> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2022-12-31

Pawan Jury BhilwaraRj

जनता सरकार मोर्चा (JSM) के संयोजक देवेंद्र जी बल्हारा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कह रहे है कि JSM राईट टू रिकॉल / वोट वापसी क़ानून लाने पर काम कर रहा है। आगे वे कहते है कि — उनके द्वारा बताई वोट वापसी की प्रक्रिया “रजिस्टर” पर संचालित होगी।
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JSM संयोजक के इस वक्तव्य से यह भ्रम खड़ा हो रहा है कि -

वोट वापसी के मुद्दे पर जनता सरकार मोर्चा RSS के प्रस्तावो के समर्थन में है,
अथवा
वोट वापसी पासबुक (Vvp) आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले कार्यकर्ताओ के प्रस्तावों के समर्थन में?
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उल्लेखनीय है कि , भारत में वोट वापसी (राईट टू रिकॉल) प्रक्रियांओं को लागू करने के सिर्फ 2 प्रकार के ही ड्राफ्ट उपलब्ध है।
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भारत में इसके अलावा तीसरा कोई भी ड्राफ्ट उपलब्ध ही नहीं है।
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अत: यदि कोई जिम्मेदार कार्यकर्ता/नेता वोट वापसी प्रक्रिया का सार्वजनिक समर्थन करता है, तो उन्हें आवश्यक रूप से यह भी स्पष्ट करना चाहिए की वे किसके क़ानून ड्राफ्ट का समर्थन कर रहे है।
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(खंड - A)

इस खंड में मैंने राईट टू रिकॉल क़ानूनों को लेकर RSS के प्रस्तावों एवं वोट वापसी पासबुक (Vvp) आंदोलन के प्रस्तावों के अंतर को स्पष्ट किया है।
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उल्लेखनीय है कि RSS के नेता-कार्यकर्ता सिर्फ़ सरपंच, विधायक एवं सांसद पद पर ही राईट टू रिकॉल का समर्थन करते है, मुख्यमंत्री पद पर नहीं। RSS मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने के विरोध में है।
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RSS ने हरियाणा में पिछले साल राईट टू रिकॉल सरपंच नाम से क़ानून लागू किया है, (जिसका मैं विरोध करता हूँ। विरोध की वजह आगे दी गयी है) और वरुण गांधी ने भी 2016 में विधायक एवं सांसद पर राईट टू रिकॉल लाने का क़ानून संसद में प्रस्तुत किया था (जिसका मैं विरोध करता हूँ)।
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(1) RSS का राईट टू रिकॉल सरपंच कानून :

RSS ने हरियाणा में राईट टू रिकॉल सरपंच का जो कानून पास किया है, उस में मतदाता सरपंच को केवल निकाल सकते है, बदल नहीं सकते।
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सिर्फ निकालने (Negative Recall Procedure) की प्रक्रिया होने के कारण सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी, जिसके फलस्वरूप अमुक पंचायत ज़िला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नियंत्रण में चली जायेगी।
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दूसरे शब्दों में, RSS द्वारा पास किए गए राइट टू रिकॉल सरपंच कानून से जितनी पंचायतों में सरपंचों का रिकॉल होगा, उन पंचायतों में मतदाता अपना जनप्रतिनिधि खो देंगे तथा अमुक पंचायतों पर मुख्यमंत्री का नियंत्रण बढ़ जाएगा।
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पंचायती राज कानून पंचायतों को स्वायत्ता देने के लिए लाया गया था , और अब RSS पंचायतो की स्वायत्तता में कटौती करने के लिए राईट टू रिकॉल के लेबल का इस्तेमाल कर रहा है।
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(2) Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच कानून:
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Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलती है।
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महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसमें वोटर सरपंच को बदलने (Positive Recall Procedure) के लिए स्वीकृति देता है, निकालने के लिए नहीं। इस प्रक्रिया में सरपंच निकाला नहीं जाता, केवल बदला जाता है, अतः सरपंच की कुर्सी कभी खाली नहीं रहती।
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(3) वरुण गाँधी द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल MLA-MP कानून :

