Posts for 2022-12

Pawan Jury BhilwaraRj

Fri Dec 02 2022 18:36:37 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Fb banned advt account due to EVM video

Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:

Because of my anti-EVM advt or may be some election related advt, my advt account has been suspended by FB !!!
.
My ordinary account is still working
.
----
.
मेरे EVM विरोधी विज्ञापन के कारण या चुनाव संबंधी किसी विज्ञापन के कारण --- मेरा advt खाता FB द्वारा suspend कर दिया गया है !!!
.
मेरा साधारण account अभी भी काम कर रहा है
.
----------
.
મારી EVM વિરોધી જાહેરાતને કારણે અથવા ચૂંટણી સંબંધિત કોઈ જાહેરાતને ---- FB દ્વારા મારું advt એકાઉન્ટ સસ્પેન્ડ કરવામાં આવ્યું છે !!!
.
મારું સામાન્ય account હજુ પણ કામ કરી રહ્યું છે

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 03 2022 21:59:16 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Important : उत्तर प्रदेश के 17 नगर निगमों में मेयर पद के चुनाव होने वाले हैं। नामांकन 12 दिसंबर से शुरू होगा ।
.
वोट वापसी मेयर क़ानून का समर्थन करने वाले कार्यकर्ता चुनाव लड़ने का प्रयास करें।
.
(1) अयोध्या
(2) अलीगढ़
(3) आगरा
(4) कानपुर नगर
(5) गाजियाबाद
(6) गोरखपुर
(7) झाँसी
(8) प्रयागराज
(9) फिरोजाबाद
(10) बरेली
(11) मथुरा
(12) मेरठ
(13) मुरादाबाद
(14) लखनऊ
(15) वाराणसी
(16) सहारनपुर
(17) शाहजहाँ पुर
.
———-

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 10 2022 09:00:53 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

खनिज मुनाफ़ा बँटवारा क़ानून आने से सरकारी विभागों द्वारा रोक के रखी गयी अनुत्पादक ज़मीन को सरकार द्वारा लीज पर दिया जाएगा। यदि किसी शहर की 10% अनुत्पादक ज़मीन भी बाज़ार में आ जाती है तो ज़िले के प्रत्येक नागरिक को अनुमानित कितना पैसा मिलेगा ?
.
नीचे अहमदाबाद का उदाहरण दिया गया है
.
(1) अहमदाबाद में कुल ज़मीन : 500 वर्ग किमी
.
खम्बा क़ानून आने के बाद बाज़ार में आने वाली अनुमानित सरकारी ज़मीन :
50,60,0000 वर्ग मीटर = 50.6 वर्ग किमी (कुल भूमि का 10%)

(2) किसी शहर की कुल भूमि का लगभग 30% हिस्सा सड़के, पार्क आदि में उपयोग होता है, अत: इसे रिहाईश या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अतएव, कुल ज़मीन में से 30% घटाया जाएगा :
35,420,000 वर्ग मीटर
.
(3) अहमदाबाद में ज़मीन का औसत मूल्य :
यह माना गया है कि शहर में ज़मीन की क़ीमत 3 लाख प्रति वर्ग मीटर है। किंतु बाज़ार में 10% सप्लाई बढ़ने से क़ीमते लगभग 40% तक गिर जाएगी।
.
खम्बा क़ानून आने के बाद अहमदाबाद में प्रति वर्ग मीटर क़ीमते : 1,20,000 रू
.
(4) लीज़ पर जाने वाली सरकारी भूमि की क़ीमत :
35,420,000 * 120,000 = 4,250,400,000,000 रू

(5) लीज़ पर जाने वाली सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाला कुल सालाना राजस्व :
127,512,000,000 रू (ज़मीन की क़ीमत का 3%)

(6) अहमदाबाद में 46.25 लाख वयस्क नागरिक है। प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त होने वाली सालाना राशि : 27,570 रू

(7) प्रति व्यक्ति प्राप्त होने वाली मासिक राशि : 2297 रू
.
इस तरह खम्बा क़ानून आने से अहमदाबाद के प्रत्येक नागरिक को उस ज़मीन की लीज से 2,297 रू महीने के मिलेंगे जो ज़मीन अभी सरकार के पास अनुपयोगी पड़ी है।
.
खम्बा क़ानून आने बाद खोदे जा रहे मिनरल का मुनाफ़ा भी नागरिकों में वितरित होगा। मिनरल से प्राप्त होने वाली मासिक राशि प्रति व्यक्ति लगभग 3,000 रू है।
.
इस तरह यदि अहमदाबाद में ख़ंबा क़ानून आ जाता है तो अहमदाबाद के प्रत्येक नागरिक के खाते में 2,297+3000 = 5,297 रू महीने के जमा होंगे।
.
—————
.
उपरोक्त गणना आपके ज़िले के लिए करें कि यदि आपके ज़िले में खम्बा क़ानून आता है तो प्रति व्यक्ति कितनी राशि प्राप्त होगी।
.
#KhamBa

