> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-03-27

Pawan Jury BhilwaraRj

जल संसाधनों पर नागरिको के समान स्वामित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
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यह क़ानून "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" के प्रवृत होने के बाद ही लागू होगा। मीटर अनिवार्य करने के क़ानून में कई प्रश्न अनुत्तरित है , जैसे -- अ) जब पानी को वितरित करने की कीमत पानी के मूल्य से अधिक हो तो जल की कीमतें कैसे निर्धारित की जायेगी। ब) जब राशि बड़ी हो तो , पानी की कीमत में से लागत घटाने पर शेष राशि का वितरण किसे किया जाना चाहिए।
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इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको की राय में यह प्रस्तावित क़ानून मतदाताओ एवं अधिकारियो के बीच न्यूनतम टकराव एवं न्यूनतम भ्रष्टाचार की व्यवस्था के तहत उपरोक्त प्रश्नों के जवाब देता है।
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इस क़ानून के लागू होने का अंतिम नतीजा यह होगा कि -- जो नागरिक बहुत कम पानी का इस्तेमाल कर रहे है , वे उन लोगो से धनराशि प्राप्त करेंगे जो नागरिक बेहद अधिक पानी का इस्तेमाल कर रहे है। क्योंकि यह क़ानून जल संसाधनों पर समान स्वामित्व की रचना करता है , अत: जो व्यक्ति अपने हिस्से से अधिक जल का उपभोग करते है , उन्हें उन व्यक्तियों से जल उपभोग के अधिकार "खरीदने" होंगे जो अपने हिस्से में आये जल की मात्रा का कम उपभोग कर रहे है।
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जब पानी की लागत एवं पानी की कीमत वसूली जाकर नागरिको में वितरित की जाने लगेगी तो उपभोक्ताओ में पानी को व्यर्थ बहाने की प्रवृति में कमी आएगी तथा साथ ही वे वाटर रिसाईक्लिंग प्लांट लगाने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।
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जैसा कि ऊपर लिखा गया है , यह क़ानून सिर्फ तब ही काम कर सकेगा जब प्रस्तावित "युनिवर्सल वाटर मीटरींग क़ानून" लागू किया जाए। तो यदि आप "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" का विरोध करते है तो इस क़ानून को पढ़कर आप अपना समय ही नष्ट करेंगे। किन्तु यदि आप प्रस्तावित "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" के समर्थक है तो इस क़ानून को पढना आपके लिए उपयोगी होगा।
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जल संसाधनों पर समान नागरिक स्वामित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट
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[ टिप्पणी : इस प्रस्तावित क़ानून को राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के गेजेट में प्रकाशित करके अमुक राज्य में लागू किया जा सकता है। इस क़ानून को लागू करने के लिए विधानसभा या संसद से अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है।
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इस ड्राफ्ट के तीन भाग है -
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भाग- I : नागरिको के लिए सामान्य निर्देश
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भाग - II : अधिकारियो के लिए सामान्य निर्देश एवं टिप्पणिया
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इस ड्राफ्ट की महत्त्वपूर्ण धाराएं है – ( 1 , 2 , 3 , 5.1 )

