Pawan Jury BhilwaraRj
रफाल आयातित विमान है, और इसमें किल स्विच है।
1) आयतित हथियार के साथ समस्या यह है कि सेना सिर्फ तब और तब तक ही युद्ध लड़ सकती है जब तक कि हमें विदेशी हथियार भेजते रहे। हथियार भेजना बंद , युद्ध बंद !! तो अगhर युद्ध हो जाता है और हमारे 10-20 रफाल नष्ट हो जाते है तो हमें तुरंत और रफाल चाहिए होंगे। और युद्ध के दौरान विमान खरीदने के लिए 10 गुना दाम चुकाने होंगे।
2) किल स्विच - रफाल में किल स्विच भी है। जितने आधुनिक हथियार विदेशियों द्वारा निर्मित है , उनमे विदेशी किल स्विच डालते है। खरीदने वालो को नहीं पता होता कि इसमें कहाँ और कैसा किल स्विच है. इसे खोजा भी नहीं जा सकता। और यदि हथियार बनाने वाली कम्पनी इन्हें एक्टिवेट कर दे तो हथियार काम करना बंद कर देता है। मतलब युद्ध शुरू हुआ तो रफाल के निर्माता इसका किल स्विच एक्टिवेट कर देंगे और यह प्लेन स्टार्ट ही नहीं होगा। उससे भी बदतर यह होगा कि रफाल वाले सीधे चीनियों से संपर्क करके कहेंगे कि भारत के प्लेन हम हवा में बंद कर देंगे इतने उतने पैसे हमें दे दो। चीन उन्हें पैसे दे देगा। फिर जब भारत के प्लेन उड़ान भरेंगे तो उड़ान के दौरान इंजन बंद हो जाएगा और प्लेन गिर जाएगा। चीन इसके बदले में रफाल के निर्माता को 10-20 हजार करोड़ दे देगा। तो इस तरह चीन सिर्फ पैसा खर्च करके भारत के रफाल उडवाते जायेगा। यदि भारत रफाल वालो को कहता है कि प्लेन हवा में जाकर खराब क्यों हो जा रहे है , तो रफाल वाले कहेंगे कि आप 10-20 हजार करोड़ डॉलर भेज दो तो उड़ते रहेंगे !!
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कोंग्रेस को यह जानकारी जनता में पहुँचाने में इंटरेस्ट नहीं है। क्योंकि वे भी हथियारों की खरीद से अरबों रूपये कमाते आये है , और आगे भी कमाने वाले है। संघ के कार्यकर्ता भी यह बात जनता तक नहीं पहुँचाना चाहते। और जहाँ तक मीडिया की बात है तो मीडिया के मालिक और रफाल के मालिक एक ही है। तो आयातित और किल स्विच शुदा रफाल के मुद्दे को साइड में करके ये लोग इसकी कीमत को लेकर बवाल मचा रहे है।
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यह सूचना जनता से छुपाना ही रफाल डील का सबसे बड़ा घोटाला है। और सभी आयातित हथियारों के मामले में यही घोटाला किया जाता है।
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इस समस्या से बचने का सिर्फ एक उपाय है कि भारत अपने हथियार खुद से बनाये — “100% मेड इन इण्डिया , मेड बाय इंडियन्स” पालिसी के तहत. अन्य कोई उपाय नहीं. भारत में स्वदेशी आधुनिक हथियारों का निर्माण संभव बनाने के लिए हमें वेल्थ टेक्स , एम आर सी एम एवं जूरी सिस्टम कानूनों की जरूरत है. यदि ये क़ानून गेजेट में आ जाते है तो भारत अपने हथियारो का उत्पादन स्वयं करने में सक्षम हो जाएगा.
यदि हम प्रधानमन्त्री को 1) वेल्थ टेक्स , 2) एम आर सी एम और 3) जूरी सिस्टम कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करने के लिए बाध्य कर दें तो भारत की सेना को इतना ताकतवर बनाया जा सकता है, कि हम अमेरिका के सामने टिक सके।
इन कानूनों को सिर्फ प्रधानमंत्री ही लागू कर सकते है। लेकिन जब तक प्रधानमंत्री पर रिकॉल नहीं आएगा , तब तक भारत का कोई भी प्रधानमन्त्री वेल्थ टेक्स, जूरी सिस्टम और एम आर सी एम कानूनों को गेजेट में छापने के लिए तैयार नहीं होगा। अत: सेना को मजबूत करने के लिए हमें राईट टू रिकॉल प्रधानमन्त्री का क़ानून चाहिए। राईट टू रिकॉल पीएम का क़ानून आने बाद भी यदि प्रधानमंत्री भारत की सेना को मजबूत बनाने के लिए वेल्थ टेक्स और एम आर सी एम कानूनों को गेजेट में नहीं छापता है तो नागरिक 5 वर्षों तक इंतजार किए बिना उसे नौकरी से निकालकर किसी ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री बना सकेंगे जो इन कानूनों को गेजेट में छापने की हिम्मत दिखाने को तैयार हो।
राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करने से भारत में यह क़ानून लागू हो जाएगा। इसका ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें - <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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