Read full post →




Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 21 2022 07:34:28 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Introducing point system for RTR activists. (INCOMPLETE)
.
अब से राईट टू रिकॉल पार्टी के प्रेसिडेंट एवं अन्य पदाधिकारीयों को वोट वापसी के अधीन किये जाने की प्रक्रिया को लागू किया जा रहा है।
.
राईट टू रिकॉल आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले कार्यकर्ताओ के पास वोटिंग राइट्स होंगे और निम्नलिखित बिंदुओं पर मतैक्य न होने पर फ़ैसला वोटिंग द्वारा किया जा सकेगा :
.
(a) पार्टी प्रेसिडेंट एवं अन्य पदाधिकारियों को बदलने के विषय पर।
.
(b) किसी लोकसभा /विधानसभा / नगरीय निकाय क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी की घोषणा के विषय पर।
.
फ़िलहाल वोटिंग सिस्टम के दायरे में उपरोक्त बिंदुओं को शामिल किया गया है, एवं आगे इसमें अन्य महत्त्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया जाएगा।
.
कृपया इस बात पर ध्यान दें कि, सभी कार्यकर्ताओ का मत भार (Voting Weightage) समान नहीं होगा, बल्कि मत भार अर्जित किए गए अंकों (Points) पर निर्भर करेगा।
.
कार्यकर्ता आरटीआर आंदोलन को आगे बढ़ाने वाली प्रभावी गतिविधियों को करने के एवज़ में अंक प्राप्त करेंगे और इससे उनका मत भार बढ़ेगा।
.
नीचे कुछ प्रभावी गतिविधियों को करने के एवज़ में आवंटित किए जाने वाले अंकों का निर्धारित मान दिया गया है :
.
(1) Pm/Cm को आदेश पत्र भेजने पर- 50 Points (Level1)
.
(1.1) अंक अर्जित करने के लिए कार्यकर्ता को ‘my letters to Pm’ शीर्षक से बनाए गए रजिस्टर के पेज का चित्र अपनी फ़ेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट करना होगा। यदि भेजे गए आदेश पत्र की फ़ोटो कॉपी के अभिलेख का चित्र फ़ेसबुक पर नहीं रखा गया है तो अंक आवंटित नहीं होंगे।
.
(1.2) कार्यकर्ता प्रत्येक महीने भेजे जाने वाले आदेश पत्र के लिए मासिक रूप से एक ही बार अंक प्राप्त करेगा। यदि किसी महीने में एक से अधिक बार आदेश पत्र भेजे गए है तब भी आवंटित होने वाले अधिकतम अंक 50 ही होंगे।
.
(1.3) Level 2 :
.
(1.3.1) 6 माह तक “निरंतर” आदेश पत्र भेजने पर कार्यकर्ता Level 2 प्राप्त कर लेगा। Level 2 प्राप्त करने के बाद से अमुक कार्यकर्ता भेजे गए आदेश पत्र के लिए हर महीने 50 की जगह 100 अंक प्राप्त करेगा।
.
(1.3.2) यदि कार्यकर्ता ने पार्षद या सरपंच का चुनाव लड़ा है तो अमुक कार्यकर्ता सीधे Level 2 प्राप्त कर लेगा, और भेजे गये आदेश के लिए 100 अंक प्राप्त करेगा।
.
(1.4) Level 3 :
.
(1.4.1) 12 माह तक “निरंतर” आदेश पत्र भेजने पर कार्यकर्ता Level 3 प्राप्त कर लेगा। Level 3 प्राप्त करने के बाद से अमुक कार्यकर्ता भेजे गए आदेश पत्र के लिए हर महीने 200 अंक प्राप्त करेगा।
.
(1.4.2) यदि कार्यकर्ता ने विधायक का चुनाव लड़ा है तो अमुक कार्यकर्ता सीधे Level 3 प्राप्त कर लेगा, तथा भेजे गये आदेश पत्र के लिए 200 अंक प्राप्त करेगा।
.
(1.5) Level 4 :
.
(1.5.1) 24 माह तक “निरंतर” आदेश पत्र भेजने पर कार्यकर्ता Level 4 प्राप्त कर लेगा। Level 4 प्राप्त करने के बाद से अमुक कार्यकर्ता भेजे गए आदेश पत्र के लिए हर महीने 300 अंक प्राप्त करेगा।
.
(1.5.2) यदि कार्यकर्ता ने सांसद का चुनाव लड़ा है तो अमुक कार्यकर्ता सीधे Level 4 प्राप्त कर लेगा, तथा भेजे गये आदेश पत्र के लिए 300 अंक प्राप्त करेगा।
.
(2) चुनाव लड़ने पर अंकों का आवंटन :
.
(2a) पार्षद एवं सरपंच - 3000 points
.
(2b) विधायक - 10,000 points
.
(2c) मेयर - 13,000 points
.
(2d) सांसद - 25,000 points
.
(2.1) चुनाव लड़ने के points जमानत राशि के अनुपात में घटते बढ़ते रहेंगे।
.
(2.2) यदि प्रत्याशी की जमानत राशि में किसी अन्य कार्यकर्ता ने योगदान किया है तो 50% अंक (अधिकतम) योगदान कर्ता को मिलेंगे।
.
(2.3) प्रत्याशी जितने वोट प्राप्त करेगा उस अनुपात में अलग से points अर्जित होंगे, और इन points का विभाजन प्रत्याशी एवं उसके आर्थिक योगदान कर्ताओं (पर्चे, बैनर, विज्ञापन के लिए किया गया सहयोग) में किया जाएगा। — प्राप्त होने वाले मतों का अंकों के साथ क्या अनुपात होगा इसकी गणना का फ़ार्मूला अभी निर्धारित नहीं किया गया है।
.
(2.4) यदि कार्यकर्ता ने दूरदराज़ चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ा है तो कार्यकर्ता निर्धारित अंकों से दो गुने अंक प्राप्त करेगा। दूरदराज़ चुनाव क्षेत्र से आशय है जब कार्यकर्ता ऐसी विधानसभा/ लोकसभा/ वार्ड से चुनाव लड़ता है जिस चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज नहीं है।
.
(3) विधायक का नामांकन प्रपत्र भरने का अभ्यास : 500 points
.
(3.1) यदि कार्यकर्ता विधानसभा चुनाव का नामांकन पत्र विधिवत रूप से भरकर फ़ेसबुक पर डालता है और यदि इसमें कोई त्रुटि नहीं है तो कार्यकर्ता 500 points प्राप्त करेगा।
.
(3.2) उपरोक्त अंक सिर्फ़ उन कार्यकर्ताओ को मिलेंगे जो अब तक कभी भी विधायक या सांसद पद के प्रत्याशी नहीं रहे है।
.
———-
.
Pm को आदेश पत्र भेजने के अंकों का आवंटन करने का सिस्टम बना दिया गया है। नीचे दिये गये लिंक पर जाकर आप भेजे गये आदेश पत्र का विवरण सबमिट कर सकते है — <https://sites.google.com/view/rrppoints/enter-my-data>;
.
———

