 वर्ष की आयु के मध्य के 100 मतदाताओं को 5 विभिन्न जिलो से चुनेगा | प्रथम जिला वह होगा जो उस जिले से सबसे निकट है, जहाँ से संदिग्ध पकड़ा गया है और जहाँ बांग्लादेशी जनसँख्या 10% से कम भी है। जूरी मंडल को आरोपी का सार्वजनिक रूप से पॉलीग्राफ टेस्ट, ब्रैनमैपिंग और / या सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने का अधिकार होगा। जूरी मंडल बहुमत से घुसपेठिये को सजा देने के बारे में फैसला करेगा।
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पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें - <https://newindia.in/causes/eiar5>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 08 2019 18:21:03 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

प्रधानमंत्री जी , कृपया सामरिक परमाणु अस्त्रों का उत्पादन शुरू करें। पाकिस्तान बड़े पैमाने पर सामरिक परमाणु अस्त्र बना रहा है , अत: हमें भी सामरिक अस्त्रों का उत्पादन करने की जरूरत है। यदि इसमें 123 एग्रीमेंट बाधा बनता है तो कृपया इसे भी रद्द करें। यदि इस विषय पर देशव्यापी रायशुमारी की जरूरत हो तो सलंग्न की गयी प्रक्रिया को गेजेट में प्रकाशित करें :
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भारत के नागरिको,
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यदि आप सामरिक परमाणु अस्त्रों के उत्पादन का समर्थन करते है तो निम्नलिखित कदम उठाए :
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(1) प्रधानमंत्री कार्यालय को पोस्टकार्ड भेजें। पोस्टकार्ड पर यह लिखें - "प्रधानमंत्री जी, इस क़ानून को गेजेट में छापें - Newindia.in/MakeTacticalNuke "
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(2) पीएम की वेबसाईट पर रखी गयी इस अर्जी का समर्थन करें - Newindia.in/causes/MakeTacticalNuke
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(3) पीएम को यह ट्वीट करें - Newindia.in/MakeTacticalNuke , #MakeTacticalNuke
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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Feb 11 2019 05:29:44 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Rakesh Suri Ghaziabad UpActivist:

ऐसे लगभग 17 देश हैं जहाँ जूरी प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग किया जाता है –
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कनाडा, अमेरिका, इंग्‍लैण्‍ड, फ्रांस, डेनमार्क, नार्वे, स्‍वीडन, फिनलैण्‍ड, जर्मनी, स्‍पेन, पुर्तगाल, इटली, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्‍ड।
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रूस के लगभग 25 प्रतिशत जिलों में अब जूरी प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग किया जाने लगा है और जापान वर्ष 2009 से जूरी प्रणाली (सिस्टम) प्रारंभ कर चुका है।
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लगभग 90 देशों में जज प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग किया जाता है। जज प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग करने वाले हर एक देश के न्‍यायालय भ्रष्‍ट हैं, पुलिसवाले भ्रष्‍ट हैं और राजव्‍यवस्‍था भी भ्रष्‍ट है |
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रूस ,चीन और जापान को भी अपने यहां की अदालतों में भ्रष्‍टाचार और भाई-भतीजावाद की समस्‍या के कारण जूरी प्रणाली (सिस्टम) लागू करना पड़ा था।
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जूरी प्रणाली (सिस्टम) पर ऐतिहासिक दृष्‍टिकोण से एक नजर :-

रोम में मजिस्‍ट्रेटों का चयन हुआ था और वहां अत्‍यधिक अपराध के कारण जूरी प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग शुरू हुआ जिससे पड़ोस के देशों की तुलना में वहां बहुत ही कम भाई–भतीजावाद और कम भष्‍टाचार वाला शासन कायम हुआ। यही कारण था कि रोम अन्‍य देशों की तुलना में ज्‍यादा मजबुत/सुदृढ़ हो गया। लेकिन रोम का पतन हो गया जिसका सबसे प्रमुख कारण यह था कि जनसंख्‍या के एक बहुत बड़े हिस्‍से (गुलामों) को वोट/मत देने का अधिकार नहीं था।
इसके बाद हरेक शासन में राजा या राजा द्वारा नियुक्‍त किए गए लॉर्ड के द्वारा सजा सुनाई जाती थी। वर्ष 1200 में, इंग्‍लैण्‍ड पहला राष्‍ट्र बना जिसने इस व्‍यवस्‍था को उलट दिया – और मैग्‍ना कार्टा में यह घोषणा की कि राजा के ऐजेन्‍ट अब आरोप ही लगाएंगे और नागरिक (जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य) ही दोषी होने का निर्णय/फैसला करेंगे और सजा सुनाएंगे।
यह एक ऐतिहासिक बदलाव था, एक ऐसा बदलाव जिससे शासकों/राजाओं और प्रजा के बीच के संबंधों में पूरी तरह से बदलाव आ गया। अब राजा/शासक के पास बन्‍दी बनाने अथवा यहां तक कि अर्थदण्‍ड/जुर्माना लगाने का भी अधिकार नहीं रह गया। इसी जूरी प्रणाली (सिस्टम) का ही यह परिणाम हुआ कि अब कारीगर/शिल्‍पकार और व्‍यापारी अपने आप को लॉर्डां के मनमाने शासन से अपना बचाव कर पाए और प्रगति होनी शुरू हो गई।
केवल इसी कारण/बदलाव से इंग्‍लैण्‍ड में कारीगर/शिल्‍पकार सम्‍पन्न हो गए और उनमें से कुछ बाद में चलकर उद्योगपति बन बैठे। इंग्‍लैण्‍ड में औद्योगिक क्रान्‍ति इसी जूरी प्रणाली(सिस्टम) के कारण ही आई – जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य ने कारीगर/शिल्‍पकार, व्‍यापारियों और उद्योगपतियों को लॉर्डों और राजाओं के मनमाने जुर्माने से बचाया और इस प्रकार जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य ने इन्‍हें धनवान बनने के लिए योग्य बनाया ।
तथाकथित पुनर्जागरण की कहीं कोई भूमिका नहीं थी। इंग्‍लैण्‍ड ने जो प्रगति/तरक्‍की की, यदि उसके लिए पुनर्जागरण जिम्‍मेवार था तो बताएं कि ऐसी प्रगति इटली ने क्‍यों नहीं की जहां कि पुनर्जागरण सबसे पहले आया ?
बुद्धिजीवियों ने यह बताने के दौरान कि यूरोप ने सारी दुनियां पर कैसे कब्‍जा कर लिया, जानबुझकर जूरी प्रणाली (सिस्टम) की भूमिका को दबा दिया है क्‍योंकि वे नहीं चाहते थे कि छात्र समुदाय जूरी प्रणाली (सिस्टम) के बारे में जानें ताकि ऐसा न हो कि वे इस प्रणाली (सिस्टम) की मांग ही न करने लगें।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Feb 12 2019 13:53:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ishwar Choudhary BhilwaraRj:

जब ऐसे शिक्षा में सुधार होगा तो।
देश तकनीक में आत्मनिर्भर कैसे होगा ।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 15 2019 20:34:26 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

