Posts for 2023-08

Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Aug 04 2023 16:07:27 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

भारतियों के पास वोटिंग राइट्स (चुनने का अधिकार) होने के बावजूद हालात बदतर क्यों है ?
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मान लीजिये आप 2 साझेदारों (A एवं B) की एक कम्पनी में साझेदार है। कम्पनी में मैनेजर की नियुक्ति 2 वर्ष के लिए की जाती है और नियम है कि -
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(1) मैनेजर को नियुक्त करने का फैसला A करेगा। किन्तु एक बार नियुक्त करने के बाद A मैनेजर को निकाल नहीं सकेगा।
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(2) साझेदार B चाहे तो वह A द्वारा रखे गए मैनेजर को बदल सकता है।
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आपके विचार में एक बार नियुक्त होने के बाद मैनेजर किसकी बात सुनने वाला है ? A की या B की !!
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और आप अमुक कम्पनी में साझेदार के रूप में A बनना चाहेंगे या B ?
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भारत में अभी मतदाता की स्थिति A है। और वोट वापसी पासबुक आने से भारतीय मतदाता की स्थिति बदलकर B की हो जाएगी।
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#VoteVapsiPassbook
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 05 2023 19:30:31 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

आज मुख्यमन्त्री को खुला आदेश पत्र भेजा कि कर्नाटक के कूर्ग ज़िले में लागू बंदूक़ के क़ानून को मेरे ज़िले भीलवाड़ा में भी लागू करने के लिए जनमत संग्रह कराएँ। यदि जनमत संग्रह में ज़िले के कुल मतदाताओं के 55% मतदाता इस पर हाँ दर्ज करते है तो मुख्यमंत्री यह क़ानून भीलवाड़ा ज़िले में लागू कर सकते है।
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#CoorgGunLawReferendum
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#VoteVapsiPassbook

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 08 2023 05:28:24 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Mahaveer Kumawat Bhilwara JuryCourt:

आज जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र के शक्करगढ़ मे हनुमंत धाम मे चल रही शिवमहापुराण कथा मे गोनिति और राष्ट्रीय हिन्दु बौर्ड कानुन के पेम्पलेट बाटे
#GauNiti
#RHB

