रिक्त भूमि कर

यह क़ानून अकार्यशील एवं अनुपयोगी जमीन को कर योग्य बनाता है। इस क़ानून के गेजेट में छपने के बाद जीएसटी रद्द हो जाएगा और नागरिको को वर्ष में एक बार 1% की दर सिर्फ रिक्त भूमि कर चुकाना होगा। इस कानून को प्रधानमन्त्री धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पास करके लागू कर सकते है, और इसे राज्यसभा से अनुमति लेने की जरुरत नहीं है।

Google Drive

Facebook


प्रस्तावित रिक्त भूमि कर

क़ानून का सार :

यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है और देश में इसे लागू करना चाहते है तो पीएम को एक पोस्टकार्ड लिखें। पोस्टकार्ड में यह लिखे :

प्रधानमंत्री जी, कृपया प्रस्तावित रिक्त भूमि कर के क़ानून को गेजेट में छापें — #EmptyLandTax , #VoteVapsiPassBook , #P20180436104


नागरिकों एवं अधिकारियों के लिए निर्देश :

. (01) इस क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही जीएसटी क़ानून रद्द होगा, तथा नागरिको द्वारा धारण की गयी अतिरिक्त भूमि कर योग्य होगी। सभी प्रकार के भू-खंड एवं इमारतें इस कानून के दायरे में आयेंगे। भू-खंड शब्द में सभी प्रकार की भूमि एवं प्लाट आदि शामिल है। इमारतों में सभी प्रकार के कार्यालय, बंगले, भवन, वेयरहाउस, अपार्टमेन्ट, औद्योगिक शेड, गोदाम और अन्य सभी प्रकार के निर्माण शामिल है। इस क़ानून में प्रोपर्टी शब्द में सभी प्रकार के भू-खंड एवं इमारतें शामिल है । . (02) प्रत्येक व्यक्ति को 250 वर्ग फुट गैर-कृषि भूमि, 500 वर्ग फुट निर्माण और 2 एकड़ कृषि भूमि रखने की छूट होगी, और इस सीमा से अधिक भूमि को व्यक्ति की अतिरिक्त भूमि माना जाएगा। यदि किसी व्यक्ति के पास इस सीमा से अधिक भूमि एवं निर्माण का स्वामित्व है तो धारा 3 में दी गयी कटौतियों को घटाने के बाद इस अतिरिक्त भूमि /निर्माण पर सालाना 1% की दर से कर देय होगा। . (03) निचे दी गयी कटौतियों के योग को सकल देय कर में से घटाने के बाद जो राशि आएगी वह वास्तविक देय कर होगा। यदि ये राशी ऋणात्मक है तो करदाता इस टेक्स क्रेडिट का इस्तेमाल अगले वर्ष भी कर सकेगा। यह क्रेडिट अगले 4 वर्ष तक इस्तेमाल किया जा सकता है। . (3.1) सामान्य कटौतियां जिन्हें सकल देय कर में से घटाया जायेगा :
. 3.1.1. गैर-वैतनिक आय पर चुकाया गया आयकर . 3.1.2. वेतनिक आय पर चुकाये गए आयकर का 50% . 3.1.3. नियोक्ता के कर्मचारीयों द्वारा वैतनिक आय पर जो आयकर चुकाया गया है उसका 50% या नियोक्ता द्वारा भुगतान किये गए कुल वेतन का 5% की कटौती नियोक्ता प्राप्त करेगा . 3.1.4. नियोक्ता द्वारा स्टाफ को चुकाए प्रोविडेंट फण्ड का 15% . 3.1.5. चुकाया गया बिजली कर
. 3.1.6. पिछले 10 वर्षो के दौरान चुकायी गयी स्टाम्प ड्यूटी . 3.1.7. प्राप्त किये गए दान सेवा अंक . (3.2) स्टाम्प ड्यूटी : इस क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद चुकायी गयी स्टाम्प ड्यूटी पर करदाता को टेक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। टेक्स क्रेडिट सिर्फ उस राशि पर मिलेगा जो इस क़ानून के लागू होने के पूर्व के 10 वर्षो में करदाता द्वारा चुकायी गयी है। राज्य सरकारें चाहे तो स्टाम्प ड्यूटी रद्द करके राज्य स्तर पर रिक्त भूमि कर का क़ानून लागू कर सकती है। यदि राज्य सरकार स्टाम्प ड्यूटी जारी रखती है, तो इस क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद चुकायी गयी स्टाम्प ड्यूटी पर करदाता को कटौती नहीं मिलेगी। . (3.3) दान सेवा अंक या Charity Service Points = CSP : वे अंक जो किसी व्यक्ति, कंपनी, ट्रस्ट या किसी इकाई ने किसी व्यक्ति को सेवा देने के एवज में प्राप्त किये है। प्रत्येक नागरिक को प्रति वर्ष 5 दान सेवा अंक मिलेंगे और व्यक्ति ये दान सेवा अंक इच्छित ट्रस्ट या इकाई को दान कर सकेगा। 1 दान सेवा अंक की कीमत 100 रू होगी और इस तरह यदि किसी ट्रस्ट को कोई व्यक्ति अपने 5 दान सेवा अंको में से 2 अंक हस्तांतरित कर देता है तो अमुक ट्रस्ट अपने रिटर्न में 100*2 = 200 रू की कटौती प्राप्त कर सकेगा। कोई व्यक्ति सभी 5 अंक किसी एक व्यक्ति या ट्रस्ट या इकाई को दे सकता है। प्रधानमंत्री अधिसूचना के माध्यम से प्रति दान सेवा अंक का मूल्य बढ़ा या घटा सकते है। . स्पष्टीकरण : मान लीजिये किसी व्यक्ति या ट्रस्ट के पास 10 लाख अनुयायी है और मान लीजिये अमुक ट्रस्ट को 7 लाख अनुयायी 1 अंक, 2 लाख अनुयायी 2 अंक और 1 लाख अनुयायी 5 अंक हस्तांतरित करते है। तब कुल अर्जित अंक होंगे = 7 लाख * 1 + 2 लाख * 2 + 1 लाख * 5 = 16 लाख । अत: टेक्स क्रेडिट 16 लाख * 100 रू प्रति अंक = 16 करोड़ रू होगा।


