> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-02-02

Pawan Jury BhilwaraRj

कारगिल युद्ध ऐसी घटना है जिसे आधार में रखकर आप पूरी दुनिया की वास्तविक राजनीति और भारत की सभी समस्याओ की जड़ को समझ सकते है।

( दिए गए विवरणों में से ज्यादातर की भिन्न भिन्न स्त्रोतों से पुष्टि की जा सकती है। पुष्टि के लिए गूगल करें। यह व्यक्ति के कॉमन सेन्स पर निर्भर करता है कि वह इन तथ्यों से क्या निष्कर्ष निकालता है और क्या सबक लेना चाहता है। )
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कारगिल युद्ध का असली कारण पोकरण-2 था : वाजपेयी जी ने 1998 में परमाणु परिक्षण के आदेश दिए थे। परमाणु परिक्षण के कारण अमेरिका नाराज हो गया और उसने भारत को सबक सिखाना तय किया।
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(1) कारगिल युद्ध भारत एवं अमेरिका के बीच लड़ा गया था , जिसमे पाकिस्तान एवं भारत की हार हुयी और अमेरिका युद्ध जीत गया !!

सूचना : अमेरिका ने पाकिस्तान को हाई एलटीट्युड हेलिकोप्टर एवं अन्य साजो सामान दिए ताकि वे भारतीय चौकियो पर चढ़ सके। अमेरिका ने भारत का सेटेलाईट भी बंद करवाया , ताकि हेलिकोप्टर के स्मोक सिग्निचेर , हिट सिग्निचेर और मेटल ऑब्जेक्ट को ट्रेस न किया जा सके। चीन एवं रूस के सेटेलाईट को इस बात की खबर थी कि पाकिस्तान बड़े पैमाने पर फ़्लाइंग एक्टिविटी कर रहा है , पर सभी भारत को सबक सिखाना चाहते थे , अत: उन्होंने हमें सूचना नहीं दी !!

सबक : यदि कोई देश अपनी सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कदम उठाता है तो दुनिया के सभी ताकतवर देश उसे गिराने और दबाने के लिए एक जुट हो जाते है।
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(2) कारगिल युद्ध में हमारी मिसाइलो में लगे हुए टाइमर्स ने काम करना बंद कर दिया था और मिसाइले बेकार हो गयी थी !! हमने ये टाइमर्स रूस से लिए थे।

सूचना : आयातित हथियारों में और उनके स्पेयर पार्ट्स में किल स्विच होते है, और इनका निर्माता यदि इन्हें एक्टिवेट कर दे तो हथियार काम करना बंद कर देता है। यही वजह है कि हथियार निर्माता देश चाहता है कि अन्य देश उनके बनाए हथियार इस्तेमाल करें। रूस को परमाणु परिक्षण अच्छा नहीं लगा और उन्होंने हमें सबक सिखाने के लिए मिसाइलो के टाइमर बंद कर दिए। 1984 फाकलेंड वार में भी जब अर्जेन्टाइना ने फ़्रांस से आयातित एक्सोसेट मिसाइल का प्रयोग करके ब्रिटेन का युद्ध पोत उड़ा दिया था तो मार्गरेट थेचर ने फ़्रांस के राष्ट्रपति को धमकाया था कि यदि उन्होंने एक्सोसेट मिसाइलो के किल कोड नहीं दिए तो वे अर्जेंटिना पर परमाणु हमला कर देगी !! जब 2008 में इसरायली प्लेन सीरिया पर हमला करने आये तो रूस के रडार ने काम करना बंद कर दिया। जब प्लेन बमबारी करके लौट गए तो रडार फिर से काम करने लगा !! यह खुला हुआ रहस्य है कि मोसाद ने भारी पैसा देकर रडार का किल कोड खरीद लिया था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने रडार को निष्क्रिय करने में किया !!

