Pawan Jury BhilwaraRj
कृपया शशांक (जो खुद को "सखा" कहकर पुकारते है) द्वारा दी गयी गालियों की अवहेलना करें। उल्लेखनीय है कि शशांक ने राईट टू रिकॉल पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओ एवं पूरी राईट टू रिकॉल पार्टी के लिए अपशब्दों का प्रसारण किया है।
.
कृपया उन्हें कोई प्रत्युत्तर न दें।
.
कोई व्यक्ति किसी शालीन प्रश्न के एवज में गालियाँ कब देता है ?
.
जब उसके पास सवाल का तार्किक जवाब न हो।
.
------
.
शशांक का दावा है कि -- राईट टू रिकॉल पार्टी के अध्यक्ष ने उन्हें 2 वर्ष पहले क़ानून ड्राफ्ट्स भेजे थे। हालाँकी राईट टू रिकॉल पार्टी के अध्यक्ष ने किसी भी मायने में उनसे कभी कोई संपर्क नहीं किया है। यह बात समझ से परे है कि शशांक राईट टू रिकॉल पार्टी के अध्यक्ष के बारे में इस तरह की गलतबयानी क्यों कर रहे है।
.
बहरहाल, एक तरफ शशांक के अनुयायी राईट टू रिकॉल पार्टी के विभिन्न कार्यकर्ताओ को बार बार 8 Pm क्रांति से जुड़ने का निमंत्रण भेजते है, और आग्रह करते है कि वे शशांक के शो में आकर उनसे कोई भी प्रश्न पूछ सकते है। और जब कोई कार्यकर्ता शालीन ढंग से कोई सवाल पूछता है तो शशांक उन्हें सवाल पूछने के एवज में स्त्रीअपमान सूचक गालियां देते है !!
.
एक सामान्य तरीका यह है कि, यदि कोई व्यक्ति प्रश्न का जवाब नहीं देना चाहता तो वह सीधे शब्दों में कह सकता है कि - मैं इस प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता। किन्तु शालीन सवाल के एवज गालियां देना एक मर्यादित व्यवहार नहीं है। और सार्वजानिक जीवन में तो कतई नहीं।
.
हम शशांक को एवं उसके अनुयायीयों को प्रत्युत्तर में कोई अपशब्द नहीं कहेंगे। न ही उन्हें कोई गाली देंगे। सार्वजनिक विषयों पर संवाद के दौरान गालियां देना उनकी संस्कृति हो सकती है। यह हमारी संस्कृति नहीं।
.
--------------