रिक्त भूमि कर की गणना के कुछ उदाहरण : . उदाहरण -1 : . (i) मान लीजिये एक 5 सदस्यीय परिवार के पास 1000 स्क्वायर फुट का एक मकान है, तो 5 सदस्यों के हिसाब से उन्हें 5250 = 1250 वर्ग फुट की छूट मिलेगी, अत: भवन के स्वामी को इस पर कोई टेक्स नहीं देना होगा। किन्तु यदि इस परिवार में सिर्फ 3 सदस्य है तो उनकी छूट की सीमा 2503 = 750 वर्ग फुट होगी। इस तरह यहाँ अतिरिक्त भूमि 1000 – 750 = 250 वर्ग फुट हुई। मान लीजिये कि इस मकान का मूल्य यदि 10,00,000 रू है तो देय कर इस प्रकार होगा ; . कर योग्य अतिरिक्त भूमि : 250 वर्ग फुट बाजार मूल्य की दर : 10,00,000 / 1000 = 1000 रू प्रति वर्ग फुट अतिरिक्त भूमि का बाजार मूल्य : 2501000 रू = 2,50,000 रू बकाया देय कर : 2,50,000 का 1% = 2,500 रू , अत: बकाया देय कर 2,500 रू होगा। . (ii) अब मान लीजिये कि अमुक भू स्वामी एक वेतनभोगी कर्मचारी है और उसने पिछले वर्ष 4,000 आयकर चुकाया है तो बकाया देय कर में से 4,000 का 50% = 2,000 रू घटा दिए जायेंगे। अत: शुद्ध देय कर 2,500-2000 = 500 रू होगा। किन्तु यदि भू-स्वामी वेतनभोगी कर्मचारी नहीं है तो उसे चुकाए गए आयकर की पूरी छूट मिलेगी। इस स्थिति में गणना इस प्रकार होगी : 2,500-4,000 = ( -1500 ) , यहाँ वास्तविक देय कर ऋणात्मक है, अत: भू-स्वामी कोई कर नहीं चुकाएगा, और ये 1500 रू अगले वर्ष के लिए टेक्स क्रेडिट बन जाएगा। . उदाहरण -2 : . (i) मान लीजिये कि, एक व्यक्ति के परिवार में निम्न सदस्य है : स्वयं, पत्नी, 2 संताने और 2 वरिष्ठ नागरिक माता-पिता है। इस परिवार के पास 1500 वर्ग फुट भूमि और 3000 वर्ग फुट निर्माण वाले फ्लैट है। अमुक निर्माण या भूमि एक घर या एक से अधिक घरों, दुकानों या ऑफिसों में बिखरा हो सकता है। 6 सदस्यों के हिसाब से उन्हें 2506 = 1500 वर्ग फुट की अकृषि भूमि और 3000 वर्ग फुट के निर्माण की छूट होगी, अत: इस परिवार पर कोई टेक्स नहीं आएगा। . (ii) अब मान लीजिये कि इस परिवार के पास इस छूट सीमा के ऊपर एक ऑफिस है, जिसकी कीमत 1 करोड़ रू है। उसके पास 5 कर्मचारियों का स्टाफ है जिन्हें वेतन के रूप में 12 लाख रू का भुगतान किया गया है, व स्टाफ के लिए 1 लाख रू प्रोविडेंट फण्ड के चुकाये है। बिजली बिल पर उस वर्ष में चुकाया कर 1 लाख रू था और मान लीजिये उसने स्वयं की आय पर 3 लाख रू आयकर चुकाया है। तो रिक्त भूमि कर की गणना इस तरह होगी :
. चुकाया गया आयकर : 3,00,000 रू चुकाया गए प्रोविडेंट फण्ड का 15% : 15,000 रू (15%* 1,00,000 ) चुकाये गए वेतन का 5% : 60,000 रू ( 5%* 12,00,000 ) बिजली कर : 1,00,000 रू कटौतियों का योग = 4,75,000 ( 3,00,000 रू + 15,000 रू + 60,000 रू + 1,00,000 रू ) . (iii) अब वास्तविक देय कर निकालने के लिए सकल देय कर में से टेक्स क्रेडिट घटा दिया जायेगा। 1,00,000 - 4,75,000 = ( - 3,75,000 ) , चूंकि यह ऋणात्मक है, अत: चुकाया जाने वाला कर शून्य होगा और अगले वर्ष के लिए क्रेडिट रु. 3,75,000 होगा। . उदाहरण -3 : . (i) मान लीजिये, एक ट्रस्ट के पास मुंबई में 4,000 एकड़ जमीन है, जिसका बाजार मूल्य 2,00,000 प्रति वर्ग फुट है। अत: इस जमीन की कीमत 3,20,000 करोड़ होगी, और टेक्स क्रेडिट घटाने से पहले सकल देय कर इस राशि का 1% यानि 3,200 करोड़ रू होगा। . (ii) अब यदि अमुक ट्रस्ट के कर्मचारियों के वेतन मामूली है, यह ट्रस्ट कोई उल्लेखनीय गतिविधियाँ नहीं करता है, और आयकर भी नगण्य चुकाता है, तो उसके टेक्स क्रेडिट्स लगभग शून्य हो सकते है। इस स्थिति में शुद्ध देय कर 3,200 करोड़ रू या इसके समान ही होगा। . (iii) मान लीजिये कि यह ट्रस्ट परोपकार के लिए पर्याप्त गतिविधियाँ संचालित करता है और हजारो नागरिक इन सेवाओं से लाभ ले रहे है तो नागरिक इस ट्रस्ट को दान सेवा अंक दे सकते है। और तब इस ट्रस्ट को प्राप्त किये गए दान सेवा अंक के अनुपात में टेक्स में कटौती मिल जायेगी।
. उदाहरण -4 : . (i) मान लीजिये, एक व्यक्ति के पास 2000 वर्ग फुट भूमि है जिस पर उसने 4 फ्लैट बनाए हुए है। प्रत्येक फ्लेट 1000 वर्ग फुट का है, और प्रत्येक फ्लैट की कीमत 50 लाख रू है। इस तरह यहाँ फ्लेट का कुल निर्माण 4000 वर्ग फुट हुआ। उसके परिवार में 4 सदस्य है तो प्रति सदस्य 250 वर्ग फुट भूमि और 500 वर्ग फुट निर्माण की उन्हें छूट मिलेगी। और इस तरह कुल छूट 1000 वर्ग फुट भूमि और 2000 वर्ग फुट निर्माण की होगी। इस स्थिति में इस परिवार को 2 फ्लैट के लिए रिक्त भूमि कर का सामना नहीं करना होगा। किन्तु शेष 2 फ्लैट पर टेक्स आएगा, और प्रत्येक फ्लेट को 50,000 रू प्रति फ्लेट के हिसाब से कर का सामना करना होगा। . (ii) अब मान लीजिये उसने 3 फ्लैट किराये पर दे रखे है, और प्रत्येक फ्लैट का किराया 1,20,000 रू प्रति वर्ष है। अत: कुल किराया आय = 3,60,000 रू प्रति वर्ष हुई। यह मानते हुए कि मकान-मालिक के पास अन्य आय है जो उसे 20% आयकर के दायरे में लाती है, ऐसी किराया आय पर लगभग 40,000 रू आयकर प्रति वर्ष बनेगा। मान लीजिये प्रत्येक किरायेदार 40,000 रू प्रति वर्ष की बिजली खपत करता है, और वह उस पर 10,000 प्रति वर्ष का बिजली कर चुका रहा है। . (iii) अत: भू स्वामी पर वास्तविक देय कर होगा : 1,00,000 – 40000 रू - 10000*3 = 30,000 रू , जो कि उसकी कुल किराया आमदनी पर चुकाए गए आयकर का लगभग 8% है।
. (iv) लेकिन यदि मान लीजिये, उसके सभी फ्लैट खाली है, तब उसे अपने दो फ्लैटो के लिए 50,000 रू प्रति फ्लैट अर्थात कुल 1,00,000 रू का रिक्त भूमि कर चुकाना पड़ेगा। किन्तु यदि अमुक फ्लैट मालिक को अन्य स्त्रोतों से आय भी है, और यदि वह इसका आयकर भी चुका रहा है, तब वह आयकर भी इस कर में से घटा दिया जायेगा और इस प्रकार अंतिम रिक्त भूमि कर शून्य हो जायेगा। . उदाहरण - 5 : . (i) मान लीजिये, एक व्यक्ति के पास 10,000 वर्ग फुट भूमि है, जिस पर उसके 20 फ्लैट प्रत्येक 1000 वर्ग फुट, कुल योग = 20,000 वर्ग फुट है। मान लीजिये, प्रत्येक फ्लैट की कीमत 50 लाख रू है। मान लीजिये, उसके परिवार में 4 सदस्य है तो कुल छूट 1000 वर्ग फुट भूमि और 2000 वर्ग फुट निर्माण की होगी। अत: 2 फ्लैट को रिक्त भूमि कर का सामना नहीं करना होगा, और शेष 18 फ्लैट को प्रत्येक फ्लेट के लिए 50,000 रू के हिसाब से कर का सामना करना होगा। . (ii) मान लीजिये उसने ये सभी फ्लैट किराये पर दे रखे है, और प्रत्येक फ्लैट का किराया 1,50,000 रू प्रति वर्ष है। ऐसी किराया आय पर आयकर लगभग 30,000 प्रति वर्ष का बनेगा, जिसमे माना गया है कि उसकी कुल आय 30% आयकर स्लेब के दायरे में आती है। मान लीजिये प्रत्येक किरायेदार 40,000 रू प्रति वर्ष की बिजली खपत कर रहा है, और बिजली कर 10,000 रू प्रति वर्ष है। तब एक फ्लेट के लिए कटौतियां 30,000 रू ( आयकर ) + 10,000 ( बिजली कर ) = 40,000 रू होगी। मालिक द्वारा चुकाया जाने वाला वास्तविक कर प्रति फ्लैट 10,000 रू ( 50,000 – 40,000 ) होगा, जो कि किराये से प्राप्त आय पर उसके द्वारा चुकाए गए आयकर का लगभग 7% है।
. (iii) लेकिन यदि उसने अपने सभी फ्लैट किराये से नहीं देकर इन्हें खाली रखा हुआ है, तब उसे 50,000 रू प्रति फ्लैट के हिसाब से रिक्त भूमि कर चुकाना होगा। . निष्कर्ष : ऊपर दिए गए उदाहरणों से यह संभावित निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि, जो व्यक्ति भूमि और निर्माण का उपयोग किराये के लिए और व्यावसायिक या औद्योगिक कार्य के लिए कर रहे है, उनके टेक्स क्रेडिट्स का मान उच्च होगा और उन्हें ज्यादा कर नहीं चुकाना होगा। लेकिन जिन व्यक्तियों के पास भूमि और निर्माण एक बड़ी संख्या में अकार्यशील और अनुपयोगी पड़ा है, उन्हें एक बड़ी राशि रिक्त भूमि कर के रूप में चुकानी पड़ सकती है। इस तरह यह व्यवस्था भू स्वामियों को प्रेरित करेगी कि वे अपनी अकार्यशील एवं रिक्त भूमि का इस्तेमाल व्यवसायिक, रिहाईश, उत्पादन, सेवा प्रदाय आदि कार्यो में करना शुरू करें। .

