> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2022-01-23

Pawan Jury BhilwaraRj

चुनाव न लड़ने के सम्बन्ध में बतायी जाने वाली गलत एवं मनोवैज्ञानिक वजहें :
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(1) मेरे पास चुनाव लड़ने का समय नहीं है !!
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यह एक गलत वजह है। यदि नामांकन पत्र भरने की अवधि को शामिल न किया जाए तो व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम 3*3 = 6 घंटे की जरूरत होती है। इसमें मैंने नामांकन पत्र भरने में लगने वाले समय को शामिल नहीं किया है। क्योंकि किसी व्यक्ति को नामांकन पत्र भरने में 3 घंटे भी लग सकते है, और किसी को 10 घंटे। किन्तु यदि आपके हाथ में भरा हुआ नामांकन पत्र है तो फिर फॉर्म जमा करने से लेकर पूरा चुनाव लड़ने तक आपको सिर्फ 6 घंटे ही चाहिए।
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(1.1) 3 घंटे आपके उस दिन खर्च होते है जब आप कलेक्टर को फॉर्म सबमिट करने जाते हो।
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(1.2) 3 घंटे आपको तब चाहिए जब आपको वोटिंग के बाद खर्चे का रजिस्टर जमा करने जाना होता है।
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यदि आपके पास 2 किश्तों में 6 घंटे का टाइम है तो यह कहना एक गलत वजह है कि -- मेरे पास चुनाव लड़ने का टाइम नहीं है।
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जहाँ तक चुनाव प्रचार में लगाने वाले समय की बात है तो यदि आपके पास समय नहीं है तो आप प्रचार पर बिलकुल भी समय खर्च न करें। चुनाव प्रचार करने से अतिरिक्त फायदा है, किन्तु प्रचार न करने से कोई अतिरिक्त नुकसान नहीं होता।
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(2) मेरे पास चुनाव लड़ने का पैसा नहीं है !!
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यह भी गलत वजह है। विधायक का चुनाव लड़ने के लिए कुल 12,000 रूपये की जरूरत होती है।
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(2.1) 10,000 रू नामांकन पत्र के साथ जमानत राशि के रूप में कलेक्टर कार्यालय में जमा करानी होती है।
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(2.2) 2,000 रू नोटेरी, जेरोक्स आदि जैसे स्टेशनरी खर्चे एवं 2 बार कलेक्ट्री जाने का पेट्रोल खर्च आदि ।
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यदि आपके पास 12,000 रू है तो चुनाव लड़ने के लिए यह काफी है। हाँ, आपको चुनाव जीतना है तो फिर 12 करोड़ भी कम पड़ेगा। पर हम यहाँ चुनाव लड़ने की बात कर रहे है, चुनाव जीतने की नहीं। और जहाँ तक चुनाव लड़ने की बात है तो आप 12 हजार में बहुत आसानी से चुनाव लड़ सकते है।
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और यदि आप अच्छे मुद्दों पर चुनाव लड़ते है तो 10 -12 हजार का आर्थिक सहयोग तो आपको मिल ही जाता है। उदाहरण के लिए वोट वापसी एवं जूरी कोर्ट के मुद्दों पर जो भी प्रत्याशी चुनाव लड़ते है उन्हें जमानत राशि के बराबर आर्थिक सहयोग तो हमेशा ही मिल जाता है।
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तो यदि आपके पास 12,000 रू है तो चुनाव न लड़ने की यह एक गलत वजह है कि – मेरे पास पैसा नहीं है। और यदि आप वोट वापसी जैसे जनहित के मुद्दे पर चुनाव लड़ते है तो 12 हजार न होना भी समस्या नहीं है।
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(3) मैं अकेला हूँ । चुनाव लड़ने के लिए मेरे पास टीम नहीं है !!
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चुनाव लड़ने के लिए किसी टीम की जरूरत नहीं होती। आदमी अकेला ही चुनाव लड़ सकता है। उसे अकेले नामांकन फॉर्म लेकर कलेक्टर कार्यालय जाना है और फॉर्म जमा करके आ जाना है। हाँ, सहयोग के लिए आपके साथ यदि एक व्यक्ति को साथ ले जा सको तो थोड़ी आसानी रहेगी । किन्तु यदि आप के साथ कोई भी नहीं है तब भी आप अकेले चुनाव लड़ सकते है।
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आपको बस फॉर्म जमा कराना है। फॉर्म भरने के बाद आप कुछ भी न करो तब भी कलेक्टर आपको चुनाव लड़ाने का काम करता रहेगा। वह आपका नाम सभी Evm मशीनों पर लगाएगा और सभी बूथों पर मशीने पहुंचाएगा। हाँ, यदि आपके पास वक्त है तो आप अपने संसाधनों के अनुरूप चुनाव प्रचार कर सकते है। पर यह एच्छिक है, अनिवार्य नहीं।
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तो पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान आपको किसी व्यक्ति की जरूरत नहीं होती। अत: चुनाव लड़ने की यह एक गलत वजह है कि – मेरे पास टीम नहीं है।
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(4) मेरी जमानत जब्त हो जायेगी !!
