> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-07-22

Pawan Jury BhilwaraRj

क्या जूरी कोर्ट क़ानून गेजेट में छपवाने के लिए क्या आम पब्लिक को बंदूक उठानी होगी….? इन्कलाब लाना होगा ?
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जब तक वोटिंग राइट्स और चुनावी प्रक्रिया चालू है तब तक बंदूक उठाने का नंबर नहीं आता.
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मेरा मानना है कि यदि भारत के 51% नागरिक यानी लगभग 46 करोड़ मतदाता पीएम को पोस्टकार्ड / ट्विट भेजकर जूरी कोर्ट छापने के लिए कहते है तो 2 चीजे होगी

(1) या तो पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छाप देंगे, या
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(2) पीएम से मिलने के लिए अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी सक्रीय हो जायेंगे.
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और यदि उधम सिंह जी सक्रीय हो जाते है तो पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छाप देंगे.
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और ज्यादा से ज्यादा नागरिक पीएम को पोस्टकार्ड भेजे इसके लिए कार्यकर्ताओ को क्या कदम उठाने चाहिए ?

इसके लिए यदि ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओ को जूरी कोर्ट क़ानून की मांग को लेकर चुनाव लड़ना चाहिए. क्योंकि जितने ज्यादा कार्यकर्ता चुनाव लड़ेंगे उतनी ही तेजी से जूरी कोर्ट की जानकारी लोगो तक पहुंचेगी और पोस्टकार्ड भेजने / ट्विट करने वालो की संख्या बढ़ेगी.
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तो चुनाव लड़ना मांग को बूस्ट करता है. मेरा मानना है कि जब तक ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ता जूरी कोर्ट के मुद्दे पर चुनावी मैदान में नहीं आते तब तक जूरी कोर्ट की मांग खड़ी नहीं की जा सकती. किसी भी तरह से नहीं.
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तो बंदूक उठाने का नंबर सिर्फ तब आता है जब कार्यकर्ता निम्नलिखित चरण पूरे कर चुके हो :
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(1) पीएम को 45 करोड़ नागरिक पोस्टकार्ड / ट्विट के माध्यम से जूरी कोर्ट छापने के लिए कह चुके हो
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(2) यह बात कॉमन नोलेज में आ चुकी हो कि, नागरिको का बहुमत पीएम से जूरी कोर्ट गेजेट में छापने की मांग कर रहा है
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और फिर भी यदि पीएम जूरी कोर्ट गेजेट में छापने से मना कर देता है, तब और सिर्फ तब अहिंसामूर्ती महात्मा उधम सिंह जी पीएम से मुलाकात करेंगे.
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