> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-07-02

Pawan Jury BhilwaraRj

भारत में टिक टॉक सहित 58 चीनी एप पर प्रतिबंध क्यों लगा?
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भारत सरकार का कहना है कि – इससे हमारी संप्रभुता और अखंडता, रक्षा, राज्य की सुरक्षा को खतरा है।
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मेरा हमेशा से यह रूख रहा है कि मॉस मीडिया (Paid Media) में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हथियार कम्पनियों के बाद मॉस मीडिया कम्पनियां किसी भी देश की संप्रभुता के लिए सबसे अधिक खतरनाक होती है। अत: मैं सरकार के इस फैसले से सहमत हूँ, और समर्थन करता हूँ।
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टिक टोक वगेरह मॉस मीडिया कम्पनियां नहीं है। यह सोशल मीडिया कम्पनियां है। किन्तु सोशल मीडिया कम्पनियों की प्रकृति इतनी लचीली है कि ताकतवर होने के साथ ही ये मॉस मीडिया की तरह व्यवहार करने लगती है / करने लगेगी। और इस आधार पर सरकार का फैसला सही है।
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अब असली समस्या पर आइये :
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फेसबुक एवं व्हाट्स एप असली समस्या है। “सुरक्षा एवं संप्रभुता को खतरा” लिहाज से टिक टोक फेसबुक-व्हाट्स एप के सामने मच्छर है। फेसबुक अगले कुछ ही वर्षो में इतना ताकतवर हो जाएगा कि यह मॉस मीडिया की तरह पूरे समुदाय को गिरफ्त में ले लेगा। जहाँ तक डेटा की बात है, टिक टोक के पास फेसबुक की तुलना में नगण्य डेटा है। और व्हाट्स एप पर भेजा गया प्रत्येक मेसेज CIA की पहुँच में है !! और हमारे सैन्य अधिकारी तक कमांड देने के लिए व्हाट्स एप का इस्तेमाल कर रहे है !!
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मेल सर्विस इंटरनेट का खून है। और जासूसी करने एवं डेटा जुटाने में जी मेल फेसबुक एवं व्हाट्स एप का बाप है। और इसी वजह से चीन में जी मेल, फेसबुक, व्हाट्स एप, गूगल और यू ट्यूब पर प्रतिबन्ध है !! रूस ने भी एंड्रॉयड को अनौपचारिक रूप से बेन कर दिया है और स्मार्टफोन्स के लिए स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम को बढ़ावा दे रहा है।
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जो भी देश अपने आप को किसी अन्य देश पर पूरी तरह से निर्भर नहीं कर देना चाहता वह ऐसा ही करेगा। वह गूगल, एंड्रॉयड, फेसबुक, व्हाट्स एप एवं जीमेल को बेन कर देगा और इनके विकल्प के रूप में स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित करेगा.
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सिंगापुर बेस्ड कम्पनी Broadcomm अमेरिकी संचार कम्पनी Qualcomm का अधिग्रहण करना चाहती थी। किन्तु ट्रम्प ने अधिग्रहण को "सुरक्षा के लिए खतरा" बताते हुए इस पर रोक लगा दी थी.
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लेकिन यहाँ भारत में हमारे पास पेड मीडिया द्वारा खड़े किये गए सोनिया जी, मोदी साहेब एवं केजरीवाल जी जैसे नगीने है जो पूरे देश को फेसबुक, एंड्रॉयड एवं गूगल की गिरफ्त में दे देना चाहते है !! सिर्फ एक बटन दबाकर अमेरिका गूगल के माध्यम से एंड्रॉइड एप्लिकेशन पर चल रहे भारत के पूरे या आंशिक नेटवर्क को बंद कर सकता है और इसका इल्जाम पाकिस्तान या चाइना पर डाल सकता है !!
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दूसरे शब्दो में अमेरिकी धनिको ने हम भारतियों को कैशलेस सिस्टम में भुगतान के उस सिस्टम को स्वीकार करने के लिए बाध्य/ राजी कर लिया है जिसे अमेरिका किसी भी समय बंद कर सकता है !!!
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इतना ही नहीं हमारे नेता पेड मीडिया के प्रायोजको को खुश करने के लिए इससे भी एक कदम आगे गए !! उन्होंने कोमकासा एग्रीमेंट साइन किया !! यह एग्रीमेंट 2018 में मोदी साहेब ने साइन किया था और सोनिया जी एवं केजरीवाल जी ने इसका पूरा समर्थन किया था !!
