राष्ट्रीय हिंदू बोर्ड

(1) यह कानून हिन्दू नागरिको के लिए एक राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड (R.H.B.) का गठन करता है। इस बोर्ड का प्रमुख हिन्दू संघ प्रधान कहलायेगा। भारत में निवास करने वाला प्रत्येक हिन्दू इस बोर्ड का वोटिंग मेम्बर बन सकेगा। यदि आप हिन्दू बोर्ड के सदस्य है तो आपको एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी ताकि आप हिन्दू संघ प्रधान को चुनने या निष्काषित करने के लिए स्वीकृति दे सके। . (2) इस क़ानून द्वारा (a) कृष्ण जन्म भूमि, मथुरा , (b) विश्वनाथ देवालय, काशी एवं , (c) अमरनाथ देवालय, कश्मीर के भूखंड हिन्दू बोर्ड के स्वामित्व में हस्तांतरित होने की प्रक्रिया शुरू होगी और बोर्ड को इन भूखंडो पर देवालय निर्माण व इनका प्रबंधन करने का कानूनी अधिकार मिल जायेगा। . (3) इसके अलावा यदि संघ प्रधान या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई शिकायत आती है, तो मामले की सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति जजों के पास न होकर बोर्ड मेम्बर्स की नागरिको की जूरी के पास रहेगी। . (4) यह क़ानून सरकार द्वारा हथियाये जा चुके सभी देवालयों को भी सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करता है। . (5) इस क़ानून में विभिन्न हिन्दू संप्रदाय भी अपनी पहचान बनाये रखते हुए ‘स्वैच्छिक रूप से’ पंजीकृत हो सकेंगे। तथा इन सम्प्रदायों के अनुयायियों को यह अधिकार मिल जायेगा कि वे अपने सम्प्रदाय के ट्रस्टियों एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष को बदल सके।

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राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड – हिन्दू देवालयों एवं धार्मिक सम्प्रदायों के प्रबंधन के लिए प्रस्तावित संघ

. ( Rashtriya Hindu Board - Proposed National Temple & Sect Management Body ) . (इस क़ानून ड्राफ्ट का पीडीऍफ़ एवं अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस पोस्ट के पहले 3 कमेन्ट देखें। पीडीऍफ़ पेम्पलेट छपवाने और मोबाईल पर पढने के फोर्मेट में है।) . इस कानून का सार : . (1) यह कानून हिन्दू नागरिको के लिए एक राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड (R.H.B.) का गठन करता है। इस बोर्ड का प्रमुख हिन्दू संघ प्रधान कहलायेगा। भारत में निवास करने वाला प्रत्येक हिन्दू इस बोर्ड का वोटिंग मेम्बर बन सकेगा। यदि आप हिन्दू बोर्ड के सदस्य है तो आपको एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी ताकि आप हिन्दू संघ प्रधान को चुनने या निष्काषित करने के लिए स्वीकृति दे सके। . (2) इस क़ानून द्वारा (a) कृष्ण जन्म भूमि, मथुरा , (b) विश्वनाथ देवालय, काशी एवं , (c) अमरनाथ देवालय, कश्मीर के भूखंड हिन्दू बोर्ड के स्वामित्व में हस्तांतरित होने की प्रक्रिया शुरू होगी और बोर्ड को इन भूखंडो पर देवालय निर्माण व इनका प्रबंधन करने का कानूनी अधिकार मिल जायेगा। . (3) इसके अलावा यदि संघ प्रधान या उसके स्टाफ के खिलाफ कोई शिकायत आती है, तो मामले की सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति जजों के पास न होकर बोर्ड मेम्बर्स की नागरिको की जूरी के पास रहेगी। . (4) यह क़ानून सरकार द्वारा हथियाये जा चुके सभी देवालयों को भी सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करता है। . (5) इस क़ानून में विभिन्न हिन्दू संप्रदाय भी अपनी पहचान बनाये रखते हुए ‘स्वैच्छिक रूप से’ पंजीकृत हो सकेंगे। तथा इन सम्प्रदायों के अनुयायियों को यह अधिकार मिल जायेगा कि वे अपने सम्प्रदाय के ट्रस्टियों एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष को बदल सके। . इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। #HinduBoard , #P20180436108 , #RHB
. [ टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में 3 भाग है - . (I) नागरिकों के लिए निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश, (III) सनातन संस्कृति के विभिन्न सम्प्रदायों के लिए निर्देश। . टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। अत: इनका पालन बाध्यकारी नहीं है। ] .