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 08 2023 08:28:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 08 2023 21:51:11 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#SocialMediaPolicy
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सोशल मीडिया को सुधारने हेतु प्रस्तावित अधिसूचना
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14 धाराओं की इस अधिसूचना को लागू करने के लिए लोकसभा या राज्यसभा से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री अपने हस्ताक्षर करके इसे राजपत्र में सीधे प्रकाशित कर सकते है। राजपत्र (Gezette) में छपने के साथ ही यह क़ानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।
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इस कानून के गेजेट में आने से निम्नलिखित परिवर्तन आयेंगे :
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(i) राजनैतिक पार्टियों एवं अन्य इसी तरह के समूहों द्वारा संचालित IT cells द्वारा समुदाय को विभाजित करने के लिए नामालूम खातो द्वारा सुनियोजित रूप से फैलाए जा रहे झूठे प्रोपेगेंडा, फेक न्यूज आदि में कमी आएगी।
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(ii) सोशल मीडिया पर नग्नता, न्यूसेंस, गाली-गलौच आदि के सार्वजनिक प्रदर्शन में कमी आएगी।
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यदि आप यह क़ानून चाहते है तो पीएम को एक खुला निर्देश पत्र भेजे। पत्र में यह लिखे : प्रधानमंत्री जी, प्रस्तावित सोशल मीडिया नीति गेजेट में छापें - #SocialMediaPolicy
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------- कानून ड्राफ्ट का प्रारंभ ------
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(1) सिर्फ सत्यापित खाते : सोशल मीडिया कम्पनी किसी भी यूजर की पहचान का सत्यापन (Identity Verification) किये बिना उसे खाता खोलने की अनुमति नहीं देगी। पहचान को सत्यापित करने के लिए सिर्फ मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाएगा, अन्य किसी दस्तावेज का नहीं।
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(1.1) यदि अवयस्क अपना खाता खोलना चाहता है तो वह अपने माता-पिता, भाई-बहन या इनके सहोदर रिश्तेदारों या अपने विधिक अभिभावक के मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल कर सकता है।
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(1.2) यदि कोई आप्रवासी भारतीय (NRI) खाता खोलना चाहता है तो वह PIO कार्ड (Person of Indian Origin) या OCI कार्ड (Overseas Citizen of India), या पासपोर्ट या धारा (1.1) में उल्लेखित अपने रिश्तेदारों के माध्यम से खाता खोल सकता है।
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(1.3) यदि कोई विदेसी नागरिक खाता खोलना चाहता है तो वह भारतीय दूतावास से पहचान पत्र को सत्यापित करवाकर खाता खोल सकेगा।
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(1.4) यदि कोई ईकाई (कम्पनी, एनजीओ एवं फर्म) अपना खाता खोलना चाहती है तो अमुक इकाई के निदेशक / ट्रस्टी / साझेदार अपने मतदाता पहचान पत्र के द्वारा इकाई के नाम से खाता खोल सकेंगे।
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(2) सोशल मीडिया कम्पनी यूजर से जो भी डेटा इकट्ठा करेगी, उन्हें उसे भारत में ही स्टोर करना होगा। वे इसे भारत से बाहर नहीं ले जा सकेगी।
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टिपण्णी : इस क़ानून में सोशल मीडिया कम्पनी से आशय ऐसी सभी कम्पनियों से है जो इंटरनेट प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से किसी यूजर को खाता खोलने और अमुक प्लेटफ़ॉर्म पर किसी भी प्रकार का पाठ्य, चित्र, ऑडियो, वीडियो या किसी भी तरह का दृश्य, श्रव्य सन्देश आदि सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए अपलोड करने की सुविधा देती है।
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(3) सिर्फ प्रमाणिक नाम के खाते : सोशल मीडिया कम्पनी किसी भी यूजर को अपने नाम के शुरूआती शब्दों में वही नाम इस्तेमाल करने की अनुमति देगी जो नाम वोटर कार्ड में दर्ज है। यूजर अपने नाम में यदि अन्य शब्द जोड़ना चाहता है तो नाम के बाद जोड़ सकता है। इकाई की स्थिति में पहले इकाई का नाम आएगा।
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(4) पहचान का प्रदर्शन : प्रोफाइल के About सेक्शन में सबसे ऊपर एवं पहले खाता धारक की मतदाता संख्या, उसका जिला एवं उसके द्वारा चलाए जा रहे खातो की संख्या दृश्यमान (Visible) होगी। बनाए गए समूह (ग्रुप या पेज आदि ) पर भी यही नियम लागू होगा।
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(5) चेटिंग सर्विस देने वाले प्लेटफ़ॉर्म (व्हाट्स एप, टेलीग्राम, मेसेंजर, हाईक आदि) पर जब कोई मेसेज फॉरवर्ड किया जाएगा तो मेसेज के हेडर पर उस व्यक्ति का नाम लिखा हुआ आएगा जिसके मेसेज को फॉरवर्ड किया गया है, तथा साथ ही यह संख्या भी लिखी हुई आएगी, कि अमुक मेसेज को अब तक कुल कितनी बार फॉरवर्ड किया जा चुका है।
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(6) मुख्य सचिव एवं मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए निर्देश : भारत के सभी मतदाताओ के फोन नंबर को उनकी मतदाता पहचान पत्र संख्या से लिंक करने की प्रक्रिया को अगले 3 माह में पूर्ण करने का निर्देश जारी किये जाते है।
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(7) हानिकारक प्रसारणों पर प्रतिषेध :
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(7.1) ऑनलाइन जुआ एवं दांव खिलाने वाली सभी प्रकार की बेटिंग एप को प्रतिबंधित किया जाता है।
