> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-02-11

Pawan Jury BhilwaraRj

Rakesh Suri Ghaziabad UpActivist:

ऐसे लगभग 17 देश हैं जहाँ जूरी प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग किया जाता है –
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कनाडा, अमेरिका, इंग्‍लैण्‍ड, फ्रांस, डेनमार्क, नार्वे, स्‍वीडन, फिनलैण्‍ड, जर्मनी, स्‍पेन, पुर्तगाल, इटली, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्‍ड।
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रूस के लगभग 25 प्रतिशत जिलों में अब जूरी प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग किया जाने लगा है और जापान वर्ष 2009 से जूरी प्रणाली (सिस्टम) प्रारंभ कर चुका है।
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लगभग 90 देशों में जज प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग किया जाता है। जज प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग करने वाले हर एक देश के न्‍यायालय भ्रष्‍ट हैं, पुलिसवाले भ्रष्‍ट हैं और राजव्‍यवस्‍था भी भ्रष्‍ट है |
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रूस ,चीन और जापान को भी अपने यहां की अदालतों में भ्रष्‍टाचार और भाई-भतीजावाद की समस्‍या के कारण जूरी प्रणाली (सिस्टम) लागू करना पड़ा था।
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जूरी प्रणाली (सिस्टम) पर ऐतिहासिक दृष्‍टिकोण से एक नजर :-

रोम में मजिस्‍ट्रेटों का चयन हुआ था और वहां अत्‍यधिक अपराध के कारण जूरी प्रणाली (सिस्टम) का प्रयोग शुरू हुआ जिससे पड़ोस के देशों की तुलना में वहां बहुत ही कम भाई–भतीजावाद और कम भष्‍टाचार वाला शासन कायम हुआ। यही कारण था कि रोम अन्‍य देशों की तुलना में ज्‍यादा मजबुत/सुदृढ़ हो गया। लेकिन रोम का पतन हो गया जिसका सबसे प्रमुख कारण यह था कि जनसंख्‍या के एक बहुत बड़े हिस्‍से (गुलामों) को वोट/मत देने का अधिकार नहीं था।
इसके बाद हरेक शासन में राजा या राजा द्वारा नियुक्‍त किए गए लॉर्ड के द्वारा सजा सुनाई जाती थी। वर्ष 1200 में, इंग्‍लैण्‍ड पहला राष्‍ट्र बना जिसने इस व्‍यवस्‍था को उलट दिया – और मैग्‍ना कार्टा में यह घोषणा की कि राजा के ऐजेन्‍ट अब आरोप ही लगाएंगे और नागरिक (जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य) ही दोषी होने का निर्णय/फैसला करेंगे और सजा सुनाएंगे।
यह एक ऐतिहासिक बदलाव था, एक ऐसा बदलाव जिससे शासकों/राजाओं और प्रजा के बीच के संबंधों में पूरी तरह से बदलाव आ गया। अब राजा/शासक के पास बन्‍दी बनाने अथवा यहां तक कि अर्थदण्‍ड/जुर्माना लगाने का भी अधिकार नहीं रह गया। इसी जूरी प्रणाली (सिस्टम) का ही यह परिणाम हुआ कि अब कारीगर/शिल्‍पकार और व्‍यापारी अपने आप को लॉर्डां के मनमाने शासन से अपना बचाव कर पाए और प्रगति होनी शुरू हो गई।
केवल इसी कारण/बदलाव से इंग्‍लैण्‍ड में कारीगर/शिल्‍पकार सम्‍पन्न हो गए और उनमें से कुछ बाद में चलकर उद्योगपति बन बैठे। इंग्‍लैण्‍ड में औद्योगिक क्रान्‍ति इसी जूरी प्रणाली(सिस्टम) के कारण ही आई – जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य ने कारीगर/शिल्‍पकार, व्‍यापारियों और उद्योगपतियों को लॉर्डों और राजाओं के मनमाने जुर्माने से बचाया और इस प्रकार जूरी/निर्णायक मण्‍डल के सदस्‍य ने इन्‍हें धनवान बनने के लिए योग्य बनाया ।
तथाकथित पुनर्जागरण की कहीं कोई भूमिका नहीं थी। इंग्‍लैण्‍ड ने जो प्रगति/तरक्‍की की, यदि उसके लिए पुनर्जागरण जिम्‍मेवार था तो बताएं कि ऐसी प्रगति इटली ने क्‍यों नहीं की जहां कि पुनर्जागरण सबसे पहले आया ?
बुद्धिजीवियों ने यह बताने के दौरान कि यूरोप ने सारी दुनियां पर कैसे कब्‍जा कर लिया, जानबुझकर जूरी प्रणाली (सिस्टम) की भूमिका को दबा दिया है क्‍योंकि वे नहीं चाहते थे कि छात्र समुदाय जूरी प्रणाली (सिस्टम) के बारे में जानें ताकि ऐसा न हो कि वे इस प्रणाली (सिस्टम) की मांग ही न करने लगें।