भाग (I) : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश

. (1) इस क़ानून के गेजेट में छपने से राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड नामक संस्था का गठन होगा, और इसके प्रत्येक सदस्य को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। इस संस्था के सदस्यों को हिन्दू बोर्ड मेम्बर या हिन्दू संघ सदस्य कहा जाएगा। . (2) भारत के निम्नलिखित नागरिक इस संघ के सदस्य हो सकेंगे : . (2.1) उन सभी समुदायों, पन्थो, सम्प्रदायों के अनुयायी जो स्वयं को हिन्दू या सनातनी हिन्दू कहते है। . (2.2) सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि पन्थो के अनुयायी भी इस संगठन में जुड़ना चाहते है तो इसकी सदस्यता ले सकेंगे। . (2.2) यह क़ानून इस्लाम, ईसाई, पारसी, यहूदी एवं अन्य धर्म जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर उत्पन्न हुए है, पर कोई दायित्व या प्रतिबन्ध नहीं लगाता। इन धर्मो के अनुयायी स्पष्ट रूप से इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे . [ टिप्पणी : यह क़ानून किसी भी प्रकार से उन नागरिको पर हिन्दू होने का लेबल नही लगाता जो स्वयं को हिन्दू नहीं कहते या हिन्दू नहीं कहलाना चाहते। उदाहरण के लिए यदि कोई जैन या सिक्ख पंथ का अनुयायी इसमें नामांकित होता है तो भी उसकी कानूनी-धार्मिक-सामाजिक पहचान प्रवृत कानूनों के अनुसार जैन / सिक्ख धर्म के अनुयायी के रूप में बनी रहेगी ] . (3) राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड ( Rashtriy Hindu Board = RHB ) की मुख्य कार्यकारिणी में 1 प्रमुख एवं 4 न्यासियो सहित कुल 5 व्यक्ति होंगे। RHB का प्रमुख हिन्दू संघ प्रधान एवं कार्यकारिणी के शेष 4 सदस्यों को न्यासी कहा जाएगा। . (4) हिन्दू संघ प्रधान वोट वापसी पासबुक के दायरे में होगा, और यदि आप उसके काम-काज से संतुष्ट नहीं है, तो वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर उसे निकालने और किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त करने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकते है। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दे सकेंगे।
. (5) प्रधानमंत्री एक अधिसूचना जारी करके राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या का स्वामित्व हिन्दू बोर्ड को सौंपेंगे। इसके अलावा हिन्दू बोर्ड उन सभी देवालयों का प्रबंधन करेगा जिन्हें किसी मंदिर के मालिको ने इसे स्वेच्छा से सौंप दिया है। किन्तु बोर्ड उन देवालयों का अधिग्रहण / प्रबंधन नहीं करेगा जिनकी देख-रेख देवालय के मालिक RHB से नहीं कराना चाहते। सभी प्रकार की मस्जिदे, चर्च, गुरूद्वारे, बौद्ध तीर्थ स्थल एवं जैन तीर्थ स्थल आदि हिन्दू बोर्ड के दायरे से बाहर रहेंगे।
. (6) यदि एवं जब भारत के सभी मतदाताओ में से 45 करोड़ मतदाता धारा 30 में दी गयी प्रक्रिया का प्रयोग करते हुए निचे दिए 4 मंदिरो के भूखंड RHB को सौंप देते है तो हिन्दू बोर्ड इन मंदिरों की देख रेख करेगा : .

  1. कृष्ण जन्म भूमि देवालय, मथुरा
  2. काशी विश्वनाथ देवालय, वाराणसी
  3. अमरनाथ देवालय, कश्मीर . (7) हिन्दू संघ प्रधान और न्यासी अपने नियंत्रण में मौजूद देवालयो की देखरेख करेंगे और प्राप्त हुए दान को इस तरह खर्च करेंगे कि सनातन संस्कृति का सरंक्षण हो। किन्तु हिन्दू बोर्ड सरकार से किसी भी प्रकार का दान प्राप्त नहीं कर सकेगा । . (8) यदि संघ प्रधान या उसके स्टाफ के बीच या नागरिको व हिन्दू बोर्ड के मध्य कोई आपसी विवाद होता है तो मामले का निपटान हिन्दू बोर्ड की सदस्य सूची में दर्ज नागरिको की जूरी करेगी। यदि आपका नाम बोर्ड की मेम्बर लिस्ट में है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको मामला सुनकर फैसला देना होगा। जूरी का गठन बोर्ड की मेम्बर लिस्ट से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। मामले की प्रकृति अनुसार जूरी में 12 से 1500 तक नागरिक हो सकेंगे। .

भाग (II) नागरिकों व अधिकारियों के लिए निर्देश

. (9) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रिय हिन्दू बोर्ड ( Rashtriy Hindu Board = RHB ) नामक ट्रस्ट का गठन करेंगे और इसके संचालन के लिए अपनी पसंद से 1 संघ प्रमुख व 4 न्यासियों की प्रारम्भिक नियुक्ति करेंगे। ये सभी 5 सदस्य अनिवार्य रूप से हिन्दू होंगे। . (10) राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या के अलावा हिन्दू बोर्ड उन सभी देवालयो का भी प्रबंधन करेगा जो किसी ट्रस्ट के मालिको ने उसे स्वेच्छा से सौंप दिया है। यदि अमुक ट्रस्ट चाहे तो सौंपा गया देवालय 5 साल के भीतर वापिस ले सकता है। 