> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-12-04

Pawan Jury BhilwaraRj

राईट टू रिकॉल = वोट वापस लेने का अधिकार
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यदि आप चाहते है कि देश की किसी समस्या का समाधान आये , तो सबसे सीधा एवं सरल तरीका यह है कि खुद को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा हुआ समझ कर सोचना शुरु कीजिये। जैसे ही आप खुद को पीएम की तरह देखने लगेंगे वैसे ही आपको यह मालूम हो जाएगा कि प्रधानमंत्री कितना काम कर रहा है , और कितना टाइम पास कर रहा है।
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तो मान लीजिये कि आप प्रधानमंत्री है और पीएम की कुर्सी पर बैठे है। अगला प्रश्न है कि प्रधानमंत्री और एक आम व्यक्ति में क्या अंतर है ? तकनिकी रूप से सिर्फ एक अंतर है , जिससे फर्क पड़ता है -- असल में प्रधानमंत्री के पास गेजेट छापने की शक्ति है, जबकि आपके पास नहीं है। इस एक चीज के अलावा पीएम और आपमें कोई उल्लेखनीय अंतर नहीं है , जो कि मायने रखता हो।
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गेजेट क्या है ? गेजेट यानी राजपत्र। राजपत्र यानी जिस पत्र पर राजा की मुहर हो। लोकतंत्र में पीएम राजा है, और राज मुहर है अशोक स्तम्भ। जिस पत्र पर राजा अपना साइन करके अपनी मुहर लगाएगा वह राजाज्ञा है। राजा यानी पीएम का स्टाफ लगभग 1 करोड़ सरकारी कर्मचारी। पीएम को जब भी अपने मातहत अधिकारियो या जनता के लिए कोई आदेश / निर्देश देने होते है तो उन्हें वह गेजेट में निकाल देता है। गेजेट में कुछ भी छापने के लिए पीएम को लोकसभा या राज्यसभा से अनुमति नहीं लेनी पड़ती। पीएम गेजेट में सीधे भी कुछ भी छाप सकता है। पीएम जो भी बात गेजेट में छाप देगा वह देश में तुरंत प्रभाव से लागू हो जायेगी। जो आदमी गेजेट में लिखी गयी बात की अवहेलना करेगा या तो उसकी नौकरी जायेगी या वह जेल जाएगा। इस तरह पीएम राजपत्र यानी एक कागज से पूरा देश चलाता है। भारत की सेना , पुलिस , आई ए एस अधिकारी , बैंक्स सब कुछ राजपत्र के अधीन है। और चूंकि पीएम के पास राजपत्र में कुछ भी छापने की शक्ति है इसीलिए ये सब पीएम के अधीन हो जाते है। जब लोकसभा भंग हो जाती है तो पीएम के हाथ से गेजेट छापने की शक्ति निकल जाती है।
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तो पीएम किस तरह सोचता है ?
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पीएम का काम सिर्फ यह सोचना है कि मैं गेजेट में ऐसा क्या छाप दूँ कि ऐसा हो जाये। और जब पीएम यह सोच लेता है कि यह इबारत गेजेट में छाप देने से ऐसा हो जाएगा, तो पीएम उसे गेजेट में छाप देता है। उदाहरण के लिए , यदि पीएम सोचता है कि देश के प्रत्येक गरीब से गरीब नागरिक का बैंक में खाता होना चाहिए ताकि गरीबो को सुविधा मिले, बैंको की ताकत बढे और अर्थव्यवस्था पर बैंको का ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण हो। तो पीएम सबसे पहले यह सोचेगा कि मैं गेजेट में क्या छाप दूं कि ऐसा हो जाए। फिर पीएम गेजेट उठाता है और उसमे छापता है कि -- सभी राष्ट्रीयकृत बैंको के निदेशको को निर्देश दिए जाते है कि यदि कोई नागरिक सिर्फ आधार कार्ड लेकर आये तो भी वे उसका जीरो बेलेंस एकाउंट तत्काल खोलकर दें। बस हो गया। अब अगले दिन से लोग देश भर के बैंको की ब्रांचो में आधार कार्ड लेकर पहुंचेगे और जन धन योजना लागू हो जाएगी। अब बैंक जीरो बेलेंस एकाउंट खोलने से इनकार नहीं कर सकता। क्योंकि यह आदेश गेजेट में आया है।

फिर पीएम सोचता है , कि अब मैं और क्या करूं कि बैंको की ताकत और भी बढे। तो वह गेजेट में छापता है कि, सभी नागरिक अपने 1000 एवं 500 के नोट अगले 2 महीने के अंदर बैंको में जमा करवा कर नए नोट ले ले, क्योंकि 2 महीने के बाद ये नोट गैर कानूनी हो जायेंगे। पीएम इसी गेजेट में बैंको के लिए यह निर्देश भी छापता है कि यदि कोई व्यक्ति 1000-500 के नोट लेकर आये तो उन्हें नए नोटों से बदल दो। पीएम गेजेट में रिजर्व बैंक गवर्नर के लिए यह भी छापता है कि वह इतने उतने नए नोट छापकर बैंको को दे दे। और इस तरह पीएम गेजेट का इस्तेमाल करके एक घंटे में देश भर को हिला कर रख देता है !!!
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किसी राजनैतिक पार्टी के कार्यकर्ता और एक रिकालिस्ट में क्या बुनियादी अंतर है ? हम रिकालिस्ट इस नजरिये से सोचने के आदी है कि गेजेट में ऐसा क्या छापा जाए कि पुलिस एवं जजों के भ्रष्टाचार में कमी आये , बेरोजगारी एवं महंगाई की समस्या कम हो , शिक्षा का स्तर सुधरें , सरकारी अस्पतालों में सुधार आये आदि। गेजेट में हम ऐसा क्या छाप दें कि राम मंदिर का निर्माण हो , गंगा प्रदुषण मुक्त हो , गौ हत्या में कमी आये , मंदिरों का प्रशासन मजबूत हो , मिशनरीज एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के प्रभाव में कमी आये , भारत की सेना आत्मनिर्भर एवं मजबूत हो जाए आदी आदी। और फिर हम लिखे गए इन गेजेट नोटिफिकेशन के ड्राफ्ट पीएम को भेजते है, और पीएम से कहते है कि इसे गेजेट में छाप दो। हम ये ड्राफ्ट नागरिको कप भी देते है और उनसे कहते है कि वे पीएम से इन्हें गेजेट में छापने को कहे।
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हम रिकालिस्ट्स ने देश की विभिन्न समस्याओ के समाधान के लिए लगभग 200 गेजेट नोटीफिकेशन के ड्राफ्ट दिए है। प्रत्येक ड्राफ्ट को गेजेट में छापने से देश की किसी एक समस्या का समाधान आएगा। कार्यकर्ताओ से हमारा आग्रह है कि वे अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों पर यह दबाव बनाए कि वे अपने ड्राफ्ट सार्वजनिक करें जिन्हें गेजेट में प्रकाशित करने से किसी समस्या का समाधान आएगा। और तब आप पायेंगे कि उन सभी की रूची समस्या के समाधान में नहीं है , वे सिर्फ समस्या को उभारकर वोट इकठ्ठे कर रहे है। लेकिन यदि आप देस की किसी समस्या के समाधान की तलाश में है तो आपको यह सोचना शुरू करना चाहिए कि गेजेट में क्या इबारत छाप देने से इस समस्या का समाधान आएगा।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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