> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-12-02

Pawan Jury BhilwaraRj

राईट टू रिकॉल को लेकर पूछे जाने वाले कुछ सामान्य प्रश्न एवं उनका स्पष्टीकरण :
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१) भारत बहुत बड़ा देश है। राईट टू रिकॉल जैसे क़ानून छोटे देशो के लिए तो उपयुक्त है, किन्तु भारत जैसे देश के लिए ?

देश बड़ा छोटा होने से कुछ नहीं होता। प्रत्येक देश प्रशासन की दृष्टी से छोटी छोटी इकाइयों में विभाजित होता है। देश में राज्य , राज्य में जिले, जिलो में तहसील एवं गाँव आदि होते है। एक जिले में एक पुलिस प्रमुख होता है। भारत का जिला हो या अमेरिका का जिला हो या स्विट्जर्लेंड का जिला हो, जिले की आबादी एवं आकार कमोबेश एक जैसा ही रहता है। पुलिस प्रमुख या किसी जिला अधिकारी को शेष भारत से कोई मतलब नहीं , उसे सिर्फ अपना जिला देखना होता है।
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२) राईट टू रिकॉल आने से रोज रोज चुनाव होने लगेंगे ?

नहीं होंगे। अधिकारी को बदलने का अधिकार सिर्फ आपको नहीं दिया जा रहा है। रिकाल सिर्फ तब होगा जब किसी जिले के नागरिको का बहुमत रिकॉल करना चाहेगा। मान लीजिये किसी जिले में १० लाख मतदाता है, एवं पदासीन जिला पुलिस प्रमुख को ६ लाख अनुमोदन प्राप्त है। तो रिकॉल सिर्फ तब होगा जब किसी उम्मीदवार को पदासीन पुलिस प्रमुख से अधिक अनुमोदन प्राप्त हो एवं यह अनुमोदन ५ लाख से अधिक भी हो। तो कुछ हजार मतदाता के चाहने से रिकॉल होना संभव नहीं है। जब तक जिले के नागरिको का बहुमत नहीं चाहेगा तब तक रिकॉल नहीं होगा। लेकिन जैसे जैसे पुलिस प्रमुख का भ्रष्टाचार एवं निकम्मापन नागरिको के सामने आता जाएगा वैसे वैसे उसके अनुमोदनो की संख्या कम होती जाएगी। और जब उसका प्रदर्शन बेहद घटिया स्तर तक पहुँच जाएगा तो रिकाल होगा।

व्यवहारिक रूप से यह देखने में आया है कि रिकॉल की कभी नौबत ही नहीं आती। क्योंकि अधिकारी रिकॉल होने की सम्भावना देखकर तुरंत अपने व्यवहार में परिवर्तन ले आता है।
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३) राईट टू रिकॉल विदेशी कांसेप्ट है। हम स्वदेशी में मानते है।

पहली बात -- भारत की रेल से लेकर प्लेन एवं आपके मोबाइल से लेकर फेसबुक तक सब विदेशी है , तो पहले आप इन सब का त्याग कीजिये। वोट देने का अधिकार भी विदेश से ही आया है। अत: आप अपना मतदाता पहचान पत्र रद्द करवाइए और घोषणा कीजिये कि आप आइन्दा वोट नहीं करेंगे। क्योंकि वोट देना एवं अपने जनप्रतिनिधियों को चुनना भी एक विदेशी कोंसेप्ट है। पर आप ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि आप वोट करने का अधिकार चाहते है। हमने इसमें बस इतना जोड़ा है कि आपके पास वोट देने के साथ ही अपना वोट फिर से लौटा देने का अधिकार भी हो। इस तरह हम आपके अधिकारों में कानूनी वृद्धि कर रहे है। इसमें स्वदेशी विदेशी कुछ नहीं है।

दूसरी बात - महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने 19वीं शताब्दी में लिखी गयी अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में राजा के प्रजा अधीन होने की अवधारणा प्रस्तुत की थी, और उन्होंने यह विचार वेदों से लिया था। क्या वेद एवं सत्यार्थ प्रकाश विदेशी है ? महात्मा सच्चिन्द्र नाथ सान्याल एवं महात्मा चंदशेखर आजाद ने 1925 में अपनी पार्टी के मेनिफेस्टो में राईट टू रिकॉल कानूनों की मांग की थी। क्या ये क्रांतिकारी भी विदेशी थे ? राजिव भाई दीक्षित भी इन कानूनों की मांग कर रहे थे, क्या आप राजीव भाई को भी विदेशी मानते है ?
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४) महात्मा सच्चिन्द्र नाथ सान्याल एवं महात्मा चंदशेखर आजाद को तब राईट टू रिकॉल कानूनों कैसे सूझ गए थे ?

1920 में भारत में पहली दफा चुनाव हुए थे एवं स्थानीय निकायों में भारतीय जनप्रतिनिधि चुने गए। लेकिन चुनने के तुरंत बाद इनमे से ज्यादातर ने अंग्रेजो से गठजोड़ बना लिए थे। इस घटना से महात्मा सच्चिन्द्र नाथ सान्याल, महात्मा चंदशेखर आजाद एवं अन्य क्रांतिकारी यह बात ताड़ गए थे कि बिना राईट टू रिकॉल के यदि आजादी आ भी जाती है दशा वही रहने वाली है। उन्होंने तात्कालीन परिस्थिति के आधार पर भविष्य का यह आकलन कर लिया था कि यदि "आजाद भारत में राईट टू रिकॉल क़ानून नहीं हुए तो लोकतंत्र एक मजाक बन कर रह जाएगा"। बाद में जब महात्मा भगत सिंह जी इनके सम्पर्क में आये तो उन्होंने भी इन कानूनों का समर्थन किया।
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पवन कुमार शर्मा - भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राइट टू रिकॉल के उम्मीदवार
चुनाव चिन्ह - प्रेशर कुकर
evm पर क्रमांक - 15

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