(04) रिक्त भूमि कर से मिलने वाली सामान्य छूटें :

. किसी व्यक्ति पर रिक्त भूमि कर शून्य हो जायेगा जब स्वयं उसकी और उसके परिवार के स्वामित्व में मौजूद भूमि एवं निर्माण के योग निर्धारित छूटों की सीमा से कम होगा। प्रति व्यक्ति सामान्य छूटें निचे दी गयी है, और व्यक्ति चाहे तो इस्तेमाल में नहीं ली गयी छूटों को अपने परिवार के एक या एक से अधिक सदस्यों को हस्तांतरित कर सकता है।
. (4.1) श्रेणी A के 10 शहरों में 250 वर्ग फुट प्रति व्यक्ति अकृषि भूखंड एवं अन्य शहरों में 500 वर्ग फुट के भूखंड। किन्तु ये छूट दोनों श्रेणी के शहरो में अलग अलग नहीं मिलेगी। . (4.2) श्रेणी A के शहरों में 500 वर्ग फुट एवं अन्य शहरों में 1000 वर्ग फुट प्रति व्यक्ति निर्माण। किन्तु ये छूट दोनों श्रेणी के शहरो में अलग अलग नहीं मिलेगी। . (4.3) प्रति व्यक्ति 2 एकड़ तक की कृषि भूमि। . (4.4) 60 वर्ष से ऊपर व्यक्तियों के लिए छूट सामान्य छूट से दोगुनी होगी। और 80 वर्ष से ऊपर वालों के लिए ये छूट सामान्य छूट से 4 गुना होगी। . (4.5) विधवाओं की भी सामान्य छूट दोगुनी होगी। हालाँकि, 60 वर्षों से ऊपर की विधवाओ के लिए भी यह दोगुनी होगी, ना कि चार गुना। 80 वर्षों से ऊपर की विधवायों के लिए भी यह चार गुना होगी, ना कि आठ गुना। . (4.6) सभी गैर-व्यक्ति इकाइयों जैसे किसी भी प्रकार की फर्म, कंपनी, धार्मिक ट्रस्ट और सभी अन्य ट्रस्ट, सभी संघ या समिति, अविभाजित हिन्दू परिवारों, इत्यादि के लिए सामान्य छूट शून्य होगी। विदेशी नागरिकों एवं विदेशी इकाइयों के लिए भी सामान्य छूट शून्य होगी। सामान्य छूट केवल जीवित भारतीय नागरिको पर लागू होगी।
. (4.7) श्रेणी A के शहरो की सूची : .

  1. मुंबई
  2. दिल्ली
  3. कोलकाता
  4. चैन्नई
  5. बेंगलुरु
  6. हैदराबाद
  7. अहमदाबाद
  8. पुणे
  9. सूरत
  10. जयपुर . राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी शहरों के महंगाई सूचकांक या जनसँख्या के आधार पर और भी औचित्य पूर्ण श्रेणीकरण करने के लिए श्रेणी A के शहरो में जमीन की कीमतों एवं जनसँख्या घनत्व के अनुसार छूटों को वर्गीकृत कर सकता है। .