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जमानत जब्त नहीं होती है, जमानत राशि जब्त होती है। और हम तो यह पहले से ही मानकर चल रहे है कि, हमारी जमानत राशि जब्त होने वाली है। इसीलिए हमनें जमानत राशि को खर्चे की मद में जोड़ दिया है। जमानत राशि बचाने के लिए 25 लाख रू का बजट चाहिए। 10 हजार की जमानत राशि बचाने के लिए 25 लाख रू प्रचार पर खर्च करने की कोई तुक नहीं। अत: छोटे स्तर पर चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को जमानत राशी बचाने पर विचार नहीं करना चाहिए।
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अत: जमानत राशि न बचने का हवाला देकर चुनाव न लड़ना एक गलत वजह है।
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(5) मुझे वोट कम आयेंगे तो लोग मेरा मजाक उड़ायेंगे !!
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यह एक गलत मनोवैज्ञानिक वजह है। यथार्थ स्थिति यह है कि जब आप अत्यंत सीमित बजट में, छोटी पार्टी या स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में, सीमित संसाधनों में चुनाव लड़ते है तो आपको कम वोट ही आते है। आपने कम संसाधन खर्च किये इसलिए आपको कम वोट मिले। संसाधनों के अनुपात में वोट आना स्वाभाविक है। यह अक्षमता का पर्याय नहीं।
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जहाँ तक लोगो के मजाक उड़ाने की बात है तो यह आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि आप “लोग क्या कहेंगे” को कितना महत्त्व देते है। मैं मनोविज्ञान का विशेषग्य नहीं, इसलिए इस मनोवैज्ञानिक समस्या का कोई समाधान भी नहीं कर सकता। मेरे मानना है कि, इस तरह की मनोवैज्ञानिक समस्याएं जिनमें कोई तत्व न हो, विचार से शुरू होती है, और जैसे जैसे आदमी इन पर विचार करता जाता है, ये समस्या व्यक्ति पर अपनी पकड़ मजबूत बनाती जाती है। अत: तत्व रहित ऐसी मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर विचार ही नहीं किया जाना चाहिए।
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[ दरअसल, यह गलत मनोवैज्ञानिक समस्या ही सबसे बड़ी बाधा है जो व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोकती है। वह “लोग क्या कहेंगे” के फोबिया से उबर नहीं पाता। उसे लगता है कि, कम वोट आने पर उसका मजाक बनाया जाएगा, और उसकी प्रतिष्ठा गिर जायेगी। और इसी चक्कर में वह चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाता]
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(6) यदि मैं चुनाव लडूंगा तो अन्य पार्टी वाले मेरे दुश्मन हो जायेंगे !!
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कुछ हद तक यह एक वाजिब समस्या हो सकती है। लेकिन ज्यादातर से भी ज्यादातर मामलो में यह अतिशियोक्ति पूर्ण होती है, और इस वजह से यह भी एक गलत वजह है।
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(6.1) मान लीजिये आप किसी X नामक ब्रांडेड पार्टी के बागी उम्मीदवार है, और आपकी सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक हैसियत इतनी अधिक है कि आप लगभग 10 से 15 हजार वोट लाने वाले है। अब मान लिजिये कि अमुक विधानसभा क्षेत्र से X पार्टी की और से मिस्टर A चुनाव लड़ रहा है। इस स्थिति में इस बात की पूरी सम्भावना है कि A आपके पीछे आएगा, और A आपको बिठाने का प्रयत्न करेगा। क्योंकि A का यह सोचन सही है कि यदि आप 15 हजार वोट ले जाते है तो इसमें से निश्चित ही 12 हजार वे वोट है, जो उसे मिलने वाले थे।
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(6.2) मान लीजिये कि आप किसी जाति विशेष के उम्मीदवार है, और सामाजिक-जातीय गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के कारण आपकी हैसियत इतनी बढ़ी हुई है कि आप अमुक जाति के 10 से 15 हजार वोट लाने वाले है। और मान लीजिये कि मिस्टर B भी आपकी ही जाति का उम्मीदवार है, और वह किसी ब्रांडेड पार्टी के टिकेट पर चुनाव लड़ रहा है। इस स्थिति में मिस्टर B आपके पीछे आएगा। क्योंकि उसका यह सही मानना है कि, यदि आप चुनाव नहीं लड़ते है तो अमुक जाति के 10 हजार में से 8 हजार वोट मिस्टर B को मिल जायेंगे।
