Pawan Jury BhilwaraRj
ड्राफ्ट में लिखी गयी इबारत पर स्पष्टीकरण के बारे में
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कुछ कार्यकर्ताओ द्वारा यह प्रश्न पुछा गया है कि जूरी कोर्ट ड्राफ्ट में लिखी गयी किसी धारा को लेकर अस्पष्टता हो तो इसकी व्याख्या करने का अधिकार किसके पास है, या स्पष्टीकरण के बारे में ड्राफ्ट लेखक द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण किस सीमा तक मूल्य रखता है ?
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जवाब :
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सामान्य रूप से, कोई भी ड्राफ्ट अपने आप में स्वतंत्र मसौदा होता है, और ड्राफ्ट पब्लिश करने के बाद ड्राफ्ट में लिखी गयी धारा का स्पष्टीकरण देने का 'अधिकार' ड्राफ्ट के लेखको के पास नहीं होता। यदि किसी धारा को लेकर अस्पष्टता है तो ड्राफ्ट के लेखक से इस बारे में स्पष्टीकरण लिया जा सकता है। किन्तु यह स्पष्टीकरण निर्णायक नहीं हो सकता। लेखक द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण एक "राय" या व्याख्या (Interpretation) है। कोई कार्यकर्ता ड्राफ्ट लेखक के अमुक स्पष्टीकरण को स्वीकार कर सकता है या खारिज भी कर सकता है। किसी धारा का वही स्पष्टीकरण चलन में रहेगा जिसे जन सामान्य द्वारा सहज बोध द्वारा स्वीकार्य किया जाता है।
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जूरी कोर्ट ड्राफ्ट के बारे में :
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जब तक जूरी कोर्ट का ड्राफ्ट गेजेट में प्रकाशित नहीं होता, तब तक इसमें लिखी गयी किसी भी धारा की व्याख्या करने का अधिकार कार्यकर्ताओ एवं नागरिको के पास है, ड्राफ्ट के लेखको के पास नहीं। ड्राफ्ट के लेखको द्वारा दी गयी व्याख्या सिर्फ एक "राय" या "दृष्टिकोण" है। कोई कार्यकर्ता अमुक व्याख्या को मान भी सकता है और नहीं भी मान सकता है।
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जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट में यह प्रावधान किया गया है कि गेजेट में आने के बाद इसमें दी गयी धाराओं की व्याख्या करने का अधिकार नागरिको की जूरी के पास होगा। अत: जूरी ही बहुमत द्वारा इसकी व्याख्या करेगी।
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