(05) टेक्स क्रेडिट्स का हस्तांतरण :

. (5.1) टेक्स क्रेडिट (ELTC = Empty Land Tax Credits) को सिर्फ एक बार ही हस्तांतरण किया जा सकेगा। एक बार हस्तांतरण होने के बाद इनका न तो पुन: हस्तांतरण किया जा सकेगा, और न ही आगे किसी व्यक्ति / इकाई आदि को हस्तांतरित किया जा सकेगा। हस्तांतरित किये गए टेक्स क्रेडिट सिर्फ उसी वित्तीय वर्ष में उपयोग किये जा सकेंगे जिस वित्त वर्ष में इन्हें हस्तांतरण द्वारा प्राप्त किया गया था। . (5.2) व्यक्तियों के टेक्स क्रेडिट अहस्तांतरणीय होंगे, और इन्हें किसी भी व्यक्ति को या परिवारिक सदस्यों या किसी भी ट्रस्ट, सार्वजनिक कंपनी आदि को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। . (5.3) यदि कोई व्यक्ति किसी साझेदारी फर्म या कम्पनी का संस्थापक सदस्य रहा है, या उसके पास किसी साझेदारी फर्म या कम्पनी के 10% से अधिक शेयर 2 से अधिक वर्षों के लिए रहे है तो व्यक्ति अपने टेक्स क्रेडिट अमुक साझेदारी फर्म या कम्पनी को हस्तांतरित कर सकता है। किन्तु यदि अमुक साझेदारी फर्म या कंपनी का अधिग्रहण / विलय / विक्रय हो जाता है, या अमुक फर्म / कम्पनी भंग हो जाती है तो ये टेक्स क्रेडिट शून्य हो जायेंगे। . (5.4) किसी ट्रस्ट या पब्लिक लिमिटेड कंपनी के टेक्स क्रेडिट का हस्तांतरण उसके शेयर धारकों या ट्रस्टियों या किसी भी अन्य व्यक्ति को नही किया जा सकेगा। किन्तु एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी को टेक्स क्रेडिट हस्तांतरित कर भी सकती है, और उससे टेक्स क्रेडिट का हस्तांतरण ले भी सकती है। कोई भी कंपनी अपने टेक्स क्रेडिट अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी को हस्तांतरित कर सकती है या हस्तांतरण ले भी सकती है, बशर्ते मूल कंपनी सहायक कंपनी से स्थापना के समय से ही जुडी रही थी। यदि कंपनी का अधिग्रहण बाद में हुआ था, तो सिर्फ वही टेक्स क्रेडिट मान्य होंगे जिनका हस्तांतरण अधिग्रहण के बाद हुआ हो।
. (5.5) विलय या अधिग्रहण की स्थिति में अधिकतम टेक्स क्रेडिट धारण करने वाली कंपनी के टेक्स क्रेडिट ही मान्य होंगे, किन्तु दोनों कंपनियों के टेक्स क्रेडिट जुड़ेंगे नही।
. (5.6) साझेदारी फर्म या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के टेक्स क्रेडिट उसके स्वामियों को उनके स्वामित्व के अनुपात में हस्तांतरित किये जा सकेंगे। . (5.7) किरायेदार चुकाए गए बिजली कर के टेक्स क्रेडिट मकान मालिक को हस्तांतरित कर सकता है, यदि किरायेदार ने इसे अपने आयकर रिटर्न में व्यावसायिक खर्चों के रूप में नहीं दर्शाया हो। टेक्स क्रेडिट हस्तांतरित करने के सम्बन्ध में अंतिम निर्णय किरायेदार का ही होगा। मकान मालिक इस टेक्स क्रेडिट का उपयोग सिर्फ अमुक विशिष्ट वर्ष में अमुक विशिष्ट मकान पर आये कर में कटौती के लिए ही कर सकेगा।
.

(06) पारिवारिक सदस्य बनने की पात्रता :

. (6.1) रिक्त भूमि कर में छूट के उद्देश्य हेतु कोई व्यक्ति स्वयं को एकल सदस्य अर्थात अकेला या परिवार के हिस्से के रूप में, जैसा उसे उचित लगे, पंजीकृत करवा सकता है। . (6.2) यदि किसी व्यस्क व्यक्ति की भूमि का मूल्य, उसकी इच्छा के किसी भी 500 वर्ग फुट प्लाट एवं 1000 वर्ग फुट निर्माण को घटाने के बाद, 25 करोड़ रू से ऊपर है तो ऐसा व्यक्ति ना तो किसी से छूट ले सकता है, और ना किसी को छूट दे सकता है। तब रिक्त भूमि कर के उद्देश्य हेतु उसे एकल व्यक्ति के रूप में ही रिटर्न भरना होगा। . (6.3) परिवार में एक व्यक्ति परिवार का मुखिया होगा जो 18 वर्ष की आयु से ऊपर का कोई पुरुष या स्त्री हो सकता है। किसी व्यक्ति को परिवार का सदस्य बनाने के लिए मुखिया का सहमत होना जरुरी होगा, और उस व्यक्ति का भी परिवार का सदस्य बनने के लिए सहमत होना जरुरी होगा। यदि व्यक्ति अवयस्क है तो उसकी माता ये तय करेगी कि बच्चे परिवार के सदस्य होने चाहिए या नहीं। . (6.4) निम्नलिखित व्यक्ति परिवार के सदस्य हो सकते है : . 6.4.1. मुखिया या उसकी पत्नी के किसी भी आयु के बच्चे और पूर्व विवाह से हुए बच्चे भी परिवार के सदस्य बन सकते हैं। रिक्त भूमि कर के उद्देश्य हेतु अधिकतम 4 बच्चे ही परिवार के सदस्य हो सकेंगे। . 6.4.2. माता पिता और सास-ससुर परिवार के सदस्य बन सकते हैं लेकिन सास-ससुर परिवार के सदस्य केवल तब ही बन सकते हैं जब/यदि पत्नी जीवित है और परिवार की सदस्य भी है। माता-पिता और सास-ससुर में से अधिकतम 2 ही परिवार के सदस्य बन सकेंगे। . 6.4.3. पुत्र / पुत्री के बच्चे परिवार के सदस्य बन सकते है, बशर्ते पुत्र / पुत्री भी अमुक परिवार का सदस्य हो। . 6.4.4. पोते-पोतियों के बच्चे परिवार के सदस्य नहीं बन सकेंगे। . 6.4.5. मुखिया की अविवाहित या तलाकशुदा बहन परिवार की सदस्य हो सकती है। किसी भी आयु का भाई परिवार का सदस्य बन सकता है। भाई या बहिन के बच्चे परिवार के सदस्य हो सकते हैं, बशर्ते भाई या बहिन भी अमुक परिवार की सदस्य हो। . 6.4.6. भाई या बहिन के बच्चे परिवार के सदस्य बन सकते हैं, यदि भाई या बहिन अमुक परिवार के सदस्य हो या जीवित ना हो। . 6.4.7. ऊपर दिए गए बिन्दुओ के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति परिवार का सदस्य नहीं बन सकेगा। . 6.4.8. एक परिवार में 12 से अधिक सदस्य नहीं हो सकेंगे। . (6.5) एक व्यक्ति दो परिवारों में सदस्य नहीं बन सकता। एकल रूप में पंजीकृत व्यक्ति भी किसी परिवार का सदस्य नहीं बन सकेगा। गैर-व्यक्ति इकाइयां या विदेशी भी रिक्त भूमि कर के उद्देश्य से किसी भी परिवार के सदस्य नहीं हो सकेंगे। . (6.6) यदि कोई व्यक्ति रिक्त भूमि कर के उद्देश्य हेतु परिवार बनाना चाहता है, तब उसे व्यक्तिगत रूप से पटवारी कार्यालय में जाकर अपने परिवार सदस्यों का पंजीकरण करवाना होगा, और परिवार सदस्यों को भी भारत में स्थित किसी भी पटवारी कार्यालय में प्रस्तुत होकर इसे स्वीकृत करना होगा। अवयस्कों के लिए माता की अनुमति जरुरी होगी और अवयस्क को कार्यालय में प्रस्तुत होने की जरुरत नहीं है। .