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(7.2) वयस्क सामग्री जैसे कॉल गर्ल्स एप, व्यस्क श्रेणी के वीडियो, ऑडियो, वयस्क श्रेणी के उत्पाद जो कि अवयस्कों के लिए उपयुक्त नहीं है, के विज्ञापन दिखाना निषेध किया जाता है। ऐसे विज्ञापन सिर्फ वयस्कों के लिए प्रसारित किये जाने वाले कार्यक्रमों के दौरान ही दिखाए जा सकेंगे।
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शिकायतों का नागरिको की जूरी द्वारा निपटारा
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(8) महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 30 विवेकशील नागरिको को छांटकर महाजुरी मंडल का गठन करेगा। प्रत्येक महाजूरी सदस्य का अधिकतम कार्यकाल 3 महीने का होगा। 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए विवेकशील नागरिक लॉटरी द्वारा चुन लिए जाएंगे। इस तरह यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(9) जूरी द्वारा सुनवाई का दायरा : सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर किये गए ऐसे सभी कृत्य जो भारत में प्रवृत दंड संहिताओ के अंतर्गत दण्डनीय है, जूरी के दायरे में आयेंगे। उदाहरण के लिए दृश्य या श्रव्य माध्यम से नग्नता, न्यूसेंस, गाली-गलौच, अफवाह, फेक न्यूज, भड़काऊ बयानबाजी, धमकी, जातीय-साम्प्रदायिक वैमनस्य आदि फैलाना।
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(10) जूरी के समक्ष शिकायत करने की प्रकिया : यदि किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर किये गए किसी कृत्य पर आपत्ति या शिकायत है तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में अपनी शिकायत दे सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास का सुझाव दे सकते है।
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(10.1) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए जुर्माना लगा सकते है। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय, सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(10.2) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य शिकायत को सुनवाई योग्य पाते है तो वे अमुक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल के गठन का आदेश देंगे।
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(11) जूरी मंडल का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(11.1) मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(11.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। वोटर लिस्ट में दर्ज उम्र ही व्यक्ति की उम्र मानी जाएगी।
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(11.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(11.5) जूरी में न्यूनतम 12 सदस्य होंगे किन्तु अभियुक्त की आर्थिक या राजनैतिक हैसियत अधिक है, या मामला गंभीर प्रकृति का है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(12) जूरी द्वारा मुकदमो की सुनवाई की प्रक्रिया :
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(12.1) सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से 75% जूरी सदस्य सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(12.2) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा।
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(12.3) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तथा उन्हें और विचार की जरूरत नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी। यदि बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता।
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(12.4) यदि जूरी सदस्यों को लगता है कि आरोपी का सार्वजनिक नारको टेस्ट किया जाना चाहिए तो वे सार्वजनिक नार्को टेस्ट का आदेश दे सकते है। नारको टेस्ट के मामले में कम से कम 75% जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी।
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(12.5) यदि मामला किसी वीडियो से सम्बंधित है तो हमेशा प्राथमिक आरोपी वे होंगे जिन्होंने अमुक वीडियो को अपनी प्रोफाइल पर अपलोड किया है, तथा मुख्य आरोपी वह होगा जिसने इसे सबसे पहले अपलोड किया था। मामले की गंभीरता एवं प्रभाव को देखते हुए यदि जूरी मंडल का बहुमत अनुमति देता है तो निर्माताओं को भी सह आरोपी बनाया जा सकेगा। किन्तु अभिनेताओ एवं अन्य कलाकारों को आरोपी नहीं बनाया जा सकेगा।
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(13) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी का फैसला उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जब भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा तो अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(14) जिला जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले के विरुद्ध किसी भी पक्ष को 30 दिन के अन्दर राज्य के उच्चतर जूरी मंडल (High Court Jury) में, तथा उच्चतर जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ उच्चतम जूरी मंडल (Supreme Court Jury) में अपील करने का अधिकार होगा। यदि वादी गण 30 दिनों के बाद अपील करते है तो महाजूरी मंडल प्रति दिन या प्रति माह के हिसाब से विलम्बित शुल्क लगाकर अपील स्वीकार कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। उच्चतर जूरी मंडल एवं उच्चतम जूरी मंडल में सुनवाई की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया राष्ट्रिय जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट देखें।
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(15) जनता की आवाज :
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टरी में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा (15.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Aug 09 2023 19:46:59 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