सबक : यदि हमें आत्मनिर्भर सेना बनानी है तो हथियारों के निर्माण में "मेड इन इंडिया मेड बाय इंडियन्स " की नीति अपनानी चाहिए। भारत के 80% हथियार आयातित है , और जो 20% हथियार स्वदेशी है उनमे भी 60% पुर्जे आयातित है !!! मतलब हमने अपनी सेना को ऐसे हथियार पकड़ा रखे है जिसके बटन किन्ही दुसरे देशो के पास है। यदि अमेरिकी कम्पनियां भारत में आकर हथियार बनाएगी तो भी हालात जस के तस रहेंगे।
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(3) भारत के पास लेजर गाइडेड बम नहीं थे और अमेरिका, फ़्रांस , रूस , ब्रिटेन ने हमें ये बम देने से इनकार कर दिया था !!

सूचना : पर्वत पर बैठे पाकिस्तानियों को उड़ाने के लिए हमें लेसर गाइडेड बमों की आवश्यकता थी। लेसर गाइडेड बम सिर्फ 6 देश ही बनाते है। इन सभी देशो ने भारत को लेजर गाइडेड बम देने से इंकार कर दिया। और इसी वजह से हमें अपने सैनिको को पहाड़ चढ़ने को कहना पड़ा, जिसकी वजह से 450 सैनिक शहीद हो गए। यदि हमें लेजर गाइडेड बम मिल जाते तो भारत के एक भी सैनिक की जान नहीं जाती !! इस्राएल से हमारा सैन्य समझौता होने के कारण इस्राएल ने हमें हथियारों की काफी मदद दी , और इसके लिए हमें इस्राएल का शुक्रगुजार होना चाहिए। किन्तु इस्राएल ने भी हमें तत्काल मदद नहीं दी और लेसर गाईडेड बम हमें काफी बाद में मिले थे। वजह इस्राएल पर अमेरिकी दबाव था, और इस्राएल को भी यह सुनिश्चित करना चाहता था कि भारत अब सैन्य क्षमता नहीं बढ़ाएगा। अमेरिका से सिग्नल मिलने तक इस्राएल हमें इतनी सैन्य मदद देता रहा कि हम युद्ध में टिके रह सके। किन्तु निर्णायक मदद हमें जून में ही मिली थी।

सबक : भारत को अपने हथियार खुद बनाने की जरूरत है। हम पराये देशो के भरोसे पर सेना नहीं चला सकते। क्योंकि जब युद्ध होगा तो हथियार बनाने वाली कम्पनियां हथियार देने के एवज में तरह तरह की शर्तें लगाती है या फिर हथियारों के दाम 10 गुना कर देती है !!
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(4) मदद मांगने के लिए वाजपेयी ने तब मोदी साहेब को अमेरिका भेजा था। मोदी साहेब की यह विजिट गुप्त थी !!

सूचना : भारत के पास हथियार नहीं थे और अमेरिका देने को राजी भी नहीं था। शर्ते तय करने के लिए तब मोदी साहेब को भेजा गया। यदि किसी ऑफिशियल को भेजा जाता तो मीडिया में बवाल हो सकता था। तब मोदी साहेब किसी पद पर नहीं थे, अत: मोदी साहेब वहां जाकर हमारे राजदूत से मिले। राजदूत उन्हें विश्व बैंक और आई एम ऍफ़ के अधिकारियों के पास ले गए। वहां मदद के बदले में शर्तें तय की गयी। मुख्य शर्त यह थी कि भारत अपना सैन्य परमाणु कार्यक्रम हमेशा के लिए बंद कर देगा। भारत ने 2008 में 123 एग्रीमेंट कर के ऐसा किया। इसके अलावा कुछ अन्य शर्तें जैसे - बीमा , मीडिया आदि में एफडीआई आदि। बदले में हमें लेसर गाईडेड बम मिले।

सबक : अन्तराष्ट्रीय राजनीति में कोई किसी का दोस्त नही होता। यदि हममें अपने हितो की रक्षा करने का बल नहीं है तो कोई अन्य देश हमें बचाने नहीं आएगा। और जब वे आयेंगे तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी होती है। हथियारों के बदले हमें अपनी अर्थव्यवस्था अमेरिकियों के हवाले करनी पड़ी , अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करना पड़ा , और नतीजे में आज अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां एक के बाद एक अर्थव्यवस्था के हमारे सभी क्षेत्रो को टेक ओवर कर रही है !!
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(5) युद्ध विराम की स्क्रिप्ट भी अमेरिका ने लिखी थी !! भारत और पाकिस्तान सिर्फ इसका अनुसरण कर रहे थे !!!

