> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2019-06-22

Pawan Jury BhilwaraRj

My Letters to Pm रजिस्टर : अध्याय 2 , पेज नंबर 013 , तारीख 10-6-2019
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शीर्षक : मेरे राजनैतिक विश्वास
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(1) जजों के बारे में :
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1.1. सुप्रीम कोर्ट – मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत की सुप्रीम कोर्ट के कुल जजों में से 90% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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1.2. हाई कोर्ट - मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत की हाई कोर्ट के कुल जजों में से 80% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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1.3. निचली कोर्ट - मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत की निचली अदालतों के कुल जजों में से 90% जज भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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टिपण्णी : सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट एवं निचली अदालतों के जो जज बिकाऊ नहीं है वे निकम्मे, स्वार्थी एवं पद प्रतिष्ठा के आकांक्षी है और इस वजह से वे भारत की अदालतों को सुधारने के लिए न तो कोई कदम उठाते है और न ही परवाह करते है – ऐसा मैं विश्वास करता हूँ ।
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निष्कर्ष : मेरा मानना है कि, भारत की अदालतें एवं जज देश की सबसे भ्रष्ट संस्था है। जजों के भ्रष्टाचार को ख़त्म किये बिना देश की किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। जो कार्यकर्ता एवं नेता जजों के भ्रष्टाचार पर अपना रुख साफ़ नहीं करता, मैं उसे एक फर्जी कार्यकर्ता / फर्जी नेता मानकर खारिज करता हूँ।
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[ फुटनोट : पाठक के लिए सूचना – अपने रजिस्टर में यह अध्याय अवश्य जोड़े, तथा जजों पर आपकी जो “मान्यता” हो उसे लिखे। यदि आपको लगता है कि भारत के जज ईमानदार है तो ऐसा ही लिखे। परन्तु जजों पर अपनी मान्यता रखना अनिवार्य है। ]
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(2) राजनीती शास्त्रियों एवं अर्थ शास्त्रियों के बारे में :
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2.1. राजनीति शास्त्रियों के बारे में – मेरा दृढ़ विश्वास है कि राजनीति शास्त्र ( जिसे में राजनीति अंध शास्त्र भी कहता हूँ ) के सभी विशेषग्य, प्रोफेसर्स, लेक्चरर इत्यादि में से 70% भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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2.2. अर्थशास्त्रियों के बारे में - मेरा दृढ़ विश्वास है कि अर्थशास्त्र के सभी विशेषग्य, प्रोफेसर्स, लेक्चरर, स्तम्भ लेखक इत्यादि में से 70% भ्रष्ट एवं बिकाऊ है।
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टिप्पणी – जो शेष 30% भ्रष्ट एवं बिकाऊ नहीं है वे 30% अनिवार्य रूप से निकम्मे, पद लोलुप एवं पद प्रतिष्ठा के आकांक्षी है, और उन्हें भारत की अर्थ व्यवस्था एवं राजनैतिक व्यवस्था सुधारने में कोई रुचि नहीं है ।
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मेरा मत – अनुपादक विषयों के इन विशेषज्ञों ने भारत में जितना वैचारिक प्रदुषण फैलाया है उसका कोई जोड़ नहीं है । समाज जब तक इन्हें सुनता पढता रहेगा या इन्हें तवज्जो देता रहेगा तब तक भारत में राजनैतिक आर्थिक सुधार लाना मुमकिन नहीं है – ऐसी मेरी मान्यता है !!
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3. BJP = RSS के बारे में
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जिस तरह गंगाधर एवं शक्तिमान एक ही व्यक्ति है और अलग अलग अवसर पर अलग तरह की वेश भूषा एवं भिन्न नाम से सामने आता है उसी तरह BJP एवं Rss एक ही संगठन है और इसके सदस्य अपनी सुविधा एवं अवसर के अनुसार BJP एवं RSS के अलग अलग किरदारों के रूप में सामने आते है – ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है.
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भारत में कई लोगो एवं बच्चो का मानना है कि गंगाधर एवं शक्तिमान अलग अलग व्यक्ति है, और साथ ही वे BJP एवं RSS को भी दो अलग अलग संगठन मानते है. मैं उन्हें कहता हूँ कि उन्हें जो भी मान्यता ठीक लगे वो मान सकते है. किन्तु मेरा मानना है कि RSS एवं BJP में जो अंतर है वह अंतर उतना ही है जितना गंगाधर एवं शक्तिमान में है.
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मेरी इस मान्यता के कारण मैं संघ के सभी कार्यकर्ताओ को बीजेपी का कार्यकर्ता एवं बीजेपी के कार्यकर्ताओं को संघ का कार्यकर्ता कहकर पुकारता हूँ.
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4. केंचुआ = केन्द्रीय चुनाव आयोग के बारे में
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केंचुआ = केन्द्रीय चुनाव आयोग के बारे में मेरी मान्यता है कि केंचुआ भारत की दुसरे(*) नंबर की सबसे भ्रष्ट संस्था है.
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मेरा मानना है कि Evm मशीनों को देश पर थोपकर चुनाव आयोग ने हमारे पूरे लोकतंत्र को हाईजेक किया हुआ है. मैं विश्वास करता हूँ कि केंचुआ ही Evm का हैकर है. और चूंकि केंचुआ आम कार्यकर्ताओ को evm का अवलोकन करने का अवसर नहीं देता इसीलिए यह साबित है कि जिसे Evm खोलने या इससे छेड़खानी का अवसर मिले वह इसे हैक कर सकता है.
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(*) भ्रष्टाचार में केंचुआ शीर्ष संस्था नहीं है. भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट का कोई मुकाबला नहीं है, और मैं सुप्रीम कोर्ट को देश की सबसे भ्रष्ट संस्था मानता हूँ. मेरा मानना है कि भारत में नेताओं-अधिकारियों के हर प्रकार के हर स्तर के भ्रष्टाचार की जिम्मेदार सुप्रीम कोर्ट है और सुप्रीम कोर्ट ही भारतीय भ्रष्टाचार की गंगोत्री है.
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5. ऊँचे कद वाले ब्रांडेड नेताओं के बारे में :
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निचे दिया गया चित्र बताता है कि भारत की सभी पार्टियों के ब्रांडेड नेताओं की क्या स्थिति है और उनके अंध भगत उन्हें किस दृष्टी से देखते है.
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भारत के सभी ब्रांडेड नेता चुनाव जीतने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा संचालित मीडिया पर बुरी तरह से निर्भर करते है. पेड मीडिया इन नेताओं का जलवा बनाये रखने के लिए टीवी-अख़बार के जरिये इनकी सकारात्मक छवि का निर्माण करता है. पेड मीडिया द्वारा रची गयी इसी छवि की चपेट में आकर मतदाता इन्हें वोट करते है और इन नेताओं के अंध भगत इन्हें मसीहा के रूप में देखते है. जैसा कि चित्र में दिखाया गया है कि पानी के ऊपर ऊपर देखने से हमें आभास होता है कि हम शार्क देख रहे है. जबकि पानी के निचे देखने पर मालूम होता है कि यह बेबी शार्क भी नहीं है, बल्कि एक नुमाइशी मछली है.
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