5 साल बाद बोर्ड औपचारिक रूप से ट्रस्ट से पूछेगा कि क्या उसे देवालय वापस चाहिए। यदि 65% से ऊपर ट्रस्टी ना में उत्तर करते है, सिर्फ तब और तब ही बोर्ड द्वारा देवालय अधिगृहीत किया जायेगा। लेकिन इसके बाद हिन्दू बोर्ड अमुक ट्रस्ट को देवालय कभी भी वापस नहीं दे सकेगा। . (11) मथुरा, काशी एवं अमरनाथ देवालय के भूखंड हिन्दू बोर्ड के स्वामित्व में सौंपना . (11.1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर इस क़ानून की धारा 30 में दिए गए प्रावधानों का प्रयोग करते हुए प्रधानमन्त्री देश के सभी मतदाताओ के 4 अलग अलग देश व्यापी जनमत संग्रह करवाएंगे, जिसमें यह प्रश्न रखा जाएगा कि क्या (1) कृष्ण जन्म भूमि देवालय, मथुरा (2) विश्वनाथ देवालय, काशी एवं (3) अमरनाथ देवालय, कश्मीर के भूखंड हिन्दू बोर्ड को सौंप दिए जाने चाहिए या नहीं। यदि देश के 45 करोड़ मतदाता इसके लिए अपनी स्वीकृति हाँ के रूप में दे देते है, तो प्रधानमंत्री ये 4 भूखंड हिन्दू बोर्ड को सौंप देंगे। . (11.2) यह क़ानून उपरोक्त 3 मंदिरों के भूखंडो के अतिरिक्त देश के अन्य किसी भी भूखंड पर - जिस पर मन्दिर, मस्जिद, चर्च होने का दावा हो या स्वामित्व को लेकर विवाद हो के स्वामित्व के निर्धारण हेतु धारा 30 का इस्तेमाल करने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबन्ध लगाता है। . (12) हिन्दू संघ प्रधान एवं हिन्दू बोर्ड के न्यासियों के पद के लिए आवेदन एवं योग्यताएं : . (12.1) हिन्दू बोर्ड का कोई भी सदस्य जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो, वह हिन्दू संघ प्रधान एवं हिन्दू बोर्ड के न्यासी पद के लिए आवेदन कर सकेगा। कोई व्यक्ति बोर्ड के न्यासी के साथ साथ संघ प्रधान के रूप में भी उम्मीदवार हो सकता है। . (12.2) हिन्दू बोर्ड का कोई भी सदस्य जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा। . (13) धारा 12 में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा इसे प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।। . (14) हिन्दू बोर्ड के सदस्यों द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना . (14.1) कोई भी बोर्ड मेम्बर किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर संघ प्रधान, बोर्ड के किसी भी न्यासी या जूरी प्रशासक के उम्मीदवारों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाता की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है। . (14.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी . (14.3) यदि कोई बोर्ड मेम्बर अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी बिना कोई फ़ीस लिए स्वीकृति रद्द कर देगा। . (14.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा। . [टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके।

रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि बोर्ड मेम्बर किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मेम्बर सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ] . (15) हिन्दू संघ प्रधान एवं हिन्दू बोर्ड के न्यासियों की नियुक्ति एवं निष्कासन . (15.1) हिन्दू संघ प्रधान के लिए : यदि हिन्दू संघ प्रधान पद के किसी उम्मीदवार को 25 करोड़ से अधिक बोर्ड मेम्बर्स की स्वीकृति मिल जाती है और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन संघ प्रधान की स्वीकृतियों से 1 करोड़ अधिक भी है, तो प्रधानमन्त्री उसे नए संघ प्रधान के रूप में नियुक्त कर सकते है। . (15.2) हिन्दू बोर्ड के न्यासी के लिए : यदि हिन्दू बोर्ड न्यासी के किसी उम्मीदवार को 20 करोड़ से अधिक बोर्ड मेम्बर्स की स्वीकृति मिल जाती है और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन न्यासी की स्वीकृतियों से 1 करोड़ अधिक भी है, तो प्रधानमन्त्री उसे नए न्यासी के रूप में नियुक्त कर सकते है। . (15.3) जिला-राज्य-राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए : यदि किसी जिले / राज्य की बोर्ड सदस्य सूची में दर्ज सभी हिन्दू मतदाताओं के 35% से अधिक सदस्य किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह संख्या पदासीन जूरी प्रशासक से 1% अधिक भी है तो हिन्दू संघ प्रधान अमुक व्यक्ति को क्रमश: जिला / राज्य जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्ति कर सकते है। राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए पूरे देश के कुल बोर्ड सदस्यों के 35% सदस्यों की स्वीकृतियों की जरूरत होगी।