वोट वापसी पासबुक को अपडेट किया गया है। इसमें निम्न बदलाव किये गए है :
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(1) 'जनता की आवाज' खंड को लागू करने के लिए इसका पेज जोड़ा गया है, ताकि पासबुक धारक सरकार द्वारा छापे गए किसी क़ानून को निरस्त या रद्द करने के लिए अपनी हाँ / नहीं दर्ज कर सके।
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(2) पासबुक के कवर पर उन पदों के नाम जोड़े गए है जो इसके दायरे में आयेंगे।
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(3) पृष्ठों की संख्या को 28 से घटाकर 16 किया गया है।
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अपडेटेड वर्जन का पीडीऍफ़ कमेन्ट बॉक्स में दिए लिंक से डाउनलोड करें।
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#VoteVapsiPassbook

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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 12 2023 19:55:47 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#SocialMediaPolicy , #Vvp35
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सोशल मीडिया को सुधारने हेतु प्रस्तावित अधिसूचना
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14 धाराओं की इस अधिसूचना को प्रधानमंत्री अपने हस्ताक्षर करके राजपत्र में सीधे प्रकाशित कर सकते है। इस कानून के गेजेट में आने से निम्न परिवर्तन आयेंगे :
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A. राजनैतिक एवं अन्य ऐसे समूहों की IT cells के नामालूम खातो द्वारा फैलाए जा रहे सुनियोजित झूठे प्रोपेगेंडा, फेक न्यूज आदि में कमी आएगी।
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B. नग्नता, अश्लीलता, गाली-गलौच आदि के सार्वजनिक प्रदर्शन में कमी आएगी, तथा सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराध घटेंगे।
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इस क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है। पूरे ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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(1) सिर्फ सत्यापित खाते : सोशल मीडिया कम्पनी किसी भी यूजर की पहचान का सत्यापन (Identity Verification) किये बिना उसे खाता खोलने की अनुमति नहीं देगी। पहचान को सत्यापित करने के लिए सिर्फ मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाएगा, अन्य किसी दस्तावेज का नहीं।
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1.1. अवयस्क या NRI / PIO / OCI अपना खाता खोलने के लिए अपने माता-पिता, भाई-बहन या इनके सहोदर रिश्तेदारों या अपने विधिक अभिभावक के मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल कर सकता है।
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1.2. यदि कोई ईकाई (कम्पनी, एनजीओ एवं फर्म) अपना खाता खोलना चाहती है तो अमुक इकाई के निदेशक / ट्रस्टी / साझेदार अपने मतदाता पहचान पत्र के द्वारा इकाई के नाम से खाता खोल सकेंगे।
.
(2) पहचान का प्रदर्शन : प्रोफाइल के About सेक्शन में सबसे ऊपर एवं पहले खाता धारक की मतदाता संख्या, उसका जिला एवं उसके द्वारा चलाए जा रहे खातो की संख्या दृश्यमान (Visible) होगी, ताकि कोई भी यूजर इसे देख सके।
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(3) चेटिंग सर्विस देने वाले प्लेटफ़ॉर्म (व्हाट्स एप, टेलीग्राम, मेसेंजर, हाईक आदि) पर जब कोई मेसेज फॉरवर्ड किया जाएगा तो मेसेज के हेडर पर उस व्यक्ति का नाम व वोटर नं लिखा दिखेगा जिसके मेसेज को फॉरवर्ड किया गया।
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(4) वयस्क सामग्री जैसे डेटिंग एप, व्यस्क श्रेणी के वीडियो, ऑडियो, वयस्क श्रेणी के उत्पाद जो कि अवयस्कों के लिए उपयुक्त नहीं है, के विज्ञापन सिर्फ वयस्कों के लिए प्रसारित कार्यक्रमों के दौरान ही दिखाए जा सकेंगे।
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(5) ऑनलाइन जुआ एवं दांव खिलाने वाली सभी प्रकार की बेटिंग एप को प्रतिबंधित किया जाता है।
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(6) मुख्य सचिव के लिए निर्देश : सभी मतदाताओ के मोबाईल नंबर को उनके वोटर कार्ड से लिंक करने की प्रक्रिया को 90 के भीतर पूर्ण करने के आदेश जारी किये जाते है।
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(7) शिकायतों की सुनवाई जूरी द्वारा : सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर किये गए ऐसे सभी कृत्य जो भारत में प्रवृत दंड संहिताओ के अंतर्गत दण्डनीय है, जैसे - दृश्य या श्रव्य माध्यम से नग्नता, न्यूसेंस, गाली-गलौच, अफवाह, फेक न्यूज, धमकी, जातीय-साम्प्रदायिक वैमनस्य आदि फैलाना - जूरी के दायरे में आयेंगे।
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(8) जूरी के समक्ष शिकायत करने की प्रकिया : यदि किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर किये गए किसी कृत्य पर आपत्ति या शिकायत है तो वे अपने जिले के महाजूरी मंडल को लिखित में अपनी शिकायत दे सकते है। मामले की गंभीरता के अनुसार जूरी में 12 से 1500 तक सदस्य हो सकेंगे।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Aug 12 2023 20:12:54 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#Vvp7 #SajaKiBa
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सरकारी जमीन किराया बँटवारा
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[ मकान, दूकान आदि खरीदना एवं किराए पर लेना सस्ता बनाने के लिए - खाली पड़ी सरकारी जमीन को किराए पर देने एवं किराया नागरिको के खाते में भेजने का प्रस्ताव ]
