> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-11-02

Pawan Jury BhilwaraRj

आर्यन - समीर वानखेड़े ड्रामा
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(1) अफीम-भांग-गांजे पर प्रतिबन्ध होने के कारण हैरोइन, कोकीन, एक्सटेसी, जैसी रिफाइंड ड्रग्स की खपत बेहद बढ़ जाती है। शराब भी इसमें शामिल है। अफीम-भांग-गांजे के नशे में फुटकर कारोबार है, और इसमें धनिक वर्ग के लिए एकाधिकार बनाकर मोटा मुनाफा बनाने के अवसर नहीं है। लेकिन रिफाइंड ड्रग्स एक संगठित कारोबार है, जिसे नेता-पुलिस-जज माफिया के गठजोड़ से धनिक वर्ग नियंत्रित करता है।
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समाधान : हमारा प्रस्ताव है कि अफीम-भांग-गांजा पर जिला स्तर पर राज्य स्तर पर एवं राष्ट्रिय स्तर पर जनमत संग्रह करवाए जाने चाहिए। जनमत संग्रह में इन पर प्रतिबन्ध उठाने या न उठाने से सम्बंधित प्रश्न रखा जाए। यदि किसी जिले / राज्य / देश के नागरिको का बहुमत अनुमति देता है तो इन पर से प्रतिबन्ध उठा लिया जाना चाहिए। ऐसे जनमत संग्रह में मेरा वोट प्रतिबन्ध उठाने के पक्ष में होगा।
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शराब एवं दवाईयों की खपत बढ़ाने के लिए ब्रिटिश ने भारत में अफीम-गांजा-भांग पर प्रतिबन्ध लगाए थे। इन प्रतिबंधो को हटाने से शराब एवं रिफाइंड ड्रग्स जो कि ज्यादा खतरनाक ड्रग्स है, की खपत में बेहद तेजी से कमी आएगी।
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बीजेपी-कोंग्रेस-आपा एवं इनके सभी कार्यकर्ता, मोदी-सोनिया-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत अफीम-भांग-गांजे पर जनमत संग्रह करवाने के विरोध में है। 'नशा मत करो' के लेक्चर देने वाले सभी आध्यत्मिक गुरु वगेरह भी इस प्रस्ताव के खिलाफ है। उनका कहना है कि हम अपने प्रवचन सुना सुना कर लोगो का नशा छुडवा देंगे, और यह समस्या हल हो जायेगी !! इसलिए वे अपने अनुयायियों को इस कानून की जरूरत के बारे में सूचना नहीं देते।
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जनमत संग्रह जैसी प्रक्रिया संचालित करने के लिए हमने टी सी पी क़ानून का प्रस्ताव किया है, जिसका ड्राफ्ट आप यहाँ देख सकते है – facebook.com/pawan.jury/posts/3173094346142113
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(2) आर्यन खान की गिरफ्तारी, सुनवाई एवं रिहाई का ड्रामा।
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आधा बोलीवुड कोकीन से लेकर कई प्रकार की रिफाइंड ड्रग लेता है। और यह खुली हुई बात है। मंत्रियो के आदेश पर बड़े अधिकारी इन लोगो को पकड़ते है। पकड़े गए इन बड़े लोगो के 100 में 99 मामलो में मंत्री / नेता आदमी की हैसियत के अनुसार पैसा खींच कर उन्हें छोड़ देते है। पुलिस एवं नारकोटिक्स विभाग का यही काम है – बड़े लोगो को नशे के साथ पकड़ो और उनसे पैसा खींच लो।
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इन 100 मामलो में से 1 मामला सौदा न पटने या किसी राजनैतिक वजह से गिरफ्तारी तक पहुँच जाता है, और मामले को निपटाने का बजट बढ़ जाता है। क्योंकि अब फंसने वाले बड़े आदमी को मीडिया कर्मियों एवं जजों को भी भुगतान करना होता है !! तो अदालत में जाने के बाद सबसे ज्यादा पैसा जजों एवं मीडिया कर्मियों की जेब में जाता है। और वे काफी बड़ी राशि वसूलते है।
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आर्यन खान के मामले में भी यही हुआ। कुल मिलाकर शाहरुख़ खान को 50-100 करोड़ का धक्का लगा है, जो उसने मामला रफा दफा करने के लिए मंत्री-जज-मीडिया आदि को चुकाए।
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पेड मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि आर्यन खान के पास से ड्रग बरामद नहीं हुई है। सबूत के नाम पर उनके पास सिर्फ व्हाट्स एप चेट थी !! तो हुआ यह होगा कि ड्रग बरामद होने के बावजूद इसे सौदा पटने के एवज में रिकोर्ड में से निकाल दिया गया, और यह भी हो सकता है कि ड्रग कभी बरामद हुई ही नहीं थी, लेकिन शाहरुख़ से पैसा खींचने के लिए मामले को खड़ा किया गया।
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समाधान : जूरी कोर्ट एवं जूरी के सामने सार्वजनिक नार्को टेस्ट !!
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जूरी कोर्ट आने के बाद इस तरह के मामलो को नागरिको की जूरी सुनेगी। मुंबई की वोटर लिस्ट में से 25 से 55 आयु वर्ग के नागरिको का लोटरी से चयन किया जाएगा और 50 लोगो की जूरी के सामने यह मामला प्रस्तुत होगा। जूरी दोनों पक्षों को सुनने के बाद संदेह के आधार पर वादी-प्रतिवादी का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने के आदेश दे सकती है। और जैसे ही जूरी नार्को टेस्ट के आदेश देगी वैसे ही बिना इंजेक्शन लिए ही शाहरुख़, आर्यन और वानखेड़े सब कुछ सच सच बकना शुरू कर देंगे !!
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इस तरह के संगठित अपराध को जिसमें नेता-अधिकारी-जज-मीडियाकर्मी-वादी-प्रतिवादी सभी मिले हुए हो जूरी के सामने सार्वजानिक नार्को टेस्ट बिना खोलना नामुमकिन है।
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बीजेपी-कोंग्रेस-आपा एवं इनके सभी कार्यकर्ता, मोदी-सोनिया-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत जूरी कोर्ट के विरोध में है। उनका कहना है कि सभी प्रकार के मामले सिर्फ जज को ही सुनने चाहिए और ऐसे आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए।
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प्रस्तावित जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट यहाँ देखें – facebook.com/pawan.jury/posts/3173085952809619
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