(07) रिक्त भूमि कर रिटर्न फाइल करना :

. (7.1) सिर्फ उन भारतीय नागरिकों को छोड़कर जिनके पास धारा (02) में बताई सामान्य छूटों से कम भूमि है, प्रत्येक व्यक्ति, सभी विदेशी इकाइयां, सभी कंपनियाँ, सभी ट्रस्ट और सभी इकाइयां जिनके स्वामित्व में भूमि है, को प्रति वर्ष एक रिक्त भूमि कर का रिटर्न फाइल करना जरुरी होगा। ऐसी इकाइयां जिनकी करयोग्य भूमि 100 करोड़ रू से अधिक होगी, उन्हें हर महीने एक अंतरिम रिटर्न भरना होगा, और मासिक रूप से कर चुकाना होगा। उन्हें अंतिम रूप से एक वार्षिक रिटर्न भी भरना होगा। . (7.2) वार्षिक रिटर्न वित्तीय वर्ष समाप्त होने के 210 दिनों के अन्दर या आयकर रिटर्न भरने के 60 दिनों के अन्दर, या इनमे से जो भी पहले हो, कि अवधि में फाइल हो जाना चाहिए। मासिक रिटर्न महिना समाप्त होने के 60 दिनों के अन्दर फाइल करना होगा। . (7.3) करदाता रिटर्न फाइल करने के लिए पैन-आई.डी. या आधार-आई.डी. का इस्तेमाल कर सकता है। यदि उसके पास दोनों में से कोई भी आई.डी. नहीं है तो इस कानून के राजपत्र में प्रकाशित होने के 3 महीनों के अन्दर उसे उपरोक्त में से कोई एक आई.डी. प्राप्त करनी होगी।
. (7.4) हिन्दू अविभाजित परिवार के लिए मुखिया को एक वार्षिक रिटर्न अलग से भरना जरुरी होगा। हिन्दू अविभाजित परिवार के सदस्य जमीन और निर्माण पर मिली अपनी सामान्य छूटों का हस्तांतरण अपने मध्य कर सकते है। .

(08) भू-स्वामित्व के आंकड़ो को सार्वजनिक करना :

. (8.1) इस सम्बन्ध में आवश्यक निर्देशों का विज्ञापन प्रकाशित होने के 90 दिनों के भीतर सभी व्यक्ति, साझेदार, अन्य कम्पनियां, सार्वजनिक उपक्रम, सरकारी इकाइयां, ट्रस्ट, सहकारी संस्थाएं, विदेशी व्यक्ति, इकाइयां तथा अन्य सभी नागरिक जो कि भारत में किसी भूमि या निर्माण में आंशिक या पूर्ण स्वामित्व रखते है, अपने स्वामित्व की सूचना का पंजीयन करायेंगे। यह पंजीयन जिला रिक्त भूमि कर अधिकारी ( DELTO = District Empty Land Officer ) कार्यालय में दर्ज किया जा सकेगा। सभी नागरिक भूमि, फ्लेट, भवन आदि के स्वामित्व से सम्बंधित किये गए दावों की सूचना भी पंजीकृत करायेंगे, चाहे ऐसे दावों से सम्बंधित वाद अदालत में दायर नही किये गए हो अथवा नही। . (8.2) राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी इस तरह का सिस्टम बनाएगा कि नागरिक अपने स्वामित्व और दावों से सम्बंधित विवरण इंटरनेट पर या तहसील रिक्त भूमि कर अधिकारी ( TELTO = Tehsil Empty Land Officer ) कार्यालय में दर्ज कर सके। राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी ( NELTO = National Empty Land Officer ) किसी स्वामित्व / दावे के विलम्बित पंजीयन पर सम्बंधित भूमि के मूल्य का 0.03% जुर्माना साप्ताहिक आधार पर लागू कर सकेगा। दावों को विलम्ब से दर्ज कराने के आधार पर दावों की स्थिति अप्रभावित बनी रहेगी। . (8.3) NELTO सभी भूमि स्वामित्व तथा दावों के अभिलेखों का विवरण स्वामी के नाम, माता पिता के नाम, छाया चित्र, पेन कार्ड संख्या, आधार कार्ड संख्या, मतदाता पहचान संख्या, उनकी मतदाता पहचान संख्या, पेन कार्ड संख्या, आधार संख्या के साथ इंटरनेट पर पारदर्शी रूप से सार्वजनिक करेगा। स्वामी के महिला होने की स्थिति में महिला का छाया चित्र प्रकाशित नही किया जाएगा, किन्तु महिला का द्वारा अनुमोदित उसके परिवार के किसी पुरुष सदस्य, या उसके द्वारा अनुमोदित अन्य पुरुष या उसके वकील का छाया चित्र वेबसाईट पर रखा जायेगा। सरकारी संस्थाओं द्वारा उपयोग में लिए जा रहे सभी प्रकार के भूमि, फ्लेट, चाहरदीवारी जैसे जिलाधीश कार्यालय, नगर परिषद आदि के समस्त अभिलेख और विवरण भी सार्वजनिक किये जायेंगे। . (8.4) सभी सरकारी कर्मचारी धारण की गयी अपनी समस्त संपत्ति की घोषणा करेंगे जिसमें जमीन, इमारतें, फ्लेट, सोना, कीमती धातुएं, शेयर, डिबेंचर, ट्रस्ट जिनमें में जुड़े हए है आदि शामिल है। न्यायाधीशो, प्रशासनिक अधिकारियों आदि को शामिल करते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों के वेतन एवं उनके भू-स्वामित्व के सभी ब्यौरे इस तरह सार्वजनिक रूप से रखे जायेंगे कि कोई भी नागरिक इन्हें पारदर्शी ढंग से देख सके। सरकारी कर्मचारियों के इन ब्यौरो को उनके विभागों एवं मंत्रालयों के आधार पर वर्गीकृत करके इंटरनेट पर रखा जाएगा। प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की प्रोफाइल के साथ उसके समस्त नजदीकी रक्त संबंधियों-रिश्तेदारों आदि की सूचना भी जुडी (Linked) रहेगी। .

