Pawan Jury BhilwaraRj
जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट में पुलिस प्रमुख पद के लिए आवेदन करने की धारा के बारे में स्पष्टीकरण :
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प्रस्तावित जूरी कोर्ट की धारा (37) विभिन्न अधिकारियों के आवेदन करने की प्रक्रिया बताती है। धारा (37.1) कहती है कि --
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(37.1) जिला पुलिस प्रमुख : यदि 32 वर्ष से अधिक आयु का कोई भारतीय नागरिक जो पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए किसी जिले में पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, तथा जिसने 5 वर्षों तक सेना में काम किया हो, या पुलिस विभाग में एक भी दिन काम किया हो, या सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो या उसने राज्य / संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रशासनिक सेवाओ की लिखित परीक्षा पास की हो, या उसने विधायक /सांसद / पार्षद या जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता हो, तो ऐसा व्यक्ति जिला पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर सकेगा।
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(जूरी कोर्ट का पूरा ड्राफ्ट यहाँ देखें - <https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/909604579412620/>)
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इस धारा के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :
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(1) क्या जूरी कोर्ट आने के बाद आईपीएस की परीक्षाएं बंद हो जायेगी ?
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यह क़ानून आने के बाद भी आईपीएस की परीक्षाएं जारी रहेगी और परीक्षा पास करके आने वाले अभ्यर्थीयों को पुलिस विभाग में नियुक्ति मिलेगी। लेकिन वे पुलिस प्रमुख के पद पर तब तक ही रह सकेंगे जब तक नागरिको का बहुमत उन्हें पुलिस प्रमुख बनाए रखना चाहता है.
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यदि नागरिको के बहुमत ने उन्हें निकालने के लिए स्वीकृति दे दी है तो उनका पद जिला पुलिस प्रमुख या पुलिस प्रमुख नहीं होगा। सरकार उन्हें डिप्टी पुलिस प्रमुख या सहायक पुलिस अधीक्षक बना सकती है या किसी
अन्य विभाग में भेज सकती है, या नौकरी से भी निकाल सकती है। इस बारे में फैसला सरकार को करना है, कि वे ख़ारिज किये गए व्यक्ति का क्या करना चाहती है.
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पुलिस प्रमुख वही बना रह सकेगा जिसे नागरिको के बहुमत ने अनुमोदित किया है। शेष पूरी पुलिस व्यवस्था उसी तरह से काम करेगी जिस तरह आज करती है।
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(2) क्या बिना किसी प्रशिक्षण के पुलिस प्रमुख जिले की पुलिस व्यवस्था चला पायेगा ?
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प्रशासन या संचालन की किसी भी प्रणाली में 2 स्तर होते है।
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(i) स्टाफ : किसी विभाग में कार्मिको या स्टाफ का काम दिए गए निर्देशों का पालन करना एवं व्यवस्था को संचालित करना होता है। और इस स्तर पर कुछ मामलों में आपको प्रशिक्षित व्यक्तियों की जरूरत हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी विभाग में अकाउंटिंग का काम है तो यह जरुरी है कि कार्मिको के पास वाणिज्य या कम्प्यूटर का अनुभव हो। इस स्तर पर कर्मचारी दिए गए निर्देशों का पालन करते है, और उनके पास विवेकाधिकार शक्तियां नहीं होती।
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(ii) मुखिया : किसी विभाग के मुखिया का काम सही एवं गलत के आधार पर फैसले लेने होते है, और इसके पास काफी विवेकाधिकार शक्तियां होती है। जब किसी अधिकारी को विवेकाधिकार शक्तियां दी जाती है तो प्रशिक्षण गौण हो जाता है, और नीयत मायने रखती है। किसी विभाग का मुखिया वह होना चाहिए जो अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल न करें।
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इसी वजह से दुनिया के किसी भी देश में मंत्री या प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी भी प्रकार के प्रशिक्षण / डिग्री / शिक्षा आदि की अर्हता (योग्यता) नहीं रखी जाती। और इन्हें जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाता है। और प्रधानमंत्री या मंत्री को प्रशिक्षित स्टाफ दिया जाता है ताकि वह निर्देशों का पालन करके व्यवस्था चलाये। और पुलिस प्रमुख के पास काफी विवेकाधीन शक्तियां होती है।
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दरअसल , ज्यादातर मामलों में पुलिस प्रमुख के लिए वे ही लोग आवेदन करेंगे जो पहले से ही पुलिस विभाग में काम कर रहे है। उदाहरण के लिए कोई सहायक पुलिस अधीक्षक (D.S.P.) या थानेदार (S.H.O.) , वृत निरीक्षक (C.I.) आदि इसके लिए आवेदन कर सकते है, और जनता उन्हें सामान्य आवेदक की तुलना में इसीलिए तरजीह देगी क्योंकि उनके पास कार्य अनुभव होगा. इसके अलावा सेना में काम कर चुके अधिकारी (जिन्होंने इस्तीफा दे दिया हो या सेवानिवृत हो गए हो) भी आवेदन कर सकेंगे. इन सभी आवेदकों को हथियार चलाने एवं प्रशासन में काम करने का पहले से अनुभव होता है.