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इस कानून का उद्देश्य सरकारी स्वामित्व वाले उन सभी भूखंडो को बाजार में लाना है जो सरकार एवं जनता के किसी भी उपयोग में नहीं आ रहे है। इस क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है। पूरे ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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(1) इस क़ानून के लागू होने पर केंद्र एवं राज्य सरकार के स्वामित्व वाले ऐसे सभी भूखंड जो आज खाली पड़े है, को 5 से 25 वर्ष की अवधि की लीज पर दिया जाएगा। इस भूमि से प्राप्त किराए से इकट्ठा हुयी राशि सभी भारतीयों में बराबर बटेंगी। प्रत्येक भारतीय को यह राशि हर महीने सीधे बेंक खाते में जमा कर दी जायेगी।
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टिप्पणी : उदाहरण के लिए दिल्ली 1500 करोड़ स्क्वायर फुट में फैली हुई है, और इसमें से 300 करोड़ स्क्वायर फुट जमीन सरकार के पास खाली पड़ी है। और इसी तरह सरकार के पास पूरे भारत में (अहमदाबाद में 50 करोड़ स्क्वायर फुट , जयपुर में 70 करोड़ स्क्वायर फुट) कीमती जमीनें है, जिनका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा। यह सारी जमीन किराए / लीज पर दे दी जायेगी।
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(2) जमीनों को किराए पर देकर पैसा इकठ्ठा करने वाला राष्ट्रिय किराया अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में होगा। यदि किराया अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहा है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे।
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टिप्पणी: यदि किराया अधिकारी को वोट वापसी पासबुक के दायरे में नहीं लाया गया तो किराया अधिकारी कीमती जमीनों को किराए पर नहीं देगा और कोई न कोई बहाना बताकर उनके दबा कर बैठा रहेगा, ताकि इच्छित क्षेत्र में कीमतें बढ़ने से स्थानीय बिल्डर एवं भू माफिया को फायदा हो। वोट वापसी पासबुक के दायरे में न होने पर वह किराए / लीज़ आदि की बोली लगाने में भी घपले करेगा।
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(3) यदि किराया अधिकारी या उसके स्टाफ के खिलाफ घपले आदि की कोई शिकायत आती है तो सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति सरकार के आदमी (जज आदि) के पास न होकर नागरिक समूह (जूरी मंडल) के पास रहेगी। जूरी सिस्टम होने से भू माफिया जजों से गठजोड़ नहीं बना सकेंगे।
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इस क़ानून के आने ने निम्नलिखित परिवर्तन आयेंगे :
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(a) बाजार में आपूर्ति बढ़ने से जमीन के दाम 50% तक कम हो जायेंगे अत: जन सामान्य कम कीमतों पर घर/दूकान हेतु जमीन खरीद सकेगा।
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(b) जिन व्यक्तियों ने रहने या कारोबार के लिए जमीन किराए पर ले रखी है उन्हें 2000 से 10,000 रू महीना की बचत होगी।
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(c) सरकारी जमीन के किराए से प्राप्त होने वाली राशि नागरिको को मिलने से नागरिको को प्रति माह 400 से 500 रू की आय होगी।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 13 2023 15:38:56 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#33Vvp प्रस्तावित वोट वापसी पासबुक
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#VoteVapsiPassbook ; इस क़ानून को लागू करने के लिए विधानसभा या लोकसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री एवं प्रधानमन्त्री इस कानून पर हस्ताक्षर करके इसे सीधे गेजेट में प्रकाशित कर सकते है।
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(1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित 4 अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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1. जिला पुलिस प्रमुख
2. मुख्यमंत्री
3. स्वास्थ्य मंत्री
4. शिक्षा मंत्री
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(2) तब यदि आप उपरोक्त व्यक्तियों के काम काज से संतुष्ट नहीं है और इन्हें बदलकर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि एक सुझाव है।
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(3) शुरुआती चरण में इस पासबुक के दायरे में उपरोक्त 4 अधिकारी आयेंगे। मुख्यमंत्री अन्य अधिकारियों जैसे जिला जज, हाईकोर्ट जज, चिकित्सा अधिकारी आदि के पेज भी इस पासबुक में जोड़ सकते है। यदि नागरिक भी चाहे तो इसी क़ानून की धारा 10 का इस्तेमाल करके अमुक अधिकारियों के नाम इस पासबुक में जोड़ने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेंगे। इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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भारत की किसी भी पाठ्यपुस्तक एवं समाचार-पत्र ने आपको यह क्यों नहीं बताया कि– अमेरिका में मुख्यमंत्री, जिला पुलिस प्रमुख एवं हाई कोर्ट जज को शामिल करते हुए कई अधिकारीयों पर वोट वापसी क़ानून लागू है !!
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असल में यह सबसे बड़ी वजह है कि, वहां की पुलिस एवं अदालतो में भारत की तुलना में काफी कम भ्रष्टाचार है। और पुलिस एवं अदालतों में भ्रष्टाचार कम होने की वजह से सभी विभागों में भ्रष्टाचार कम है। इसके अलावा अमेरिका में जिला एवं राज्य स्तर पर जनमत संग्रह प्रक्रियाएं होने के कारण यदि सरकार कोई गलत क़ानून बनाती है तो नागरिक बहुमत का प्रदर्शन करके उसे रद्द करवा देते है।
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जैसे जैसे भारत में वोट वापसी कानूनों की मांग आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे पेड मीडिया के प्रायोजक यह प्रयास कर रहे है कि वोट वापसी कानूनों की चर्चा को सिर्फ सरपंच, पार्षद, विधायक एवं सांसद जैसे कमजोर पदों तक सीमित रखा जाए। असल में, विधायक एवं सांसदों के पास गेजेट छापने की शक्ति नहीं होती है। गेजेट में क़ानून छापने की शक्ति सिर्फ मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के पास होती है। अत: हमारा प्रस्ताव ताकतवर पदों को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाना है।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Aug 15 2023 05:18:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