  1. जमीनों के बाजार मूल्य एवं सर्किल रेट का अंतर कम करना :

. (9.1) यह खंड उस भूमि के विक्रय पर लागू नहीं होगा, जिसका विक्रय निष्पक्ष तथा खुली नीलामी की प्रक्रिया के तहत किया गया हो। ऐसी कोई नीलामी प्रक्रिया निष्पक्ष एवं खुली हुयी है या नही, इसका निर्धारण इस अधिनियम में वर्णित ज्यूरी प्रावधानों के अनुसार गठित जूरी मंडल करेगा। यह खंड सरकारी इकाइयों पर भी लागू नहीं होगा। सरकारी इकाई से आशय किसी ऐसी इकाई से है जिसके स्वामित्व का 51% या इससे अधिक अंश केंद्र, राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम, स्थानीय निकाय, नगर परिषद् आदि के अधिकार में हो। . (9.2) जब भी विक्रेता कोई प्रॉपर्टी बेचेगा तो इसका पंजीयन TELTO कार्यालय में कराया जाएगा। यह विवरण क्रेता एवं विक्रेता को TELTO कार्यालय में अलग अलग प्रस्तुत करना होगा। दोनों पक्ष किसी प्रोपर्टी की खरीद फरोख्त होने के 7 दिवस के भीतर अमुक भूखंड का नंबर, स्थिति, आकार, निर्माण का आकार, दोनों पक्षों के नाम, पहचान पत्र संख्या तथा भुगतान की गयी राशि का विवरण TELTO कार्यालय में या उसकी वेबसाईट पर दर्ज करायेंगे। यदि ऐसे विवरण विलम्ब से प्रस्तुत किये जाते है तो अमुक भूखंड के मूल्य का 0.01% प्रतिदिन की दर से जुर्माना देय होगा। . (9.3) जब भी TELTO को ऐसे किसी भूखंड के विक्रय की जानकारी मिलेगी वह अमुक भूखंड से सम्बंधित सम्पूर्ण विवरण सार्वजनिक करने के लिए वेबसाईट पर दर्ज करेगा। यदि क्रेता कोई ट्रस्ट या कम्पनी है तो TELTO सभी ट्रस्टियों के नाम तथा पहचान पत्र संख्या वेबसाईट पर रखेगा। ऐसी स्थिति में जबकि क्रेता कोई पब्लिक लिमिटेड कम्पनी है कंपनी का नाम, निदेशक मंडल तथा मुख्य अंश धारको के विवरण दर्ज किये जायेंगे, न कि सभी शेयर धारको के। TELTO प्रोपर्टी खरीदने वाले क्रेता को अमुक प्रोपर्टी का संभावित स्वामी के रूप में दर्ज करेगा। . (9.4) सार्वजनिक रूप से दर्ज होने के बाद यह प्रोपर्टी 30 दिवस तक सार्वजनिक नीलामी के लिए उपलब्ध रहेगी। यदि कोई तृतीय पक्ष 30 दिनों के भीतर इस प्रोपर्टी के विक्रय मूल्य से 25% अधिक भुगतान करता है, तो TELTO पूर्व क्रेता को 120% राशि का भुगतान करेगा तथा तृतीय पक्ष को अमुक भूखंड के अगले संभावित स्वामी के रूप में दर्ज करेगा। संभावित स्वामी द्वारा लगाईं गयी इस राशि को स्वीकार करने के बाद TELTO फिर से अगले 30 दिनों तक अगली बोली की प्रतीक्षा करेगा। यदि अन्य कोई पक्षकार इस भूखंड के लिए बोली लगाता है, तो यह बोली उस राशि से 25% अधिक होनी चाहिए जिस राशि का भुगतान संभावित स्वामी द्वारा पिछली खरीद में किया गया था। यदि अगले 30 दिनों के भीतर अन्य कोई पक्ष अमुक भूखंड के लिए कोई बोली नही लगाता है, तो अंतिम क्रेता को भूखंड का स्वामी घोषित कर दिया जाएगा। . (9.5) किसी भी प्रकार का विवाद होने की स्थिति में मामले का निपटान जूरी मंडल द्वारा किया जाएगा। . उदाहरण : . (a) माना कि A एक भूखंड B को विक्रय करता है तथा B इसका मूल्य 1 करोड़ चुकाता है । A स्थानीय TELTO को रिपोर्ट करता है कि उसने B को भूखंड 1 करोड़ में विक्रय किया है । . (b) अब यदि 30 दिनों के भीतर C इस भूखंड को खरीदने के लिए 1.25 करोड़ रू का भुगतान करने का प्रस्ताव करता है। ऐसी स्थिति में TELTO 1.20 करोड़ रू B के बेंक खाते में जमा करेगा तथा B का दावा अमुक भूखंड से हटा देगा। शेष 5 लाख रू की राशि केंद्र सरकार के खाते में जमा की जायेगी । . (c) यदि A के भूखंड बेचने के 30 दिनों के भीतर यदि C1, C2, तथा C3 क्रमश: 1.25 करोड़, 1.35 करोड़ तथा 1.50 करोड़ रूपये के भुगतान का प्रस्ताव करते है, तो TELTO C3 का प्रस्ताव स्वीकार करेगा, B का नाम भूखंड के स्वामित्व से हटाएगा, B को 1.20 करोड़ रू का भुगतान करेगा तथा शेष 30 लाख रू केंद्र सरकार के खाते में जमा करेगा। . (d) जब एक बार C (या C3) का दावा भूखंड पर स्वीकार कर लिया जाता है, तो TELTO नये दावों के लिए फिर से अगले 30 दिनों तक प्रतीक्षा करेगा। इस चरण में बोली की राशि पिछली बार अदा किये गए विक्रय मूल्य के 25% से अधिक होगी। यदि C ने भूखंड को 1.25 करोड़ में क्रय किया था तो बोली लगाने के लिए अब यह राशि 1.25×125% = 1.56 करोड़ होगी। . (e) अब यदि D इस भूखंड को खरीदने का प्रस्ताव करता है तो बोली 1.56 करोड़ रू से प्रारम्भ होगी। यदि D 1.60 करोड़ की बोली लगाता है, तो TELTO 1.50 करोड़ रू C के खाते में जमा करेगा, D का नाम भूखंड के संभावित स्वामी के रूप में दर्ज करेगा तथा अगले 30 दिनों तक प्रतीक्षा करेगा। . (f) यदि अगले 30 दिन तक अन्य कोई भी पक्षकार बोली लगाने के लिए नही आता है, तो TELTO भूखंड को अंतिम क्रेता के नाम पर हस्तांतरित कर देगा, और यह अंतिम क्रेता स्थायी स्वामी बन जाएगा। . [ टिप्पणी : इस तरह धीरे धीरे बाजार मूल्य एवं सर्किल रेट के मध्य का अंतर कम होगा और सर्किल रेट रिवाइज होती चली जायेगी। ] .

(10) चुकाए जाने वाले रिक्त भूमि कर की गणना :