. (16) हिन्दू बोर्ड के सदस्यों के मतदान अधिकार : . (16.1) प्रत्येक व्यक्ति जो हिन्दू है और RHB का ड्राफ्ट राजपत्र में छपने की दिनांक पर 18 वर्ष से ऊपर की आयु का है, राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड का मतदाता सदस्य होगा। इस हिन्दू बोर्ड में गैर-हिन्दू मतदाता सदस्य नहीं होंगे। शब्द हिन्दू में हिन्दू, सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि सम्प्रदायों के अनुयायी भी शामिल है, जिन सम्प्रदायों का उद्भव भारतीय उपमहाद्वीप रहा है । . (16.2) यदि कोई व्यक्ति स्वयं को गैर-हिन्दू कहता है और बोर्ड का सदस्य नहीं बनता तो उसका अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा इस क़ानून द्वारा प्रभावित नहीं होगा। . (16.3) यदि कोई ईसाई या मुस्लिम हिन्दू बनना चाहता है तो जूरी उसकी पहचान की पुष्टि करके अनुमोदन करेगी। जूरी के अनुमोदन के बाद यदि सभी न्यासी भी इसका अनुमोदन करते है तो संघ प्रधान उसका नाम बोर्ड की सदस्य सूची में जोड़ेगा। नाम तब तक नहीं जोड़ा जायेगा जब तक कम से कम 100 बोर्ड मेम्बर्स की जूरी बहुमत द्वारा स्वीकृति नहीं देती। . (16.4) यदि कोई व्यक्ति हिन्दू धर्म छोड़कर अन्य किसी धर्म में धर्मान्तरित हो जाता है तो उसका मताधिकार निलम्बित कर दिया जाएगा। यदि धर्मान्तरित हुआ अमुक व्यक्ति एक वर्ष के भीतर फिर से हिन्दू धर्म में पुन: धर्मान्तरित नहीं होता है तो उसका नाम बोर्ड की मेम्बर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। और यदि वह दो बार किसी अन्य धर्म में परिवर्तित हो जाता है तो दूसरी बार उसका नाम बिना 1 साल इंतज़ार किये हटा दिया जायेगा। विवाद की स्थिति में जूरी का निर्णय अंतिम होगा। . (16.5) यदि किसी व्यक्ति की माता या पिता में से कोई एक हिन्दू है और वह स्वयं को हिन्दू घोषित करता है तो वह 18 वर्ष की आयु से हिन्दू बोर्ड का मतदाता बन जाएगा। . (17 ) हिन्दू बोर्ड के नियंत्रण में आने वाले देवालयों का प्रबंधन . (17.1) संघ प्रधान और न्यासी हिन्दू बोर्ड के संचालन और कर्मचारियों के प्रबंधन लिए जरुरी नियम बनाएंगे। संघ प्रधान के सभी निर्णयों को कम से कम दो न्यासियों के अनुमोदन की ज़रूरत होगी। . (17.2) RHB किसी भी भारतीय व्यक्ति या गैर व्यक्ति भारतीय इकाई या विदेशी हिन्दू से दान प्राप्त कर सकता है, किन्तु विदेशी इकाई से नहीं । RHB किसी भी व्यवसाय आदि में भी शामिल हो सकता है। जैसे कोई उद्योग, निगम, संस्था आदि। . (17.3) संघ प्रधान लिखित परीक्षा द्वारा 1000 दिनों की अवधि के लिए पुरोहितों एवं अन्य कर्मचारियों की भर्ती करेगा। संघ प्रधान विशेष कार्यों के लिए बाहरी ठेकेदारों को ठेके दे सकता है। . (17.4) संघ प्रधान कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतें सुनने के लिए जूरी सिस्टम की स्थापना करेगा। संघ प्रधान राष्ट्रिय जूरी प्रशासक, राज्य जूरी प्रशासको एवं जिला जूरी प्रशासको की भी नियुक्ति करेगा।
. (18) विवादों एवं मामलो का हिन्दू नागरिको की जूरी द्वारा निपटान . (18.1) जूरी प्रशासक जिले की हिन्दू बोर्ड मेम्बर लिस्ट में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य रिटायर होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मेम्बर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर काम करता रहेगा। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू एवं यात्रा व्यय मिलेगा। . (18.2) यदि संघ प्रधान, न्यासी या बोर्ड के स्टाफ से सम्बंधित कोई भी मामला है तो वादी अपने मामले की शिकायत महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है। . (18.3) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच कितने सदस्यों की जूरी बुलानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक बोर्ड की मेम्बर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा 30 से 55 वर्ष के बीच की आयुवर्ग के सदस्यों का चयन करके एक जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा। . (18.4) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर या जज को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नारको टेस्ट या नौकरी से निकालने का निर्णय लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। जज या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी के सामने जूरी का निर्णय सुनायेंगे। यदि जज जूरी के फैसले को खारिज करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी होगी, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है। . (18.5) जिला जूरी मंडल के निर्णय की अपील राज्य जूरी मंडल में एवं राज्य जूरी मंडल के फैसले की अपील राष्ट्रीय जूरी के सामने की जा सकेगी। प्रवृत कानूनों के अनुसार फैसले की अपील जिला / उच्च / उच्चत्तम न्यायालय में भी की जा सकेगी। . (18.6) यदि 75% या उससे अधिक जूरी सदस्य आरोपी कर्मचारी को नौकरी से निकालने या जुर्माना लगाने का निर्णय देते है तो संघ प्रधन अमुक कर्मचारी को निकाल सकता है या उससे जुर्माना वसूल सकता है। यदि शिकायतकर्ता को लगता है कि संघ प्रधान ने जूरी सदस्यों के निर्णय का ठीक से पालन नहीं किया है, तो वह हिन्दू बोर्ड के मतदाताओं से मांग कर सकता है कि वे धारा 15 में दी गयी वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके हिन्दू संघ प्रधान को नौकरी से निकालने की सहमती दें। .

