जूरी कोर्ट – थानों-अदालतों को सुधारने के लिए जूरी अदालतें

(Jury Court - Proposed Notification to Enact Jury Courts)

निचे दिया गया क़ानून देश भर के थानों, अदालतों, स्कूलों, अस्पतालों, बैंक, मीडिया, एवं अन्य सरकारी विभागों का काम काज सुधारने के लिए लिखा गया है। इस कानून को लोकसभा और राज्यसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री अपने हस्ताक्षर करके इस अधिसूचना को सीधे गेजेट में छाप सकते है। गेजेट में आने के साथ ही यह क़ानून पूरे देश में लागू होगा। #P20180436102

यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है और देश में इसे लागू करना चाहते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड लिखें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :

प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित जूरी कोर्ट के क़ानून को गेजेट में छापें — #JuryCourt, #VoteVapsiPassBook


भाग (I) : नागरिकों के लिए निर्देश :

(01)

यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है तो यह कानून पास होने के बाद आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी ड्यूटी में आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा। जूरी का चयन वोटर लिस्ट में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा और मामले की गंभीरता देखते हुए जूरी मंडल में 15 से 1500 तक सदस्य होंगे। यदि आपका नाम लॉटरी में निकल आता है तो आपको निचे दिए अपराधो के मुकदमे सुनने के लिए बुलाया जा सकता है :

(02)

इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित अधिकारी इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :

  1. जिला पुलिस प्रमुख
  2. जिला शिक्षा अधिकारी
  3. जिला चिकित्सा अधिकारी
  4. जिला जूरी प्रशासक
  5. मिलावट रोक अधिकारी
  6. DD चेयरमेन
  7. RBI गवर्नर
  8. CBI डायरेक्टर
  9. BSNL चेयरमेन
  10. सेंसर बोर्ड चेयरमेन
  11. जिला जज
  12. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
  13. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
  14. राष्ट्रिय जूरी प्रशासक
  15. केन्द्रीय सूचना आयुक्त

तब यदि आप ऊपर दिए गए किसी अधिकारी के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।

धारा 2 का स्पष्टीकरण : इस कानून में शुरूआती तौर पर सिर्फ कुछ सरल स्वभाव के अपराधों को शामिल किया गया है, ताकि विशिष्ट किस्म के बुद्धिजीवियों द्वारा दिए जा रहे इस तर्क को कि - आम भारतीय नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो की प्रकृति समझने की अक्ल नहीं रखते है, अत: उन्हें जूरी में आने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए - नागरिकों द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा सके। बाद में प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री या मतदाता अन्य अपराधों एवं नागरिक विवादो के अन्य प्रकार भी इसमें जोड़ सकते है।

इस तरह ये स्थापित किया जा सकेगा कि बुद्धिजीवियों का यह तर्क कि - आम भारतीय नागरिक ‘ऐसे वाले और वैसे वाले’ अपराधो को समझने की अक्ल नहीं रखते है - अधिकतम मतदाताओं द्वारा एक सफ़ेद झूठ के रूप में ख़ारिज किया जा चुका है। तब गोहत्या, भ्रष्टाचार, भाईभतीजा वाद, चोरी, धोखाधड़ी, चेक बाउंस, कर्ज ना चुकाना, किरायेदार-मकान मालिक विवाद, मजदूर-नियोक्ता विवाद, जमीन विक्रय के दस्तावेजों की जालसाजी आदि जैसे अपराध भी प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री / मतदाताओ द्वारा इस क़ानून में जोडे जा सकेंगे।

(03)

यदि आपका नाम वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (44.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर आपके शपथपत्र को पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।


भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :

(04)

टिप्पणी : टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक व अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है। टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी, मंत्री या न्यायाधीश पर बाध्यकारी नहीं है।

(05)

यह कानून आरोपी या पीड़ित की आयु की अवहेलना करते हुए निम्नलिखित मामलो पर लागू होगा :

(06)