मोदी साहेब ने विपक्ष के शीर्ष नेता रहते हुए एक बेहद गिरी हुयी हरकत करनी शुरू की - उन्होंने आतंकियों द्वारा किये गए हमलो को "प्रधानमंत्री की कायरता" से जोड़ा !! संघ=बीजेपी के कार्यकर्ता यह हरकत 1950 से ही करते आये है , किन्तु किसी शीर्ष नेता द्वारा ऐसा करने की पहल सबसे पहले मोदी साहेब ने की !!
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संघ=बीजेपी के कार्यकर्ता शुरू से ही यह कहते आये है कि आतंकियों द्वारा किये जाने वाले हमलो का कारण यह है कि, भारत का पीएम कायर और डरपोक है, लेकिन बीजेपी=संघ के शीर्ष नेताओ जैसे वाजपेयी एवं आडवाणी ने इस तरह के घटिया बयान कभी नहीं दिए।
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और जब वाजपेयी पीएम थे और भारत पर एक के बाद आतंकी हमले हुए तब भी कोंग्रेस के किसी शीर्ष नेता ने इस तरह के आरोप नहीं लगाए कि संघ के मंत्री कायर एवं डरपोक है।
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लेकिन मोदी साहेब में ये विशिष्ट प्रकृति है कि उन्होंने राजनैतिक माइलेज लेने के लिए यह शर्मनाक हरकत शुरू की। उन्होंने 2011 से ही इस आशय के बयान देने शुरू किये कि भारत के मंत्री एवं प्रधानमंत्री डरपोक है !! जब वे इस प्रकार के एलान देते थे कि, "हमें पाकिस्तान को लव लेटर लिखने बंद करने चाहिए" एवं पाकिस्तान को उनकी भाषा में जवाब देना चाहिए" तो दरअसल वे यह दिखाना चाहते थे कि भारत के पीएम एक कायर आदमी है , और इसी वजह से भारत पर आतंकी हमले हो रहे है , और इसका समाधान यह है कि उनके जैसे किसी बहादुर आदमी को पीएम बनाया जाए !! और जैसे ही उनके जैसे बहादुर आदमी पीएम की कुर्सी पर जाएगा वैसे ही जादू की तरह आतंकी हमले बंद हो जायेंगे !!
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यदि संघ=बीजेपी के कार्यकर्ता इस तरह की शर्मनाक हरकते करते है तो इसकी अवहेलना की जा सकती है , किन्तु किसी शीर्ष नेता को इस तरह की घटिया हरकत करने से बचना चाहिए। वोट लेने के लिए इस तरह का धूर्त व्यवहार करना प्रशस्त नही है।
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और अब विपक्ष मोदी साहेब से यह पुछ सकता है कि आपके 56 इंच के सीने का अब हम कौनसा अचार डाले ? शहीद हुए 40 सैनिको के परिवार वालो को आप यह बात कैसे समझायेंगे कि आप एक बहादुर आदमी है जबकि पूर्ववर्ती सभी पीएम कायर थे !! या आपका 56 इंच का सीना पिचक कर अचानक 5 इंच का हो गया है !! या ये हमेशा से 5 इंच का ही था लेकिन पेड मीडिया एवं आपकी आई टी सेल इसमें हवा भरकर 56 इंच दिखा रहे थे ? ये सब कहते हुए अच्छा नहीं लगता और हम यह सब कहना भी नहीं चाहते। क्योंकि यह गिर कर दिखाने की लड़ाई है, और इसमें वही जीतता है, जिसमे ज्यादा गिर कर दिखाने और ज्यादा गाली गलौज करने की प्रकृति हो। जाहिर है इसमें जीतना आपको ही है।
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हम इस बात पर ध्यान केन्द्रित करना चाहते है कि कश्मीर एक गंभीर मुद्दा है, और इसका समाधान सिर्फ उन कानूनों को गेजेट में छापने से आ सकता है, जिससे भारत में तकनिकी निर्माण में वृद्धि हो। स्थानीय निर्माण सुधरने से हथियारों के निर्माण में सुधार आएगा, और सेना के मजबूत होने से हम कश्मीर समस्या का समाधान कर सकते है।
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तो मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे मोदी साहेब पर तंज कसने की जगह उन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करवाने का प्रयास करें जिससे भारत की सेना मजबूत हो।
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स्वदेशी हथियारों के निर्माण को बढावा देने के लिए आवश्यक क़ानून यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1981902295261330>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 15 2019 20:54:32 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यदि सेब के डब्बों एवं सेब पर जो स्टिकर लगाए जाते है उन पर पिन कोड एवं जिले का नाम लिखना अनिवार्य कर दिया जाए एवं बिना स्टिकर की खेप को जब्त करने या दण्डित करने का क़ानून बना दिया जाए तो उपभोक्ता यह जान सकेगा कि अमुक सेब कश्मीर से आया है या जम्मू / हिमाचल से। और फिर इस तरह की घटना होने पर उपभोक्ता यह फैसला कर सकता है , कि उसे क्या करना है !! व्यापारिक घाटा या मौद्रिक नुकसान सबसे मारक चोट करता है। इससे आतंकी अचानक उनके लिए घाटा देने वाले बन जाएंगे।
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समस्या यह है कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो सेब उत्पादकों का कार्टेल और होलसेलर इस तरह का क़ानून न छापने के लिए कांग्रेस के नेताओं को काफी घूस देते थे। अब यह पैसा कौन ले रहा है इस बारे में कुछ मालूम नहीं है। यदि अब भी ये हफ्ता कांग्रेस के नेता ही वसूल रहे है तो यह ठीक बात नहीं है। संघ=बीजेपी के राष्ट्रवादी नेताओ और कार्यकर्ताओ से हमारा आग्रह है कि यदि उन्हें कोई दिक्कत न हो तो कृपया इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित करवाएं।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 15 2019 21:03:33 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

@PmoIndia #RemoveArt370 #RemoveArt35A
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कृपया पीएम को ट्विट करें कि धारा -370 और धारा-35 को हटाने के लिए संसद में संवैधानिक संशोधन लाये.
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ट्वीट में यह लिखें :
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@PmoIndia #RemoveArt370 #RemoveArt35A. <https://newindia.in/causes/CancelArt370>;
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प्रधानमंत्री जी , कृपया धारा -370 और धारा-35 को हटाने के लिए संसद में संवैधानिक संशोधन लाये. और यदि सांसद इसे पास नहीं करते है तो कृपया इन धाराओं को रद्द करने के लिए देश व्यापी जनमत संग्रह करें.
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मेरा ट्विट - <https://twitter.com/PawanJury/status/1096513859383263232>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Feb 15 2019 21:17:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारत में स्थानीय तकनिकी उत्पादन की दशा बदतर होने के कारण, हमारे पास पर्याप्त बख्तरबंद वाहन नहीं हैं और इसलिए 50 सैनिको की शहादत हुयी।
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पर्याप्त बख्तरबंद वाहन नहीं होने की वजह से सेना द्वारा इतने संवेदनशील इलाके में भी साधारण बसों का उपयोग किया जा रहा था। साधारण बसों के बजाय, यदि बख्तरबंद वाहन का उपयोग किया जाता तो एक वाहन में सिर्फ 10 सैनिक ही होते और इस वजह से फिर कम सैनिको की जान जाती। बख्तरबंद वाहन मजबूत स्टील के बने होते है और भारी विस्फोट का सामना कर सकते है।
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स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1981902295261330>;
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Sat Feb 16 2019 11:15:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इंडेक्स पोस्ट , एल्बम – रेलवे सुधार
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(15) रेलवे में खाना परोसने का काम भी अब नेस्ले करेगी --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1506897652761799>;
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(14) मोदी साहेब भारतीय रेल को स्टील भी आयात करने को कह रहे है :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1439040516214180>;
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(13) प्रधानमंत्री बुलेट ट्रेन की ब्याज दरो पर झूठ बोला जा रहा है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1406969109421321>;
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(12) पहले सरकारी संस्थाओ को बदतर बनाओ और फिर इन्हें निजी हाथों में बेच दो
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1403399736444925>;
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(11) 800 करोड़ के नागपुर मेट्रो का ठेका चीनी कम्पनी को -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1344073469044219>;
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(10) मोदी साहेब ने भारत के रेलवे स्टेशन बेचने का फैसला कर लिया है -
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1213974622054105>;
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(09) मोदी साहेब ने रेल्वे स्टेशन पर WI-FI लगाने का ठेका बीएसएनएल की जगह गूगल को दे दिया है :
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1063305473787688>;
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(08) बुलेट ट्रेन शताब्दी के लिए बुरी खबर है !!
<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/957664651018438>;
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(07) मोदी साहेब ने रेल के 1000 इंजन बनाने का ठेका अमेरिकी कम्पनी जीई को दिया है :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/897694363682134>;
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(06) मुंबई-कोलकाता रूट पर हाई स्पीड ट्रेन चलाने का काम स्पेन को :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/788939317890973>;
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(05) जापानियों की बुलेट ट्रेन हमारी शताब्दी को तबाह कर के रख देगी :

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/763249740459931>;
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(04) रेल में FDI की अनुमति देना ललित मोदी विवाद से ज्यादा गंभीर विषय :
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/768614493256789>;
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(03) रेलवे में FDI :

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/725293370922235>;
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(02) रेल में विदेशी निवेश स्वदेशी इकाइयों को निगल जाएगा :

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/767459193372319>;
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(01) केजरीवाल बेतुकी दलीले देकर रेल में विदेशी निवेश का समर्थन कर रहे है :

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/591061164345457>;
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Sat Feb 16 2019 11:20:20 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

हेडलाइन कहती है - "अहमदाबाद में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान श्री मोदीजी और परेश रावल !!"
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यह दिनांक 28-दिसंबर-2012 है । यह लगभग 6.5 साल पुरानी तस्वीर है
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मैं अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं डाल रहा हूँ, लेकिन कृपया इस खबर को पढ़ें और इस तस्वीर को देखें।
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<http://stars.topnews.in/262267-paresh-rawal-narendra-modi-and-amit-shah-during-india-pakistan-2nd-twenty20-international?fbclid=IwAR0uwCAYoarpfGDsNQEBL-oKx44OIe4Rr3saGNk1DYWQ1k1l0jL7ypfVPzs>;
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और यह भारत बनाम पाकिस्तान मैच अहमदाबाद में खेला गया था !!!
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Sun Feb 17 2019 09:02:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

उन लोगों के लिए जो पूछ रहे है कि एक नागरिक वाहन CRPF के काफिले के साथ कैसे जा टकराया। 2014 में दो युवकों ने एक चेक पोस्ट तोडा और सेना द्वारा उन्हें शूट कर दिया गया। सेना को माफी मांगनी पड़ी और पीएम ने कश्मीर में एक चुनावी रैली में इसके लिए क्रेडिट लिया । इस घटना के बाद चेक पोस्ट पर सिविल वाहनों की जांच करना और उन्हें रोकना बंद कर दिया गया और हमने कीमत अदा की। फौजियों पर ऍफ़ आई आर दर्ज करने और पत्थरबाजो को रिहा करने के बाद सेना को कार्यवाही करने के लिए छूट देने में काफी देर हो चुकी है।

Fauji Baba ਫੌਜੀ ਬਾਬਾ:

For those who are askimg how a civilian vehicle mingled with crpf convey. In 2014 two youths who did not stop at a check post were fired upon and killed. The Army was made to apologise and PM took credit for this at a election rally in kashmir. There after stoping of civil vehicles were stoped and we paid the price. Giving free hand to them is too late now after demoralising them by lodging fir etc and letting off stone pelters.