RSS के सांसद वरुण गाँधी द्वारा प्रस्तावित यह कानून कहता है कि — विधायक को रिकॉल करने की शुरुआत करने हेतु अमुक विधान सभा के एक चौथायी (25%) मतदाताओं के हस्ताक्षरों को एक “रजिस्टर” में इकट्ठा किया जाएगा।
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और आगे वरुण गांधी का राईट टू रिकॉल क़ानून कहता है कि, किसी विधायक के खिलाफ दायर की गयी रिकॉल पीटीशन आगे बढ़ेगी या ख़ारिज होगी, इसका अंतिम निर्णय विधान सभा स्पीकर के हाथ में होगा, मतदाताओं के हाथ में नहीं !!
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चूँकि स्पीकर की नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है, अत: यहाँ भी कौन विधायक रिकॉल किया जाएगा और कौन नही , इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री के पास ही रहने वाला है !!
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सार यह है कि, RSS के नेताओं को राइट टू रिकॉल के नाम से ऐसी प्रक्रिया लिखने में महारत हासिल है, जो मतदाताओं की शक्ति में कटौती करता हो, शासन में अस्थिरता लाता हो, और मुख्यमंत्री की शक्ति में इजाफा कर देता हो !!!
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RSS द्वारा प्रस्तावित रिकॉल क़ानूनों से मुख्यमंत्री उन सरपंचो और विधायकों को रिकॉल करवा कर निकलवा देंगे, जो मुख्यमंत्री द्वारा थोपे गए NWO के एजेंडे का विरोध करने की मंशा रखते है।
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और साथ ही इस तथ्य को नोट करें कि RSS के नेता/कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने के सख्त खिलाफ है। मतलब, न तो राज्य के मतदाता मुख्यमंत्री को बदल सकेंगे न निकाल सकेंगे।
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Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी MLA कानून:
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Vvp आंदोलन द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी प्रक्रिया में प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक जारी की जाएगी।
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इसमें मतदाता विधायक को बदलने (Positive Recall Procedure) के लिए स्वीकृति देता है, निकालने के लिए नही। और कोई विधायक बदला जाएगा या नहीं इसका निर्णायक फैसला मतदाता लेते है, स्पीकर या CM नहीं।
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उल्लेखनीय है की वर्ष 1999 से Vvp आंदोलन विकल्पयुक्त एवं सकारात्मक वोट वापसी प्रक्रिया (पासबुक आधारित) को लागू करवाने के लिए काम कर रहा है।
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1999 से 2015 तक RSS इस पर ख़ामोश बने रहे। किंतु वोट वापसी पासबुक की बढ़ती मांग को देख कर RSS वोट वापसी क़ानूनों को एक बदतर प्रक्रिया के रूप में दर्शाने के लिए एक विकल्पहीन, नकारात्मक, सिर्फ निकालने वाली (बदलने वाली नहीं) वोट वापसी प्रक्रिया का समर्थन करना शुरू किया, ताकि वोट वापसी क़ानूनों को बदनाम किया जा सके।
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स्पष्ट है कि, RSS वोट वापसी क़ानून का छद्म समर्थक है, सच्चा समर्थक नही है।
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(खंड - B )
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अस्तु JSM के कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि कृपया निम्नलिखित बिंदुओं पर अपना स्पष्टीकरण सार्वजनिक करें :
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(1) क्या JSM हरियाणा में RSS द्वारा पास किये गए विकल्पहीन एवं नकारात्मक, राईट टू रिकॉल सरपंच कानून का समर्थन करता है या इस क़ानून का विरोध करता है ?
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यदि आप हरियाणा में पास किये गए RTR सरपंच कानून का विरोध करते है तो कृपया इस सम्बंध में अपना वक्तव्य सार्वजनिक करें।
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यदि आप RSS के इस कानून का समर्थन करते है, तो आपको समर्थन वाला वक्तव्य जारी करने की आवश्यक्ता नहीं है। चूंकि यह कानून लागू हो चुका है अतः विरोध नहीं करने से भी यह कानून जारी ही रहने वाला है।
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उदाहरण के लिए लॉकडाउन जब लगाया जाता है तो लॉकडाउन के समर्थक कार्यकर्ता को सार्वजनिक रूप से यह कहने की आवश्यकता नहीं होती की "मैं लॉकडाउन का समर्थन करता हूँ" , उस कार्यकर्ता की चुप्पी ही सरकार द्वारा लागू किये किसी फैसले का समर्थन होती है।
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विरोध करने वाले कार्यकर्ता की ही जिम्मेदारी होती है कि वह सार्वजनिक रूप से कहे की "मैं लॉकडाउन का विरोध करता हूँ। "
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(2) क्या JSM के कार्यकर्ता वरुण गाँधी द्वारा संसद में प्रस्तुत किये गए “रजिस्टर” आधारित मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री की शक्ति बढ़ाने वाले राईट टू रिकॉल विधायक / सांसद कानून का समर्थन करते है ?
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चूँकि यह कानून RSS / BJP द्वारा समर्थित है, और संसद में पेश हो चुका है अत: किसी भी समय यह भारत में लागू हो सकता है।
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वोट वापसी आंदोलन के कार्यकर्ताओं के अलावा भारत के किसी भी दल / व्यक्ति / संगठन / कार्यकर्ता आदि ने इस कानून का सार्वजनिक विरोध नहीं किया है। इस तरह वह सब मौन धारण करके RSS द्वारा लाये जाने वाले इस नकारात्मक एवं विकल्पहीन राईट टू रिकॉल कानून का समर्थन कर रहे है।
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(3) क्या JSM के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने का समर्थन करते है?
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क्योंकि गैज़ेट (सरकारी आदेश जैसे की लॉकडाउन लगाना आदि) जारी करने की शक्ति मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री के पास ही होती है , सरपंच/विधायक/सांसद के पास नहीं। अत: मुख्य रूप से बदलाव मुख्यमंत्री को वोट वापसी के दायरे में लाने से ही आएगा, विधायक-सरपंच से नही।
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उल्लेखनीय है की RSS वोट वापसी मुख्यमंत्री का सख़्त रूप से विरोध करता है , जबकि Vvp आंदोलन का मुख्य प्रस्ताव मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाना है।
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अत: JSM के कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि कृपया उपरोक्त वर्णित तीनो बिंदुओं पर अपना रुख़ स्पष्ट करके स्थिति को साफ़ करें।
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#JSM , #VvpCM , #VoteVapsi
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