यदि कोई अपराध मुख्यमंत्री द्वारा इस क़ानून में जोड़ा जाता है तो यह केवल अमुक राज्य के लिए ही लागू होगा। यदि इसे प्रधानमंत्री द्वारा जोड़ा जाता है तो यह सम्पूर्ण देश या प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए राज्यों के लिए लागू होगा। मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री स्पष्ट कर सकते है कि जूरी सदस्य किन जिलो / राज्यों से या फिर सम्पूर्ण भारत से चुने जाएंगे।

(07)

जिला सहायक निदेशक अभियोजन को शामिल करते हुए धारा (02) में दिए गए 15 अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में रहेंगे। प्रत्येक नागरिक को राशन कार्ड या गैस डायरी की तरह एक vote वापसी पासबुक जारी की जायेगी, जिसमें इन सभी अधिकारियों के खाने (कॉलम) होंगे। प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री चाहे तो अन्य पदों जैसे सभापति, सरपंच आदि जन प्रतिनिधियों या अन्य अधिकारियों के पन्ने भी इसमें जोड़ने के लिए अधिसूचना जारी कर सकते है। कोई भी नागरिक इनमें से किसी अधिकारी को बदलना चाहता है तो वह इसके लिए अपनी स्वीकृति दर्ज करवा सकेगा। स्वीकृति दर्ज करने और नियुक्ति के प्रावधानों के लिए धारा (39) देखें।

(08) जूरी कोर्ट की स्थापना एवं इसका अस्थायी निलंबन :

मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक एवं प्रधानमंत्री केन्द्रीय स्तर पर 1 राष्ट्रीय जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक उनके काम से संतुष्ट नही है तो धारा (39) का प्रयोग करके जूरी प्रशासको को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।

टिप्पणी : जिला जूरी प्रशासक और राष्ट्रीय जूरी प्रशासक वह अधिकारी होगा जो मुकदमो के लिए जूरी मंडलों का गठन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जूरी कोर्ट सुचारू रूप से काम करें। जिला जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन किया गया है, ताकि नागरिक यदि यह पाते है कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो वे जूरी प्रशासक को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकें। यदि जूरी प्रशासक को वोट वापसी पासबुक के अधीन नहीं किया गया तो जूरी प्रशासक के निकम्मे एवं पक्षपाती होने की सम्भावना बढ़ जायेगी और जूरी कोर्ट सुचारू ढंग से काम नहीं कर सकेगी।

(09) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निलंबन :

(10) जूरी ड्यूटी में नागरिको के चयन सम्बन्धी नियम :

सभी प्रकार के जूरी मंडलो एवं महाजूरी मंडलों का गठन करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाएगा :

(11) जिला महाजूरी मंडल = डिस्ट्रिक्ट ग्रेंड ज्यूरी का गठन :

(12) क्रमरहित तरीके (लॉटरी) से मतदाताओं को चुनने का तरीका :

(13)

महाजूरी सदस्य प्रत्येक शनिवार और रविवार पर बैठक करेंगे। यदि 15 से अधिक महाजूरी सदस्य सहमति देते है तो वे अन्य दिन भी मिल सकते है। ये संख्या 15 से ऊपर तब भी होनी चाहिए, जब 30 से कम महाजूरी सदस्य उपस्थित हों। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे से और समाप्त शाम 5 बजे तक हो जानी चाहिए। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती प्रतिदिन 500 रु. एवं साथ में यात्रा खर्च भी मिलेगा। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री महंगाई दर के अनुसार या यात्रा दूरी जैसी स्थितियों में मुआवजा राशि बदल सकते है। ये राशि उसका कार्यकाल समाप्त होने के 60 दिनों बाद दी जाएगी।

(14)

यदि कोई महाजूरी सदस्य बैठक में अनुपस्थित रहता है तो उसे दैनिक भुगतान नहीं मिलेगा। साथ ही वह भुगतान की जाने वाली राशि की तिगुनी राशी से भी वंचित हो सकता है, तथा उसकी संपत्ति का अधिकतम 0.05% तक और उसकी वार्षिक आय का 1% तक का जुर्माना उस पर लगाया जा सकता है। महाजूरी सदस्य 60 दिनों के बाद जुर्माना राशि तय करेंगे।

