> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2023-08-23

Pawan Jury BhilwaraRj

राजनैतिक धारा का सबसे बड़ा शाप “विचारों एवं सिद्धांतों का विश्लेषण” है। पिछली कई शताब्दियों से पेड मीडिया के प्रायोजकों ने दुनिया भर के गंभीर प्रकृति के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को विचारों एवं सिद्धांतों के डिस्कसन में उलझा कर रखा हुआ है, (और पोचे स्तर के कार्यकर्ताओं को लुगदी नारों एवं बयानों में)।
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स्वतंत्रता सैनानी महात्मा विजय सिंह जी पथिक द्वारा 1939 में लिखी “चुनावी पद्धतियाँ” पढ़ने से पहले मैंने आज तक ऐसी कोई पुस्तक नही देखी थी जो प्रक्रियाओं (Drafting) के बारे में इतनी महत्त्वपूर्ण जानकारी देती है।
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बड़े से बड़ा और महान से महान नेता और विद्वान (जिन्हें मैं पंचायतिया या भकर कहता हूँ) भी अपनी पूरी ज़िंदगी विचारों को रगेदने में ही बिताता है, लेकिन प्रक्रिया तक कभी नहीं पहुँच पाता या पहुँचना नही चाहता।
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मेरी जानकारी में महात्मा पथिक पहले व्यक्ति थे जिन्होंने प्रक्रिया के महत्व को समझा और इन्हें व्यवस्थित रूप से दर्ज करके प्रकाशित किया।
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लोगो (Mass) को आंदोलित / उत्तेजित / आकर्षित करने,मतलब एड्रिनलिन के स्तर में इजाफ़ा करने वाला फ़ील्ड वर्क करने वाले मिज़ाज के व्यक्ति से इतनी नीरस एवं खपाऊ गहराई में उतरने की अपेक्षा नही की जाती है। यह विपरीत ध्रुवो को मिलाने वाली बात है। एक दुर्लभतम संयोग।
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आजादी आने से 10 साल पहले ही उन्होंने उन प्रक्रियाओं का वर्णन कर दिया था, जिनके आधार पर शासन चलाया जाना चाहिए। उन्होंने जनमत संग्रह से लेकर रिकॉल और प्रीफ़्रेंसियल वोटिंग सिस्टम तक की प्रक्रियाओं से सम्बन्धित सभी व्यावहारिक पहलुओं को दर्ज किया।
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इस पुस्तक को ढूँढने के लिए Mahaveer Kumawat Bhilwara JuryCourt का बहुत बहुत धन्यवाद ।
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