Pawan Jury BhilwaraRj
चुनावी फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए प्रस्ताव :
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चुनाव लड़ने की मौजूदा व्यवस्था में इस तरह के प्रावधान है जो छोटी पार्टियों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों की परेशानी में अतिरिक्त इजाफा करते है, जबकि बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को अतिरिक्त लाभ पहुंचाते है। यह प्रस्तावित क़ानून छोटे उम्मीदवारों एवं बड़े उम्मीदवारों के बीच किये जा रहे इस पक्षपात में कमी लाएगा।
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स्पष्टीकरण ड्राफ्ट का हिस्सा नहीं है। स्पष्टीकरण नागरिको एवं कार्यकर्ताओ की सामान्य जानकारी के लिए जोड़े गए है।
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-----ड्राफ्ट का प्रारम्भ-----
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(1) सांसद / विधायक / पार्षद / सरपंच के चुनावी फॉर्म (जिसे आज नाम निर्देशन पत्र या नोमिनेशन फॉर्म कहा जाता है) में से प्रस्तावक का कॉलम हटाया जाएगा, और उम्मीदवार को चुनावी फॉर्म भरने के लिए किसी भी प्रस्तावक की जरूरत नहीं होगी।
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(a) स्पष्टीकरण :
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(a1) इस समय यह प्रावधान है कि, रजिस्टर्ड पार्टियों (छोटी पार्टियाँ) के उम्मीदवारों को 10 प्रस्तावको का ब्यौरा भरना होता है, जबकि मान्यता प्राप्त पार्टियों (बड़ी पार्टियाँ) को सिर्फ 1 प्रस्तावक चाहिए। कई मामलो में छोटी पार्टियों के उम्मीदवारों को 10 प्रस्तावक नहीं मिल पाते है, और उनका फॉर्म ख़ारिज हो जाता है। अत: 10 प्रस्तावको की अनिवार्यता को निकाल दिया गया है, ताकि छोटी पार्टियों के उम्मीदवारों के फॉर्म ख़ारिज होने की संख्या में कमी आये।
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(a2) कई बार RO उम्मीदवार से सभी 10 प्रस्तावको को उसके सामने पेश करने को कहता है। ज्यादातर मामलो में प्रस्तावक कलेक्टर की कचहरी में आने से कतराते है, और उनके उपस्थित नहीं होने पर RO फॉर्म ख़ारिज कर देता है। बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को इस समस्या का सामना नहीं करना होता, क्योंकि उन्हें सिर्फ 1 ही प्रस्तावक को ही साथ में ले जाना होता है। जो कि कोई मुश्किल कार्य नहीं।
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(2) यदि उम्मीदवार पहली बार चुनाव लड़ रहा है और यदि एफिडेविट में कोई कमी है तो RO एफिडेविट के आधार पर किसी व्यक्ति की उम्मीदवारी को ख़ारिज नहीं कर सकेगा। उम्मीदवार ने एफिडेविट को जैसे भी भरा है, RO को एफिडेविट स्वीकार करना होगा। यदि एफिडेविट में कोई कमी है, तो RO एफिडेविट पर अनुपयुक्त (Defective) और यदि एफिडेविट में कोई कमी नहीं है तो RO एफिडेविट पर उपयुक्त (appropriate) अंकित करेगा। किन्तु RO अनुपयुक्त एफिडेविट के आधार पर व्यक्ति की उम्मीदवारी को ख़ारिज नहीं कर सकेगा।
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(3) यदि उम्मीदवार दूसरी बार चुनाव लड़ रहा है, और पूर्व चुनाव में उसके द्वारा भरा गया एफिडेविट अनुपयुक्त था, तो उम्मीदवार को इस बार उपयुक्त (appropriate) एफिडेविट दाखिल करना होगा। यदि दूसरी बार में भी उम्मीदवार जो एफिडेविट दाखिल करता है वह अनुपयुक्त पाया जाता है तो RO अनुपयुक्त एफिडेविट के आधार पर व्यक्ति की उम्मीदवारी ख़ारिज कर सकेगा। दूसरी बार चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार चाहे तो 1 से अधिक एफिडेविट (अधिकतम 4) दाखिल कर सकता है।
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(b) स्पष्टीकरण :