(15) जिला महाजूरी मंडल द्वारा मुकदमो को स्वीकार करना :

(16) किसी मामले के लिए आवश्यक जूरी सदस्यों की संख्या का निर्धारण :

महाजूरी मंडल का प्रत्येक सदस्य मामले के विचार के लिए वांछित जूरी की संख्या प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक सारे सदस्यों द्वारा प्रस्तावित संख्या के माध्य को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेगा। यदि महाजूरी मंडल के सदस्यों की संख्या सम है तो जिला जूरी प्रशासक उच्चतर मध्य संख्या को वांछित जूरी संख्या के रूप मे निर्धारित करेंगे। जूरी सदस्यों की संख्या के संबध में महाजूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा। महाजूरी सदस्यों के लिए दिशा निर्देश :

(17) जूरी सदस्यों का चयन :

(18) जूरी मंडल द्वारा मुकदमो की सुनवाई करना :

सुनवाई सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। मामले की सुनवाई सिर्फ तभी शुरू होगी जब चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से (चुने गए समस्त जूरी सदस्यों में से, ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के) 75% सुनवाई शुरू करने को राजी हों।

(19)

ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर शिकायत कर्ता को एक घंटे तक बोलने की अनुमति देगा तथा इस दौरान उन्हें कोई नहीं रोकेगा। इसके बाद अभियुक्त एक से डेढ़ घंटे तक अपना पक्ष रखेगा। इस तरह एक के बाद एक दोनों पक्ष बोलेंगे। भोजन विराम दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच शुरू होगा और 1 घंटे तक रहेगा। इसी तरह सुनवाई लगातार प्रत्येक दिन चलेगी। जूरी सदस्यों के बहुमत द्वारा किसी भी पक्ष के बोलने की अवधि को बदला जा सकेगा। इस क़ानून में सभी जगह जूरी का बहुमत या अधिकांश का अर्थ चुने गए समस्त जूरी सदस्यों के बहुमत से है ना कि सिर्फ उपस्थित जूरी सदस्यों के बहुमत से।

(20)

मामले की सुनवाई न्यूनतम 2 दिन तक चलेगी। तीसरे दिन या उसके बाद यदि जूरी सदस्यों का बहुमत कहता है कि हमने दोनों पक्षों को पर्याप्त सुन लिया है, तो सुनवाई एक दिन और चलेगी। यदि अगले दिन बहुमत कहता है कि उन्हें और सुनना है तो सुनवाई तब तक चलती रहेगी जब तक जूरी का बहुमत सुनवाई ख़त्म करने को नही कहता। अंतिम दिन दोनों पक्ष 1-1 घंटे तक अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद जूरी सदस्य 2 घंटे तक आपस में विचार मंथन करेंगे। यदि 2 घंटे बाद जूरी सदस्य ये निर्णय लेते है की उन्हें और विचार मंथन की आवश्यकता नहीं है, तो जूरी अपना फैसला सार्वजनिक करेगी।

(21) जुर्माने का निर्धारण :

प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा, जो कि प्रवृत क़ानूनी सीमा के अन्दर हो। यदि किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित जुर्माना राशि कानूनी सीमा से अधिक है तो जुर्माने की अधिकतम कानूनी सीमा को प्रस्तावित जुर्माने की राशि माना जाएगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर सभी प्रस्तावित जुर्माना राशीयों को घटते क्रम में रखेगा। अर्थात सबसे अधिक प्रस्तावित राशि को सबसे ऊपर और सबसे अंत में सबसे कम जुर्माने की राशि को रखा जायेगा। ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर दो तिहाई जूरी सदस्यों द्वारा मंजूर जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि मानेंगे। उदाहरण : यदि जूरी सदस्यो की संख्या 100 हैं तो घटते क्रम में 67 क्रमांक पर प्रस्तावित जुर्माने की राशि को जुर्माने की राशि माना जाएगा। अर्थात, यदि 100 में से 34 जूरी सदस्यों ने शून्य जुर्माना प्रस्तावित किया है तो जुर्माने की राशि को शून्य माना जाएगा।