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यदि आप ऊपर दी गयी स्थिति में से किसी एक या ऐसी ही किसी विशेष स्थिति में फिट हो रहे है तो आपका ऐतराज जायज है। किन्तु इसका समाधान भी सरल है। सीधा रास्ता यह है कि – यदि आपको ऐसी स्थिति का सामना कारण पड़ता है तो जैसे ही आपका फॉर्म स्वीकृत होगा वैसे ही मिस्टर A या मिस्टर B आपके पास आ जायेंगे और आपको पर्चा वापिस लेने को कहेंगे। और तब आप यह फैसला कर सकते है कि आपको फॉर्म उठाना चाहिए या नहीं। दुसरे शब्दों में, यदि आप ऐसी परिस्थिति में पड़ जाते है तो आपके पास इससे बाहर आने का पर्याप्त समय एवं अवसर होता है।
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असल में सिर्फ चुनाव लड़ने से कोई आपका दुश्मन नहीं हो जाता। आपके चुनाव लड़ने से इस तरह का समीकरण बैठना चाहिए कि किसी ब्रांडेड पार्टी के प्रत्याशी को साफ़ तौर पर सीधे नुकसान हो रहा हो, और यह नुकसान निर्णायक भी हो।
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किन्तु यदि आपकी सामाजिक हैसियत इतनी नहीं है कि आप 10 -15 हजार वोट लाने वाले है, तो आपका यह बिंदु सिरे से ही ख़ारिज हो जाता है कि, आपके चुनाव लड़ने से अन्य पार्टी वाले आपके दुश्मन हो जायेंगे। और इस बात को नोट करे कि विधानसभा चुनाव में 15 हजार वोट आप तब ही ला पाते है जब चुनाव लड़ने से पहले ही आधा शहर आपको जानता हो या आपके पास 20-30 लाख का बजट हो, या आपको सक्रीय सार्वजनिक जीवन में एक दशक से अधिक हो गया हो।
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किन्तु यदि आप सीमित संसाधनों में चुनाव लड़ रहे है तो आपको 1000-2000 वोट से ज्यादा मिलते नहीं है। और ऐसी स्थिति में कोई आपसे दुश्मनी लेने नहीं आता। क्योंकि आपके चुनाव लड़ने से किसी प्रत्याशी को प्रत्यक्ष नुकसान नहीं होता।
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ये ऊपर मैंने चुनाव न लड़ने की कुछ गलत वजहें बतायी है। यदि आप इन गलत वजहों की वजह से चुनाव लड़ने की अवहेलना कर कर रहे है तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप चुनाव लड़ें। क्योंकि उपरोक्त सभी वजहें गलत है, और आप इन्हें बढ़ा चढ़ा कर आँक रहे है।
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(7) तो यदि आप चुनाव लड़ने का फैसला करते है तो इसके बाद कुछ अन्य सही-गलत-मनोवैज्ञानिक वजहों का नम्बर आता है। ये वजहे है – पारिवारिक सदस्य, मित्रगण, पड़ौसी, रिश्तेदार !!
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(7.1) पारिवारिक सदस्य : यह लगभग तय है कि यदि आप चुनाव लड़ते है तो आपको पारिवारिक सदस्यों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन्हें इस बारे में कैसे समझा सकते है। इस बारे में परिस्थिति के अनुरूप आपको ही फैसला करना होगा। क्योंकि कोई व्यक्ति किस तरह के और किस स्तर के पारिवारिक प्रतिरोध का सामना कर रहा है, इसका अनुमान अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं लगाया जा सकता।
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(7.2) मित्रगण, पड़ौसी, रिश्तेदार : मेरे विचार में आपको इन लोगो से चुनाव लड़ने या न लड़ने के बारे में कभी मशविरा करना ही नहीं चाहिए। और फिर भी यदि आप इनसे इस बारे में बात करते है तो यह मानकर ही चले कि ये सभी आपको चुनाव न लड़ने की सलाह ही देने वाले है।
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यदि आप चुनाव में खड़े हो जाते है तो इनमें से ज्यादातर लोग आपके चुनाव लड़ने के फैसले समर्थन करेंगे। किन्तु यदि आपने फॉर्म भरने से पहले मशविरा किया तो ये लोग इनकार ही करने वाले है। अत: मेरे विचार में फॉर्म भरने से पहले अपने मित्रो, पडौसियों, रिश्तेदारों से आपको इस बारे में पूछना नहीं चाहिए। उन्हें सिर्फ सूचित कारण चाहिए कि, आप चुनाव लड़ने वाले है।
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यदि ऊपर दी गयी वजहों में कुछ वजहें अब भी rah गयी हो जो आपको चुनाव लड़ने से रोक रही है, तो कमेन्ट में लिखे। मैं उसका निराकरण भी इसमें शामिल करूँगा।
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