> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-10-14

Pawan Jury BhilwaraRj

सबरीमाला विवाद—25 से 55 वर्ष के बीच की उम्र के क्रमरहित चुने हुए 1500 हिन्दू वोटर्स की जूरी द्वारा सुनवाई और फैसला
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कांग्रेस-संघ-सीपीएम-आप, ये सभी पार्टियाँ और इनके कार्यकर्ता मिशनरीज़ के एजेंट भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट जजों के महिलायों के प्रवेश के फैसले का समर्थन कर रहे हैं और एक बड़ा जनविरोध उठने के बाद, अब ये सभी कदम पीछे खीच रहें हैं !!!
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संघ द्वारा दिया गया एक बयान देखें--- <https://www.news18.com/news/india/rss-backs-womens-entry-in-temples-says-such-unfair-traditions-should-be-discarded-1215530.html>;
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संघ मंदिरों में निषेध स्थानों पर महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करता है और ये कहता है कि ऐसे कुरीतियों को हटा देना चाहिए !!
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“ऐसे संवेदनशील मुद्दे संवाद और चर्चा द्वारा सुलझाने चाहिए ना कि आक्रोश से,”—संघ कहता है
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और ऐसी 10 से ज्यादा न्यूज़लिंक आपको मिल जाएँगी जिसमे कांग्रेस-सीपीएम पार्टीयों के नेताओं ने भी मिशनरीज़ के एजेंट सुप्रीम जजों के फैसले का समर्थन किया है |
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और अब जबकि केरला में इस फैसले के विरोध में एक बड़ा आक्रोशित जनांदोलन खड़ा हो गया है, तो ये सभी पार्टियाँ अपना रुख बदल रहे हैं और मंदिर में महिलायों के प्रवेश निषेध का समर्थन कर रहे हैं !!
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कुल मिलाकर सार ये हैं -- कांग्रेस-संघ-सीपीएम-आप ये सभी पार्टियाँ और इनके कार्यकर्तायों का कोई वजूद नहीं है , ये सब वही करते हैं जो सुप्रीम कोर्ट के जज और मिशनरीज और अमेरिका-ब्रिटेन के धनिक कहते हैं | लेकिन जब जन आक्रोश उमड़ता हैं तब ये अपना रुख बदल लेते हैं !! पर जैसे ही जन आक्रोश कमजोर पड़ता है, ये फिर से मिशनरीज और अमेरिका-ब्रिटेन के धनिकों की घुलमि शुरू कर देते हैं |
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प्रस्तावित समाधान—कार्यकर्ताओं को भारत में जूरी सिस्टम और राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज कानून लाने के लिए कार्य करना चाहिए |
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यदि आप राईट टू रिकॉल सुप्रीम कोर्ट जज कानून से सहमत हैं तो कृपया <https://newindia.in/causes/RtrSCCj>; पर वोट कर अपना समर्थन दर्ज करें | साथ में <https://fb.com/ProposedLawsHindi/posts/859860420858820>; पर दिए गए सम्पूर्ण ड्राफ्ट को “Law Drafts I Support” एल्बम में शेयर भी करें |
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आपसे विनती हैं सोमोके और कांग्रेस-संघ-आप नेताओं और कार्यकर्ताओं के पीछे अपना समय ख़राब ना करें | ये दोगले लोग बढ़ते आक्रोश का अभी समर्थन करेंगे, पर जैसे ही आक्रोश कमजोर पड़ेगा, ये मिशनरीज के फैसले का पुन: समर्थन करने लगेंगे |
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