(22) कारावासीय दंड :

ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर जूरी सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कारावास की अवधि को घटते क्रम में सजाएगा। अर्थात सबसे अधिक दंड सबसे पहले और सबसे कम को अंत में रखा जायेगा। यदि किसी सदस्य द्वारा बतायी कारावास की अवधि कानूनी सीमा से अधिक है तो ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उस मामले में कानून द्वारा प्रस्तावित सर्वाधिक कारावास अवधि को प्रस्तावित कारावास की अवधि के रूप में दर्ज करेंगे, और 2/3 जूरी सदस्यो द्वारा मंजूर कारावास की अवधि को सम्मिलित रूप से तय की गयी कारावास की अवधि माना जाएगा। अर्थात, यदि एक तिहाई जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो अभियुक्त को निरपराध घोषित कर दिया जाएगा। उदाहरण : यदि जूरी सदस्यों की संख्या 100 है तो घटते क्रम में 67 क्रम संख्या वाली प्रस्तावित कारावास की अवधि को कारावास की सम्मिलित अवधि के रूप में माना जाएगा और यदि 34 जूरी सदस्य कारावास की अवधि शून्य प्रस्तावित करते हैं तो कारावास नहीं होगा।

(23)

मृत्यु दंड एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के मामले में 75% से अधिक जूरी सदस्यों की मंजूरी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में एक अन्य जूरी मंडल द्वारा मामले पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी बार में आयी जूरी ही ये निर्णय करेगी कि मृत्युदंड होगा या नहीं। मृत्यु दंड पर पुनर्विचार के लिए आयी जूरी भी मृत्यु दंड को 75% सदस्यों द्वारा अनुमोदित करेगी।

(24)

जूरी मंडल जो भी अंतिम फैसला देंगे उसे ट्रायल के पदासीन जज द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। यदि जज चाहे तो जूरी के फैसले में संशोधन कर सकता है, या फैसले को पूरी तरह से पलट सकता है। जज जब भी अपना फैसला लिखेगा तब वह सबसे पहले जूरी के फैसले को उद्धत करेगा। सरकारी दस्तावेजो, बुलेटिन एवं अन्य सभी जगह जहाँ पर भी फैसले को दर्ज / उद्धत किया जाएगा, वहां पर अनिवार्य रूप से सबसे पहले जूरी द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया जाएगा।

(25)

यदि किसी अन्य समाधान की मांग की गयी है तो जूरी सदस्य दोनों पक्षों को अधिकतम 5 या उससे कम वैकल्पिक प्रस्ताव दाखिल करने को कहेंगे। इसके अलावा जूरी की अनुमति से कोई भी व्यक्ति समाधान के लिए अपना प्रस्ताव जूरी के सामने रख सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक वैकल्पिक प्रस्ताव को 0 में से 100 के बीच अंक देगा। यदि किसी प्रस्ताव को किसी जूरी सदस्य ने कोई भी अंक नहीं दिया हैं तो उस प्रस्ताव के लिए उनके द्वारा दिया गया अंक शून्य माना जाएगा। जिस वैकल्पिक समाधान प्रस्ताव को सबसे ज्यादा अंक मिलेंगे उस प्रस्ताव को जूरी द्वारा मंजूर किया गया प्रस्ताव माना जाएगा।

(26) अनुपस्थिति या देर से आने पर जूरी सदस्यों पर जुर्माना -

यदि कोई जूरी सदस्य या कोई भी पक्ष सुनवाई में अनुपस्थित रहता हैं या विलम्ब से आते हैं तो 60 दिन बाद महा जूरी मंडल जुर्माने की राशी तय करेगा, जो कि उनकी संपत्ति का 0.1% अथवा वार्षिक आय का 1% हो सकता है। जुर्माने के निर्धारण में महा जूरी मंडल का फैसला अंतिम होगा।

(27)