30 जून 1999 को मोदी साहेब ने अमेरिका से भारत के लिए उड़ान भरी , 2 जुलाई को नवाज शरीफ को क्लिंटन ने तलब किया , 3 जुलाई को शरीफ पाकिस्तान के लिए रवाना हुए, 4 जुलाई यानी कि अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर क्लिंटन ने रात को 2 बजे वाजपेयी को युद्ध विराम करने और पाकिस्तान को सेफ पैसेज देने के लिए कहा। 4 जुलाई रात 3 बजे वाजपेयी ने ये आदेश जनरल को दिए और सुबह 4 जुलाई सुबह 4 बजे जनरल ने युद्ध विराम की घोषणा की।

सूचना : हम टीवी पर जो गोला बारी देख रहे थे, वह युद्ध का मैदान नहीं था। असली युद्ध का मैंदान अमेरिका के वातानुकूलित कक्ष थे। जो वहां अमेरिका ने तय किया वही युद्ध का नतीजा था। युद्ध शुरू भी अमेरिका ने कराया था , और अपनी शर्ते मनवाकर ख़त्म भी अमेरिका ने करवाया। इस तरह भारत और पाकिस्तान यह युद्ध हार गए और अमेरिका जीत गया।

सूचना : मीडिया ख़बरें छुपाने का कारोबार है। यदि आपको सच्ची ख़बरें चाहिए तो कम से कम एक स्त्रोत है जिसके लिए गारंटी के साथ कहा जा सकता है कि वह आपको सच्ची ख़बरें नहीं बतायेगा। और वह स्त्रोत मीडिया है।
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(6) कारगिल की सबसे ऊँची चोटी पॉइंट 5353 हमें छोडनी पड़ी !! यह आज भी पाकिस्तान के कब्जे में है !!

सूचना : लेह लद्धाख राजमार्ग पर इस चोटी से सीधे निशाना लगाया जा सकता है। अमेरिका ने इस छोटी पर लेसर गाइडेड बम इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। इस तरह तावान के रूप में हमें यह चोटी छोडनी पड़ी। रणनीतिक रूप से यह चोटी बेहद महत्त्वपूर्ण है। भारत अगले 12 वर्षो तक इस चोटी पर पुन कब्ज़ा करने के लिए प्रयास करता रहा। 2012 में सेना के अधिकारियो ने रिपोर्ट किया कि ज्योग्राफिक स्थिति के कारण इस चोटी को कब्जे में लेना लगभग असंभव है। मनमोहन सिंह जी 2012 में अधिकृत रूप से कारगिल युद्ध बंद करने के आदेश जारी किये।

सबक : यदि आप राजनीति को समझना चाहते है तो सेना एवं हथियारों के महत्त्व को समझने का प्रयास करें। पूरी राजनीति सेना एवं हथियारों के इर्द गिर्द घूमती है। पेड मीडिया राजनीति को चिल्लर मुद्दों से जोड़ कर दिखाने का धंधा करता है। समाजशात्र , अर्थशास्त्र , राजनीति शास्त्र के सभी सवालों के जवाब आपको सिर्फ सेना एवं हथियारों में ही मिलेंगे , शेष सब महत्त्वहीन है।
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समाधान ?

हमें उन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करवाने की जरूरत है जिनके आने से भारत आधुनिक स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करने में सक्षम हो जाएगा। जूरी सिस्टम , राईट टू रिकॉल , woic जैसे क़ानून लागू करके हम अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के भारत में बढ़ते नियंत्रण में कमी ला सकते है।

स्वदेशी हथियारों के उत्पादन के लिए प्रस्ताव - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1981902295261330>;
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हथियारबंद नागरिक समाज के लिए प्रस्ताव - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1982766555174904>;

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सन्दर्भ के लिए ये लिंक देखें एवं अन्य विवरणों के लिए गूगल करें :

<https://goo.gl/hvChmC>;
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<https://goo.gl/2oSRzJ>;
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<https://goo.gl/Yvbtif>;
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<https://goo.gl/Am6Upm>;
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