1947 में जब गोरे भारत से गये तो यह तय नही हुआ था कि देश को चलाने वाला जो आदमी होगा उसका फ़ैसला करने में भारत के नागरिकों की कोई भूमिका होगी या नहीं।
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उस समय जवाहर लाल गोरो के ख़ास और वफ़ादार थे। अत: वायसराय उन्हें पीएम बना गए और बोल गये थे कि — आगे का देख लेना अपने हिसाब से।
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तो 15 अगस्त के दिन कांग्रेस के शीर्ष नेताओ को सत्ता मिली थी, भारत के नागरिकों को नहीं। भारत के नागरिकों का इससे कोई लेना देना नहीं था।
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1950 में जो कविता लिखी गई थी, उसमें वयस्क मताधिकार का ज़िक्र था। लेकिन उस कविता में और भी बहुत सारा दर्शन लिखा हुआ है, जिससे कुछ होता जाता नहीं।
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भारतीयो का भारत से लेना देना 17 July 1951 को शुरू हुआ था, जब भारतीयो को क़ानून बनाने वाले लोगों को वोट द्वारा चुनने की प्रक्रिया यानी वोटिंग राइट्स मिले थे। (जन प्रतिनिधित्व क़ानून)
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और अहिंसामूर्ति महात्मा चंद्रशेखर आज़ाद ने 1925 में ही यह बात अपने पेम्पलेट में लिखकर बाँटना शुरू कर दी थी कि — यदि वोट वापसी क़ानून लागू नहीं किए गए तो लोकतंत्र एक मज़ाक़ बन कर रह जाएगा !!!
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#VoteVapsiPassbook
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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Aug 23 2023 21:50:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