यदि 50% से ज्यादा जूरी सदस्य मानते हैं कि शिकायत बिलकुल निराधार एवं मनगड़ंत है तो प्रत्येक जूरी सदस्य अधिकतम 1000 रूपए प्रति जूरी सदस्य तक का जुर्माना लगा सकता है। प्रत्येक जूरी सदस्य जुर्माने की राशि प्रस्तावित करेगा और जिला जूरी प्रशासक प्रस्तावित राशियों के मध्य मान को जुर्माने की राशि मानेगा। किन्तु जुर्माने की उच्चतम सीमा वह राशि होगी जो कि शिकायतकर्ता की संपत्ति की 2% या वार्षिक आय की 10% में से उच्च है। जुर्माने की इस राशि में से अभियुक्त को जो राशि दी जायेगी उसकी गणना इस प्रकार होगी - अभियुक्त द्वारा पिछले वर्ष भरे गए आयकर रिटर्न के अनुसार उसकी प्रतिदिन आय का निर्धारण किया जाएगा। तथा जितने दिन सुनवाई चली और अभियुक्त को जितने दिन का नुकसान हुआ उस हिसाब से उसे मुआवजा दिया जाएगा। अभियुक्त ज्यादा मुआवजे के लिए अलग से मामला दायर कर सकता है। हायर जूरी एवं सुप्रीम जूरी में सुनवाई के दौरान भी सुनवाई करने वाला जूरी मंडल भी मामले के पूर्णतया निराधार होने पर वादियों पर इस तरह का जुर्माना लगा सकता है। किन्तु यह जुर्माना 20,000 रू प्रति सुनवाई घंटे से अधिक नहीं होगा।

(28)

जटिल मामलों में यदि कोई तकनिकी या कानूनी विशेषज्ञ कोई जानकारी देने के इच्छुक हैं तो कोई भी पक्षकार या ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर उनकी मदद ले सकते है। जूरी प्रशासक उनकी दैनिक भुगतान राशि तय करेंगे, जो उनकी दैनिक आय से अधिक नहीं होगी। जूरी सदस्यों को भत्तों के रूप में जिला महाजूरी मंडल के सदस्यों के समान धनराशी दी जायेगी।

(29)

यदि किसी जिले में तहसील स्तर के न्यायालय है तो जूरी प्रशासक तहसील स्तर पर भी महाजूरी मंडल का गठन कर सकता। तहसील का महाजूरी मंडल तहसील के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करेगा। जिला जूरी प्रशासक तहसील अदालतों के लिए तहसील जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे और जूरी कोर्ट की कार्यवाही ऊपर दी गयी धाराओं के अनुरूप ही होगी।

(30) उच्चतर महाजूरी मंडल = हायर जूरी कोर्ट में अपील :

(31) हायर जूरी में सुनवाई :

(32) केन्द्रीय स्तर पर राष्ट्रीय महाजूरी मंडल का गठन :

(33) उच्चतम महाजूरी मंडल = सुप्रीम जूरी कोर्ट में अपील :

(34) सुप्रीम जूरी कोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया :

(35)

इसी क़ानून की धारा (05) में वर्णित मामलो या धारा (05) के तहत जारी की गयी राजपत्र अधिसूचना द्वारा निर्धारित मामलों में जूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना किसी भी नागरिक को किसी भी सरकारी अधिकारी द्वारा न तो दण्डित किया जा सकेगा, और न ही जुर्माना लगाया सकेगा।

किन्तु निम्नलिखित दशाओं में जूरी मंडल की सहमती आवश्यक नहीं होगी - यदि ऐसे आदेश को उच्च या उच्चतम न्यायालय ने अनुमोदित किया हो, अथवा ऐसे आदेश को इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (44) के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए जिले / राज्य / देश के मतदाताओ के बहुमत ने अनुमोदित किया हो। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी भी नागरिक को ज्यूरी मंडल के 2/3 से अधिक बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या महाजूरी मंडल के साधारण बहुमत द्वारा दी गयी सहमती बिना या धारा (42) के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जिला / राज्य / देश के नागरिको के बहुमत बिना 48 घंटो से अधिक समय तक कारावास में नहीं रखेगा।

(36) जनहित याचिकाएं :