इस क़ानून के लेखको की राय में अन्य धाराएं जटिल नहीं है एवं सामान्य समझ से इन्हें समझा जा सकता है।
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इस क़ानून को "युनिवर्सल वाटर मीटरींग क़ानून" के लागू होने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए। "युनिवर्सल वाटर मीटर क़ानून" का ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें - <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1558167890968108>; ]
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) जिला जल वितरण अधिकारी नागरिको के लिए दो तरह के 'जल कोटा" ( पानी का आरक्षित हिस्सा ) की मात्रा निर्धारित करेंगे (a) नगर निगम के जल कनेक्शन द्वारा लिए जा सकने वाले प्रति व्यक्ति प्रति महीने का जल कोटा , (b) बोरिंग द्वारा प्रति व्यक्ति प्रति महीने लिए जा सकने वाले भूगर्भ जल का कोटा।
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(2) प्रत्येक नागरिक अपने लिए आरक्षित जल की मात्रा का समस्त उपभोग कर सकते है या नकद या किसी वस्तु / सेवा का विनिमय के रूप में इस्तेमाल करते हुए किसी भी उपभोक्ता को आंशिक या पूर्ण मात्रा में अपनी जल राशि हस्तांतरित कर सकते हैं। यह विनिमय मूल्य जल क्रेता और आरक्षित जल का धारक आपस में तय करेंगे। सरकार ये मूल्य निर्धारित नहीं करेगी। जल क्रेता सीधे आरक्षित जल के धारक को जल का मूल्य अदा कर सकते है ,और जल धारक सीधे क्रेता से ये मूल्य ले सकते है। नाबलिगो के लिए यह मूल्य उनके माता पिता या अभिभावक तय करेंगे।
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(3) जल वितरण अधिकारी इन दो कीमतों की सार्वजनिक घोषणा कर सकते हैं या नहीं भी कर सकते हैं -- जल वितरण अधिकारी से ख़रीदे जाने वाले जल का सामान्य क्रय मूल्य और जल वितरण अधिकारी को बेचे जाने वाले जल का विक्रय मूल्य।
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(3.1) इस स्थिति में जो भी व्यक्ति अपनी आरक्षित जल की मात्रा से ज्यादा जल का उपभोग करते हैं, उन्हें जल के सामान्य क्रय मूल्य के अनुसार जल का मूल्य अदा करना होगा। और जो व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा से कम जल का उपभोग करेंगे उन्हें जिला जल वितरण अधिकारी जल के सामान्य विक्रय मूल्य के अनुसार मूल्य अदा करेंगे।
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(4) आरक्षित जल की मात्रा को हस्तांतरित करने के लिए नागरिक को नागरिक सेवा केंद्र आकर पूर्ण या आंशिक मात्रा में किसी अन्य पंजीकृत जल उपभोक्ता को जल का हस्तांतरण करना होगा। जल वितरण अधिकारी ऐसी व्यवस्था बना सकते है, जिससे नागरिक ये काम मोबाइल एप्लीकेशन या एस.एम्.एस द्वारा कर सके। यदि नागरिक अपने लिए आरक्षित जल की मात्रा किसी को भी हस्तांतरित नहीं करते है, तो ये मान लिया जाएगा कि उन्होंने अपनी समस्त अतिरिक्त जल की मात्रा जिला जल वितरण अधिकारी को हस्तांतरित कर दी है, और जिला जल वितरण अधिकारी निर्धारित विक्रय मूल्य के अनुसार मूल्य अदा कर करेगा।
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(4.1) जिला जल वितरण अधिकारी सभी हस्तान्तरणों की जानकारी एक सार्वजनिक वेबसाइट पर रखेंगे।
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(4.2) जल केवल नागरिकों के लिए आरक्षित किया जाएगा , किसी ट्रस्ट ,कंपनी ,संस्था , आवासीय सोसाइटी आदि के लिए नहीं। इस प्रकार की संस्थाएं यदि नगर निगम का जल या भूगर्भ जल का उपभोग करना चाहती है, तो उन्हें जिले के नागरिकों से उनके आरक्षित जल की मात्रा में से हस्तांतरण अधिकार लेने होंगे।
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(5) टिप्पणी क्या है : टिप्पणियाँ इस कानूनी ड्राफ्ट की मुख्य धाराओं का हिस्सा नहीं है। ये टिप्पणियाँ कार्यकर्ताओं और नागरिकों को यह ड्राफ्ट समझाने के लिए लिखी गयी है। जूरी सदस्य इन टिप्पणियों का प्रयोग किसी क़ानूनी मामले का निर्णय लेने में कर सकते हैं। किन्तु ये टिप्पणियाँ किसी पर भी बाध्यकारी नही है।
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(5.1) "कर सकता है" का अर्थ है , कर सकता है या नहीं भी कर सकता है। "कर सकता है" किसी पर भी बंधनकारी नहीं है।
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उदाहरण :

