> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2022-04-12

Pawan Jury BhilwaraRj

Aditya Prakash Sharma:

क्या एलन, आकाश और बायजू जैसी दिग्गज भारतीय कोचिंग कम्पनिया पूरी तरह से विदेशियों के हाथों बिकने वाली है ?
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जी हां ये सत्य हो सकता है !!

नीचे दिए गए लिंक पर आप क्लिक करके ये देख सकते है कि एलन कोचिंग ने एक अमेरिकी कम्पनी Lupa systems को 1 बिलियन डॉलर के बदले अपनी 35% की हिस्सेदारी बेच दी है ।
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<https://entrackr.com/2022/01/exclusive-kota-famed-allen-career-institute-set-to-raise-funds-at-over-1-bn-valuation/>;

ठीक इसी तरह आकाश कोचिंग ने भी अमिरिकी कम्पनी blackstone group को लगभग 200 मिलियन डॉलर के बदले अपनी 38 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी है ।
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<https://m.economictimes.com/markets/stocks/news/blackstone-picks-up-37-5-stake-in-aakash-educational/articleshow/71824952.cms>;

हालांकि 38 प्रतिशत के बाद ब्लैकस्टोन कम्पनी के मालिक आकाश कोचिंग में 51 प्रतिशत की हिस्सेदारी की मांग कर रहे थे पर इस पर आकाश कोचिंग के मालिक राजी नही थे अतः ये डील रद्द हुई और इसके 1.5 साल बाद ही आकाश कोचिंग को byju कम्पनी ने 1 बिलियन डॉलर देकर खरीद लिया
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<https://www.vccircle.com/blackstone-bags-2x-returns-in-aakash-exit-scripted-by-byju-s-1-bn-acquisition-deal>;

गौर करने वाली बात ये है कि byju कम्पनी भी अपनी 78 प्रतिशत हिस्सेदारी अमेरिकी कम्पनियों को पहले ही बेच चुकी है और बायजू रवीन्द्रन के पास अब कम्पनी का 22 प्रतिशत ही मालिकाना हक बचा है ।
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<https://app.dealroom.co/companies/byju_s>;

इसका अर्थ है कि आकाश कोचिंग को अमिरिकी ब्रिटिश धनिकों द्वारा संचालित byju कम्पनी ने खरीद लिया है ।

तो आखिर राजेश माहेश्वरी(एलन के मालिक), जे. सी. चौधरी(आकाश के मालिक) और बायजू रवीन्द्रन(बायजू के मालिक) जैसे उद्यमी व्यक्ति अपनी कम्पनियों की हिस्सेदारियो को विदेशियों को बेचने हेतु क्यो मजबूर हुए ।

जागरूकता वादी लोग इस बात के पीछे ये तर्क दे सकते है कि इन लोगो को अपने बिजनेस को बढाने हेतु अधिक पैसे की आवश्यकता रही होगी । अतः उन्होंने अपनी हिस्सेदारियो को बेचा ।

जबकि ये तर्क बिल्कुल बेबुनियाद है क्योकि यदि

1) किसी कम्पनी को पैसा चाहिए होता है तो वो शेयर मार्केट में खुद को लिस्ट करवा कर ipo ला सकती है ।

2) साथ ही ये कम्पनियां इतनी बड़ी ब्रांड है कि यदि इनको भारत भर में अपने सेंटर खोलने ही है तो ये अपने ब्रांड वैल्यू के आधार पर फ्रेंचाइजी देकर हर शहर में अपने सेंटर खोल सकते है । इसमें इनका एक रुपये का भी इन्वेस्टमेंट नही होता बल्कि ये फ्रेंचाइजी पार्टनर से फ्रेंचाइजी देने के एवज में पैसा ले सकते है ।

पर फिर भी इन लोगो को अपनी हिस्सेदारिया बेचने पर मजबूर क्यो होना पड़ा ?

क्योकि इसका कारण है = मोदी सोनिया केजरी समेत सभी सत्ताधारी पार्टियों द्वारा 2020 में भारत मे शिक्षा के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी दी गयी
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<https://www.livemint.com/education/news/govt-plans-to-ease-rules-on-foreign-investment-in-education-sector/amp-11581358606272.html#aoh=16497510692753&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com&amp_tf=From%20%251%24s>;

तो शिक्षा क्षेत्र में FDI आने से भारतीय कोचिंग दिग्गज अपनी हिस्सेदारी बेचने हेतु क्यो मजबूर हुए ?

देखिए इसको एक उदाहरण से समझते है मान लीजिए आपके पास कोई दुकान है जिसकी कीमत 50 लाख है अब कोई दबंग आपके घर पर आता है और कहता है कि मुझे ये दुकान 30 लाख में बेचो हालांकि आप का कोई मानस नही था दुकान बेचने का पर वो जो दबंग आपके पास आया है तो उसके एक हाथ मे डंडा है और एक हाथ मे 30 लाख और मिठाई का डिब्बा (और अदालत+पुलिस पहले ही उसकी जेब मे है) तो फिर आप क्या करेंगे ?

