Pawan Jury BhilwaraRj
#SocialMediaPolicy
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सोशल मीडिया को सुधारने हेतु प्रस्तावित अधिसूचना
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14 धाराओं की इस अधिसूचना को लागू करने के लिए लोकसभा या राज्यसभा से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री अपने हस्ताक्षर करके इसे राजपत्र में सीधे प्रकाशित कर सकते है। राजपत्र (Gezette) में छपने के साथ ही यह क़ानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।
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इस कानून के गेजेट में आने से निम्नलिखित परिवर्तन आयेंगे :
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(i) राजनैतिक पार्टियों एवं अन्य इसी तरह के समूहों द्वारा संचालित IT cells द्वारा समुदाय को विभाजित करने के लिए नामालूम खातो द्वारा सुनियोजित रूप से फैलाए जा रहे झूठे प्रोपेगेंडा, फेक न्यूज आदि में कमी आएगी।
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(ii) सोशल मीडिया पर नग्नता, न्यूसेंस, गाली-गलौच आदि के सार्वजनिक प्रदर्शन में कमी आएगी।
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यदि आप यह क़ानून चाहते है तो पीएम को एक खुला निर्देश पत्र भेजे। पत्र में यह लिखे : प्रधानमंत्री जी, प्रस्तावित सोशल मीडिया नीति गेजेट में छापें - #SocialMediaPolicy
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------- कानून ड्राफ्ट का प्रारंभ ------
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(1) सिर्फ सत्यापित खाते : सोशल मीडिया कम्पनी किसी भी यूजर की पहचान का सत्यापन (Identity Verification) किये बिना उसे खाता खोलने की अनुमति नहीं देगी। पहचान को सत्यापित करने के लिए सिर्फ मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाएगा, अन्य किसी दस्तावेज का नहीं।
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(1.1) यदि अवयस्क अपना खाता खोलना चाहता है तो वह अपने माता-पिता, भाई-बहन या इनके सहोदर रिश्तेदारों या अपने विधिक अभिभावक के मतदाता पहचान पत्र का इस्तेमाल कर सकता है।
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(1.2) यदि कोई आप्रवासी भारतीय (NRI) खाता खोलना चाहता है तो वह PIO कार्ड (Person of Indian Origin) या OCI कार्ड (Overseas Citizen of India), या पासपोर्ट या धारा (1.1) में उल्लेखित अपने रिश्तेदारों के माध्यम से खाता खोल सकता है।
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(1.3) यदि कोई विदेसी नागरिक खाता खोलना चाहता है तो वह भारतीय दूतावास से पहचान पत्र को सत्यापित करवाकर खाता खोल सकेगा।
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(1.4) यदि कोई ईकाई (कम्पनी, एनजीओ एवं फर्म) अपना खाता खोलना चाहती है तो अमुक इकाई के निदेशक / ट्रस्टी / साझेदार अपने मतदाता पहचान पत्र के द्वारा इकाई के नाम से खाता खोल सकेंगे।
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(2) सोशल मीडिया कम्पनी यूजर से जो भी डेटा इकट्ठा करेगी, उन्हें उसे भारत में ही स्टोर करना होगा। वे इसे भारत से बाहर नहीं ले जा सकेगी।
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टिपण्णी : इस क़ानून में सोशल मीडिया कम्पनी से आशय ऐसी सभी कम्पनियों से है जो इंटरनेट प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से किसी यूजर को खाता खोलने और अमुक प्लेटफ़ॉर्म पर किसी भी प्रकार का पाठ्य, चित्र, ऑडियो, वीडियो या किसी भी तरह का दृश्य, श्रव्य सन्देश आदि सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए अपलोड करने की सुविधा देती है।
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(3) सिर्फ प्रमाणिक नाम के खाते : सोशल मीडिया कम्पनी किसी भी यूजर को अपने नाम के शुरूआती शब्दों में वही नाम इस्तेमाल करने की अनुमति देगी जो नाम वोटर कार्ड में दर्ज है। यूजर अपने नाम में यदि अन्य शब्द जोड़ना चाहता है तो नाम के बाद जोड़ सकता है। इकाई की स्थिति में पहले इकाई का नाम आएगा।
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(4) पहचान का प्रदर्शन : प्रोफाइल के About सेक्शन में सबसे ऊपर एवं पहले खाता धारक की मतदाता संख्या, उसका जिला एवं उसके द्वारा चलाए जा रहे खातो की संख्या दृश्यमान (Visible) होगी। बनाए गए समूह (ग्रुप या पेज आदि ) पर भी यही नियम लागू होगा।
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(5) चेटिंग सर्विस देने वाले प्लेटफ़ॉर्म (व्हाट्स एप, टेलीग्राम, मेसेंजर, हाईक आदि) पर जब कोई मेसेज फॉरवर्ड किया जाएगा तो मेसेज के हेडर पर उस व्यक्ति का नाम लिखा हुआ आएगा जिसके मेसेज को फॉरवर्ड किया गया है, तथा साथ ही यह संख्या भी लिखी हुई आएगी, कि अमुक मेसेज को अब तक कुल कितनी बार फॉरवर्ड किया जा चुका है।
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(6) मुख्य सचिव एवं मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए निर्देश : भारत के सभी मतदाताओ के फोन नंबर को उनकी मतदाता पहचान पत्र संख्या से लिंक करने की प्रक्रिया को अगले 3 माह में पूर्ण करने का निर्देश जारी किये जाते है।
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(7) हानिकारक प्रसारणों पर प्रतिषेध :
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(7.1) ऑनलाइन जुआ एवं दांव खिलाने वाली सभी प्रकार की बेटिंग एप को प्रतिबंधित किया जाता है।
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(7.2) वयस्क सामग्री जैसे कॉल गर्ल्स एप, व्यस्क श्रेणी के वीडियो, ऑडियो, वयस्क श्रेणी के उत्पाद जो कि अवयस्कों के लिए उपयुक्त नहीं है, के विज्ञापन दिखाना निषेध किया जाता है। ऐसे विज्ञापन सिर्फ वयस्कों के लिए प्रसारित किये जाने वाले कार्यक्रमों के दौरान ही दिखाए जा सकेंगे।
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शिकायतों का नागरिको की जूरी द्वारा निपटारा
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(8) महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 30 विवेकशील नागरिको को छांटकर महाजुरी मंडल का गठन करेगा। प्रत्येक महाजूरी सदस्य का अधिकतम कार्यकाल 3 महीने का होगा। 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे, और 10 नए विवेकशील नागरिक लॉटरी द्वारा चुन लिए जाएंगे। इस तरह यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा।
