> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2023-05-17

Pawan Jury BhilwaraRj

वोट वापसी पासबुक जारी कराने हेतु प्रस्तावित क़ानून
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#Vvp33 , #VoteVapsiPassbook
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इस क़ानून के गेजेट में आने के बाद राज्य के प्रत्येक नागरिक को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। जिला पुलिस प्रमुख एवं जिला चिकित्सा अधिकारी इस पासबुक के दायरे में आयेंगे। जिस तरह आप वोटर कार्ड का प्रयोग किसी प्रतिनिधि को चुनने में करते है, उसी तरह से आप इस पासबुक का इस्तेमाल करके उपरोक्त 2 अधिकारीयों को बदल सकेंगे।
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इस क़ानून को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में प्रकाशित कर सकते है। किसी जिले के 5 विधायक चाहे तो मुख्यमंत्री से कहकर यह क़ानून अपने जिले में लागू करा सकते है।
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यदि आप वोट वापसी पासबुक चाहते है तो मुख्यमंत्री को एक खुला निर्देश पत्र भेजे. निर्देश पत्र में यह लिखें -
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मुख्यमंत्री जी, हमें वोट वापसी पासबुक जारी करें - #VoteVapsiPassbook
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-------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारंभ-----
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(1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्न लिखित 2 अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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(a) जिला पुलिस प्रमुख
(b) जिला चिकित्सा अधिकारी
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तब यदि आप अपने जिले के पुलिस प्रमुख या जिला चिकित्सा अधिकारी के काम काज से संतुष्ट नहीं है और इन्हें बदलकर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS से भी दर्ज करवा सकेंगे।
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(2) पुलिस प्रमुख के लिए आवेदन : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो, अथवा उसने राज्य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की मुख्य लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा उसने विधायक या सांसद या पार्षद या सरपंच का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(3) जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन : 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसे ऐलोपेथी, आयुर्वेद, होम्योपेथ, यूनानी या भारत सरकार द्वारा स्वीकार की गयी इसके समकक्ष किसी अन्य चिकित्सा विज्ञान का मान्यता प्राप्त चिकित्सक होने के लिए आवश्यक जैसे MBBS, BAMS या इसके समकक्ष डिग्री प्राप्त किये हुए 5 वर्ष पूर्ण हो चुके हो, तो वह जिला चिकित्सा अधिकारी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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(4) धारा 2 एवं 3 में दी गयी योग्यता वाला कोई भी नागरिक यदि कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा इसे स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति इसे बिना लॉग इन के देख सके।
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(5) मतदाता द्वारा स्वीकृति दर्ज करना : कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवार खाने जाकर पुलिस प्रमुख या चिकित्सा अधिकारी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या इसे रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि एक सुझाव है।
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(5.1) पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाता की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा।
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(5.2) मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(5.3) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रू फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रू होगी
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(5.4) यदि मतदाता स्वीकृती रद्द करवाता है तो पटवारी एक या अधिक नाम बिना फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(5.5) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[टिप्पणी 1 : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS से भी दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग – मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तो दिए गए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय से प्रतिरक्षा प्रदान करती है]
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(6) पुलिस प्रमुख एवं चिकित्सा अधिकारी का निष्कासन :
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(6.1) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है) के 50% से अधिक मतदाता पुलिस प्रमुख के किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री सबसे अधिक स्वीकृति प्राप्त करने वाले व्यक्ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया पुलिस प्रमुख नियुक्त कर सकते है।
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(6.2) यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता जिला चिकित्सा अधिकारी के किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो मुख्यमंत्री उसे जिला चिकित्सा अधिकारी नियुक्त कर सकते है।
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[टिपण्णी 2: नागरिको के बहुमत द्वारा सुझाए गए व्यक्ति को पुलिस प्रमुख या जिला चिकित्सा अधिकारी नियुक्त करना है या नहीं इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। यदि मुख्यमंत्री बहुमत के खिलाफ जाने का फैसला लेते है तो नागरिक इसी क़ानून की धारा (08) का इस्तेमाल करके इस पासबुक में मुख्यमंत्री का पेज भी जोड़ने का प्रस्ताव कर सकते है। ताकि नागरिक वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके मुख्यमंत्री को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर सके।]
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(7) मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री नागरिक चाहे तो इसी क़ानून की धारा (08) का इस्तेमाल करके निचे दिए गए जिला, राज्य एवं केंद्रीय स्तर के अन्य महत्त्वपूर्ण अधिकारियों एवं मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री के पेज भी इस पासबुक में जोड़ सकते है :
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(7.1) जिला शिक्षा अधिकारी
(7.2) जिला जज
(7.3) मिलावट रोक अधिकारी
(7.4) DD चेयरमेन
(7.5) RBI गवर्नर
(7.6) CBI डायरेक्टर
(7.7) BSNL चेयरमेन
(7.8) सेंसर बोर्ड चेयरमेन
(7.9) स्वास्थ्य मंत्री
(7.10) मुख्यमंत्री
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(8) जनता की आवाज
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(8.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके सार्वजनिक रूप से रखेगा।
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(8.2) यदि कोई मतदाता धारा 8.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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---------क़ानून ड्राफ्ट का समापन----------
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निचे वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया के मुख्य बिंदु दिए गए है, ताकि पाठक वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया को ठीक से समझ सके
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(01) वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया में आप अपनी स्वीकृति सुझाव (Suggestion) के रूप में देते है, मत (vote) के रूप में नहीं।
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(02) इस प्रक्रिया में आपकी स्वीकृति गुप्त नहीं रहती। यह देखा जा सकता है कि आपने किसे स्वीकृति दी है।
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(03) आप किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर या SMS द्वारा अपनी स्वीकृति दे सकते है।
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(04) स्वीकृति देने के लिए प्रति स्वीकृति आप 3 रू शुल्क देते है।
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(05) आप कितनी भी बार अपनी स्वीकृति बदल सकते है।
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(06) सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले प्रत्याशी को अमुक पद पर नियुक्त करने का अंतिम फैसला Cm / Pm के पास होता है।
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(07) वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल मुख्य अधिकारियों जैसे जिला पुलिस प्रमुख, जिला शिक्षा अधिकारी, सेंसर बोर्ड चेयरमेन एवं अप्रत्यक्ष प्रतिनिधियों जैसे मुख्यमंत्री एवं मंत्रियो को बलदने में किया जाता है।
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(08) वोट वापसी पासबुक प्रक्रिया Cm / Pm के अधीन काम करती है। चुनाव आयोग की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।
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इस क़ानून का पीडीऍफ़ लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें
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