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Sun Feb 17 2019 09:27:25 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राष्ट्र पर जब संकट आये तो हमें ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जिससे प्रधानमंत्री का हौंसला पस्त होता हो।
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और संकट के समय हमें किस तरह के बयान नहीं देने चाहिए इसे समझने के लिए कृपया मोदी साहेब एवं स्मृति ईरानी के वे पुराने बयान देखें जब राष्ट्र पर संकट आया था और मोदी साहेब एवं स्मृति इरानी विपक्ष में थे !!
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Mon Feb 18 2019 13:02:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

तिहाड़ में बंद जवान के बारे में कोई जानकारी किसी कार्यकर्ता को है तो कमेंट में बताए

Yash Bhandari:

On 3rd Nov 2014 two Kashmiri youths sped past two consecutive check post in Budgam district and finally on the third checkpost they were fired upon and killed. The Army was made to apologize and PM Modi Ji (who now talks about giving free hand) not only celebrated the Army apology but also took credit for this at an election rally in Kashmir. (please watch the second video)

As per Gen Bakshi after this incident the Mufti givernment loosened the security checks which the later BJP-PDP government didn't change(he forgot to mention this but its implied and important if he is right) that led to the terrorist vehicle with 300 kg explosives passing freely unchecked and carrying out the Pulwama attack.

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Mon Feb 18 2019 18:13:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Mon Feb 18 2019 21:10:23 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

इंडेक्स पोस्ट , एल्बम : सर्जिकल स्ट्राइक
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(14) फर्जिकल स्ट्राइक पर नया स्पष्टिकरण जारी - तेंदुएं का पेशाब !!!

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1797173673734194>;
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(13) सर्जिकल स्ट्राइक – 3

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1085470881571147>;
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(12) "सस्टेंड फायर असाल्ट" ( मतलब सर्जिकल स्ट्राइक - 2)

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1075808689204033>;
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(11) कोंग्रेस शासन में 2004-2014 के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1054112258040343>;
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(10) सेना ने विडियो जारी करने के लिए हरी झंडी दे दी है :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1051346288316940>;
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(09) सर्जिकल स्ट्राईक के मुद्दे पर कटघरे में पैड मीडिया है, न कि सेना और सरकार :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1050867698364799>;
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(08) राज्यवर्द्धन सिंह ने माना है कि, इस स्ट्राईक में हेलीकोप्टर का प्रयोग नही किया गया :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1049656891819213>;
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(07) उड़ी का बदला अभी बाक़ी है :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1049006615217574>;
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(06) सर्जिकल स्ट्राइक 28 सितम्बर -2016 को घटी। अख़बार में छपने के 6 दिन बाद :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1048652108586358>;
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(05) सर्जिकल स्ट्राईक -- समापन लेख :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1048611218590447>;
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(04) सर्जिकल स्ट्राइक - फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले पाइरेटेड DVD बाज़ार :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1047933315324904>;
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(03) सर्जिकल स्ट्राइक और जनपलोकपाल :

<https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/1047737475344488>;
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(02) हमें भारतीय सेना के बयान पर ही भरोसा करना चाहिए, न कि पेड मिडिया पर :

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1047675632017339>;
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(01) पैड मीडिया यह झूठ फैला रहा है कि, भारत की सेना ने ४० आतंकियों को मार गिराया ?

<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1047226692062233>;
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Feb 19 2019 06:20:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

1990 में कैसे इस्लामिक आतंकियों ने कश्मीरी हिंदुओ को कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर किया ।

The Indian Thing:

The exodus of Hindus from the Srinagar valley..

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Feb 20 2019 20:23:48 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Bhudev Jury Haryana:

मैं तब तक नहीं मानूँगा जब तक बिकाऊ मीडिया टी वी पर नहीं दिखाएगा! सोचने और समझने का मेरे पास समय नहीं है।

"मेरा प्यारा अमरीका "

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Pawan Jury BhilwaraRj

Thu Feb 21 2019 20:12:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

पुलवामा हमले के संदर्भ में कश्मीर की मूल समस्या एवं इसका समाधान :
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कश्मीर का सबसे बड़ा स्टेक होल्डर अमेरिका है, पाकिस्तान नहीं। यदि अमेरिका, चीन एवं सऊदी अरब पाकिस्तान के माध्यम से कश्मीर के आतंकियों को मदद देना बंद कर दें तो हम पाकिस्तान के दखल को रोक सकते है।
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[ खंड (अ ) में पुलवामा हमले पर संक्षिप्त टिप्पणी एवं तात्कालिक समाधान, खंड (ब) में कश्मीर की मूल समस्या के बारे में जानकारी है। खंड (स) समस्या के स्थायी समाधान के बारे में है, और खंड (द) बताता है कि एक आम नागरिक होने नाते आप कश्मीर समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठा सकते है। ]
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खंड (अ )
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(1) पुलवामा में CRPF के पास यदि आर्म्ड ट्रक होते तो शहीदों की संख्या घटकर 4-5 हो जाती. आर्म्ड ट्रक मजबूत इस्पात से बनाए जाते है और इन ट्रको में हथगोले, बम विस्फोट, रॉकेट लॉन्चर, बुलेट, लेंड माइंस आदि के हमले को सहने की क्षमता होती है। लेकिन हमारे जवान बसों में सफर कर रहे थे और उस संवेदनशील इलाके से जहाँ पर हमला होना कोई नयी बात नहीं है. दरअसल बसों के होने से हमले की संभावनाएं बढ़ गयी थीं, क्योंकि बसों को तो रॉकेट लॉन्चर से भी उड़ाया जा सकता है.
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यह हमला हमारे सैन्य बलों के कमजोर होने और उनके पास आधुनिक हथियारों के अभाव के कारण हुआ। इसलिए यह हमला तो होना ही था, हफ्ते भर पहले न हुआ होता तो हफ्ते भर बाद होता।
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यह एक तथ्य है कि मोदी साहेब ने पिछले 5 साल में ऐसे कोई क़ानून नहीं छापे जिससे सेना को हथियार मिले, और यह स्थिति सिर्फ मौजूदा पीएम की नहीं है, बल्कि सभी पूर्व पीएम भी इन कानूनों की अवहेलना कर रहे थे। इंदिरा गांधी एवँ शास्त्री के शासन काल को निकाल दें तो शेष (72-18 = 54) 54 वर्षो में भी किसी पीएम ने ऐसे कोई क़ानून नहीं बनाए जिससे सेना हथियारो में आत्मनिर्भर बने।
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और जब हमने अपने 50 जवान खोये तो पूरी दुनिया के सामने हमारी कमजोरी भी जाहिर हुयी क्योंकि हमारे पास अपने जवानो को देने के लिए या तो आर्म्ड ट्रक नहीं थे, या पैसा नहीं था, या हमारे शासको को यह फ़िक्र करने की फुर्सत नहीं थी। ये ट्रक हमें आयात करने की भी जरूरत नहीं है। टाटा, महिंद्रा एवं अशोक लीलेंड ये ट्रक बनाते हैं।
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(2) नवम्बर 2014 में एक कार ने दो चेक पोस्ट तोड़ी और सेना द्वारा उन पर फायरिंग करने के कारण 2 स्थानीय युवको की जाने गयी। और इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री जी ने सेना के उच्च अधिकारियों को बाध्य किया कि वे इस हादसे के लिए माफ़ी मांगे !! इससे पहले इस तरह की गड़बड़ी के लिए पीएम खेद व्यक्त कर देते थे, लेकिन सेना पर कभी इस तरह का दबाव नहीं डाला गया था। प्रधानमंत्री जी ने इसे चुनावी रैली में दोहराया कि पिछले 20 वर्ष में यह पहली बार हुआ है कि सेना ने माफ़ी मांगी है !!
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प्रधानमंत्री जी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। इसने इस बात की पुष्टि की कि भारतीय सेना पिछले 20 वर्षो से कश्मीर में लापरवाही से काम कर रही है। इसने सेना के मनोबल को तोड़ा और उन्होंने सिविलयन वाहनों की चेकिंग करने की प्रोसीजर का कड़ाई से पालन करना बंद कर दिया। इस तरह जब आतंकियों ने देखा कि सेना के काफिले में आसानी से मर्ज हुआ जा सकता है, तो उन्होंने हमले की योजना बनायी।