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(b1) एफिडेविट को जानबुझकर इतना जटिल एवं दुरूह ढंग से डिजाइन किया गया है, कि इसे निर्दोष रूप से भरने के लिए काफी कौशल की जरूरत होती है। बड़ी पार्टियों के उम्मीदवार इसके लिए वकीलों की सेवाएं लेते है, और फॉर्म भरकर जमा करवा देते है। वकील आम तौर पर एक फॉर्म भरने का 10 से 20 हजार चार्ज करता है, जो कि छोटी पार्टी के उम्मीदवार के लिए काफी बड़ी राशि है। अत: छोटी पार्टी के उम्मीदवार को फॉर्म स्वयं ही भरना होता है, और अभ्यास न होने के कारण एफिडेविट ख़ारिज हो जाता है।
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(b2) हर चुनाव में दोषपूर्ण एफिडेविट के कारण ख़ारिज किये जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या काफी बड़ी है, और चूंकि वे लगातार एफिडेविट को और भी जटिल बनाते जा रहे है अत: ख़ारिज किये जाने वाले उम्मीदवारों की यह संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है।
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(4) यदि उम्मीदवार का चुनावी फॉर्म या एफिडेविट ख़ारिज हो जाता है, तो RO जमा की गयी जमानत राशि में से 20% की कटौती करके शेष राशि उम्मीदवार को लौटा देगा।
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(5) एक बार चुनावी फॉर्म जमा करवाने के बाद उम्मीदवार अपने फॉर्म को किसी भी स्थिति में वापिस नहीं ले सकेगा।
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(c) स्पष्टीकरण : फॉर्म वापिस लेने की प्रक्रिया होने के कारण काफी धांधली होती है। कई मामलो में व्यक्ति अपने समर्थको को इकट्ठा करके चुनाव में निर्दलीय के रूप में खड़ा हो जाता है, और बाद में बड़े प्रतिद्वंदी उम्मीदवार से डील करके अपना फॉर्म उठा लेता है। कई बार ऐसा भी होता है कि बड़ा प्रतिद्वंदी उम्मीदवार छोटे उम्मीदवार पर दबाव बनाकर / धमका कर उसे बिठा देता है। अत: हमने फॉर्म वापिस लेने की प्रक्रिया ही ख़त्म कर दी है। जब उम्मीदवार फॉर्म भरे तब सोच समझ कर भरें। और एक बार फॉर्म भरने के बाद उसे किसी भी तरह वापिस नहीं किया जा सकेगा। इससे गंभीर उम्मीदवार मैदान में बने रहेंगे और महज राजनैतिक समीकरण बनाने के लिए फॉर्म भरने वाले उम्मीदवारों की संख्या में कमी आएगी।
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(6) 1 उम्मीदवार एक ही चुनावी फॉर्म भरेगा। उम्मीदवार ऐसी 3 पार्टियों के नाम वरीयता क्रम में लिख सकेगा जिन पार्टियों से वह चुनाव लड़ना चाहता है। चौथा विकल्प निर्दलीय का होगा। यदि व्यक्ति निर्दलीय पर टिक मार्क करता है, और यदि व्यक्ति किसी भी पार्टी का टिकेट (फॉर्म A) प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो RO व्यक्ति को निर्दलीय के रूप में उम्मीदवार घोषित कर देगा। यदि व्यक्ति ने निर्दलीय टिक मार्क नहीं किया है, और यदि व्यक्ति किसी भी पार्टी का टिकेट (फॉर्म A) प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो RO व्यक्ति की उम्मीदवारी ख़ारिज कर देगा।
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(d) स्पष्टीकरण : मौजूदा प्रावधान यह है कि एक व्यक्ति 4 फॉर्म भर सकता है। किन्तु हमने फॉर्म ख़ारिज करने की प्रक्रिया ही हटा दी है, अत: उम्मीदवार को 4 फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं रहेगी। मौजूदा व्यवस्था में यदि कोई उम्मीदवार किसी पार्टी से चुनाव लड़ता है तो उसे पार्टी का फॉर्म भरना पड़ता है, और यदि पार्टी का टिकेट (फॉर्म A) RO के पास नहीं पहुँचता है और यदि उसने निर्दलीय उम्मीदवारी के लिए अलग से फॉर्म नहीं भरा है तो तो उसकी उम्मीदवारी ख़ारिज हो जाती है।
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उपरोक्त धारा यह प्रावधान करती है कि वह एक ही फॉर्म में पार्टी एवं निर्दलीय दोनों के विकल्प भर सकेगा। यदि उसे पार्टी का टिकेट नहीं मिलता है और उसने निर्दलीय पर टिक किया है तो वह स्वत: ही निर्दलीय उम्मीदवार घोषित हो जाएगा।
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(यह ड्राफ्ट अपूर्ण है। इसमें और भी धाराएं जोड़ी जानी शेष है।)
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