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Comcasa एग़्रिमेंट अमेरिका की सेना को भारतीय सेना के आपसी सामरिक संवाद , युद्ध पोत , विमान आदि की स्थिति की जानकारी से अपडेट रहना सम्भव बनाता है। यह एग्रीमेंट होने से भारत की सेना की सामरिक महत्त्व की कोई भी जानकारी ख़ुफ़िया / कोनफ़िडेंसीयल नही रहेगी। सूचना , स्थिति के अलावा भारतीय युद्ध पोतो, पनडुब्बी , जहाज़ , विमान , रडार आदि के संचालन पर भी अमेरिकियों का नियंत्रण रहेगा।
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भारत का पेड मीडिया (Paid Media) पहले से ही अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माताओ के कब्जे में है। अत: पेड मीडियाकर्मी इस बिंदु को कभी नहीं छूते कि हमें फेसबुक एवं व्हाट्स एप पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए। यदि हम फेसबुक-व्हाट्स एप को निकाल बाहर कर देते है तो जल्दी ही इस वैक्यूम को कवर करने के लिए भारतीय कम्पनियां सामने आएगी और पनपने लगेगी। और इस तरह हम क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर' होना शुरू कर देंगे।
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चाइनीज एप पर बेन लगाने की मांग कई कार्यकर्ता वर्षो से कर रहे है। लेकिन पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले बुद्धिजीवियों को यह खतरा नजर नहीं आता था। क्योंकि वे किसी भी चीज को खतरे के रूप में सिर्फ तब देखने के आदि है जब उन्हें यह जानकारी पेड मीडिया द्वारा दी जाए !!
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और इसीलिए उन्होंने कभी भी पीएम को ट्विट / पोस्टकार्ड भेजकर चाइनीज एप पर बेन लगाने की मांग नहीं की !! लेकिन जैसे ही पेड मीडिया ने उन्हें बताया कि – “अरे चाइनीज एप तो देश की संप्रभुता एवं सुरक्षा के लिए खतरा है” , और तुरंत उनमे देशभक्ति का ज्वार उठ खड़ा होता है !!
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[इसी को मैं पेड मीडिया की चपेट कहता हूँ। नागरिक अपने सहज बोध (Common Sense) से कोई निर्णय नहीं लेते, बल्कि उनके स्टेंड लेने के समय (Timing) एवं रुख का फैसला पेड मीडिया की फीडिंग करती है !!]
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तो फेसबुक, व्हाट्स एप आदि भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता के लिए खतरा क्यों नहीं है ?
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क्योंकि पेड मीडिया ने अभी तक इसे खतरे के रूप में नहीं बताया है ?
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और जब पेड मीडिया ने अभी तक इसे खतरे के रूप में नहीं बताया है तो पेड मीडिया की फीडिंग पर निर्भर व्यक्ति का दिमाग अभ्यस्त तरीके से उन तर्कों का जाल बुनने लगता है जो उसे संतुष्ट कर सके कि, यह हमारी सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है !!
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बहरहाल, मैं इसे खतरे के रूप में देखता हूँ, और मेरा मानना है कि, हमें फेसबुक एवं व्हाट्स एप पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहीये। मैंने कल ही प्रधानमंत्री को इसके लिए कह दिया था, कि वे फेसबुक एवं व्हाट्स एप पर बेन लगाए।
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यदि आप भी इसे भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता के लिए खतरा मानते है तो पीएम को ट्विट भेजकर कह सकते है। और यदि आप इसे खतरे के रूप में नहीं देखते तो बात यहीं पर ख़त्म हो जाती है !!
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प्रधानमंत्री जी को यह ट्विट करें :
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@PmoIndia , सिर्फ 100% भारतीयों के स्वामित्व वाली सोशल मीडिया कम्पनियों को संचालन की अनुमति दें - #बैन_व्हाट्सएप , #बेन_फेसबुक , #बेन_ट्विटर , #सिर्फ_भारतीयों_के_पूर्णत_स्वामित्व_वाली_सोशल_मीडिया_कम्पनियों_को_अनुमति_दें
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@PmoIndia #BanWhatsApp #BanFacebook #AllowOnly100percentIndianSmMessagingOnly WhatsApp sends all messages to CIA. And so does FB. Pls allow ONLY 100% owned by and 100% operated by messaging/SM in India. Ban foreign messaging/SM like FB / WhatsApp etc
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