तो जब हमारे पास आर्म्ड ट्रक भी नहीं है, और हम सिविलयन ट्रेफिक भी नहीं रोक रहे है तो हमले योजना बनाने वालो को इसने प्रेरित किया। यदि हम काफिले के गुजरने के दौरान सिविलयन ट्रेफिक नहीं रोक रहे है, तो यह सामान्य समझ का विषय है कि हमारे जवानो के पास आर्म्ड ट्रक होने चाहिए थे, और यदि हमारे पास आर्म्ड ट्रक नहीं थे तो हमें सिविलयन ट्रेफिक रोकना चाहिए था। हमने दोनों नहीं किये !! सारी दुनिया जानती है कि कश्मीर में आतंकी हर समय भारतीय जवानो की घात में रहते है। और जैसे ही सुरक्षा में चूक होगी हमला होगा।
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(3) पुलवामा के हमले के विरुद्ध जवाबी कार्यवाही :
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3.1. सैन्य कार्यवाही : यदि अमेरिका भारत को 5-7 ड्रोन और सेटेलाईट हेल्प दे दे तो ड्रोन पाकिस्तान की सीमा में घुसकर उन्हें वाकयी नुकसान पहुँचाने वाली कार्यवाही कर सकते है। लेकिन मुझे बेहद कम उम्मीद है कि अमेरिका हमें ड्रोन देगा। यदि अमेरिका हमें ड्रोन नहीं देता तो भारत के सैनिको को किसी न किसी तरह से पाकिस्तान की सीमा में घुसना पड़ेगा, और उनकी सीमा में घुसना एक्ट ऑफ़ वॉर होगा।
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यदि अमेरिकी सहयोग नहीं करे तो भारत के लिए ऐसा करना काफी मुश्किल है। भारत की सेना की स्थिति अभी ऐसी नहीं है कि हम पाकिस्तान पर युद्ध की घोषणा कर सके। और यदि अमेरिका भारत को हथियारों की मदद देकर हमें पाकिस्तान पर खुला हमला करने के लिए उकसाता है तो अपना निवेश बचाने के लिए चीन को भी पाकिस्तान की तरफ से युद्ध में आना पड़ेगा। और इस तरह इस युद्ध का दायरा बेहद विस्तृत हो जाएगा।
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ड्रोन से हमले का फायदा यह है कि भारत बोल सकता है कि ड्रोन हमने नहीं भेजे. तुम्हारे पास सबूत है तो दिखाओ. पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया भी जान रही होगी कि हम झूठ बोल रहे हैं और हम भी जान रहे होंगे कि पाकिस्तान यह बात जान रहा है कि हम झूठ बोल रहे हैं लेकिन जब बोलने वाला और सुनने वाला दोनों जानते है कि झूठ बोला जा रहा है, तो यह गुनाह नहीं है। हमारे साथ भी पाकिस्तान ऐसा ही कर रहा है.
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3.2 असैन्य कार्यवाही :
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(1) मोदी साहेब ने पाकिस्तान के मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा ख़त्म कर दिया है, और पाकिस्तानी वस्तुओ पर 200% आयात शुल्क भी लगाया है। मैं इस कदम का समर्थन करता हूँ। और भी इस तरह के कदम उठाये जाने चाहिए। जून में भारत पाकिस्तान के बीच लन्दन में क्रिकेट मेच होने वाले है। हमें इन्हें तत्काल रद्द करने की जरूरत है।
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यदि भारत क्रिकेट से बायकाट करेगा तो पाकिस्तान के खिलाड़ी सर्वाइव नहीं कर पायेंगे। हमें टूरिजम भी बंद कर देना चाहिए। पाकिस्तान से काफी लोग इलाज कराने भारत आते है। कुल मिलाकर भारत को यथासंभव सभी सांस्कृतिक, व्यापारिक, पर्यटन एवं कलात्मक संबध तोड़ देने चाहिए। सिर्फ जो बेहद जरुरी हो, वही सम्बन्ध जारी रहे। हालांकि इस तरह के प्रतिबन्ध स्थायी समाधान नहीं है, किन्तु पाकिस्तान को विचलित जरुर करेंगे।
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(2) यदि सेब के डब्बों एवं सेब पर जो स्टिकर लगाए जाते है उन पर पिन कोड एवं जिले का नाम लिखना अनिवार्य कर दिया जाए एवं बिना स्टिकर की खेप को जब्त करने या दण्डित करने का क़ानून बना दिया जाए तो उपभोक्ता यह जान सकेगा कि अमुक सेब कश्मीर से आया है या जम्मू / हिमाचल से। और फिर इस तरह की घटना होने पर उपभोक्ता यह फैसला कर सकता है, कि उसे क्या करना है !!
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समस्या यह है कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो सेब उत्पादकों का कार्टेल और होलसेलर इस तरह का क़ानून न छापने के लिए कांग्रेस के नेताओं को काफी घूस देते थे। अब यह पैसा कौन ले रहा है इस बारे में कुछ मालूम नहीं है। यदि अब भी ये हफ्ता कांग्रेस के नेता ही वसूल रहे है तो यह ठीक बात नहीं है।
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खंड ( ब )
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(1) कश्मीर के स्टेक होल्डर्स
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(1.1) अमेरिका : भारत के ज्यादातर कार्यकर्ता इस तथ्य से सूचित नहीं है कि अमेरिका कश्मीर को स्वतंत्र देश बनाना चाहता है। यदि एक बार कश्मीर स्वतंत्र हो जाता है तो चीन, पाकिस्तान और भारत से बचने के लिए स्वतंत्र कश्मीर के पास अमेरिका का आश्रय लेने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं रहेगा। तब अमेरिका कश्मीर को "बचाने" के लिए वहां पर अपने सैन्य अड्डे स्थापित कर लेगा। कश्मीर का रणनीतिक महत्त्व होने के कारण अमेरिका कश्मीर का सबसे बड़ा स्टेक होल्डर है। कश्मीर को लगातार अस्थिर बनाए रखने के लिए आतंकीयों एवं पाकिस्तान को हथियारों की मदद देता है। अमेरिका सबसे बड़ा स्टेक होल्डर इसीलिए है क्योंकि अमेरिका की सेना दुनिया में सबसे मजबूत है।
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(1.2) चीन : चीन की सेना भारत एवं पाकिस्तान से कई गुणा मजबूत है, अत: दूसरा सबसे बड़ा स्टेक होल्डर चीन है। 1963 में पाक अधिकृत कश्मीर के भारत से लगते हुए हिस्से का एक बड़ा भू भाग पाकिस्तान ने चीन को सौंप दिया था, और भारत के साथ लगे हुए कश्मीर के हिस्से अक्साई चिन पर चीन ने 1962 तक कब्ज़ा कर लिया !! इस तरह चीन लगातार कश्मीर में अपनी सीमाओ का विस्तार कर रहा है और अब भारत अधिकृत कश्मीर भी उसकी नजर में है।
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इसके अलावा कश्मीर के लिहाज से अब भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा चीन द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर के बीचों बीच बनाया जा रहा इकोनॉमिक कॉरिडोर है। चीन के इस कोरिडोर में कई लाइनों के हाई वे, हाई स्पीड ट्रेन ट्रेक, गैस एवं तेल सप्लाई की पाइप लाइन, फाइबर ऑप्टिक, पॉवर प्लांट, सोलर प्लांट, सेज, निर्माण इकाइयां एवं मिलिट्री बेस होंगे !!
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दुसरे शब्दों में पाक अधिकृत कश्मीर एवं भारत-पाकिस्तान की पूरी बोर्डर का यह पूरा हिस्सा चीन स्थायी रूप से टेक ओवर कर चुका है। चीन ने इस हिस्से का विस्तार गिलगित बाल्टिस्तान तक कर दिया है, जो कि भारत का इलाका है। भारत 2012 से ही चीन से लेकर अमेरिका तक बार बार यह आवाज उठा रहा है कि चीन ने भारत के इलाके पर अतिक्रमण कर लिया है, पर चूंकि चीन की सेना भारत की सेना से कई गुना ज्यादा ताकतवर है अत: चीन ने भारत के ऐतराज को खारिज कर दिया है। कुल मिलाकर कश्मीर पर अब चीन का मजबूत सैन्य दखल है, और यदि भारत एवं चीन का सैन्य अनुपात इसी तरह से गिरता रहा तो वक्त के साथ यह दखल बढ़ता जाएगा।
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(1.3) सऊदी अरब : कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए आतंकियों एवं कश्मीर के अलगाव वादी संगठनों को फंडिंग करता है। इसी पैसे से उन्हें हथियार मुहैया कराए जाते है।
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(2) कश्मीर की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पा रहा है ?
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(2.1) पहली समस्या यह है कि भारत के कार्यकर्ता जब भी कश्मीर पर विचार करते है तो अमेरिका एवं चीन की सैन्य शक्ति की अवहेलना कर देते है। उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि कश्मीर भारत की अंतर्देशीय समस्या नहीं है, बल्कि यह कई देशो के बीच फंसा हुआ युद्ध का एक मैदान है। और अंतराष्ट्रीय राजनीति में कोई क़ानून या नियम नहीं होते। वहां सिर्फ एक नियम चलता है - बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाएगी। कोई दया नहीं, कोई अपवाद नही !!
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(2.2) भारत के कार्यकर्ता इस तथ्य से भी अनभिज्ञ हैं कि अंतराष्ट्रीय राजनीति सेना की ताकत पर चलती है, नेता के हाव भाव और साहस पर नहीं चलती। भारत की सेना कमजोर है और इसीलिए हम लगातार अपनी जमीन गँवा रहे है। आजादी के बाद से चीन हमारी काफी जमीन पर कब्ज़ा कर चुका है, और कारगिल युद्ध में भी हमने .5353 के रूप में अपनी सबसे ऊँची चोटी गंवाई। भारत के कई कार्यकर्ता यह मानते है कि ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि भारत के प्रधानमन्त्री कमजोर थे, और मजबूत प्रधानमंत्री के होने से इस समस्या का समाधान हो जाता है। खेद का विषय है कि ऐसा नहीं होता। देश से बाहर देश की हैसियत को उसकी सेना से ही आँका जाता है। इसे स्पष्ट करने के लिए मैं हाल ही का एक वास्तविक उदाहरण देता हूँ।
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(A) 2014 में अंतराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने भारत के 1 लाख वर्ग किलामीटर समुद्री क्षेत्र पर बांग्लादेश का दावा मंजूर कर लिया। इस क्षेत्र में ONGC ने तेल के भंडार चिन्हित किये हैं, लेकिन अब भारत इससे वंचित हो गया है। यह क्षेत्र बांग्लादेश के पास जाने के बाद अब चीन यहाँ अपना बेस बनाएगा और तेल निकालेगा !! भारत के मछुआरे भी अब मछली पकड़ने के लिए इस क्षेत्र में नहीं जा सकेंगे।