भाग (III) : सनातन संस्कृति के विभिन्न सम्प्रदायों का प्रबंधन

. (19) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय सनातन संप्रदाय रजिस्ट्रार ( National Sanatan Sect Registrar ) नामक अधिकारी की नियुक्ति करेंगे, जो उन सम्प्रदायों एवं उनके अनुयायियों की सदस्य सूची बनाने एवं उन्हें लोकतांत्रिक रूप से प्रबंधित करने में व्यवस्थागत सहयोग करेगा जिनका उद्भव भारतीय उपमहाद्वीप की सनातन संस्कृति है, तथा वे एक पंथ या सम्प्रदाय के रूप में मान्यता प्राप्त धार्मिक ट्रस्ट है। ऐसे धार्मिक सम्प्रदायों में जैन, बौद्ध, शैव, वैष्णव, आर्य समाज आदि सभी भारतीय धर्म तथा संप्रदाय शामिल है। सिख पंथ भी एक भारतीय संप्रदाय है किन्तु यह पहले से SGPC द्वारा शासित है, अत: सिक्ख पंथ रजिस्ट्रार के दायरे से बाहर रहेगा। इसके अलावा इस्लाम, ईसाई, पारसी, यहूदी एवं अन्य धर्म जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर उत्पन्न हुए है, भी सम्प्रदाय रजिस्ट्रार के दायरे से बाहर रहेंगे। . (20) सम्प्रदाय रजिस्ट्रार वोट वापसी पासबुक के अधीन होगा और उसके आवेदन व निष्कासन की प्रक्रिया धारा 13,14, एवं 15 में हिन्दू बोर्ड के न्यासी के लिए दी गयी प्रक्रिया के समान ही होगी। सम्प्रदाय रजिस्ट्रार जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति करेगा, एवं जिला रजिस्ट्रार जिला जूरी प्रशासक के समान ही वोट वापसी प्रक्रियाओ के अधीन होंगे। . (21) वे सभी धार्मिक ट्रस्ट जिनका किसी देव स्थान या देवालय पर स्वामित्व है, उन्हें जिला सम्प्रदाय रजिस्ट्रार में अपने ट्रस्ट का पंजीयन कराना होगा। ऐसे देवालय जो किन्ही व्यक्तियों के निजी स्वामित्व है, रजिस्ट्रार के क्षेत्राधिकार में नहीं आयेंगे । . (22) धार्मिक ट्रस्टो के पंजीयन की प्रक्रिया . (22.1) जिला रजिस्ट्रार प्रत्येक ट्रस्ट से शुल्क के रूप में 1000 रूपये प्रति वर्ष लेगा। रजिस्ट्रार प्रत्येक ट्रस्टी से भी 1000 रूपये प्रति ट्रस्ट के हिसाब से जितने ट्रस्टों का वह ट्रस्टी है वार्षिक शुल्क लेगा। . (22.2) अध्यक्ष तथा ट्रस्टी ट्रस्ट के स्वामित्व में जितनी संपत्ति है उसके ब्यौरे की सूची जिला रजिस्ट्रार को देंगे। इस सूची में ट्रस्ट के स्वामित्व वाली भूमि, इमारतें, नकदी, शेयर, बांड, सोना, चांदी, फर्नीचर, किसी को दिया या किसी से लिया गया कर्ज, संपत्ति, कोई अन्य मूल्यवान प्रतिभूति आदि एवं इनका बाजार मूल्य शामिल है। कोई भी ट्रस्टी यह सूची रजिस्ट्रार को दे सकता है, एवं सभी ट्रस्टी अलग अलग भी यह सूची दे सकते है। सूची मे विचलन होने पर जूरी इसका निपटान करेगी। . (22.3) जिला रजिस्ट्रार अपने जिले के प्रत्येक ट्रस्ट का नाम, क्रम संख्या, ट्रस्ट विलेख, सभी ट्रस्टियों के नाम, ट्रस्ट की संपत्तियां (मय बाजार मूल्य) आदि की पूरी अद्यतन जानकारी ट्रस्ट के लिए बनायी गयी जिला वेबसाइट पर रखेगा। यह सूचना राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बनायी गयी ट्रस्ट की राष्ट्रीय वेबसाइट पर भी रखी जायेगी। . (23) ट्रस्ट के स्वामित्व से सम्बंधित विवादों को स्वीकार करना . (23.1) यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से ट्रस्टियों की सूची में शामिल हो गया है तो वह जिला रजिस्ट्रार के सामने प्रस्तुत होकर अपना नाम सूची से हटवा सकता है। नाम हटाने के लिए उसके द्वारा दी गयी अर्जी इंटरनेट पर रखी जायेगी तथा 3 महीने के भीतर वह अपनी अर्जी वापिस नहीं लेता है तो उसका नाम सूची में से हटा दिया जायेगा। . (23.2) यदि कोई व्यक्ति दावा करता है की वह किसी ट्रस्ट का ट्रस्टी है, किन्तु उसके नाम का उल्लेख ट्रस्टी के तौर पर नही हुआ है, तो इस कानून के पारित होने के 90 दिनों के अंदर वह जिला रजिस्ट्रार के सामने अपना दावा पेश कर सकता है। जितने ट्रस्टों के लिए ऐसा दावा प्रस्तुत किया गया उनका 5000 रू प्रति ट्रस्ट की दर से शुल्क लेकर जिला रजिस्ट्रार दावे स्वीकार कर लेगा और इसे वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा। 