Pawan Jury BhilwaraRj
फर्जिकल स्ट्राइक की पटकथा में मौजूद कई छेदों में से एक छेद ,"कुत्तो को इसकी भनक क्यों नहीं लगी" पर पैबंद लगाने के लिए पटकथा लेखको ने नया स्पष्टिकरण जारी किया है --- तेंदुएं का पेशाब !!!
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सबसे पहले पेड मीडिया ने एक बेहद चुस्त एवं सटीक पटकथा जारी करके बताया कि , हमारे सैनिको ने "नीची उड़ान" भरने वाले हैलीकोप्टर का इस्तेमाल करके पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश किया , वे रस्सो से उतरे , 70 आतंकियों को मारा , रस्सो से वापिस हेलीकोप्टर में चढ़े और भारत में लौट आये। किन्तु एक जन्मजात अंध भगत के लिए भी यह बात पचाना मुश्किल हो रहा था , क्योंकि ऐसी "नीची उड़ान" भरने वाले हेलीकोप्टर को सैनिक एंटी हेलीकोप्टर रोकेट और यहाँ तक कि रायफल से भी निशाना बना सकते है।
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बाद में जब यह सवाल ज्यादातर लोगो के हाजमे खिलाफ पड़ने लगा तो केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन को अधिकृत रूप से यह कहने को बाध्य होना पड़ा कि , "इस स्ट्राइक में भारतीय सेना ने हेलीकोप्टर्स का प्रयोग नहीं किया था, बल्कि बिना हेलीकोप्टर्स के ही सर्जिकल स्ट्राइक की गयी थी" !!
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यह स्पष्टीकरण सामने आने के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के पटकथा लेखको ने आनन फानन में नयी पटकथा जारी की। इस पटकथा में यह बताया गया कि , हमारे 50 सैनिको ने कुछ 1500-2000 मीटर तक रेंगते हुए बोर्डर पार की , 70 आतंकियों को मारा और वापिस लौट आये। स्क्रिप्ट में यह खुलासा नहीं किया गया था कि वे वापिस लौटते हुए दौड़ रहे थे या रेंग रहे थे।
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पर अगले दिन हमें इस पटकथा में एक नया छेद नजर आया --- कुत्ते। केम्प में रहने वाले कुत्ते केम्प के मुखिया एवं केम्प के अन्य लोगो के आदी होते है। केम्प में मौजूद सभी लोगो को समय समय पर एक लाइन में खड़ा किया जाता है , एवं कुत्तो को उनका निरिक्षण कराया जाता है। ये कुत्ते प्रत्येक व्यक्ति को एक एक करके सूंघते है। इस प्रकार के केम्प्स में यह एक रूटीन प्रोसेस है। इससे कुत्ते उन सभी लोगो की गंध को पहचानते है जो केम्प में रह रहे है। अब जैसे ही नया व्यक्ति केम्प में आता है , कुत्ते उसे बाहरी समझ कर भौंकने लगते है। इन्हें इसे तरह से प्रशिक्षित किया हुआ होता है। और जब कई सारे कुत्ते एक साथ भौंकने लगेंगे तो केम्प के लोग सतर्क हो जायेंगे कि कोई अनजान व्यक्ति केम्प में प्रवेश कर रहा है। और जाग हो जाने पर यह मुमकिन नहीं है कि कोई दस्ता जवाबी हमला झेले बगैर 70 आतंकियों को मार कर सुरक्षित लौट आये। क्योंकि केम्प में रह रहे आतंकियों के पास हथियार है , प्रशिक्षण है , सीमेंट बेग से बने हुये बंकर है जिनमे छिप कर उनमे बनाए गए सूराखो से गोलियां चलाई जा सकती है।
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तो इस तरह कुत्तो की वजह से पटकथा में फिर से एक बड़ा छेद दिखाई देने लगा !! किन्तु अब तक पटकथा लेखको ने इस छेद को भरने के लिए कोई संशोधित पटकथा जारी नहीं की थी !!
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अब उन्होंने इस छेद पर पैबंद लगाने के लिए पटकथा का नया वर्जन रिलीज किया है।
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नयी पटकथा कहती है कि , हमारे सैनिक अपने साथ तेंदुए का पेशाब लेकर गए थे। और इसकी वजह से कुत्ते डर गए !!! तेंदुए गाँवों में जाकर कुत्तो को मार कर खा जाते है, अत: कुत्ते तेन्दुओ से डरते है।
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अच्छी बात है। लेकिन यह इस बात का स्पष्टीकरण नहीं देता कि कुत्तो को भूँकने से किसने रोका था !!! अगर कुत्तो के नाक में तेंदुए के पेशाब की गंध जाएगी तो वे और भी ऊँची आवाज में भौंकेंगे। असल में तेंदुएं की गंध से रात में भी सो कर पड़ा रहने वाला आलसी कुत्ता भी पूरी ताकत लगाकर भौंकना शुरू कर देगा। यदि तेंदुए की गंध से कुत्ते खामोश होकर भौंकना बंद कर देते थे तो दुनिया के सारे चोर अपने साथ हर समय तेंदुए का पेशाब जरुर रखते थे।
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सच्चाई यह है कि -- तेंदुए का पेशाब होने के बावजूद कुत्ते तेंदुएं के साथ साथ नए आदमी की गंध भी सूघ लेंगे। क्योंकि कुत्ते दर्जनो प्रकार की गंध को एक साथ सूंघ कर उनमे अंतर कर सकते है। इस तरह कुत्ते नए आदमियों की गंध को सूंघ कर भौंकना शुरू कर देंगे। और जब इसके साथ तेंदुए की गंध भी होगी तो कुत्ते और भी ज्यादा दम लगाकर भौकेंगे , और तब तक नहीं रुकेंगे जब तक पूरे केम्प को जगा न दे। और जाग जाने पर जवाबी हमला झेले बिना दस्ता लौट नहीं सकता।
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तो ये पेबंद छेद को कवर करने के लिए नाकाफी है। फर्जिकल स्ट्राइक के पटकथा लेखको को अपनी पटकथा को फुलप्रूफ बनाने के लिए और भी ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है। उम्मीद है , अगली बार वे एक बेहतर पैबंद पेश करेंगे।
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मेरे विचार में , इस पैबंद ने और भी ज्यादा कबाड़ा कर दिया है। अब तक अंध भगत कुत्तो वाले छेद को "कुछ भी" कह कर खारिज कर दे रहे थे। अब वे भी यह बात मान रहे है कि पटकथा में ये एक बड़ा एवं गहरा छेद है। और इनमे से कई अंध भगत मानते है कि इस गड्ढे को भरना बहुत जरुरी है। तो इस तरह तेंदुए की स्टोरी ने अंध भगतो के विश्वास को भी विचलित कर दिया है।
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