<https://goo.gl/vXmssg>;
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टीवी अख़बार एवं ज्ञान देने वाली पुस्तकें पढ़ने वाले बुद्धिजीवी आपको यह समझाने की कोशिश करेंगे कि एक संयुक्त राष्ट्र संघ होता है , एक अन्तराष्ट्रीय न्यायालय होता है, एक सुरक्षा परिषद् होती है, और एक WTO होता है। और इन अंतराष्ट्रीय संगठनो के फैसलों का हमें सम्मान करना चाहिए !! तो मोदी साहेब ने इस फैसले का स्वागत करते हुए सामरिक और आर्थिक महत्त्व के इस क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ दिया !!

(B) अब दूसरा उदाहरण देखिये : चीन ने फिलिपिन्स की समुद्री सीमा पर कब्ज़ा करके उसके आईलेंड पर अपना मिलिट्री बेस बना लिया था। फिलिपिन्स एवं चीन का यह मामला अन्तराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के पास गया और इसी ट्रिब्यूनल ने 2016 में फैसला दिया कि, चीन अपना मिलिट्री बेस हटाए और फिलिपिन्स के क्षेत्र में दखल न करे। और शी जिनपिंग ने ट्रिब्यूनल से कहा -- भाड़ में जाओ !! चीन ने कहा हमारे हिसाब से ट्रिब्यूनल का फैसला गलत है, इसीलिए जगह खाली नहीं की जायेगी !!!

<https://goo.gl/X2xqXW>;
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टीवी देखने और अखबार पढने वाला कोई भी व्यक्ति बता सकता है कि मोदी साहेब चीन के प्रधानमंत्री की तुलना में बेहद मजबूत एवं ताकतवर आदमी है। लेकिन सेना का महत्त्व समझने वाला व्यक्ति यह जानता है कि अन्तराष्ट्रीय मामलों में असली ताकत का पैमाना सेना होती है , लफ्फाजी नहीं होती। तो हमने इतना कीमती क्षेत्र क्यों गंवाया ? इसकी एक मात्र और सीधी वजह यह है कि भारत की सेना चीन के तुलना में कई कई गुना कमजोर है। बांग्लादेश पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में जा चुका है, और इसमें चीन के हित जुड़ जाने के कारण हमने यह क्षेत्र गवां दिया।

कुल मिलाकर यदि हमने अपनी सेना को अमेरिका के बराबर ताकतवर नहीं बनाया तो कश्मीर का भारत के हाथ से निकलना लगभग नहीं बल्कि 100% तय है।
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(2.3) भारत के ज्यादातर कार्यकर्ता इस तथ्य से भी अनभिज्ञ हैं कि भारत के सभी बड़े राजनैतिक दल एवं शीर्ष नेता कश्मीर की समस्या को बढाने के लिए काम कर रहे है , क्योंकि ये सभी नेता चुनाव जीतने के लिए अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर बुरी तरह से निर्भर है। और अमेरिका कश्मीर को स्वतंत्र कराना चाहता है, तो इसका एक डरावना आशय यह होता है कि भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों के ब्रांडेड नेता एवं टीवी-अख़बार में नजर आने वाले सभी चेहरे कश्मीर को स्वतंत्र कराने का प्रतिरोध नहीं करेंगे, बल्कि वे ऐसे प्रयास करेंगे जिससे कश्मीर में हालात बदतर हो।
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यदि वे अमेरिकी हितो के खिलाफ जायेंगे तो उनका राजनैतिक कद तेजी से घटने लगेगा। तो हर बार वे अमेरिकी हितो को ही चुनते है। दरअसल भारत के सभी नेता कैसे अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के पूर्ण नियंत्रण में है, और अब हालात यह है कि अमेरिकी हितो का विरोध करने वाला कोई नेता भारतीय राजनीति में टिक नहीं पायेगा। जिस नेता का अमेरिकी हितो के प्रति जितना झुकाव होगा वह टीवी एवं अखबार के माध्यम से उतना ज्यादा ताकतवर प्रोजेक्ट किया जाएगा।

बहरहाल मैं यहाँ एक उदाहरण रख रहा हूँ जिससे आप अंदाजा लगा सकते है कि दशा किस हद तक बदतर हो रही है।
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कृपया निचे दिए गए विवरण देखिये :
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कश्मीर घाटी में निवास करने वाली जनसँख्या = 69 लाख ( इसमें 96% से ज्यादा मुस्लिम है )

जम्मू एवं कश्मीर राज्य में मुस्लिम जनसँख्या = 86 लाख

जम्मू में रहने वाले सिक्ख + हिन्दुओ की जनसँख्या = 36 लाख

जम्मू में रहने वाले मुस्लिमो की जनसँख्या = 17 लाख
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मतलब , यदि 20 लाख मुस्लिम कश्मीर से आकर जम्मू में बस जाते है तो कश्मीर में मुस्लिम मेजोरिटी में रहेंगे लेकिन जम्मू में भी मुस्लिमो का बहुमत हो जाएगा !!!
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तो इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने 2016-2017 के बीच 3 गेजेट नोटिफिकेशन प्रकाशित किये, जो यह कहते है कि -
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(1) यदि कोई मुस्लिम कश्मीर में आतंकियों दी जा रही धमकियों या दमन से पीड़ित होकर जम्मू में आकर निवास करता है तो उसे सरकार की तरफ से पुनर्वास के लिए जमीन दी जायेगी ( इससे पहले यह सुविधा सिर्फ कश्मीर के हिन्दूओ को ही उपलब्ध थी। क्योंकि उन्हें उत्पीडन का सामना करना पड़ रहा था और इसीलिए वे कश्मीर से पलायन करके जम्मू में शरण ले रहे थे। )
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(2) यदि कोई नोमद या जनजातिय व्यक्ति / समुदाय जम्मू में सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर लेता है तो तब तक उससे जमीन खाली नहीं कराई जायेगी जब तक सरकार उसे अन्य कोई जमीन उपलब्ध न करवा दे !!
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(3) और इसके बाद एक के बाद एक कई गेजेट नोटिफिकेशन जारी करके कई समुदायों को नोमद एवं जनजातियों का दर्जा दिया गया ( इनमे से ज्यादातर के पास फर्जी सर्टिफिकेट्स है ) !!
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राज्य सरकार जो भी गेजेट नोटिफिकेशन जारी करती है वह सिर्फ तब ही प्रभाव में आ सकता है जब गवर्नर इस पर हस्ताक्षर करें। और गवर्नर प्रधानमंत्री की अनुमति के बाद ही हस्ताक्षर करता है !! उल्लेखनीय है कि, मई 2014 से पहले पीएम मनमोहन सिंह थे। किन्तु या आदेश मोदी साहेब ने निकाला है !!