उच्चतर एवं उच्चतम महाजूरी मंडल में महत्त्वपूर्ण एवं तात्कालिक विषयों पर सीधे जनहित याचिकाएं भी दायर की जा सकेगी। याचिका स्वीकार करने या खारिज करने का फैसला राष्ट्रीय महाजूरी मंडल करेगा। यदि याचिका स्वीकृत हो जाती है तो राष्ट्रीय महाजूरी मंडल फ़ीस के रूप में जमा की गयी राशि लौटाने का निर्णय ले सकती है। जनहित याचिकाओं की सुनवाई की प्रक्रिया भी उसी तरह से होगी जैसा जिला जूरी मंडल के खंड में बताया गया है।

(37) जिला एवं केन्द्रीय अधिकारियों के लिए आवेदन एवं योग्यताएं :

(38)

धारा (37) में दी गयी योग्यता धारण करने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा शपथपत्र को पीएम की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।

टिप्पणी : इस समय यह व्यवस्था बनी हुयी है कि उच्च अधिकारियों की नियुक्ति सिर्फ सरकार तय करती है, और नागरिको के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि वे इस बारे में सरकार को सलाह दे सके। यह धारा किसी भी व्यक्ति को सरकार की अनुशंषा बिना भी आवेदन करने की सुविधा देती है। उदाहरण : आज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं मंत्रियो के 5 लोगो का समूह यह तय करता है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट का न्यायाधीश बनाने के लिए किस व्यक्ति के नाम पर विचार किया जाना चाहिये।

इस धारा के आने के बाद देश भर के राज्यों की हाई कोर्ट के न्यायाधीशो में से कोई भी न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के वकील आदि कलेक्टर कार्यालय में जाकर न्यायाधीश बनने के लिए आवेदन कर सकेंगे। यदि उनका सर्विस ट्रेक ऐसा रहा है कि 35% से अधिक नागरिक उन्हें स्वीकृति दे देते है तो सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उनकी नियुक्ति पर विचार कर सकते है। इस तरह यह धारा ज्यादा काबिल एवं निर्भीक व्यक्तियों को उच्च पदों पर आने के अवसर खोलता है। और वोट वापसी प्रक्रियाओ के कारण प्रदर्शन के आधार पर धीरे धीरे स्वत: ही कमतर अधिकारी पद खोने लगेंगे, और काबिल व्यक्तियों के लिए बिना कोई गठजोड़ बनाए आगे बढ़ना आसान हो जाएगा।

(39) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :

(40) अधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन :

(41) जिला पुलिस प्रमुख के लिए गुप्त स्वीकृति की अतिरिक्त प्रक्रिया एवं कार्यकाल :

(42) जिला शिक्षा अधिकारी : सात्य प्रणाली के लिए निर्देश

टिप्पणी : सात्य प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था की रचना करती है जिससे हम गणित-विज्ञान के अध्यापन में उन लोगो को मुक्त रूप से आकर्षित कर सके जिनमे प्रतिभा एवं शिक्षण तत्व (टीचिंग मेटेरियल) है। साथ ही यह ज्यादा से ज्यादा प्रतिभाशाली छात्रों को गणित विज्ञान में कुशलता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

(43) दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए निर्देश :

(44) जनता की आवाज :


----------जूरी कोर्ट ड्राफ्ट का समापन-----------

इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ?

  1. कृपया " प्रधानमंत्री कार्यालय , दिल्ली " के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :

    प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित जूरी कोर्ट क़ानून को गेजेट में छापें - #JuryCourt, #VoteVapsiPassbook

  2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र (inland letter) भी भेज सकते है।

  3. "प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग" नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।

  4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।

    तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?

    4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और प्रधानमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Pm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें।

    4.2. शाम 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।

    4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। वजह यह है कि, हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़े आकार का होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती।

  5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।

  6. यदि आप ट्विटर पर है तो प्रधानमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :

    @Pmoindia , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #JuryCourt , #VoteVapsiPassbook

  7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को प्रात: 10 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।

  8. "अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी" से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (44) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।