woic
संवेदनशील क्षेत्रो में FDI पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित क़ानून
इस कानून में 2 खंड है। पहला खंड भारत के संवेदनशील क्षेत्रो में विदेशी निवेश (FDI) पर निर्बन्धन लगाकर सिर्फ “सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कंपनियों” को कारोबार करने की अनुमति देता है। तथा दुसरा खंड भारत में भारतीयों द्वारा स्वदेशी हथियारों के उत्पादन (Made in India Made by Indians) के लिए आवश्यक शासन की रचना करता है।
इस क़ानून को संसद से साधारण बहुमत द्वारा पारित करके गेजेट में छापा जा सकता है। यदि यह कानून विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) के किसी समझौते का उलंघन करता है तो W.T.O. भारत को समझौते से बाहर कर सकता है, या प्रधानमंत्री भारत को W.T.O. समझौते से अलग करने के लिए आवश्यक अधिसूचना जारी कर सकते है।
#Rrp06 , #ReduceFDI
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
“प्रधानमंत्री जी, विदेशी निवेश में कटौतियां क़ानून गेजेट में छापें - #ReduceFDI
-----ड्राफ्ट का प्रारम्भ----
खंड – अ ; महत्त्वपूर्ण क्षेत्रो में विदेशी कम्पनियों पर निर्बन्धन के प्रावधान
(01) कोई भी कंपनी अपने आप को वोइक यानी ‘सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनी’ (Woic = Wholly Owned by Indian citizens Company) के रूप में पंजीकृत करवा सकती है। वोइक कम्पनी से आशय ऐसी किसी कम्पनी से है जिसके 100% अंश (Share) भरतीय नागरिको या भारतीय सरकार या किसी अन्य वोइक कंपनी के पास हों, और अमुक कम्पनी के कोई भी शेयर विदेशियों के पास न हों।
(02) निचे दिए गए व्यष्टियों (Individuals) के अतिरिक्त कोई भी व्यष्टि किसी भी वोइक (WOIC) कंपनी के शेयर नहीं खरीद सकेंगे : . (2.1) 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक (Indian Citizen) . (2.2) 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी अस्थायी निवासी भारतीय नागरिक (NRI = Non Resident Indian) . (2.3) कोई भी कम्पनी जो वोइक के रूप में पंजीकृत है . (2.4) भारत की केंद्र राज्य या स्थानीय सरकार . (03) सिर्फ भारतीय नागरिक ही किसी वोइक कम्पनी का निदेशक, अध्यक्ष या साझेदार हो सकेगा। . (04) यदि किसी वोइक कम्पनी का कोई साझेदार किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है, तो उसे 3 महीनों के भीतर अपने शेयर बेच देने होंगे, या अवधि बीत जाने पर वोइक रजिस्ट्रार उन शेयर को नीलाम करेगा और नीलामी शुल्क काट कर नीलामी से मिले रूपये अमुक नागरिक को दे देगा। वोइक कम्पनी प्रत्येक माह वोइक रजिस्ट्रार को कंपनी के स्वामित्व का सम्पूर्ण ब्यौरे की अद्यतन सूचना देगी। . (05) प्रत्येक मंत्री, सांसद, विधायक, जज, एवं सरकारी कर्मचारी यह घोषणा करेगा कि उसके पास किन वोइक या गैर वोइक कम्पनियों का कितना स्वामित्व (Sharing) है। . (06) वोइक कम्पनियों का क्षेत्राधिकार एवं गैर वोइक कम्पनियों पर निर्बन्धन : . (6.1) गैर वोइक कम्पनी भारत में कोई भी भूमि एवं निर्माण नहीं खरीद सकेगी और न ही इन्हें 25 साल से अधिक अवधि के लिए किराये पर ले सकेगी। . (6.2) गैर वोइक कम्पनी न तो खदानें एवं कृषि भूमि खरीद सकेगी और न ही इन्हें किराये पर ले सकेगी। . (6.3) गैर वोइक कम्पनी को भारत में बैंक खोलने या ऐसी कोई भी वित्तीय कम्पनी खोलने की अनुमति नहीं होगी जो जमाएं (Deposits) स्वीकार करती है। . (6.4) सिर्फ वोइक कम्पनियाँ ही खाने पीने की चीजे (जो दवा ना हो) बना सकेगी। . (6.5) राष्ट्रीयकृत बैंक सिर्फ वोइक कम्पनी को ही कर्ज दे सकेंगे। . (6.6) सिर्फ वोइक कम्पनी को ही खनन जैसे कच्चे तेल की खुदाई एवं ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने की अनुमति होगी। . (6.7) सिर्फ वोइक कम्पनियों को ही शैक्षिक निकाय, शिक्षा बोर्ड, विद्यालय एवं विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति होगी। . (6.8) सिर्फ वोइक कम्पनियां ही संचार, मीडिया, रेलवे, सेटेलाईट, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में काम कर सकेगी और गैर वोइक कम्पनियों को इन क्षेत्रो में कारोबार की अनुमति नहीं होगी। संचार एवं मीडिया में सभी दृश्य, श्रव्य माध्यम जैसे सभी प्रकार के अख़बार, मैगजीन, चैनल्स, फ़िल्में, इंटरनेट सेवाएं, सोशल मीडिया, टेलिकॉम शामिल है। रक्षा उत्पादन में सभी प्रकार के हथियारों का निर्माण एवं सैन्य उपकरण शामिल है।] . [ टिप्पणी : यदि इस खंड की कोई धारा विश्व व्यापार संगठन (W.T.O.) के किसी समझौते का उलंघन करता है तो W.T.O. भारत को समझौते से बाहर कर सकता है, या प्रधानमंत्री भारत को W.T.O. समझौते से अलग करने के लिए आवश्यक अधिसूचना जारी कर सकते है।]
खंड – ब ; स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान
. (07) रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों की परिभाषाएं प्रकाशित करेगा : .
