Pawan Jury BhilwaraRj
1920 के पहले तक गोरों को सबसे बड़ा भय यह था कि -- भारत के युवा अंग्रेजो पर सशस्त्र हमले करने के लिए बम बनाने एवं बन्दुक जुटाने जैसी गतिविधियों की तरफ न मुड़ जाए। और उन्हें इस रास्ते पर जाने से रोकने का काम उन्होंने दुरात्मा गांधी को दे रखा था।
.
लेकिन 1920 के बाद गोरो के सामने दूसरी समस्या खड़ी हो चुकी थी -- चुनावी राजनीति !!
.
1919 से भारत में चुनाव शुरू होने के बाद गोरे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि भारत के कम से कम युवा चुनावी राजनीती में भाग ले।
.
और युवाओ को चुनावी राजनीती से दूर रखने के लिए उन्होंने 1923 से 1925 के बीच कई गैर राजनैतिक समूहों की स्थापना करवाई जिनका मुख्य उद्देश्य "राजनैतिक विमर्श में रुचि रखने वाले युवाओ को चुनावी राजनीति से दूर रखना" था !!
.
गोरो एवं देशी राजाओं द्वारा इंस्टाल किये गए इन कई गैर राजनैतिक संगठनों में से कुछ मुख्य निम्न थे :
.
(1) आरएसएस ( संस्थापक : हेडगेवार)
(2) सेवा दल (संस्थापक : जवाहर लाल एवं कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेता)
(3) खुदाई खिदमतगार (संस्थापक : अब्दुल गफ्फार खान)
.
ये संगठन सुबह से शाम तक युवाओं को यह चाबी देते थे कि उन्हें लोगो को जागरूक करना है, उनमें चेतना लानी है, लोगो को उद्वेलित करना है, क्रांति लानी है आदि आदि, किन्तु उनेह "चुनावी राजनीती" से दूरी बनाकर रखनी है।
.
इस तरह इन संघठनो ने यह सुनिश्चित किया था कि सभी वोट गोरो द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों (कांग्रेस, मुस्लिम लीग आदि) को ही मिले, और राजनीती में रुचि रखने वाले कार्यकर्ता मतदाताओं को नया राजनैतिक विकल्प देने की दिशा में काम न कर सके।
.
यह एक बड़ी वजह रही कि कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग 1947 तक सबसे बड़ी पार्टियां बनी रही, और प्रतिस्पर्धी पार्टियों के न होने के कारण गोरे अपनी इन पार्टियों को बिना किसी प्रतिरोध के आसानी सत्ता हस्तांतरित करके जा सके।
.
क्या आप जानते है 1947 में आरएसएस के पास कितने सक्रीय सदस्य थे -- 8 लाख !!
.
मतलब राजनीती में रुचि रखने वाले 8 लाख कार्यकर्ताओ को आरएसएस ने भोट कर दिया था। न तो इन कार्यकर्ताओ ने गोरो को बम / बन्दुक द्वारा खदेड़ने के लिए क्रांतिकारियों को जॉइन किया, और न ही गोरों द्वारा खड़ी की गयी पार्टियों (कांग्रेस, मुस्लिम लीग) के खिलाफ नया राजनैतिक विकल्प बनाने की दिशा में काम किया !!
.
इस तरह इन संगठनों ने युवाओ को "चुनावी राजनीती" से दूर रहने की चाबी देकर यह सुनिश्चित किया था कि सभी वोट पेड मीडिया पार्टियों (कांग्रेस, मुस्लिम लीग आदि) को मिले।
.
------------
.
BRC, AIM और इसी तरह के दर्जनों संगठन / नेता पिछले 2 वर्षो से NWO से लड़ने के नाम पर यही काम कर रहे है। वे "NWO को एक्सपोज करने, लोगो को जागरूक करने और क्रांति लाने" की टर्म का इस्तेमाल करके आपका टाइम पास कर रहे है, ताकि बाध्यकारी वैक्सीनेशन विरोधी कार्यकर्ता पेड मीडिया पार्टियों के खिलाफ नया "चुनावी विकल्प" खड़ा करने की दिशा में काम न कर सके।
.
और इस तरह बाध्यकारी टीकाकरण एवं लॉकडाउन का विरोध करने वाले मतदाता भी फिर से पेड मीडिया पार्टियों (आरएसएस, कांग्रेस, आपा, सपा, बसपा, अकाली आदि) को ही वोट करने के लिए बाध्य होंगे, और इस तरह पेड मीडिया पार्टियों का दबदबा बना रहेगा।
.
------------