> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-04-18

Pawan Jury BhilwaraRj

जब आप किसी नेता का समर्थन करना "चुनते" हो और पेड मीडिया भी अमुक नेता का समर्थन करना "चुनता" है तो इसमें से पहले क्या होता है ?
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पहले पेड मीडिया अमुक नेता का समर्थन करना शुरू करता है, या पहले आप अमुक नेता को ढूंढ निकालते हो और फिर पेड मीडिया अमुक नेता का समर्थन करता है ?
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नागरिको ने मनमोहन को पसंद करना कब शुरू किया था ?
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पहले पेड मीडिया के प्रायोजको ने मनमोहन को पसंद किया, और यह तय किया कि वे भारत के वित्त मंत्री होंगे !! और तब नागरिको के पास यह विकल्प आया कि मनमोहन को पंसद करना है या नहीं !!
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नागरिको ने मोदी साहेब को कब पंसद करना शुरू किया ? उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले या मुख्यमंत्री बनने के बाद !! (पेड मीडिया के प्रायोजको ने मोदी साहेब को 1994 में ही पसंद कर लिया था !!)
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2004 में मनमोहन सिंह जी को पहले किसने चुना था ? आपने या पेड मीडिया ने ?
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और अब सबसे जरुरी बात यह है कि -- यदि आपके द्वारा चुनना महत्त्वपूर्ण एवं उनके द्वारा चुनना महत्त्वहीन है तो 2009 में मनमोहन सिंह को 210 सीट कैसे मिली ?
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टीवी-अख़बार में आने से पहले भी क्या आप केजरीवाल जी परिचित थे ? यदि वे केजरीवाल को अख़बार-टीवी में नहीं छापते तो भी क्या आप उन्हें मुख्यमंत्री बनाने वाले थे ?
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योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में पहले किसने चुना था ?
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या आपको लगता है कि, देवेन्द्र फड़नवीस एवं मनोहर लाल खट्टर को आप चुनते है ?
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पहले वे टिकेट देते है या पहले आप वोट देते है ?
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और जो सांसद मंत्री बनता है उसे मंत्री कौन बनाता है ? आपका वोट या चुनिन्दा सांसदों में से किसी सांसद को दिया गया मीडिया कवरेज ?
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सभी ड्राइवरो को गाड़ी चलानी आती है, लेकिन रेस में कौन उतरेगा इसका फैसला आप नहीं करते। इसका फैसला पेड मीडिया करता है !! और तब आप यह चुनते हो कि अमुक ड्राइवर गाड़ी अच्छी चला रहा है, अमुक गलत। और पेड मीडिया के प्रायोजक ऐसे किसी ड्राइवर को रेस में नहीं उतारते जो उनके बताए रूट से अलग जा रहा हो।
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यह व्यवस्थागत डिजाइन है कि, अल्टीमेटली नागरिक हमेशा उन्ही नेताओ में से किसी को चुन पाते है, जिसे पेड मीडिया के प्रायोजक चुन चुके है !! यदि किसी नेता को पेड मीडिया ने ख़ारिज कर दिया है, तो वह फर्स्ट राउंड में ही बाहर हो जाता है !!
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समाधान ?
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कई लोगो को इसमें कोई समस्या ही नहीं दिखती है !! तो समाधान भी क्यों चाहिए ?
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पर जो इस व्यवस्था को समस्या की तरह देखते है, उनके लिए सूचना है कि यदि भारत के प्रत्येक मतदाता को वोट वापसी पासबुक मिल जाती है, तो स्थिति पलट जाएगी। तब पेड मीडिया में आये बिना भी कोई नेता मंत्री / मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री बनने के लिए खुद को प्रस्तुत कर सकेगा, और नागरिक किसी उम्मीदवार को पीएम / सीएम / मंत्री बनाने के लिए अपनी सहमती दर्ज करवा सकेंगे। #VoteVapsiPassbook
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वर्ना वोटिंग सिस्टम से इस मैकेनिज्म को तोड़ा नहीं जा सकता। क्योंकि वोट आप सिर्फ उसे कर सकते है जिसे वो टिकेट देते है। और इनमे से मंत्री वही बनता है जिसे वे टीवी-अख़बार में कवरेज देते है।
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और इसी वजह से जिसे मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनना होता है, वह पहले पेड मीडिया के प्रायोजको को खुश करने में अपनी मेहनत लगाता है। क्योंकि जब तक उन्हें पेड मीडिया अपने कंधे पर नहीं चढ़ाएगा तब तक आपको दिखेगा नहीं !!
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और कंधे से उतार दिए जाने पर लॉकेट भी बदल जाते है !! 2024 के लिए लॉकेट उन्होंने अभी से ही बाजार में उतार दिए है !! कुछ उत्साही नागरिको ने पहनने भी शुरू कर दिए है !!
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है गैबे गैब जिसको समझते है हम शहूद
है ख्वाब में हनोज, जो जागे है ख्वाब में
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गैब - छिपा हुआ
शहूद - प्रकट
हनोज - अभी, अब
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