A must read book for activists- “chunavi paddhtiya” written by mahatma Vijay singh ji pathik in 1939.
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Excellent finding by Mahaveer Kumawat Bhilwara JuryCourt
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Mahaveer Kumawat Bhilwara JuryCourt:

अब तक विभिन्न तरह की पुस्तक पढ़ी है पर यह पुस्तक मैंने पहली बार पढ़ी है जिसमें बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी राइट टू रिकॉल (वोट वापसी), रेफरेंडम (जनमत संग्रह), अमेरिका में जज, पुलिस, शिक्षा अधिकारी पर रिकालॅ,विभिन्न प्रकार की प्रोसीजर (प्रक्रियाऔ) और चुनावी प्रक्रियाऔ की शानदार जानकारी दी है |
ईस पुस्तक का नाम "चुनावी पद्धतिया और जनसत्ता" है और ईसके लेखक महात्मा विजय सिहं पथिक जी है जिन्होने विश्व प्रसिद्ध बिजोलिया किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया था|
|जिनको इस पुस्तक का पीडीएफ व्हाट्सएप पर चाहिए वह "#वोट_वापसी_पासबुक" लिखकर व्हाट्सएप मैसेज करें l
9887742837
ईस लिकं से पुस्तक डाऊनलोड करे और पुरा पढे|
<https://drive.google.com/file/d/1N-mYzt0OYulmGJNbIuPkKb-6JGlQUvcc/view?usp=drivesdk>;

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Aug 23 2023 22:26:38 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