90 दिन बीतने के बाद शुल्क हर 1 माह की देरी पर 1000 रू की दर से बढ़ेगा। किन्तु यह कानून पास होने के 10 साल बाद कोई दावा स्वीकार नहीं होगा। . (23.3) यदि दावा प्राप्त करने के 30 दिनों के अंदर सभी ट्रस्टी जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय में स्वयं आकर अमुक ट्रस्टी का दावा स्वीकार कर लेते है तो दावाकर्ता का नाम ट्रस्टी के तौर पर दर्ज कर लिया जायेगा। यदि किसी ट्रस्टी ने इसे स्वीकार नही किया तो उसका मत ‘नहीं’ में माना जायेगा। ऐसी स्थिति में जूरी मंडल द्वारा मामले का निस्तारण करने के लिए जिला रजिस्ट्रार जिस जिले में ट्रस्ट है उसी जिले के जूरी प्रशासक से जूरी का गठन करने को कहेगा। . (24) स्वामित्व से सम्बंधित विवादों का जूरी मंडल द्वारा निपटान . (24.1) धारा 18 में दिए अनुसार महाजूरी मंडल मामले पर निर्णय करने के लिए एक जूरी का गठन करेगा। जूरी का आकार ट्रस्ट की संपत्ति पर निर्भर करेगा। 1 करोड़ तक की संपत्ति वाले ट्रस्ट के लिए जूरी में कम से कम 12 सदस्य होंगे और प्रत्येक 1 करोड़ की वृद्धि पर 1 जूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा। किन्तु जूरी सदस्यों की संख्या 1500 से अधिक नहीं होगी। . (24.2) जूरी सदस्य उस व्यक्ति का पक्ष सुनेंगे जो ट्रस्टी होने का दावा कर रहा है। साथ हीं वे उन ट्रस्टियों को भी सुनेंगे जो उस व्यक्ति के खिलाफ बोलना चाहते है। यह सुनवाई कम से कम 67% जूरी सदस्यों की उपस्थिति में होगी। जब 50% जूरी सदस्य दोनों पक्षों से समाप्त करने को कहेंगे, तो सुनवाई अगले 2 दिनों में समाप्त हो जाएगी। लेकिन 2 दिनों के बाद, यदि 50% से अधिक जूरी सदस्य इसे जारी रखने का निर्णय लेते हैं, तो सुनवाई जारी रहेगी। . (24.3) यदि ट्रस्ट की संपत्ति का राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा हिसाब किया गया मूल्य 200 करोड़ से अधिक है, तथा 50% से अधिक जूरी सदस्यों ने किसी खास गवाह या ट्रस्टी का सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट कराये जाने की मांग की है, तो जिला रजिस्ट्रार फोरेंसिक विशेषज्ञ का प्रबंध करेगा तथा अमुक व्यक्ति का सार्वजनिक रूप से नारको टेस्ट करायेगा। . (24.4) सुनवाई के बाद प्रत्येक जूरी सदस्य घोषणा करेगा कि व्यक्ति ट्रस्टी है या नही। यदि बहुमत में जूरी सदस्य इस बात से सहमत है कि दावा करने वाला व्यक्ति ट्रस्टी है तो जिला रजिस्ट्रार उसके नाम की घोषणा ट्रस्टी के रूप में कर देंगे। . (24.5) जूरी मिथ्या दावा करने वाले पर या उसके दावे का समर्थन / विरोध करने वालो पर आार्थिक दंड लगा सकती है। फाइन के तौर पर 15000 से कम की कोई भी रकम + जिस व्यक्ति को झूठ बोलने का दोषी पाया गया, उसकी कुल संपत्ति का 1-5% के बीच का कोई भी भाग होगा। फाइन लगाने से एक दिन पहले उन्हें जूरी इसकी पूर्व सूचना देगी।
. (24.6) हारने वाला पक्ष 15000 रू जमा कराकर जिला कलेक्टर के यहाँ अपील कर सकता है। जिला कलेक्टर राज्य के किन्ही 3 जिलों को लॉटरी से चुनेगा। हारने वाला पक्ष उन जिलों के रजिस्ट्रार के सामने अपनी अपील दायर कर सकता है। प्रत्येक जिले का जिला रजिस्ट्रार 10,000 रू की एक और जमाराशि प्राप्त करने के बाद, इस मामले में फैसला देने वाली जूरी के आकार की ही एक जूरी का गठन करेगा। इन 3 मे से 2 जूरी मंडलों द्वारा दिया गया निर्णय अंतिम निर्णय माना जायेगा। . (25) ट्रस्टो के मतदाता सदस्यों की सूची बनाना तथा उन्हें सार्वजनिक करना . (25.1) यह कानून पास होने के 6 माह के भीतर मंदिरो का स्वामित्व रखने वाले ट्रस्टो के अध्यक्ष एवं प्रत्येक ट्रस्टी ट्रस्ट के सभी मतदाता सदस्यों की सूची प्रस्तुत करेंगे। ट्रस्टी जिला रजिस्ट्रार कार्यालय में स्वयं आकर इस सूची पर हस्ताक्षर करेंगे। सूची के पहले 1000 मतदाता सदस्यों के लिए जिला रजिस्ट्रार प्रति सदस्य 50 रू, तथा उससे आगे की संख्या पर 20 रू प्रति सदस्य का शुल्क लेगा। दो या दो से अधिक या सभी ट्रस्टी मिलकर सम्मिलित रूप से एक या अलग-अलग सूची भी दे सकते हैं। जिला रजिस्ट्रार प्रस्तुत की गयी प्रत्येक सूची पर शुल्क लगायेगा। सूची देते समय ट्रस्टी को प्रत्येक मतदाता सदस्य के मत का मान भी बताना होगा या ट्रस्टी को यह कहना होगा कि "सभी मतदाता सदस्यों के मतों का मान समान है”।