<https://goo.gl/8PRMvj>;
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<https://goo.gl/ZtgdUX>;
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इन गेजेट नोटिफिकेशन के आने के बाद ज्यादातर सम्भावना है कि 2024-25 तक जम्मू की धार्मिक जनसँख्या का अनुपात भी बदल जाएगा, और हम उस पर अपना नियन्त्रण खो देंगे। और तब विभिन्न समूहों की तरफ से इस तरह के प्रयास शुरू होंगे कि कश्मीर में जनमत संग्रह करवाया जाये। यदि जनमत संग्रह किया जाता है तो हम लीगली जम्मू कश्मीर खो देंगे और यदि जनमत संग्रह नहीं किया जाता है तो अमेरिका वहां बड़े पैमाने पर हथियार पहुंचाकर जनमत संग्रह की मांग पर हिंसा करवा सकता है। और यदि जनमत संग्रह होता है तो हम कश्मीर ऑफिशियली गँवा देंगे !!

तो अब आप समझ सकते है कि समस्या कहाँ है !! दरअसल हमारे नेता भाषण कुछ भी दे लेकिन वे गेजेट का इस्तेमाल करके कश्मीर को स्वतन्त्र बनाने की दिशा में धकेल रहे है। यह नोटिफिकेशन प्रधानमंत्री श्री मोदी साहेब की अनुमति से जारी हुआ है, और यदि हम प्रधानमंत्री बदल दें तब भी स्थिति यह रहेगी। कैसे ? क्या भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी ने इन गेजेट नोटिफिकेशन का विरोध किया है ? नहीं !!
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खंड (स)
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(1) स्थायी समाधान :

यदि कश्मीर चाहिए तो हमारी सेना को अमेरिका के बराबर ताकतवर होना चाहिए। इससे कम में काम चलने वाला नहीं है। कौनसे कानूनों को गेजेट में छापने से हम सेना को अमेरिका के बराबर ताकतवर बना सकते है, इनका विवरण मैंने इन दो पोस्ट में रखा है। मैं आपसे आग्रह करूँगा कि कृपया इन्हें देखें।
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राईट टू रिकॉल पीएम , एम आर सी एम , वेल्थ टेक्स , Woic और मेक इन इंडिया मेड बाय इंडियन्स आदि कानूनों के गेजेट में आने से हमारी सेना आत्मनिर्भर होना शुरू हो जायेगी और तब हम निम्नलिखित कदम उठाना शुरू कर सकते है। कृपया ध्यान दें, निचे दिए गए उपाय राईट टू रिकॉल पीएम एवं जूरी सिस्टम कानूनों के आये बिना निरापद रूप से काम नहीं कर पायेंगे :

राईट टू रिकॉल पीएम , एम आर सी एम , वेल्थ टेक्स , Woic और मेक इन इंडिया मेड बाय इंडियन्स आदि कानूनों के गेजेट में आने से हमारी सेना आत्मनिर्भर होना शुरू हो जायेगी और तब हम निम्नलिखित कदम उठाना शुरू कर सकते है। कृपया ध्यान दें, निचे दिए गए उपाय राईट टू रिकॉल पीएम एवं जूरी सिस्टम कानूनों के आये बिना निरापद रूप से काम नहीं कर पायेंगे :

(1) हम दक्षिण अमेरिका के देशो जैसे क्यूबा और मेक्सिको को परमाण्विक, रासायनिक और जैविक हथियार देने का ऑफर दे सकते है। जैसे ही अमेरिका को इसके बारे में मालूम चलेगा उसके अगले मिनिट ही अमेरिका कश्मीर से अपने हाथ खींच लेगा।
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(2) सऊदी अरेबिया को दबाने के लिए हम यमन एवं ओमान को मदद देना शुरू कर सकते है। जब यमन एवं ओमान की शक्ति बढ़ेगी तो उनका सऊदी अरेबिया से घर्षण बढ़ जाएगा, और सऊदी अरब कश्मीर के आतंकियों को फंडिंग करना बंद कर देगा।
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(3) यदि भारत में राईट टू रिकॉल पीएम का क़ानून लागू हो जाता है तो हम पीएम को धारा 370 ख़त्म करने के लिए बाध्य कर सकते है। इसके निम्न तरीके है :

3.1. पीएम लोकसभा में धारा 370 एवं धारा 35A का प्रस्ताव पास कर सकते है। यदि राज्य सभा इसमें अडंगा लगाती है, तो यह बात निकलकर सामने आ जायेगी कि कौनसे सांसद धारा 370 हटाने का विरोध कर रहे है। इससे अगले चुनावों में नागरिक उन्हें हरा देंगे और ऐसे सांसदों को वोट करेंगे जो धारा 370 को ख़त्म करने का समर्थन करें।

किन्तु इसके लिए यह जरुरी है कि पीएम लोकसभा में धारा 370 का प्रस्ताव रखे एवं जब तक यह बिल नहीं गिरता तब तक भारत की जनता के सामने यह स्थापित नहीं हो पायेगा कि कौनसे सांसद धारा 370 हटाने का विरोध कर रहे है।
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3.2. यदि संसद से पास होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का जज इसमें टांग लगाता है तो पीएम महाभियोग लाकर उसे नौकरी से निकाल सकते है। या राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज का क़ानून गेजेट में छाप सकते है। इस क़ानून के आने से भारत के नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज को नौकरी से निकाल कर ऐसे जज को नौकरी दे देंगे जो टांग न लगाये।
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3.3. पाठक इस बात पर ध्यान दें कि जब चीन ने तिब्बत को टेक ओवर किया तो तिब्बत ने अपने सदन में चीन में विलय का प्रस्ताव पास किया था। यदि राईट टू रिकॉल पीएम का क़ानून आ जाता है तो हम पीएम को बाध्य कर सकते है कि, वह जम्मू कश्मीर की विधायको को कन्विंस करे कि वे कश्मीर की विधानसभा में कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय का प्रस्ताव पारित करे।

अभी विधायक ये प्रस्ताव इसीलिए पास नहीं कर रहे है क्योंकि यह प्रस्ताव पास न करने के लिए उन्हें सऊदी अरब से पैसा आता है। भारत की सेना यदि मजबूत हो जाती है तो पीएम इन विधायको को इसके लिए कन्विंस करना शुरू कर देंगे। पीएम इनको कैसे कन्विंस करेंगे यह सोचना पीएम का काम है। और पीएम इस दिशा में सोचना सिर्फ तब शुरू करेगा जब पीएम पर राईट टू रिकॉल आएगा।
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3.4. निचे एक तीन लाइन का ड्राफ्ट दिया गया है। इस ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करके पीएम धारा 370 ख़त्म करने के लिए देश व्यापी जनमत संग्रह करवा सकते है। यह जनमत संग्रह पीएम कल की तारीख में करवा सकते है। यदि देश के कुल मतदाताओं के 51% मतदाता इस पर प्रस्ताव पर हाँ दर्ज कर देते है तो धारा 370 और धारा 35A ख़त्म करने का प्रस्ताव पास हो जाएगा। जनमत संग्रह में यदि कोई प्रस्ताव पास हो जाता है तो यह अपने आप में संविधान संशोधन की अनुमति है। अब न तो संसद इसे रोक सकती है और न ही सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज इसमें टांग लगा सकते है।
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निचे दिए गए ड्राफ्ट का प्रयोग करके हम कश्मीर राज्य का विलय हिमाचल एवं उत्तराखंड में करने का प्रस्ताव भी पास कर सकते है। इस तरह तीनो राज्यों का विलय करके एक राज्य बनाया जा सकता है।

Cv = Citizens Voice ; जनमत संग्रह करवाने के लिए प्रक्रिया
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========ड्राफ्ट का प्रारंभ ======
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Cv1. [ जिला कलेक्टर के लिए निर्देश ]

यदि कोई मतदाता जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई शिकायत या प्रस्ताव शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करता है, तो कलेक्टर उस शपथपत्र को 20 रूपये प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर दर्ज करेगा और सीरियल नंबर के साथ एक रसीद जारी करेगा। कलेक्टर इस शपथपत्र को स्कैन करके शपथपत्र प्रस्तुतकर्ता की मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर रखेगा, ताकि कोई भी नागरिक इस अर्जी को बिना लॉग इन के देख सके।
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Cv2. [ पटवारी के लिए निर्देश ]
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(2.1) कोई मतदाता यदि धारा-1 के तहत प्रस्तुत किये गए किसी शपथपत्र पर आपनी 'हाँ' या 'ना' दर्ज कराने के लिए मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में आता है, तो पटवारी 3 रुपये का शुल्क लेकर कंप्यूटर मंर मतदाता की हाँ / ना को उसकी मतदाता पहचान संख्या के साथ दर्ज करेगा, तथा मतदाता को इसकी एक रसीद देगा। पटवारी नागरिक की हाँ / ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाइट पर भी रखेगा। बीपीएल कार्ड धारक के लिए देय शुल्क 1 रू होगा।