ठीक ऐसा ही हमारे उद्यमि कोचिंग मालिको के साथ हो रहा है । मतलब की यदि भारतीय कोचिंग मालिक अमिरिकी ब्रिटिश धनिकों के आफर को ठुकराते है तो अमिरिकी ब्रिटिश धनिक पेड मीडिया में पैसा फेक कर इन लोगो के कपड़े फड़वाने शुरू करेंगे जैसा कि वो लोग हिन्दू सन्तो को मीडिया में बदनाम करवा चुके है और फिर जजो के द्वारा इन पर सौ दो सौ फर्जी केस करवा कर अंदर कर देंगे । इसीलिए इन लोगो ने हिस्सेदारी बेचना उचित समझा ।

शिक्षा के क्षेत्र में FDI के क्या नुकसान होंगे -

1) अब ये सभी उद्यमी 2, 3 साल में ही इन कोचिंग संस्थानों में अपना मालिकाना खो देंगे और इनके द्वारा खड़े किए गए ब्रांड को अमरीकी ब्रिटिश धनिक चलाएंगे और मुनाफा कमाएंगे । जैसे कि 1991 के दशक में भारत मे बेवरेज इंडस्ट्री में FDI को अनुमति मिली थी तब भारत के ब्रांड लिम्का, कैम्पकोला, थम्बसप, गोल्डस्पॉट इत्यादि कम्पनियों को पेप्सी और कोकाकोला ने खरीद लिया था ।

2) मोदी सोनिया केजरी ने मिलकर लॉक डाउन लगाया और बच्चो को ऑनलाइन एजुकेशन की तरफ धकेल दिया इससे अब जो छोटे शहरों और कस्बों में जो छोटे कोचिंग संचालक है उनकी कोचिंग बंद हो चुके है या बंद होने के कगार पर पहुच चुके है क्योकि बच्चो को वो इन बड़े विदेशी ब्रांड्स जैसी हाई फाई luxurious 'सुविधाए' नही दे पा रहे है ।

3) अमिरिकी मल्टीनेशनल कम्पनियां FDI के रूप में जिस भी देश मे जाती है वहा मिशनरियों का प्रभाव अपने आप बढ़ने लगता है ।
अब जबकि भारत के शिक्षा क्षेत्र में अमिरिकी दबदबा कायम हो जाएगा तब भारतीय और खासकर हिंदुओ के बच्चो को ईसाई धर्म की तरफ मिशनरी खींचना शुरू करेंगे और हिन्दू संस्कृति का क्षरण बढ़ता जाएगा ।

4) FDI का एक बुरा प्रभाव और भी है कि भारतीय समाज मे अश्लीलता व्यापक पैमाने पर बढ़ेगी ।

5) और सबसे बड़ा दुखद परिणाम होगा कि अंत मे विदेशी कम्पनियां जो अभी डॉलर लेकर के आ रही है जब वो अपना लाभांश मांगेगी तो वो लाभांश भारत के रिज़र्व बैंक को डॉलर में चुकाना पड़ेगा इससे हमारा डॉलर रिज़र्व पर अतिरिक्त भर पड़ेगा और हमारे ऊपर डॉलर पुनर्भरण की विकट समस्या बढ़ जाएगी ।

तो आखिर इन भयंकर हानियों के चलते हुए भी मोदी सोनिया केजरी ने शिक्षा के क्षेत्र में FDI को मंजूरी क्यो दी ?

क्योकि किसी भी देश को चलाने हेतु डॉलर की जरूरत होती है और हमारा देश ऐसे सामान या प्रोडक्ट नही बना रहा जिनको बेच कर हम दूसरे देश से डॉलर ला सके । तो हमारे तथाकथित फर्जी राष्ट्रवादी नेताओ मोदी सोनिया केजरी को देश चलाने का एक ही तरीका दिखता है और वो है प्रत्यक्ष विदेशी निवेश । ये लोग हर क्षेत्र में एक के बाद एक FDI को मंजूरी देते जा रहे है ताकि देश चलाने हेतु डॉलर मिलता रहे ।

तो अभी ये दौर चलेगा जिसमे हमारी सारी सरकारी निजी कंपनियों को विदेशी खरीदते चले जाएंगे और अंत मे जब सारी कम्पनियां बिक जाएगी तो हमारा देश श्री लंका की तरह दिवालिया हो चुका होगा ।

समाधान = FDI का समाधान है हम अपने नेताओं पर लगाम लगाए की वो fdi को मंजूरी न दे इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को नौकरी से निकालने का अधिकार हम जनता के पास होना चाहिए यानी वोट वापसी PM, और वोट वापसी CM कानून ।
यदि ये कानून गेजेट में छपेगा तो अगले ही दिन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की अक्ल ठिकाने आ जाएगी और ये लोग FDI को मंजूरी नही देंगे । इसके साथ ही हमे हमारी सेना को हथियारों में आत्मनिर्भर बनाना पड़ेगा ताकि हम दुश्मनों का अपने दम पर मुकाबला कर सके और अमेरिका सहित कोई भी देश हमको न धमका सके कि हमारी कम्पनियों को भारत मे घुसने दो । इसके लिए हमे jury court कानून को गेजेट में छपवाना होगा ।

साथ ही सभी छोटे बड़े कोचिंग संचालको और शिक्षकों को छात्रों को ये जानकारी देनी होगी और एक नेताविहीन जनान्दोलन हेतु छात्रों को तैयार करना होगा कि ये कानून जल्द ही लागू हो जाए ।

वोट वापसी CM और जूरी कोर्ट कानून का ड्राफ्ट पढ़ने हेतु इस लिंक पर क्लिक करे
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www.Tinyurl.com/VvpCM
www.Tinyurl.com/JuryCourt

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