> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-09-17

Pawan Jury BhilwaraRj

जूरी सिस्टम की कुंजी
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यह कानून पारित होने के बाद हत्या, अपहरण, बलात्कार, मारपीट जैसे अपराधिक मामलो की सुनवाई करने और सजा सुनाने का अधिकार जज की जगह नागरिको की जूरी के पास रहेगा। जूरी का चयन जिले की मतदाता सूचियों में से रेंडमली किया जाएगा। जूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा व जूरी मंडल में 15 से 1500 तक जूरी सदस्य हो सकेंगे।

( इस कानूनी ड्राफ्ट को संसद से साधारण बहुमत से पास करके लागू किया जा सकता है। इसके लिए संविधान संशोधन की जरुरत नहीं है। )
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1) यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो इस कानून के पारित होने पर आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों और दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत तथ्य और बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई तय करनी होगी।
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2) प्रत्येक जिले में एक जूरी प्रशासक होगा, जिसकी नियुक्ति मुख्यमंत्री करेंगे। राईट टू रिकॉल प्रक्रिया का प्रयोग करके मतदाता उसे किसी भी दिन बदल सकेंगे।
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3) प्रत्येक जिले में एक 30 सदस्यीय महा जूरी मंडल होगा। प्रथम महाजूरी मंडल का गठन करने के लिए जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक बुलाएगा और मतदाता सूची से 25 वर्ष और 55 वर्ष की आयु के मध्य के 50 मतदाताओं को रेंडमली चुनेगा। जूरी प्रशासक इनमे से किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। शेष 30 मतदाता महा-जूरी मंडल के सदस्य होंगे। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य सेवानिवृत होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से रेंडमली कर लिया जाएगा। इस तरह यह महा जूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महा जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रूपये एवं यात्रा व्यय मिलेगा।
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4) कोई भी वादी अपने मामले की शिकायत महा जूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महा जूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है , अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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5) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महा जूरी मंडल यह तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से रेंडमली सदस्यों का चयन करते हुए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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6) तब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों एवं गवाहों आदि को सुनकर इस मामले में फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु मृत्यु दंड में 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा। पक्षकार चाहे तो जूरी मंडल के फैसले की अपील हायर जूरी में कर सकते है।
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7) यदि किसी जिले में तहसील स्तर के न्यायालय हैं तो जूरी प्रशासक तहसील स्तर पर भी महा जूरी मंडल का गठन कर सकता है।
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पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/829456537232542>;
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