(2.2) प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकेंगे जिससे मतदाता अपनी हाँ / ना 50 पैसे का शुल्क देकर एटीएम या एस.एम.एस. द्वारा दर्ज करवा सके।
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Cv3. [ सभी नागरिको, अधिकारियों, मंत्रियों, न्यायधीशों के लिए निर्देश ]
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मतदाताओ द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना किसी भी अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक आदि पर बाध्यकारी नहीं है। यदि भारत के कुल मतदाताओं के 51% मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री उस शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है, या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। इस सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री का निर्णय ही अंतिम होगा।
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========ड्राफ्ट की समाप्ति======
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खंड (द)
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यदि कोई नागरिक पीएम से कोई मांग कर रहा है तो उसे यह मांग कम से कम प्रधानमंत्री के सम्मुख अवश्य रखनी चाहिए। यदि आप अपनी मांग सिर्फ नागरिको के सामने रख रहे है किन्तु पीएम के सामने नहीं रख रहे है तो इसका कोई फायदा नहीं है। साथ ही इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि आपकी मांग स्पष्ट हो। पीएम आपकी मांग पर कार्यवाही करें या न करें यह बाद की बात है, किन्तु आपको अपनी मांग उन्हें भेजनी अवश्य चाहिए।

पीएम के सामने अपनी मांग रखने के कई तरीके हो सकते है, लेकिन विभिन्न विशिष्ट गुणों के कारण निचे दिए गए 3 तरीके सबसे बेहतर है :

(1) प्रधानमंत्री को ट्विट करना
(2) प्रधानमन्त्री कार्यालय पर पोस्टकार्ड भेजना
(3) पीएम की वेबसाईट newindia पर रखे गए प्रस्ताव का समर्थन करना।

आप इनमे से किसी भी तरीके का या तीनो तरीको का इस्तेमाल कर सकते है। कृपया मेरी फेसबुक प्रोफाइल के एल्बम सेक्शन में जाए। वहां आपको विभिन्न क़ानून ड्राफ्ट्स के विवरण मिलेंगे। आप जिस भी क़ानून का समर्थन करते हो उसकी मांग पीएम से कर सकते है। प्रत्येक ड्राफ्ट में मांग करने के तरीके का विवरण भी दिया गया है।
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कश्मीर मुद्दे के हल के लिए आप प्रधानमंत्री जी से निचे दी गयी मांग कर सकते है।

कृपया पीएम को ट्विट करें एवं उन्हें पोस्टकार्ड लिखें कि धारा-370 और धारा-35A को हटाने के लिए संसद में संवैधानिक संशोधन लाये।
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ट्वीट एवं पोस्टकार्ड में यह लिखें :
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@PmoIndia #RemoveArt370 #RemoveArt35A. <https://newindia.in/causes/CancelArt370>;

प्रधानमंत्री जी , कृपया धारा -370 और धारा-35 को हटाने के लिए संसद में संवैधानिक संशोधन लाये. और यदि सांसद इसे पास नहीं करते है तो कृपया इन धाराओं को रद्द करने के लिए देश व्यापी जनमत संग्रह करें
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भारत की सेना को मजबूत बनाने के लिए अति आवश्यक राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री का ड्राफ्ट यहाँ देखें -
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859858050859057>;
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और एक बात :
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राष्ट्र पर जब संकट आये तो हमें ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जिससे प्रधानमंत्री का हौंसला पस्त होता हो। अत: प्रधानमंत्री जी को कायर या डरपोक कहना या उन पर व्यंग्य करना पूरे देश में नकारात्मक माहौल बनाता है। आलोचना और राजनीति हर स्थिति में होनी चाहिये किन्तु इसे शासन के स्तर तक सीमित रखना चाहिए, निजी हमला करना या व्यंग्य का प्रयोग करना सिर्फ तनाव बढाता है।

संकट के समय हमें किस तरह के बयान नहीं देने चाहिए यह जानने के लिए मोदी साहेब और बीजेपी=संघ के नेताओं के तब के बयान देखें जब वे सत्ता में नही थे। जब मनमोहन जी पीएम थे तो इस तरह की वारदातों पर संघ=बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा उन्हें कायर एवं डरपोक कहा गया, और इसीलिए अब मोदी विपक्ष मोदी साहेब की खिल्ली उड़ा रहा है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Feb 23 2019 06:03:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Ashok Jain VotevapsiCm:

सरकार स्वार्थ के लिए ~ निजी DTH कम्पनीयों को लाभ पहुँचा रही हैं |
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लोकसभा चुनाव में 10-20 हजार करोड़ अप्रत्यक्ष खर्च करवाना चाहती है सरकार जो चुनावी खर्च में नहीं दिखाया जायेगा | निजी कम्पनीयाँ जैसे टाटा स्काई, डीश टीवी, एयरटेल, विडियोकॉन, बिग टीवी... जैसी DTH. कंपनियों को चुनाव खर्च का आदेश दिया | जिसकी भरपाई करने के लिये नया कानून बना दिया गया जिसके तहत
99 रू. के फ्री टू एयर चैनल के 130 + GST18% = 153 रू. कर दिये |
तो 54 रू. एक उपभोक्ता से प्रतिमाह अतिरिक्त वसूला जायेगा | माना 50 करोड़ उपभोक्ता हैं तो 50करोड़ *54 रू. = 2700 करोड़ प्रतिमाह जबरन वसूली चालू |
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Free To Air से PAY DTH पर लाने के लिये हिन्दू ह्रदयावरणी बीजेपी सरकार ने धार्मिक चैनल आस्था, संस्कार, दिव्य, सत्संग, कात्यायनी, जैसे चैनल एक डेढ़ साल से बंद करवा दिये है |
अब निजी चैनल को Free To Air से बंद कर गरीब, मध्यम उपभोक्ताओं को PAY DTH में कनवर्ट करने पर तुले हैं |
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जी न्यूज, आजतक, एबीपी न्यूज, इंडिया न्यूज के नियमित ग्राहक लोन लेकर भी PAY DTH में कनवर्ट होंगे ही होगें |
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कुछ भी करके लोकसभा चुनाव जीतना है भाई !!!
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समाधान :- राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष कानून व राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री कानून |
कानून का ड्राफ्ट पढ़ने के लिये मेरी कवर पिक पर कल्कि करें |

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Feb 24 2019 21:08:10 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट का इलाज किये बिना भारत को बचाने का कोई रास्ता नहीं है !!

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Feb 27 2019 11:49:41 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