- छोटी बंदूके।
- मध्यम आकार की बंदूके।
- बड़ी बंदूके।
- होवित्ज़र तथा होवित्ज़र किस्म के अन्य प्रकार।
- टेंक तथा टेंक के अन्य प्रकार।
- कारतूस, गोले तथा कारतूस व गोलों के अन्य प्रकार।
- प्रक्षेपास्त्र तथा प्रक्षेपास्त्र के अन्य प्रकार।
- लड़ाकू विमान तथा लड़ाकू विमानो के अन्य प्रकार।
- सेना द्वारा उपयोग किये जाने वाले अन्य उपकरण तथा उनके प्रकार।
- आणविक हथियार एवं उनके प्रकार।
- रासायनिक हथियार एवं उनके प्रकार।
- जैविक हथियार एवं उनके प्रकार।
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(08) रक्षा मंत्री हथियारों की निम्नलिखित तीन श्रेणियां निर्धारित करके प्रकाशित करेंगे -
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(8.1) श्रेणी प्रथम : हथियार जिनके लिए पंजीकरण करवाना आवश्यक नहीं है।
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(8.2) श्रेणी द्वितीय : ऐसे हथियार जिनके लिए पंजीकरण आवश्यक हो किन्तु लाइसेंस नहीं।
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(8.3) श्रेणी तृतीय : ऐसे हथियार जिनके लिए लाइसेंस आवश्यक हो।
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(09) रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों को 'श्रेणी द्वितीय' = 'पंजीकरण आवश्यक परंतु लाइसेंस जरूरी नहीं' सूची के अंतर्गत रखेंगे :
- छोटी बंदूके
- मध्यम आकार की बंदूके
- बड़ी बंदूके
भारत सरकार इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेगी। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसंस के, केवल पंजीकरण करवाकर, बंदूक या बन्दुक के पुर्जे या बंदूक की गोलियाँ बनाने की फैक्ट्री शुरू कर सकता है। कोई भी नागरिक गोली-रोक (बुलेट-प्रूफ) जैकेट भी बना सकता है।
(10) रक्षा मंत्री उन हथियारों की एक सूची जारी करेंगे जिनके लिए पंजीकरण या लाइसेंस की आवश्यकता न हो। रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों को श्रेणी तृतीय = लाइसेंस जरूरी की सूची के अंतर्गत रखेंगे :
- अनुमति मिले होवित्ज़र एवं उनके प्रकार ।
- अनुमति मिले टेंक एवं उनके प्रकार ।
- अनुमति मिले प्रक्षेपास्त्र एवं उनके प्रकार ।
- अनुमति मिले कारतूस, गोले एवं उनके प्रकार ।
- अनुमति मिले लड़ाकू विमान एवं उनके प्रकार ।
- सेना द्वारा स्वीकृत और उपयोग में लाये जाने वाले अन्य श्रेणी के हथियार 7. आणविक हथियार एवं उनके प्रकार ।
- जैविक हथियार एवं उनके प्रकार ।
- रासायनिक हथियार एवं उनके प्रकार ।
(11) जिन हथियारों के लिए सिर्फ पंजीकरण अनिवार्य है, ऐसे हथियारों के उत्पादन के लिए रक्षा मंत्री भारतीय नागरिकों के सम्पूर्ण स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) के लिए आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।
रक्षा मंत्री सुनिश्चित करेंगे कि इन कम्पनियों द्वारा कौनसी जानकारीयां सार्वजनिक की जायेगी तथा कौनसी जानकारियाँ रक्षा मंत्रालय के पास गुप्त रहेंगीं। रक्षा मंत्री यह भी निर्देशित करेंगे कि कौनसी जानकारियाँ इन कम्पनियों को प्रकाशित करनी होंगी तथा कौनसी जानकारियाँ कम्पनियां स्वयं के पास गुप्त रख सकेंगी।
(12) जो कम्पनियां भारतीय नागरिकों के पूर्ण स्वामित्व वाली नहीं है, ऐसी कम्पनियों को तीनों श्रेणियों तथा अन्य किसी भी श्रेणी के हथियारों के उत्पादन हेतु पंजीकरण तथा लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
(13) हथियारों का उत्पादन कर रही कंपनियों के बीच कोई विवाद हो या कोई नागरिक या सरकारी अफसर को ये लगता है कि किसी फैक्ट्री का मालिक किसी कानून को तोड़ रहा है, तो कोर्ट मामले का निपटारा जज द्वारा नहीं, बल्कि जिले के मतदाताओं की जूरी द्वारा होगा। ज्यूरी सदस्यों का चयन जिले की वोटर लिस्ट में से 30 और 55 के आयुवर्ग में से किया जाएगा। मामले की अपील राज्य जूरी और राष्ट्रिय जूरी में की जा सकती है।
[ टिप्पणी : जूरी के गठन एवं संचालन की प्रक्रिया उसी तरह की रहेगी जैसी प्रस्तावित जूरी कोर्ट के कानून ड्राफ्ट में दी गयी है ]
(14) जनता की आवाज
(14.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
(14.2) यदि कोई मतदाता धारा 14.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा (14.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यदि 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है। ]
-----ड्राफ्ट की समाप्ति----