Pawan Jury BhilwaraRj
#Vvp29 अंतरधर्मी विवाहोपरांत मेरिज एक्ट चुनने की शक्ति (Short Version)
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Power to Decide Marriage Code After Marriage
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भारत में विविध धर्मो के लिए भिन्न विवाह क़ानून लागू है। इनमें कुछ धर्मो के विवाह क़ानून महिलाओं को मजबूत सरंक्षण प्रदान करते है जबकि कुछ धर्मो के विवाह क़ानून में महिलाओं को पर्याप्त सरंक्षण नहीं है, और इस वजह से उन महिलाओं की स्थिति विवाह के बाद कमजोर हो जाती है, जिन्होंने किसी अन्य धर्म के युवक से विवाह किया है और अमुक युवक के धर्म का विवाह क़ानून महिलाओं को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता।
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यह कानून अंतरधर्मी विवाह करने वाली महिलाओं को विवाह के उपरान्त वैवाहिक झगड़ो के निपटान के लिए अपने जन्मना धर्म का क़ानून चुनने की शक्ति देता है। इस क़ानून को प्रधानमंत्री संसद से साधारण बहुमत द्वारा पास करके गेजेट में छाप सकते है। इस क़ानून के पूरे ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ लिंक एवं फेसबुक लिंक कमेन्ट बॉक्स में देखें।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक खुला निर्देश पत्र (पोस्टकार्ड आदि) भेजे। पत्र में यह लिखे -
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प्रधानमंत्री जी, महिलाओं को विवाहोपरांत मेरिज एक्ट चुनने की स्वतंत्रता कानून गेजेट में छापें - #DecidingMarriageCode
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इस क़ानून के मुख्य बिंदु निचे दिए गए है :
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(1) वैवाहिक विवादों की दशा में विवादों का निपटान किस धर्म के वैवाहिक क़ानून के तहत किया जाएगा इसका फैसला लेने का अंतिम अधिकार विवाहित महिला के पास होगा। महिला विवाह के उपरान्त किसी भी समय अदालत में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगी कि उसके विवाह का निस्तारण निचे दिए गए किस क़ानून के तहत किया जाना चाहिए :
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(1.1) उस धर्म के वैवाहिक क़ानून के तहत जिस धर्म में विवाहित महिला ने जन्म लिया था, या
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(1.2) उस वैवाहिक क़ानून के तहत जिसके तहत दम्पत्ति ने विवाह किया था।
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स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि A एक जन्मना हिन्दू महिला है, जो B नामक मुस्लिम युवक से विवाहित है, तथा विवाह के दौरान या विवाह के उपरांत मुस्लिम धर्म में धर्मान्तरित भी हो चुकी है। तब भी वैवाहिक विवाद होने की स्थिति में A यदि मामले का निपटान हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत चाहती है तो मामला हिन्दू एक्ट के तहत सुना जाएगा। A द्वारा हिन्दू मेरिज एक्ट लागू कर दिए जाने पर मुस्लिम युवक ट्रिपल तलाक द्वारा जन्मना हिन्दू महिला को तलाक नहीं दे सकेगा, और डिवोर्स हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत अदालत के आदेश के अनुसार ही होगा।
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और चूंकि हिन्दू मेरिज एक्ट में बहु विवाह की अनुमति नहीं है, अत: B यदि A को डिवोर्स दिए बिना दूसरी शादी करता है तो B को हिन्दू मेरिज एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमें का सामना करना पड़ सकता है। यदि B, A का उत्पीड़न कर रहा है तो A अदालत में B एवं B के पारिवारिक सदस्यों के खिलाफ धारा 498A के तहत आपराधिक मुकदमें कायम करवा सकेगी।
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(2) यह क़ानून पूर्ववर्ती प्रभाव के साथ लागू होगा। अर्थात इस क़ानून के लागू होने की दिनांक से पूर्व संपन्न हुए सभी विवाह भी इस क़ानून के दायरे में आयेंगे, और सभी अंतरधर्मी विवाहों पर यह क़ानून लागू होगा।
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(3) यदि पहले से मौजूद किसी अन्य प्रवृत्त क़ानून की कोई धारा इस क़ानून में दिए गए किसी प्रावधान का उलंघन करती है, तो इस कानून के गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही अन्य प्रवृत क़ानून की ऐसी समस्त विपरीत आशय दर्शाने वाली धाराएं विधि शून्य मानकर निस्स्त की जाती है।
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#VoteVapsiPassbook
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[Proposed by : #VoteVapsiMovement]