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Tue Dec 27 2022 20:12:58 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

कैसे VVPAT का काँच काला (mirror glass) होने की वजह से केंचुआ कागज के वोटो में भी हेरा फेरी कर देता है -

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 28 2022 08:32:55 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

#खंबा_यात्रा
आज खंबा यात्रा 12वे दिन ग्राम पंचायत खजूरी में पहुंची खजूरी बस स्टैंड पर राइट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित कानूनों का कैनोपी लगाकर प्रचार किया जिसका खजूरी ग्राम के मतदाताओं द्वारा बहुत ही अच्छा समर्थन किया गया l करीब 200 से ज्यादा लोगों ने पंपलेट पढ़कर कानून के बारे में जानकारी ली मेरे द्वारा चुनावी पंपलेट छपवा कर साथ रखने से , जो भी कार्यकर्ता बहस में उलझते उन्हें वह पंपलेट देते ही वह गंभीरता से समझने लगते हैं l
#Jury_Court #RightToRecallParty
#VoteVapsiPassbook
#VvpCM
#khamba
#day12

Mahaveer Kumawat Bhilwara JuryCourt:

Today KhamBa Yatra Glimpses
GP khajuri, vidhansabha jahajpur
#VvpCM
#khamba

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 28 2022 08:35:05 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

Mahaveer Kumawat Bhilwara JuryCourt:

रिकॉलिस्ट साथियों के सहयोग से आज 2000 मल्टी कलर में पंपलेट छपाए हैं खंबा यात्रा के साथ आगामी विधानसभा चुनाव प्रचार करने हेतु

Read full post →



Pawan Jury BhilwaraRj

Wed Dec 28 2022 20:07:02 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

फ़ेसबुक पर उपस्थित सभी राजनैतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए आवश्यक सूचना :
.
यदि आप राजनैतिक सूचनाओं से सरोकार रखते है, तो कृपया अपने फ़ेसबुक प्रोफाइल नाम के पीछे अपनी विधानसभा का नाम एवं विधानसभा नाम के अंत में बिना स्पेस दिए अपने राज्य का RTO कोड जोड़े।
.
उदाहरण :
.
मेरा फ़ेसबुक प्रोफाइल नाम - Pawan Jury है। चूँकि मैं राजस्थान की भीलवाड़ा विधानसभा में निवास करता हूँ , अत: मैंने अपने नाम के पीछे BhilwaraRj जोड़ा है।
.
यहाँ Bhilwara मेरी विधानसभा का नाम है, और Rj राजस्थान का RTO कोड है।
.
कृपया ध्यान दें —
.
(a) विधानसभा के नाम का पहला अक्षर कैपिटल में होना चाहिए।
.
(b) विधानसभा के नाम के अंतिम अक्षर के बाद बिना स्पेस दिए राज्य का RTO कोड लिखना है। विधानसभा के नाम एवं RTO कोड के मध्य में कोई स्पेस नहीं होना चाहिए ।
.
(c) RTO कोड का पहला अक्षर कैपिटल में होना चाहिए।
.
———
.
(1) अपने नाम के साथ विधानसभा का नाम जोड़ने के ग़लत तरीक़े :
.
(1.1) Pawan Jury Bhilwara Rj (ग़लत)
(1.2) Pawan Jury Bhilwara rj (ग़लत)
(1.3) Pawan Jury Bhilwararj (ग़लत)
.
(2) अपने नाम के साथ विधानसभा का नाम जोड़ने का सही तरीक़ा :
.
Pawan Jury BhilwaraRj (सही)
.
————
.
यह पोस्ट पढ़ने के बाद निम्नलिखित कदम उठाएँ :
.
(क) अपने नाम में ऊपर दिये अनुसार बदलाव करें।
.
(ख) अपने नाम में उपरोक्त वर्णित बदलाव करने के बाद इस पोस्ट में जहाँ Pawan Jury BhilwaraRj लिखा है वहाँ अपना नाम लिखकर वांछित बदलाव करें, और इसे अपनी फ़ेसबुक वाल पर रखें।
.
ताकि अन्य कार्यकर्ताओ तक भी यह जानकारी पहुँच सके।
.
————-

Read full post →


Pawan Jury BhilwaraRj

Sat Dec 31 2022 21:01:50 GMT+0000 (Coordinated Universal Time)

जनता सरकार मोर्चा (JSM) के संयोजक देवेंद्र जी बल्हारा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कह रहे है कि JSM राईट टू रिकॉल / वोट वापसी क़ानून लाने पर काम कर रहा है। आगे वे कहते है कि — उनके द्वारा बताई वोट वापसी की प्रक्रिया “रजिस्टर” पर संचालित होगी।
.
JSM संयोजक के इस वक्तव्य से यह भ्रम खड़ा हो रहा है कि -

वोट वापसी के मुद्दे पर जनता सरकार मोर्चा RSS के प्रस्तावो के समर्थन में है,
अथवा
वोट वापसी पासबुक (Vvp) आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले कार्यकर्ताओ के प्रस्तावों के समर्थन में?
.

उल्लेखनीय है कि , भारत में वोट वापसी (राईट टू रिकॉल) प्रक्रियांओं को लागू करने के सिर्फ 2 प्रकार के ही ड्राफ्ट उपलब्ध है।
.
भारत में इसके अलावा तीसरा कोई भी ड्राफ्ट उपलब्ध ही नहीं है।
.
अत: यदि कोई जिम्मेदार कार्यकर्ता/नेता वोट वापसी प्रक्रिया का सार्वजनिक समर्थन करता है, तो उन्हें आवश्यक रूप से यह भी स्पष्ट करना चाहिए की वे किसके क़ानून ड्राफ्ट का समर्थन कर रहे है।
.
————-
.
(खंड - A)

