Pawan Jury BhilwaraRj
नौ सैनिक विद्रोह, आजाद हिन्द फ़ौज, क्रांतिकारियों द्वारा सशस्त्र हमलो का अंदेशा एवं द्वितीय विश्व युद्ध के कारण जब गोरे भारत छोड़कर जाने के लिए बाध्य हुए तो अपने हित सुरक्षित करने के लिए वे अपने वफादारो (नेहरु एवं कोंग्रेस के अन्य शीर्ष नेता) को सत्ता हस्तांतरित कर गए।
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नेहरु एवं कोंग्रेस के शीर्ष नेताओं ने इतिहास की पाठ्य पुस्तको में क्रांतिकारियों के योगदान को नगण्य स्थान दिया, और गोरो को भगाने का सारा क्रेडिट कोंग्रेस के नेताओ को दे दिया।
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बीजेपी=संघ के नेता गोरो को भगाने का क्रेडिट कोंग्रेस को नहीं देना चाहते, किन्तु वे यह भी नहीं चाहते कि यह क्रेडिट क्रांतिकारियों को दिया जाए। क्योंकि यदि यह क्रेडिट क्रांतिकारियों को दिया जाता है तो संघ की भूमिका पर वाजिब सवाल उठने लगते है। उल्लेखनीय है कि संघ ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा नहीं लिया था, और वे अधिकृत एवं घोषित रूप से इस आन्दोलन से निस्पृह थे।
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अत: उन्होंने गोरो के भारत छोड़कर जाने का क्रेडिट गोरो को ही देने का फैसला कर लिया है !! वे अब कह रहे है कि हमें आजादी भीख में मिली थी !! भीख में !!! जिसका आशय है कि, गोरे खुद अपनी इच्छा से देश छोड़कर गए थे, और इसमें क्रांतिकारियों का कोई योगदान नहीं था !! उन्होंने एक ही झटके में, अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से लेकर, अहिंसामूर्ती राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस, नेवी रिवोल्ट एवं ऐसे लाखों क्रन्तिक्ररियों के योगदान को उठाकर फेंक दिया है !!
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इस तरह कोंग्रेस ने क्रांतिकारियों के श्रेय को हड़प कर उनके योगदान का अपमान किया, और अब बीजेपी=संघ के नेता, कार्यकर्ता राजनैतिक माइलेज लेने के लिए क्रांतिकारियों के प्रयासों से मिली आजादी को भीख बताकर उनकी शहादत पर थूक रहे है !!
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बीजेपी=संघ के सभी शीर्ष नेता एवं कार्यकर्ता "पद्म श्री कंगना रनौत" के बयान का समर्थन कर रहे है, और अपनी तरफ से इसे पूरी तरह से न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रहे है !!
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शायद बीजेपी=संघ के कार्यकर्ता अब 15 अगस्त को "भीख दिवस" के रूप में मनाना शुरू करें !!
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