राजनैतिक धारा का सबसे बड़ा शाप “विचारों एवं सिद्धांतों का विश्लेषण” है। पिछली कई शताब्दियों से पेड मीडिया के प्रायोजकों ने दुनिया भर के गंभीर प्रकृति के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को विचारों एवं सिद्धांतों के डिस्कसन में उलझा कर रखा हुआ है, (और पोचे स्तर के कार्यकर्ताओं को लुगदी नारों एवं बयानों में)।
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स्वतंत्रता सैनानी महात्मा विजय सिंह जी पथिक द्वारा 1939 में लिखी “चुनावी पद्धतियाँ” पढ़ने से पहले मैंने आज तक ऐसी कोई पुस्तक नही देखी थी जो प्रक्रियाओं (Drafting) के बारे में इतनी महत्त्वपूर्ण जानकारी देती है।
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बड़े से बड़ा और महान से महान नेता और विद्वान (जिन्हें मैं पंचायतिया या भकर कहता हूँ) भी अपनी पूरी ज़िंदगी विचारों को रगेदने में ही बिताता है, लेकिन प्रक्रिया तक कभी नहीं पहुँच पाता या पहुँचना नही चाहता।
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मेरी जानकारी में महात्मा पथिक पहले व्यक्ति थे जिन्होंने प्रक्रिया के महत्व को समझा और इन्हें व्यवस्थित रूप से दर्ज करके प्रकाशित किया।
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लोगो (Mass) को आंदोलित / उत्तेजित / आकर्षित करने,मतलब एड्रिनलिन के स्तर में इजाफ़ा करने वाला फ़ील्ड वर्क करने वाले मिज़ाज के व्यक्ति से इतनी नीरस एवं खपाऊ गहराई में उतरने की अपेक्षा नही की जाती है। यह विपरीत ध्रुवो को मिलाने वाली बात है। एक दुर्लभतम संयोग।
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आजादी आने से 10 साल पहले ही उन्होंने उन प्रक्रियाओं का वर्णन कर दिया था, जिनके आधार पर शासन चलाया जाना चाहिए। उन्होंने जनमत संग्रह से लेकर रिकॉल और प्रीफ़्रेंसियल वोटिंग सिस्टम तक की प्रक्रियाओं से सम्बन्धित सभी व्यावहारिक पहलुओं को दर्ज किया।
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इस पुस्तक को ढूँढने के लिए Mahaveer Kumawat Bhilwara JuryCourt का बहुत बहुत धन्यवाद ।
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Pawan Jury BhilwaraRj

Sun Aug 27 2023 09:15:21 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यह एल्बम भारत के क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता सैनानियों के उन विवरणों के बारे में है जिन्हें पेड मीडिया के प्रायोजको द्वारा छिपाया गया है।

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Pawan Jury BhilwaraRj

Mon Aug 28 2023 22:01:12 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

There is an opportunity- it’s been 5 years but Flat Mars Society is still looking for a founder !!
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Velle should Grab it !

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Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Aug 30 2023 19:51:49 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

यह इत्तिफाक नहीं है कि - जितने भी लोगो ने मोहन दास की चपेट में आकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी, उनमें से किसी भी व्यक्ति ने वोट वापसी, जनमत संग्रह आदि क़ानून प्रक्रियाओं के बारे में अपनी पूरी जिन्दगी में कभी मुंह नही खोला। जबकि मोहन एवं जवाहर लाल की चपेट से बाहर रहकर लड़ने वाले ज्यादातर क्रांतिकारी वोट वापसी कानूनों के समर्थक थे।
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अहिंसामूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल, महात्मा भगत सिंह जी, महात्मा चन्द्रशेखर आजाद के बाद अब महात्मा विजय सिंह जी पथिक भी इस सूची में शामिल है, जो वोट वापसी एवं जनमत संग्रह क़ानून प्रक्रियाओ के बारे में लिख लिख कर नागरिको तक यह जानकारी पहुँचाने की कोशिश कर रहे थे।
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ऐसा लगता है कि, 1919 में भारत में वोट देने का क़ानून आने एवं पहली बार चुनाव होने के बाद अंग्रेजो से लड़ने का ड्रामा करने वाले एवं वास्तव में लड़ने वालो के बीच इस विषय को लेकर स्पष्ट विभाजन रेखा खिंच गयी थी - वोट वापसी के समर्थक गोरो के खिलाफ थे और गोरो का साथ देने वाले सभी नेता वोट वापसी के विरोधी।
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#VoteVapsiPassbook

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