इस खंड में मैंने राईट टू रिकॉल क़ानूनों को लेकर RSS के प्रस्तावों एवं वोट वापसी पासबुक (Vvp) आंदोलन के प्रस्तावों के अंतर को स्पष्ट किया है।
.
उल्लेखनीय है कि RSS के नेता-कार्यकर्ता सिर्फ़ सरपंच, विधायक एवं सांसद पद पर ही राईट टू रिकॉल का समर्थन करते है, मुख्यमंत्री पद पर नहीं। RSS मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने के विरोध में है।
.
RSS ने हरियाणा में पिछले साल राईट टू रिकॉल सरपंच नाम से क़ानून लागू किया है, (जिसका मैं विरोध करता हूँ। विरोध की वजह आगे दी गयी है) और वरुण गांधी ने भी 2016 में विधायक एवं सांसद पर राईट टू रिकॉल लाने का क़ानून संसद में प्रस्तुत किया था (जिसका मैं विरोध करता हूँ)।
.
(1) RSS का राईट टू रिकॉल सरपंच कानून :

RSS ने हरियाणा में राईट टू रिकॉल सरपंच का जो कानून पास किया है, उस में मतदाता सरपंच को केवल निकाल सकते है, बदल नहीं सकते।
.
सिर्फ निकालने (Negative Recall Procedure) की प्रक्रिया होने के कारण सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी, जिसके फलस्वरूप अमुक पंचायत ज़िला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नियंत्रण में चली जायेगी।
.
दूसरे शब्दों में, RSS द्वारा पास किए गए राइट टू रिकॉल सरपंच कानून से जितनी पंचायतों में सरपंचों का रिकॉल होगा, उन पंचायतों में मतदाता अपना जनप्रतिनिधि खो देंगे तथा अमुक पंचायतों पर मुख्यमंत्री का नियंत्रण बढ़ जाएगा।
.
पंचायती राज कानून पंचायतों को स्वायत्ता देने के लिए लाया गया था , और अब RSS पंचायतो की स्वायत्तता में कटौती करने के लिए राईट टू रिकॉल के लेबल का इस्तेमाल कर रहा है।
.
(2) Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच कानून:
.
Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलती है।
.
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसमें वोटर सरपंच को बदलने (Positive Recall Procedure) के लिए स्वीकृति देता है, निकालने के लिए नहीं। इस प्रक्रिया में सरपंच निकाला नहीं जाता, केवल बदला जाता है, अतः सरपंच की कुर्सी कभी खाली नहीं रहती।
.
(3) वरुण गाँधी द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल MLA-MP कानून :