अमेरिका साथ है तो सब कुछ मुमकिन है !!
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पाकिस्तान के बीच यह तनाव अब CPEC* तक फैल सकता है !! और यदि ऐसा हुआ तो इस संघर्ष का पैमाना दुसरे विश्व के बराबर हो जाएगा !! ऐसा युद्ध जिसमे भारत, पाकिस्तान एवं चीन तीनो तबाह हो जायेंगे !!!
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CPEC : पाकिस्तान एवं भारत की सीमा से कुछ हटकर गुजरता हुआ चीन द्वारा जो कोरिडोर बनाया जा रहा है, उसमे गैस-तेल की पाइप लाइने, हाई वे, हाई स्पीड ट्रेन ट्रेक, निर्माण इकाइयां एन मिलिट्री बेस है। चीन इस मार्ग द्वारा एशिया के एक बड़े हिस्से पर आर्थिक एवं सामरिक नियंत्रण स्थापित कर लेगा। अमेरिका को इसे तबाह करना है। और इसे सिर्फ सैन्य तोड़फोड़ से ही रोका जा सकता है।
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पाकिस्तान पर भारत ने जिस तरह की एयर स्ट्राइक की है उसमे दो मुख्य बिंदु है, और इसमें अमेरिका की भूमिका निर्णायक है :
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(1) सीमा पार ओपरेशन का सफल संचालन
(2) भविष्य में जवाबी हमले के लिए खुद का बचाव करना।
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(1) सीमा पार ओपरेशन का सफल संचालन :
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1.1. अमेरिका पाकिस्तान के जनरलों को यह आदेश दे सकता है कि अमुक समय पर भारत के विमान आकर बमबारी करके लौट जाने वाले है, अत: पाकिस्तान की सेना इस हमले का कोई प्रतिरोध न करे। अमेरिका से आदेश मिलने के बाद पाकिस्तान की सेना चुपचाप इन आदेशो का पालन करेगी और भारत के प्लेन बमबारी करके सुरक्षित लौट आयेंगे।
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उदाहरण के लिए : जब अमेरिका की फौजों ने ओसामा को उठाने के लिए एबटाबाद पर हमला किया था तो पाकिस्तान के जनरलों को पहले ही बता दिया था कि हमारी फ़ौज अमुक समय पर आकर ओसामा को लेकर जाने वाली है। और यदि उन्होंने इस ओपरेशन में हस्तक्षेप किया तो ठीक नहीं होगा। तो जब अमेरिकी कमांडो ओसामा को लेने आये तो कुछ ही दूरी पर पाकिस्तानी सेना का बेस होने के बावजूद उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया !!
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1.2. अमेरिका यदि पाकिस्तान को इस बारे में कोई पूर्व सूचना नहीं देता है, लेकिन भारत अमेरिका से हमले में मदद के बदले कोई समझौता कर लेता है तो भी भारत इस तरह की स्ट्राइक कर सकता है।
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तब अमेरिका भारत को आतंकी ठिकानों के बारे गुप्त सूचनाएं और सेटेलाईट हेल्प देगा। अमेरिका पाकिस्तान के रडार के किल स्विच भी जुटाएगा और हमले के दौरान पाकिस्तान के रडार को जाम कर देगा। अमेरिका भारत को लेसर गाइडेड बम भी देगा। पेड मीडिया का वर्जन है कि लेसर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि मैं पेड मीडिया के वर्जन पर 0% भरोसा करता हूँ लेकिन भारत सरकार का अधिकृत बयान है कि आतंकी कैम्प पर बमबारी की गयी है, अत: हो सकता है कि लेजर गाईडेड बम इस्तेमाल हुए हो। क्योंकी साधारण बमो से इतने छोटे टारगेट को सटीकता से निशाना नहीं बनाया जा सकता।
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1.3. क्या भारत अमेरिका की मदद के बिना इस तरह का ओपरेशन सफलतापूर्वक संचालित कर सकता है ?
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मुमकिन नहीं है। भारत के सैन्य अधिकारियो की काबलियत पर कोई संदेह नहीं, लेकिन इस तरह के ओपरेशन के लिए जिस तरह के संसाधनों की जरूरत है, हम उनमे आत्मनिर्भर नहीं है।
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उदाहरण के लिए पेड मिडिया का वर्जन है कि SPICE लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया गया था। ये बम इस्राएल की रफाल कम्पनी बनाती है। इस तरह के बम सीमित रूप से दिए जाते है, और बहुधा इस्तेमाल करने से पहले बेचने वाले से अनुमति लेनी होती है। भारत भी अब लेसर गाइडेड बम बनाने लगा है लेकिन वे इतने उन्नत और सटीक नहीं है। हमारे बमों में बंकर को भेदने की क्षमता नहीं है।
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भारत की रॉ वगेरह इंटेलिजेंस एजेंसियों को जो ख़ुफ़िया इनपुट मिलते है, उनमे से ज्यादातर सी आई ए एवं मोसाद देती है। आतंकी ठिकानों की सटीक लोकेशन, आतंकियों की संख्या, स्थिति और पाकिस्तान की सुरक्षा के बारे सटीक सूचनाएं जुटाने के लिए हमें इन एजेंसियों की मदद चाहिए। के जी बी भी हमें ये इनपुट दे सकता है, लेकिन कोमकासा एग्रीमेंट होने के बाद रूस के साथ हमारे सामरिक संबंधो में बदलाव आ चुका है।
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पाकिस्तान का रडार जाम करवाना भी भारत की क्षमता से बाहर की बात है। यदि रडार काम करता रहता है तो पाकिस्तान जवाबी कार्यवाही कर सकता है। और खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान की सेना को भारत द्वारा सैन्य कार्यवाही होने का अंदेशा था और वे सतर्क थे।
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2) सीमा पार करने के बाद भविष्य में जवाबी हमले के लिए खुद का बचाव करना।
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2.1. अमेरिका यह सुनिश्चित कर सकता है कि पाकिस्तान चीन से सामरिक सहयोग लेकर अगले 2-3 महीने तक भारत पर कोई जवाबी कार्यवाही नहीं करेगा।
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2.2. अमेरिका पाकिस्तान को यह भी आदेश दे सकता है कि, वे अगले 2-3 महीने तक कश्मीर में कोई हमला न करें। ऐसी स्थिति में कश्मीर में अगले कुछ महीनो में कोई हमला नहीं होगा।
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2.3. क्या भारत अमेरिकी मदद के बिना इस तरह का हमला करने के बाद अपना बचाव कर सकता है ?
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बोर्डर क्रोस करना एक्ट ऑफ़ वॉर है और यह युद्ध की घोषणा है। ऐसा करने के लिए यह जरुरी है कि हमारी सेना बेहद ताकतवर हो और यह अनिवार्य रूप से आत्मनिर्भर भी हो। हमारी सेना आत्मनिर्भर नहीं है और हथियारों के लिए हम अमेरिका पर बुरी तरह से निर्भर करते है। भारत पर यदि जवाबी कार्यवाही के लिए चीन पाकिस्तान को हथियार, सामरिक सहयोग आदि देना शुरू करता है, और अमेरिका हमे हथियार देने से मना कर देता है तो हमारे पास चीन के बेक अप द्वारा किये गए हमले को सहने की क्षमता नहीं है। इसीलिए भारत ऐसी स्ट्राइक सिर्फ तब करेगा जब अमेरिका हमें सहयोग करने का वादा करे।
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इसके अलावा कश्मीर और शेष भारत में पाकिस्तान पुलवामा एवं कसाब जैसे हमलो की पूरी एक श्रुंखला शुरू कर सकता है, और यदि अमेरिका सहयोग न करे तो भारत के लिए इस स्थिति से निपटना भी बहुत मुश्किल है।
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लेकिन यदि अमेरिका भारत का सहयोग करता रहता है तो भारत हर हफ्ते इससे भी बड़ी स्ट्राइक कर सकता है !! बस हमें इस अमेरिकी सहयोग के बदले में कीमत चुकाते रहना होगा।
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मारे गए आतंकियों की संख्या : भारत सरकार ने अपने अधिकृत बयान में आतंकियों की संख्या के बारे में कोई अनुमान नहीं दिया है। सरकार ने कहा कि आतंकी कैम्पस को निशाना बनाया गया। सरकार ने नहीं बताया कि इन कैम्पों में कितने आतंकियों के होने का अनुमान था। ये संख्या 5 से लेकर 500 तक या इससे भी ज्यादा हो सकती है। मैं इस पर अनुमान व्यक्त नहीं करना चाहता। जो भी होंगे वे मारे गए होंगे। वैसे भी संख्या का यहाँ महत्त्व नहीं है। महत्त्व बोर्डर क्रोस करना है। और भारत सरकार ने स्पष्ट कहा है कि हमने बोर्डर क्रोस करके स्ट्राइक की है। मैं भारत सरकार के वर्जन में मानता हूँ, पेड मीडिया के वर्जन में नही मानता। तो अब पेड मीडिया जितने मर्जी उतने आतंकी जोड़ सकता है।
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अब ये यह तनाव क्या रूप ले सकता है ?
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यह सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। दो नतीजे आ सकते है :
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(1) यदि अमेरिका अभी भारत को चीन के खिलाफ युद्ध में नहीं धकेलना चाहता तो 5-7 दिन में तनाव ख़त्म हो जाएगा। पाकिस्तान की सेना बोर्डर पर थोडा बहुत ड्रामा करेगी और पाकिस्तान के नागरिको को मीडिया द्वारा यह विश्वास दिला दिया जाएगा कि भारत से बदला ले लिया गया है।
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(2) यदि अमेरिका चीन पर अभी युद्ध डालना तय कर चुका है तो, वह पाकिस्तान को भारत पर स्ट्राइक करने के लिए भी उकसायेगा और इस स्ट्राइक का पैमाना वास्तविक और बड़ा होगा। फिर अमेरिका भारत को उतने हथियार देगा कि भारत पाकिस्तान में स्थित चीन के CPEC तक पहुँच जाए। और यदि भारत की सेना CPEC तक पहुँच जाती है तो चीन को युद्ध में आना पड़ेगा। और फिर जब चीन भारत को धकेलना शुरू करेगा तो अमेरिका की फौजे फुल मूवमेंट में भारत में उतरना शुरु करेगी। बाद में इस युद्ध में अफगानिस्तान, ईरान और रूस को भी शामिल होना पड़ सकता है।
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पेड मीडिया जिस तरह से रिपोर्टिंग कर रहा है उससे आभास यही होता है कि अमेरिका भारत को युद्ध में धकेलने की कोशिश में है। भारत की सेना हथियारों की सप्लाई की लिए अमेरिका पर बुरी तरह से निर्भर है। और ऐसी स्थिति में भारत को इस युद्ध में हर तरह का हर लिहाज से घाटा उठाना पड़ेगा। चीन और पाकिस्तान के साथ साथ भारत भी तबाह हो जाएगा।
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कुल मिलाकर हमें बकरा बनाकर कसाई खाने की तरफ धकेला जा रहा है।
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