. (10.1) जमीन की कीमत : भू-स्वामी धारा (02) में बतायी गयी, स्वयं और उसके पारिवारिक सदस्यों को मिलने वाली छूटो को इच्छित भू-खंडो में से घटा सकता है, और ये जरुरी नहीं है कि वह उन भू-खंडो पर निवास कर रहा हो। छूटें घटाने बाद शेष भू-खंडो की सर्किल रेट को जमीन की करयोग्य कीमत की गणना के लिए लिया जायेगा। . (10.2) टेक्स क्रेडिट : वित्त वर्षों के लिए बढ़ते क्रम में अर्थात सबसे पुराना टेक्स क्रेडिट पहले घटाया जायेगा। यदि अंतिम राशी का मान सकारात्मक है तो उतनी राशी का कर चुकाना होगा। यदि अंतिम राशी का मान नकारात्मक है तो टेक्स क्रेडिट कम कर दिए जायेंगे और चुकाए जाने वाला वास्तविक कर शून्य होगा। टेक्स क्रेडिट की शेष बची राशि का उपयोग आने वाले वर्षों में रिक्त भूमि कर के निपटारे के लिए किया जा सकता है।
. (10.3) यदि कोई व्यक्ति किसी कॉम्प्लेक्स में फ्लैट या ऑफिस का मालिक है तो उसके मालिकाना जमीन का क्षेत्रफल, अमुक कॉम्प्लेक्स में शेयर स्वामित्व के अनुसार तय किया जायेगा। विवाद की स्थिति में राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी द्वारा नियुक्त अधिकारी अमुक हाउसिंग सोसाइटी या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में हुए समझौते के आधार पर फैसला करेगा। . (10.4) वास्तविक रिक्त भूमि कर की गणना : स्वामित्व में मौजूद कुल प्रोपर्टी में से धारा (02) में बतायी गयी स्वयं एवं पारिवारिक सदस्यों की छूटों एवं धारा (03) में बताये गए टेक्स क्रेडिट को घटाया जाएगा। इन मदों को घटाने के बाद जो भूमि एवं निर्माण कर योग्य होगा उस पर सर्किल रेट के हिसाब से 1% सालाना की दर से कर चुकाया जायेगा।
. (10.5) ऊपर बताई गयी 1% की सालाना दर प्रधानमंत्री द्वारा बदली जा सकती है, जो आवश्यक सरकारी तंत्रों जैसे सेना, पुलिस, अदालतें, सड़कें, गणित / विज्ञान / हथियारों के प्रयोग की शिक्षा और सरकार के पोषण और शत्रुओं और अपराधियों से संपत्ति की रक्षा के लिए होने वाले अन्य आवश्यक खर्चों पर निर्भर करेगी।
. (10.6) रिक्त भूमि कर ना चुका पाने की दशा में भू-स्वामी अपनी प्रोपर्टी को लॉक करने का निवेदन कर सकता है, और ऐसे मामले में 12% प्रति वर्ष का ब्याज लागू होगा। इस स्थिति में प्रोपर्टी की कीमत बकाया कर की कीमत से कम से कम दोगुनी होना चाहिए। यदि प्रोपर्टी की कीमत मांगे जाने वाले कर के दोगुने से भी कम हो जाती है तो राष्ट्रीय रिक्त भूमि अधिकारी अमुक प्रोपर्टी की नीलामी का आदेश दे सकता है। किन्तु यदि अमुक प्रोपर्टी की मालिक कोई महिला है या 60 वर्ष की आयु से ऊपर का कोई पुरुष है और इनके पास अमुक प्रोपर्टी ही एकमात्र प्रोपर्टी है, तो ऐसी स्थिति में बकाया कर जुड़ता रहेगा और इसका निपटान अमुक प्रोपर्टी के विक्रय या वारिसान के दौरान किया जायेगा। .

(11) किराये पर दिए भू-खंड पर रिक्त भूमि कर की गणना :

. (11.1) यदि किराये का समझौता इस कानून के लागू होने के बाद किया गया था, तब पूरा कर केवल भू-स्वामी पर लगेगा। भू-स्वामी और किरायेदार किराया समझौता बनाने से पूर्व अपने भाग का रिक्त भूमि कर तय कर सकते है। किरायेदार को कर कम रखने के लिए जमीन या निर्माण की छूट की अनुमति नहीं होगी। . (11.2) इस कानून के लागू होने के बाद 6 महीने के अन्दर किरायेदार बिना किसी जुर्माने के किराया समझौता तोड़ने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसे मामले में इन 6 महीनो के लिए ना तो मालिक को और ना किरायेदार को इस प्रोपर्टी पर कोई कर देना होगा। भू-स्वामी और किरायेदार अब नया समझौता बना सकेंगे।
. (11.3) यदि किराया समझौता इस कानून के लागू होने से पूर्व हो चूका था, और इस कानून के लागू होने के बाद किरायेदार 6 महीने से अधिक के लिए यह समझौता जारी रखना चाहता है तो उस घर या ऑफिस पर सारा कर किरायेदार चुकाएगा, जब तक कि वह प्रोपर्टी खाली नहीं करता। किरायेदार इस प्रोपर्टी का कर कम करने के लिए अपनी एवं अपने परिवार की छूटों का इस्तेमाल कर सकेगा। परिवार के जिस सदस्य की छूट का उपयोग किया गया हो यह जरुरी नहीं होगा कि वह वहां निवास भी कर रहा हो। ऐसी किराये पर दी गयी प्रोपर्टी का रिटर्न किरायेदार द्वारा अलग से भरा जायेगा और मालिक इस घर के लिए शून्य प्रविष्टि दर्ज करेगा, किन्तु वह अपने रिटर्न में किराएदार का नाम, किरायेदार से सम्बंधित जानकारियाँ और अमुक प्रोपर्टी का पता आदि दर्शायेगा।
.

(12) राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी एवं उसके स्टाफ की नियुक्ति :

. (12.1) प्रधानमंत्री रिक्त भूमि कर इकठ्ठा करने हेतु एक राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी ( NELTO = National Empty Land Tax Officer ) नामक एक अधिकारी नियुक्त करेंगे। भारत के नागरिक इसी ड्राफ्ट में दिए वोट वापसी धाराओं का प्रयोग करके राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी को बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। . (12.2) NELTO केंद्र सरकार या राज्य सरकार में कार्यरत अधिकारीयों की भर्ती उनके निर्दिष्ट प्रमुखों की सहमति से करेगा। NELTO प्रत्येक राज्य में एक राज्य रिक्त भूमि कर अधिकारी (SELTO) , प्रत्येक जिले में एक जिला रिक्त भूमि कर अधिकारी (DELTO) और प्रत्येक तहसील में एक तहसील रिक्त भूमि कर अधिकारी (TELTO) की नियुक्ति करेगा। ये सभी अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन आयेंगे और NELTO के निर्देशन में कार्य करेंगे। . (12.3) NELTO एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो वह राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी या राष्ट्रीय जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा। . (12.4) जूरी प्रशासक के लिए : भारत का कोई भी नागरिक जिसकी आयु 30 वर्ष से अधिक हो तो वह जिला एवं राज्य जूरी प्रशासक पद के लिए आवेदन कर सकेगा। . (12.5) धारा (12.3) एवं (12.4) में दी गयी योग्यता रखने वाला कोई भी नागरिक यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में स्वयं या किसी वकील के माध्यम से कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क‍ लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार करेगा और शपथपत्र को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा। .

(13) मतदाता द्वारा उम्मीदवारों के लिए हाँ दर्ज करना :

. (13.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर NELTO, जिला जूरी प्रशासक, राज्य एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के प्रत्याशियों के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ दर्ज करेगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम व मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है। . (13.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी . (13.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। . (13.4) प्रत्येक महीने की 5 तारीख को कलेक्टर पिछले महीने में प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा। राष्ट्रीय रिक्त भूमि कर अधिकारी एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक की स्वीकृतियों का प्रदर्शन 5 तारीख को कैबिनेट सचिव द्वारा भी किया जाएगा। . [ टिप्पणी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी हाँ SMS, ATM, मोबाईल एप से दर्ज कर सके। . रेंज वोटिंग - प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ] .