RSS के सांसद वरुण गाँधी द्वारा प्रस्तावित यह कानून कहता है कि — विधायक को रिकॉल करने की शुरुआत करने हेतु अमुक विधान सभा के एक चौथायी (25%) मतदाताओं के हस्ताक्षरों को एक “रजिस्टर” में इकट्ठा किया जाएगा।
.
और आगे वरुण गांधी का राईट टू रिकॉल क़ानून कहता है कि, किसी विधायक के खिलाफ दायर की गयी रिकॉल पीटीशन आगे बढ़ेगी या ख़ारिज होगी, इसका अंतिम निर्णय विधान सभा स्पीकर के हाथ में होगा, मतदाताओं के हाथ में नहीं !!
.
चूँकि स्पीकर की नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है, अत: यहाँ भी कौन विधायक रिकॉल किया जाएगा और कौन नही , इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री के पास ही रहने वाला है !!
.
सार यह है कि, RSS के नेताओं को राइट टू रिकॉल के नाम से ऐसी प्रक्रिया लिखने में महारत हासिल है, जो मतदाताओं की शक्ति में कटौती करता हो, शासन में अस्थिरता लाता हो, और मुख्यमंत्री की शक्ति में इजाफा कर देता हो !!!
.
RSS द्वारा प्रस्तावित रिकॉल क़ानूनों से मुख्यमंत्री उन सरपंचो और विधायकों को रिकॉल करवा कर निकलवा देंगे, जो मुख्यमंत्री द्वारा थोपे गए NWO के एजेंडे का विरोध करने की मंशा रखते है।
.
और साथ ही इस तथ्य को नोट करें कि RSS के नेता/कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने के सख्त खिलाफ है। मतलब, न तो राज्य के मतदाता मुख्यमंत्री को बदल सकेंगे न निकाल सकेंगे।
.
Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी MLA कानून:
.
Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक जारी की जाएगी।
.
इसमें मतदाता विधायक को बदलने (Positive Recall Procedure) के लिए स्वीकृति देता है, निकालने के लिए नही। और कोई विधायक बदला जाएगा या नहीं इसका निर्णायक फैसला मतदाता लेते है, स्पीकर या CM नहीं।
.
उल्लेखनीय है की वर्ष 1999 से Vvp आंदोलन विकल्पयुक्त एवं सकारात्मक वोट वापसी प्रक्रिया (पासबुक आधारित) को लागू करवाने के लिए काम कर रहा है।
.
1999 से 2015 तक RSS इस पर ख़ामोश बने रहे। किंतु वोट वापसी पासबुक की बढ़ती मांग को देख कर RSS वोट वापसी क़ानूनों को एक बदतर प्रक्रिया के रूप में दर्शाने के लिए एक विकल्पहीन, नकारात्मक, सिर्फ निकालने वाली (बदलने वाली नहीं) वोट वापसी प्रक्रिया का समर्थन करना शुरू किया, ताकि वोट वापसी क़ानूनों को बदनाम किया जा सके।
.
स्पष्ट है कि, RSS वोट वापसी क़ानून का छद्म समर्थक है, सच्चा समर्थक नही है।
.
————
.
(खंड - B )
.
अस्तु JSM के कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि कृपया निम्नलिखित बिंदुओं पर अपना स्पष्टीकरण सार्वजनिक करें :
.
(1) क्या JSM हरियाणा में RSS द्वारा पास किये गए विकल्पहीन एवं नकारात्मक, राईट टू रिकॉल सरपंच कानून का समर्थन करता है या इस क़ानून का विरोध करता है ?
.
यदि आप हरियाणा में पास किये गए RTR सरपंच कानून का विरोध करते है तो कृपया इस सम्बंध में अपना वक्तव्य सार्वजनिक करें।
.
यदि आप RSS के इस कानून का समर्थन करते है, तो आपको समर्थन वाला वक्तव्य जारी करने की आवश्यक्ता नहीं है। चूंकि यह कानून लागू हो चुका है अतः विरोध नहीं करने से भी यह कानून जारी ही रहने वाला है।
.
उदाहरण के लिए लॉकडाउन जब लगाया जाता है तो लॉकडाउन के समर्थक कार्यकर्ता को सार्वजनिक रूप से यह कहने की आवश्यकता नहीं होती की "मैं लॉकडाउन का समर्थन करता हूँ" , उस कार्यकर्ता की चुप्पी ही सरकार द्वारा लागू किये किसी फैसले का समर्थन होती है।
.
विरोध करने वाले कार्यकर्ता की ही जिम्मेदारी होती है कि वह सार्वजनिक रूप से कहे की "मैं लॉकडाउन का विरोध करता हूँ। "
.
(2) क्या JSM के कार्यकर्ता वरुण गाँधी द्वारा संसद में प्रस्तुत किये गए “रजिस्टर” आधारित मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री की शक्ति बढ़ाने वाले राईट टू रिकॉल विधायक / सांसद कानून का समर्थन करते है ?
.
चूँकि यह कानून RSS / BJP द्वारा समर्थित है, और संसद में पेश हो चुका है अत: किसी भी समय यह भारत में लागू हो सकता है।
.
वोट वापसी आंदोलन के कार्यकर्ताओं के अलावा भारत के किसी भी दल / व्यक्ति / संगठन / कार्यकर्ता आदि ने इस कानून का सार्वजनिक विरोध नहीं किया है। इस तरह वह सब मौन धारण करके RSS द्वारा लाये जाने वाले इस नकारात्मक एवं विकल्पहीन राईट टू रिकॉल कानून का समर्थन कर रहे है।
.
(3) क्या JSM के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने का समर्थन करते है?
.
क्योंकि गैज़ेट (सरकारी आदेश जैसे की लॉकडाउन लगाना आदि) जारी करने की शक्ति मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री के पास ही होती है , सरपंच/विधायक/सांसद के पास नहीं। अत: मुख्य रूप से बदलाव मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने से ही आएगा, विधायक-सरपंच से नही।
.
उल्लेखनीय है की RSS वोट वापसी मुख्यमंत्री का सख़्त रूप से विरोध करता है , जबकि Vvp आंदोलन का मुख्य प्रस्ताव मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाना है।
.
अत: JSM के कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि कृपया उपरोक्त वर्णित तीनो बिंदुओं पर अपना रुख़ स्पष्ट करके स्थिति को साफ़ करें।
.
#JSM , #VvpCM , #VoteVapsi
.
_________

Read full post →