Pawan Jury BhilwaraRj
श्री गुरनाम सिंह जी चढ़ूनी को खुले तौर पर आम चुनाव में भाग लेने का आह्वान करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद जबकि यहाँ टिकैत को कोई धन्यवाद नहीं मिलना चाहिए ।
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यह दुख की बात है कि टिकैत जिसने न केवल जानबूझकर देर से आंदोलन मे भाग लिया बल्कि ईतना ही काम किया कि उन्हें सारा हाइलाइट मिल जाये और चढ़ूँनी जी को जीरो कवरेज मिले।
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यहां तक कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान क्षेत्रों में भी गुरुद्वारा ही थे जिन्होंने जमीनी स्तर से लेकर संगठन तक का अधिकांश काम किया और ये सब उन्होंने टिकैत के आंदोलन मे शामिल होने से बहुत पहले ही शुरू कर दिया था
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हमने 1977 के आपातकाल हटाओ आंदोलन में भी ऐसा ही गलत क्रेडिट लेना देखा था जब जेपी और उनके नेताओं के समूह (मुलायम, लालू आदि) ने लगभग सारे क्रेडिट को हड़प लिया था,जहाँ 1975 से 1977 तक जीवित रहने वाले 50% से अधिक कैदी पंजाब में थे और 20% सिख बाहुल्य क्षेत्रों मे से थे और जमीनी स्तर के सारे काम और सारी सजा का सामना उन्होंने ही किया।
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हम कार्यकर्ताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहिए कि इस बार सभी को यह जानकारी दें कि रोथ्सचाइल्ड ने तीन कृषि कानूनों को गुरुद्वारा, सिख, चारुनीजी आदि के कारण ही समाप्त किया है और कांग्रेस सीपीएम या टिकैत जैसे लोगों ने केवल मामुली सी भूमिका निभाई है।
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ये बिल वापस लेने का मुख्य कारण आने वाले चुनाव थे। देश मे यदि चुनाव समाप्त हो जाते हैं, तो सशस्त्र विद्रोह करने को वैधता मिल जायेगी। इसलिए रोथ्सचाइल्ड मे चुनाव खत्म करने की हिम्मत नहीं है। चूंकि भारत में कार्यकर्ताओं के पास नेताओं और/या संगठन के बिना काम करने के लिए आवश्यक जानकारी और कौशल नहीं है इस वजह से रोथस्चाइल्ड के चमचों के खिलाफ लड़ने के लिए एक संगठन की अभी आवश्यकता है और उस संगठन का काम मुख्य रूप से गुरुद्वारों द्वारा किया गया जिसमें चारुनीजी किसानों का चेहरा बनकर उभरे।
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