> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-10-12

Pawan Jury BhilwaraRj

प्रोफेसर डॉ.जी. डी. अग्रवाल, पूर्व प्रोफेसर, आई आई टी कानपुर, गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अनशन कर रहे थे -- अपने अनशन के 110 वे दिन उनकी मृत्यु हो गयी!!! वे 86 वर्षीय थे।
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मैं आमरण अनशन के विरुद्ध हूँ। विरोध दर्ज करने के लिए प्रतीकात्मक उपवास तक ठीक है -- लेकिन मरने तक नहीं।
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दुरात्मा अन्ना हज़ारे और महादुरात्मा गाँधी जैसे धूर्त लोगो और पेड मीडिया मालिकों की वजह से आमरण अनशन भारत में एक सर्कस बनकर रह गया है। माननीय प्रोफेसर एक नेक व्यक्ति थे, लेकिन क्यों ऐसे मार्ग चुनना जिसे पेड मीडिया ने एक मजाक बनाकर रख दिया है।
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मेरे विचार में कार्यकर्ताओं को आमरण अनशन जैसे व्यर्थ समाधानों को छोड़कर कानूनी ड्राफ्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और इन ड्राफ्ट्स पर चुनाव भी लड़ना चाहिए। मेरे विचार में, जब चुनाव लड़ना प्रतिबंधित हो जायेगा, तब भी आमरण अनशन की जगह महात्मा उधमसिंह योजना पर कार्य करना ज़्यादा नतीजे देगा। हर कार्यकर्ता को अपने उद्देश्य हेतु चुनाव जरूर लड़ना चाहिए लेकिन आमरण अनशन एक व्यर्थ प्रयास है।
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माननीय प्रोफेसर साहब को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि -- ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। प्रोफेसर साहब मृत्यु तक अपने उद्देश्य हेतु प्रतिबद्ध और ईमानदार बने रहे, ऐसा आज के समय बहुत कम देखने को मिलता हैं
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<https://hindi.timesnownews.com/india/article/environmentalist-gd-agrawal-dies-who-fasting-on-cleaning-of-ganga-issue/297889>;
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दिल को छू लेने वाला मोदी साहेब का यह ट्वीट भी पढ़े , जो उन्होंने 2012 में किया था । तब जी डी अग्रवाल अनशन पर थे ।
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मोदी साहेब का ट्वीट ---- “स्वामी सानंद गंगा की धारा अविरल बनाए रखने के लिए आमरण अनशन पर है । मैं उनके स्वास्थ्य की कामना करता हूँ , और आशा करता हूँ कि केंद्र सरकार गंगा को बचाने के लिए सार्थक क़दम उठाएगी” !!
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<https://twitter.com/narendramodi/status/181972357643112450>;
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