(14) कर अधिकारी एवं जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं निष्कासन :

. (14.1) NELTO एवं राष्ट्रीय जूरी प्रशासक के लिए : यदि किसी उम्मीदवार को देश की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं ( सभी मतदाता, न कि केवल वे जिन्होंने स्वीकृति दर्ज की है ) की 35% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री मौजूदा अधिकारी को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले उम्मीदवार की नियुक्ति सम्बंधित पद पर कर सकते है, या अपना इस्तीफा दे सकते है। नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का ही होगा। . (14.2) राज्य जूरी प्रशासक के लिए : यदि राज्य की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी उम्मीदवार के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि स्वीकृतियों की यह संख्या पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो राष्ट्रिय रिक्त भूमि कर अधिकारी अमुक व्यक्ति को राज्य जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्ति कर सकते है। . (14.3) जिला जूरी प्रशासक के लिए : यदि जिले की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं के 35% से अधिक मतदाता किसी प्रत्याशी के पक्ष में हाँ दर्ज कर देते है और यदि यह संख्या पदासीन अधिकारी से 1% अधिक भी है तो राष्ट्रिय रिक्त भूमि कर अधिकारी अमुक व्यक्ति को जिला जूरी प्रशासक के पद पर नियुक्ति कर सकते है। .

(15) कर विवादो का नागरिको की जूरी द्वारा निपटान :

. (15.1) जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से 30 सदस्यीय महाजूरी मंडल की नियुक्ति करेगा। इनमे से हर 10 दिन में 10 सदस्य रिटायर होंगे और नए 10 सदस्यो का चयन मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा कर लिया जाएगा। यह महाजूरी मंडल निरंतर कार्यरत रहेगा। महाजूरी सदस्य को प्रति उपस्थिति 500 रू व यात्रा-व्यय मिलेगा। . (15.2) यदि करदाता एवं कर अधिकारी के बीच विवाद का कोई भी मामला आता है तो वादी अपने मामले की शिकायत महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, या इस मामले की सुनवाई के लिए 30 से 55 वर्ष आयु वर्ग के नागरिकों के एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है। जूरी सदस्यों में वे नागरिक होंगे जिन्होंने पिछले 10 वर्षों के दौरान जूरी में प्रस्तुत न हुआ हो और पूर्व में किसी अपराध के लिए सजा का सामना ना किया हो। . (15.3) करदाता और कर अधिकारी के बीच उत्पन्न विवाद जिस जिले में दर्ज होगा उसका प्राथमिकता क्रम इस तरह होगा - यदि करदाता अमुक जिले में एक मतदाता है या रहवासी है या वहां उसके पंजीकृत कार्यालय हैं अथवा या जिस जिले में अमुक भूमि स्थित है। यदि करदाता या कर अधिकारी सुनवाई का स्थान उसी राज्य के किसी अन्य जिले में बदलना चाहता है तो वे राज्य जूरी प्रशासक या राज्य उच्च न्यायालय से आदेश प्राप्त कर सकते है, और यदि दोनों में कोई भी एक पक्ष सुनवाई का स्थान राज्य के बाहर के किस जिले में बदलना चाहता है तब वे राष्ट्रीय जूरी प्रशासक या उच्चतम न्यायालय से आदेश प्राप्त कर सकते है।
. (15.4) जिले में दर्ज प्रत्येक कर विवाद हेतु जूरी प्रशासक मामलें में सहायता करने की सहमति देने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंटस की सूची में से रैंडमली 3 से 10 चार्टर्ड अकाउंटेंटस का चयन करेगा। चयनित चार्टर्ड अकाउंटेंटस की आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के मध्य होनी चाहिए और उनके पास 5 वर्षों का कार्य अनुभव चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर होना चाहिए।
. (15.5) जूरी सदस्यों की संख्या न्यूनतम 12 और अधिकतम 1500 होगी। यदि कर चोरी या कर बचत का दावा 10 लाख रू से कम है तो जूरी सदस्यों की संख्या 12 होगी, और प्रत्येक 10 लाख की कर चोरी या बचत के दावे की वृद्धि पर 1 अतिरिक्त जूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा। किन्तु जूरी का अधिकतम आकार 1500 जूरी सदस्य से अधिक नही होगा। . (15.6) यदि 75% या अधिक जूरी सदस्य आरोपी कर्मचारी को नौकरी से निकालने या जुर्माना लगाने का निर्णय देते है तो NELTO अमुक कर्मचारी को निकाल सकता है या उससे किराया वसूल सकता है, या NELTO को ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यदि शिकायतकर्ता को लगता है कि NELTO ने जूरी सदस्यों के निर्णय का ठीक से पालन नहीं किया है तो वह भारत के मतदाताओं से मांग कर सकता है कि वे धारा (13) में दी गयी वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके उसे नौकरी से निकालने की सहमती दें। . (15.7) जिला अदालत के जूरी सदस्यों के निर्णय की अपील हायर जूरी मंडल या हाई कोर्ट जज के सामने एवं बाद में सुप्रीम जूरी सदस्यों या सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने की जा सकती है। .

(16) जनता की आवाज :

. (16.1) जब प्रधानमंत्री या संसद या NELTO इस क़ानून में परिवर्तन लाने के लिए कोई अधिसूचना या सूचना-पत्र जारी करते है, तो इसे पूरे भारत में कार्यरत सभी DELTO को भेजा जाएगा और DELTO क्रमरहित विधि से 12 जूरी सदस्यों को बुलावा भेजेंगे। DELTO इस सूचना-पत्र का विवरण जूरी सदस्यों के समक्ष रखेगा और जूरी सदस्य इस सूचना-पत्र पर किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या अन्य व्यक्ति से अपने विचार रखने के लिए कह सकते हैं। यदि पूरे भारत में अधिकतर जूरी मंडल इस सूचनापत्र का विरोध करते हैं, तब प्रधानमंत्री या NELTO अपना पद त्याग सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है, या वे अमुक सूचना-पत्र को निरस्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। इस बारे में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम माना जायेगा। . (16.2) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा। . (16.3) यदि कोई मतदाता धारा 16.2 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा। . [ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 16.2 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में वाजिब प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के लिए प्रयास किये है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि या अन्य किसी रूप में हो सकता है। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ] . ======ड्राफ्ट की समाप्ति====== . इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए आप क्या सहयोग कर सकते है ? .

  1. कृपया अपना नाम-पता लिखकर एवं 4 रूपये का डाक टिकेट चिपका कर इसे 5 तारीख को 5 बजे लेटर बॉक्स में डालें। पोस्ट करने से पहले इस चिट्ठी के पहले पेज की एक फोटो कॉपी करवा ले। .
  2. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले इस बुकलेट के पहले पेज की जो 1 पेज की फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले पत्र की फोटो कॉपी भी इसी रजिस्टर में रखे। .
  3. आप प्रधानमंत्री जी को पोस्टकार्ड भी भेज सकते है। पोस्टकार्ड में यह लिखे : . प्रधानमंत्री जी, कृपया रिक्त भूमि कर क़ानून गेजेट में छापें - #EmptyLandTax , #VoteVapsiPassbook, #P20180436104 .
  4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए। यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप Cm को ये चिट्ठी भेजते है तो सिर्फ 5 तारीख को ही भेजें। 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो।इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। .
  5. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (16) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, बंद, जाम जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप चिट्ठी भेजकर नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।