. (25.2) ट्रस्टियों द्वारा प्रस्तुत की गयी प्रत्येक सूची को जिला रजिस्ट्रार जिला वेबसाइट पर रखेगा। यदि एक ही सूची प्रस्तुत की गयी है, एवं यह सूची सभी ट्रस्टियों द्वारा स्वीकृत है, तो जिला रजिस्ट्रार कोई अतिरिक्त सूची तैयार नही करेगा। यदि विभिन्न ट्रस्टियों द्वारा प्रस्तुत की गयी सूचियों में मतदाता सदस्य और / अथवा उनके मतों के मानों में भिन्नता हो तो जिला रजिस्ट्रार प्रत्येक ट्रस्ट के लिए निचे बताये अनुसार अलग-अलग सूची तैयार करेगा : . (25.2.1) समान मतदाता सूची, जिसमे वे सारे नाम शामिल होंगे जो सभी सूचियों में समान रूप से हों। . (25.2.2) संयुक्त सूची, जिसमें उन सभी सदस्यों के नाम होंगे जिनके मतों का मान भिन्न हो। . (25.2.3) मतदाता सदस्य जो आधे से अधिक ट्रस्टियों की सूची में शामिल हो तथा जिनके मत का मूल्य शून्य न हो। . (25.3) यदि कोई मतदाता सदस्य दावा करता है कि वह एक मतदाता सदस्य नहीं है, तो वह जिला रजिस्ट्रार को 'नॉट मेंबर' की अर्जी पर हस्ताक्षर करके दे सकता है। उसकी अर्जी वेबसाइट पर रखी जायेगी, तथा 30 दिनों के बाद ट्रस्ट की मतदाता सूची से उसका नाम हटाकर उसके मत का मान अन्य सभी सदस्यों में आनुपातिक रूप से बाँट दिया जायेगा। . (25.4) यदि कोई व्यक्ति दावा करता है कि वह ट्रस्ट का मतदाता सदस्य है, किन्तु उसका नाम मतदाता सदस्यों की सूची में नही है, अथवा सूची में उसके मत का मान कम है, तो वह जिला रजिस्ट्रार द्वारा वेबसाइट पर ट्रस्ट के मतदाता सदस्यों की सूची रखे जाने के 90 दिनों के अंदर अपनी शिकायत जिला रजिस्ट्रार को दर्ज करा सकता है। जिला रजिस्ट्रार यह शिकायत जिला वेबसाइट पर रखेगा। 90 दिन का समय बीत जाने पर यदि व्यक्ति शिकायत दर्ज करता है तो 100 रूपये प्रति माह की दर से अतिरिक्त शुल्क लगेगा। किन्तु 10 वर्ष बीत जाने पर सदस्यता का कोई दावा स्वीकार नही किया जायेगा। . (25.5.1) जिला रजिस्ट्रार ट्रस्ट पर निम्न शुल्क लगाएगा। यह शुल्क सदस्यों पर लागू होगा न कि प्रति सूची के आधार पर : . (25.5.2) 10 से कम मतदाता सदस्य- 500 रूपये प्रति मतदाता सदस्य प्रति वर्ष . (25.5.3) 10-99 मतदाता सदस्य- 5000 रूपये + 50 रूपये प्रति मतदाता सदस्य प्रति वर्ष . (25.5.4) 100-1000 मतदाता सदस्य- 10,000 रूपये + 20 रूपये प्रति मतदाता सदस्य प्रति वर्ष . (25.5.5) जूरी द्वारा मतदाता सदस्यों के दावों का निपटान . (26.1) प्रत्येक ट्रस्टी जूरी सदस्यों के सामने सदस्यों के नाम की सूची उनके मतों के मान के साथ रखेगा। जिला रजिस्ट्रार भी अपनी राय तथा जानकारी के आधार पर सूची देगा। कोई अन्य व्यक्ति भी अपनी तरफ से ऐसी सूची प्रस्तुत कर सकता है। . (26.2) प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक सूची को 0-100 के मध्य अंक देगा। यदि किसी सूची को जूरी सदस्य ने कोई अंक नही दिया तो उसे शून्य अंक मान लिया जायेगा। जिस सूची को सर्वाधिक अंक मिलेंगे उसे अंतिम सूची माना जायेगा। . (26.3) सूची को अंतिम रूप देने के बाद प्रत्येक जूरी सदस्य 0 रूपये से लेकर ट्रस्ट की कुल संपत्ति के 1% तक की शुल्क रकम बताएगा। जिला रजिस्ट्रार जूरी सदस्यों द्वारा दिए गए शुल्क आंकड़ों के बीच के मूल्य को शुल्क के रूप में लेकर शुल्क का 50% सूची बनाने वाले व्यक्ति को देगा और शुल्क का 50% जूरी सदस्यों के वेतन के लिए कोष में जायेगा । . (26.4) यदि कोई व्यक्ति मतदाता सदस्यों की सूची से संतुष्ट नही है तो वे जिला रजिस्ट्रार से अनुरोध कर सकते है कि वे 3 जिलों का लॉटरी द्वारा चयन कर उन जिलों के जिला रजिस्ट्रारो को जूरी ट्रायल कराने की अर्जी भेजें। प्रथम जिले मंक जिस आकार की जूरी का गठन किया गया था उसी आकार की जूरी का गठन प्रत्येक जिला रजिस्ट्रार 30 दिनों के अंदर करेगा। . (26.5) पहली सुनवाई में प्रस्तुत सूची पर प्रत्येक जूरी सदस्य पूर्व सूचियों को 0-100 अंक देगा। इस अपील में कोई नई सूची प्रस्तुत नहीं की जायेगी। तीनों जूरी मंडलों के द्वारा अधिकतम अंक प्राप्त करने वाली सूची ही अंतिम सूची मानी जाएगी। . (26.6) यदि जूरी सदस्यों को लगता है कि शिकायत व्यर्थ की गयी थी तो वे 0 से लेकर शिकायतकर्ता की कुल संपत्ति का 1% तक फाइन लगा सकते है। जिस जिले में प्रथम सुनवाई हुई थी उसका जिला रजिस्ट्रार यह फाइन प्राप्त करेगा। . (26.7) सूची को अंतिम रूप देने के बाद प्रत्येक जूरी सदस्य 0 रूपये से लेकर ट्रस्ट की कुल संपत्ति के 2% तक की शुल्क रकम बताएगा। जिला रजिस्ट्रार जूरी सदस्यों द्वारा दिए गए शुल्क आंकड़ों के बीच का मूल्य शुल्क के रूप में लेगा। . (27) मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष तथा ट्रस्टियों में बदलाव की प्रक्रिया . (27.1) धारा 14 में दी गयी प्रक्रिया के अनुरूप किसी ट्रस्ट के मतदाता सदस्य वोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके अपने ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ट्रस्टी को बदल सकेंगे। . [ टिपण्णी : राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड की वोट वापसी पासबुक में एक सेक्शन ट्रस्टो का भी होगा। यदि आप किसी ट्रस्ट के मतदाता सदस्य है तो अपने ट्रस्ट के ट्रस्टियों एवं अध्यक्ष को बदलने के लिए किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दर्ज कर सकते है। ] . (27.2) यदि किसी ट्रस्ट का मतदाता सदस्य अमुक ट्रस्ट का अध्यक्ष या ट्रस्टी बनना चाहता है तो जिला रजिस्ट्रार कार्यालय में ट्रस्ट की कुल संपत्ति का 1% के बराबर रकम का शुल्क जो कि कम से कम 2000 रूपये तथा अधिकतम 2000 रूपये हो सकता है, चुकाकर अपना नाम दर्ज करवा सकता है। . (27.3) स्वीकृति दर्ज अथवा रद्द करने के लिए शुल्क इस तरह होगा ; 50 रू + ट्रस्ट की कुल संपत्ति का 0.0001% तथा अधिकतम 1000 रूपये। शुल्क के सम्बन्ध में जिला रजिस्ट्रार का निर्णय अंतिम होगा। . (27.4) अध्यक्ष की नियुक्ति : यदि किसी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को कुल स्वीकृतियों की 50% से अधिक स्वीकृतियां मिल जाती है और यदि ये स्वीकृतियां पदासीन अध्यक्ष की स्वीकृतियों से 10% अधिक भी हो तो जिला रजिस्ट्रार उसे ट्रस्ट का नया अध्यक्ष नियुक्त करेगा। यहाँ मतदाता सदस्यों के मतों के मान को भी ध्यान में रखा जायेगा। . (27.5) ट्रस्टी की नियुक्ति : यदि किसी ट्रस्टी पद के प्रत्याशी को 50% से अधिक मतदाता सदस्यों की स्वीकृति प्राप्त हो जाये और यदि यह स्वीकृतियां न्यूनतम स्वीकृति प्राप्त ट्रस्टी से 5% अधिक भी हो तो रजिस्ट्रार अमुक न्यूनतम स्वीकृति वाले ट्रस्टी को हटा कर उसकी जगह इस प्रत्याशी को ट्रस्टी बना देगा। . (28) ट्रस्ट में नए मतदाता सदस्यों का प्रवेश तथा निष्कासन . (28.1) यदि कोई मतदाता सदस्य किसी अन्य धर्म में परिवर्तन कर लेता है या किसी ऐसे संप्रदाय में शामिल हो जाता है जो कि परंपरागत रूप से अथवा ट्रस्ट के दस्तावेजों के अनुसार अलग संप्रदाय माना जाता हो, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। किन्तु यदि इस विषय में ट्रस्ट के संविधान में विपरीत प्रावधान है तो उसकी सदस्यता जारी रहेगी। कोई भी मतदाता सदस्य अपने मताधिकार को अपने जीते जी किसी को हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। . (28.2) यदि किसी मतदाता सदस्य की मृत्यु हो जाती है अथवा वह धर्म या संप्रदाय परिवर्तन कर लेता है तो उसकी संताने मतदाता सदस्य बन जायेगी व उसके मत का मान समानुपातिक रूप से संतानों में बराबर बंटेगा। संताने नही होने पर है तो सदस्यता का हस्तांतरण पोते पोतियों में एवं पोते पोती न होने पर उसके भाई अथवा भाई के बच्चों को हो जाएगा। यदि वे भी नहीं है तो सदस्यता अगले नजदीकी रिश्तेदार को मिल जाएगी, जैसा कि जूरी ने तय किया हो। . (28.3) ट्रस्ट सभी ट्रस्टियों के अनुमोदन के बाद तथा 75% से अधिक मतदाता सदस्यों के अनुमति से निम्नलिखित में से कोई एक या एक से अधिक प्रावधान ट्रस्ट के विलेख में जोड़ सकता है, किन्तु एक बार यदि ये प्रावधान किसी ट्रस्ट के दस्तावेजों में आ गए तो फिर ये कभी हटाये नही जा सकेंगे। .
(28.3.1) मतदाता सदस्य आजीवन के लिए मतदाता सदस्य होगा। . (28.3.2) मतदाता सदस्य की संताने मतदाता सदस्य होंगी तथा उसके मत का मान संतानों में बराबर बंटेगा। . (28.3.3) किसी अन्य धार्मिक ट्रस्ट की मतदाता सदस्यता लेने से व्यक्ति अमुक ट्रस्ट में मतदाता सदस्य नही रह जाएगा। . (28.3.4) महिलाओ को यदि मतदाता सदस्य बनाया जा सकता है। . (28.3.5) ट्रस्ट में सभी मतदाता सदस्यों के मतों का मान एवं वजन बराबर होगा। . (28.4) यदि मतदाता सदस्य स्वेच्छा सदस्यता त्याग देता है तो उसके बच्चों को मतदाता सदस्यता मिल जाएगी। किन्तु पुन: मतदाता सदस्य बनने के लिए उसे फिर से नए सदस्य के तौर पर जुड़ने के लिए तय की गयी प्रक्रिया से गुजरना होगा। . (29) किसी ट्रस्ट के विभाजन या विलय के लिए ट्रस्ट के सभी ट्रस्टीयों एवं 75% मतदाता सदस्यों की सहमती आवश्यक होगी। . (30) जनता की आवाज . (30.1) यदि भारत का कोई भी मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा। . (30.2) यदि भारत का कोई भी मतदाता धारा 30.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा। .