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(3) पार्षद का चुनाव जीतने वाले एवं प्रशासनिक सेवाओं की लिखित परीक्षा पास करने वाले व्यक्ति को आवेदन करने की अनुमति क्यों दी गयी है ?
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(i) यदि किसी जिले में पुलिस विभाग में कार्यरत 10-12 शीर्ष / वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आपस में गठजोड़ बना लेते है, तो पुलिस विभाग में से अन्य कोई अधिकारी पुलिस प्रमुख बनने के लिए आवेदन नहीं करेगा और यदि अमुक क्षेत्र में कोई सैन्यकर्मी भी नहीं है तो नागरिको के विकल्प सिकुड़ जायेंगे, और पुलिस में भ्रष्टाचार फैल जाएगा. इसीलिए राज नेताओ को भी आवेदन करने का रास्ता दिया गया है. जब राजनेता प्रत्याशी बन सकेंगे तो वे पुलिस प्रमुख के गलत काम काज पर पैनी नजर रखेंगे और जनता को इस बारे में सूचित करेंगे.
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(ii) प्रशासनिक परीक्षाओं की लिखित परीक्षा पास करने वाले बहुधा छात्र साक्षात्कार में इसीलिए फ़ैल कर दिए जाते है क्योंकि उनके पास लोक सेवा आयोग के सदस्यों को घूस देने के लिए पैसा नहीं होता. और इस तरह वे पुलिस प्रमुख बनने से वंचित हो जाते है या फिर किसी कमतर विभाग में नियुक्त किये जाते है. अत: उनके लिए भी आवेदन करने का विकल्प खुला रखा गया है.
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(4) जूरी कोर्ट आने के बाद उस व्यक्ति का क्या होगा, जो परीक्षा पास करके मौजूदा स्थिति में पुलिस प्रमुख की नौकरी कर रहा है ?
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इस कानून में यह प्रावधान है कि नागरिक मौजूदा पुलिस प्रमुख को भी स्वीकृति दे सके. तो यह क़ानून आने के बाद भी मौजूदा पुलिस प्रमुख की नौकरी चालू रहेगी, और उसकी नौकरी सिर्फ तब जायेगी जब नागरिक उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को पुलिस प्रमुख बनाने की स्वीकृति दें.
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दरअसल जूरी कोर्ट के गेजेट में आने के साथ ही विभिन्न जिलो में काम कर रहे मौजूदा पुलिस प्रमुखो पर अपना काम सुधारने का दबाव बन जाएगा. वे जान जायेंगे कि यदि हमने व्यवस्था नाह सुधारी तो अब नागरिक मुझे निकालने के लिए स्वीकृति दर्ज करवा सकते है, और मंत्री जी मेरी नौकरी बचा नहीं पायेंगे. अत: ज्यादातर मामलों में वे अपना काम काज तेजी से सुधारना शुरू करेंगे. और जो अपना काम नहीं सुधरेगी उन्हें जिले के नागरिक निकाल देंगे.
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मौजूदा व्यवस्था में नागरिको के पास पुलिस प्रमुख को बदलने की कोई प्रक्रिया नहीं है. और नागरिक निकम्मे पुलिस प्रमुख को निकालकर अच्छे व्यक्ति को पुलिस प्रमुख पद पर तब ही ला सकेंगे जब उनके पास पर्याप्त विकल्प होंगे. तो यह धारा नागरिको को पुलिस प्रमुख के प्रत्याशी के लिए कई विकल्प मुहैया कराती है. ताकि नागरिक मौजूदा पुलिस प्रमुख को कह सके कि – यदि तुमने काम नहीं सुधारा तो हम किसी अन्य व्यक्ति को पुलिस प्रमुख बना देंगे. और हमारे पास इसके लिए काफी विकल्प है.
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