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(9) जूरी द्वारा सुनवाई का दायरा : सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर किये गए ऐसे सभी कृत्य जो भारत में प्रवृत दंड संहिताओ के अंतर्गत दण्डनीय है, जूरी के दायरे में आयेंगे। उदाहरण के लिए दृश्य या श्रव्य माध्यम से नग्नता, न्यूसेंस, गाली-गलौच, अफवाह, फेक न्यूज, भड़काऊ बयानबाजी, धमकी, जातीय-साम्प्रदायिक वैमनस्य आदि फैलाना।
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(10) जूरी के समक्ष शिकायत करने की प्रकिया : यदि किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर किये गए किसी कृत्य पर आपत्ति या शिकायत है तो वे महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिखित में अपनी शिकायत दे सकते है। अभियोग करने वाले अपनी तरफ से कानूनी सीमा के अन्दर समाधान के रूप में अभियुक्त की संपत्ति जप्त करना, आर्थिक क्षतिपूर्ति लेना, अभियुक्त को कुछ वर्षों या महीनो तक कारावास का सुझाव दे सकते है।
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(10.1) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य मानते है कि शिकायत बिलकुल आधारहीन और मनगड़ंत है तो वे मामले की सुनवाई में हुई समय की बर्बादी के लिए जुर्माना लगा सकते है। झूठा आरोप होने की स्थिति में अभियुक्त अपने समय, सम्मान और अन्य नुकसान के लिए अधिकतम क्षतिपूर्ति पाने हेतु अलग से एक मामला दायर कर सकते है।
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(10.2) यदि महाजूरी मंडल के अधिकांश सदस्य शिकायत को सुनवाई योग्य पाते है तो वे अमुक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल के गठन का आदेश देंगे।
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(11) जूरी मंडल का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :
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(11.1) मतदाता सूची ही जूरी ड्यूटी की सूची होगी, और जूरी का गठन मतदाता सूची से ही किया जाएगा।
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(11.2) जूरी सदस्यों की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होगी। वोटर लिस्ट में दर्ज उम्र ही व्यक्ति की उम्र मानी जाएगी।
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(11.3) सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(11.4) जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(11.5) जूरी में न्यूनतम 12 सदस्य होंगे किन्तु अभियुक्त की आर्थिक या राजनैतिक हैसियत अधिक है, या मामला गंभीर प्रकृति का है तो जूरी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
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(12) जूरी द्वारा मुकदमो की सुनवाई की प्रक्रिया :
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(12.1) सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से 75% जूरी सदस्य सुनवाई शुरू करने को राजी हों।
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(12.2) ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा।
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(12.3) मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी । तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तथा उन्हें और विचार की जरूरत नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी। यदि बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता।
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(12.4) यदि जूरी सदस्यों को लगता है कि आरोपी का सार्वजनिक नारको टेस्ट किया जाना चाहिए तो वे सार्वजनिक नार्को टेस्ट का आदेश दे सकते है। नारको टेस्ट के मामले में कम से कम 75% जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी।
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(12.5) यदि मामला किसी वीडियो से सम्बंधित है तो हमेशा प्राथमिक आरोपी वे होंगे जिन्होंने अमुक वीडियो को अपनी प्रोफाइल पर अपलोड किया है, तथा मुख्य आरोपी वह होगा जिसने इसे सबसे पहले अपलोड किया था। मामले की गंभीरता एवं प्रभाव को देखते हुए यदि जूरी मंडल का बहुमत अनुमति देता है तो निर्माताओं को भी सह आरोपी बनाया जा सकेगा। किन्तु अभिनेताओ एवं अन्य कलाकारों को आरोपी नहीं बनाया जा सकेगा।
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(13) जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी का फैसला उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जब भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा तो अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए फैसले का जिक्र किया जाएगा।
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(14) जिला जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले के विरुद्ध किसी भी पक्ष को 30 दिन के अन्दर राज्य के उच्चतर जूरी मंडल (High Court Jury) में, तथा उच्चतर जूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ उच्चतम जूरी मंडल (Supreme Court Jury) में अपील करने का अधिकार होगा। यदि वादी गण 30 दिनों के बाद अपील करते है तो महाजूरी मंडल प्रति दिन या प्रति माह के हिसाब से विलम्बित शुल्क लगाकर अपील स्वीकार कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। उच्चतर जूरी मंडल एवं उच्चतम जूरी मंडल में सुनवाई की प्रक्रिया देखने के लिए कृपया राष्ट्रिय जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट देखें।
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(15) जनता की आवाज :
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(15.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है या किसी मांग आदि के रूप में अर्जी देना चाहता है तो वह कलेक्टरी में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(15.2) यदि कोई मतदाता धारा (15.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।
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