(5.1) मान लीजिए कि जिला जल वितरण अधिकारी प्रति व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा 5,000 लीटर प्रति महीना निर्धारित करते है। मान लीजिए एक व्यक्ति के पास 4 लोगों का परिवार है, तो अमुक परिवार के लिए आरक्षित जल की मात्रा 20,000 लीटर प्रति महीना होगी। अमुक परिवार इसमें से 12,000 लीटर जल स्वयं के प्रयोग के लिए रख कर शेष अर्थात अतिरिक्त 8,000 लीटर किसी अन्य क्रेता को हस्तान्तरित कर सकता है। जल क्रेता सीधे अमुक परिवार को इसका मूल्य अदा कर सकते है। यदि जल धारक चाहे तो एक क्रेता को 5,000 लीटर व किसी अन्य क्रेता को 3,000 लीटर जल हस्तांतरित कर सकते है, और उनसे इसकी कीमत ले सकते है।
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(5.2) कोई भी नागरिक किसी भी महीने नागरिक सेवा केंद्र जाकर अथवा जिला जल वितरण अधिकारी द्वारा दिये गए मोबाइल एप्लीकेशन का प्रयोग करते हुए अपने द्वारा किये गए हस्तान्तरणों को बदल सकता है।
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(5.3) मान लीजिए एक कारखाने को प्रति महीने 500,000 लीटर जल की आवश्यकता है। तो कारखाने को उस जिले के नागरिकों से उनके लिए आरक्षित जल में से 500,000 लीटर जल के हस्तांतरण अधिकार लेने होंगे।
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(5.4) मान लीजिए जिला जल वितरण अधिकारी भूगर्भ जल के लिए प्रति व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा 5,000 लीटर प्रति महीना निर्धारित करते है। मान लीजिए एक बोर वेल का मालिक 100,000 लीटर जल प्रति महीना भूगर्भ जल उपभोग करना चाहता है। तो अमुक व्यक्ति को 20 नागरिकों से भूगर्भ जल का पूर्ण हस्तांतरण लेना होगा अथवा उन्हें अनेक नागरिको से आंशिक रूप से हस्तांतरण लेना होगा, जिनका जोड़ 100,000 लीटर हो। बोर वेल का मालिक सीधे उन नागरिकों को मूल्य दे सकता है जिनसे उसे ये हस्तांतरण प्राप्त हुए है।
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(5.5) मान लीजिए एक व्यक्ति उसके लिए आरक्षित जल में से अतिरिक्त मात्रा को जिला जल वितरण अधिकारी को आवंटित करता है। मान लीजिए जिला जल वितरण अधिकारी प्रति व्यक्ति आरक्षित जल की मात्रा को 10,000 लीटर प्रति महीना निर्धारित करते है। मान लीजिए जिला जल वितरण अधिकारी जल का क्रय मूल्य रु 20 प्रति 1000 लीटर और जल का विक्रय मूल्य रु 15 प्रति 1,000 लीटर निर्धारित करते है। और मान लीजिए एक व्यक्ति X उस महीने 30,000 लीटर पानी का उपभोग करता है और एक अन्य व्यक्ति Y उस महीने 5,000 लीटर का उपभोग करता है। तो X को 20,000 लीटर जल का क्रय मूल्य अर्थात ( 20,000 * रु 20 / 1,000 ) = रु 400 उस महीने देने होंगे और Y को उस महीने 5,000 लीटर जल का विक्रय मूल्य अर्थात ( 5,000 * रु 15 / 1,000) = रु 75 प्राप्त होंगे।

(5.6) 1 वर्ष के लिए चिकित्सालय और क्लीनिक वगेरह से जल का कोई भी मूल्य नहीं लिया जाएगा। 1 वर्ष बाद उनसे भी निर्धारित दरों के अनुसार पैसे लिए जाएंगे। चिकित्सालयो के अतिरिक्त सभी को क़ानून लागू होने के तुरंत बाद से निर्धारित दरों के अनुसार मूल्य चुकाना होगा।
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भाग - II :अधिकारियो के लिए निर्देश और टिप्पणी
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(6) जल उपभोक्ताओं का पंजीकरण
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(6.1) जिला जल वितरण अधिकारी जिले के सभी वोटरों को पंजीकृत करेंगे और प्रत्येक वोटर के संतानों की संख्या भी संगृहीत करेंगे।
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(6.2) जिला जल वितरण अधिकारी मुनिसिपल्टी पानी की आपूर्ति के प्रत्येक कनेक्शन के साथ ही सभी भूगर्भ जल का बोरिंग , प्रत्येक फ्लैट / कार्यालय आदि में किये गए पानी के सभी आतंरिक ( उप मीटर) कनेक्शन का भी ब्यौरा रखेगा । जिला जल वितरण अधिकारी जिले में स्थित पानी के प्रत्येक खरीददार को पंजीकृत करेगा।
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(7) जिला जल वितरण अधिकारी अपने कार्यालय में कर्मचारियों को नियुक्त करेगा या नागरिक केंद्र और मौजूदा कर्मचारियों का प्रयोग करेगा।
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(7.1) जिले का कोई भी वयस्क मतदाता किसी भी दिन नागरिक सेवा केंद्र में आकर यह सूचित कर सकता है कि उसके लिए आरक्षित जल की मात्रा में से कितने प्रतिशत मात्रा किसी अन्य पानी कनेक्शन धारक को या जल क्रेता को हस्तांतरित जा सकती है। उदाहरण के लिए कोई मतदाता अपने हिस्से का 30% पानी-A को ,30% पानी-B को , 20% क्रेता-C को एवं 20% पानी जिला जल वितरण अधिकारी को हस्तांतरित कर सकता है। ऐसे सारे हस्तान्तरणों का जोड़ 100% होगा।
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(7.2) क्लर्क 3 रुपये शुक्ल लेकर वोटर द्वारा सूचित किया गया प्रतिशत पंजीकृत करेगा। नागरिक मुनिसिपल्टी के जल के कनेक्शन और भू गर्भ जल के लिए अलग अलग प्रतिशत सूचित कर सकता है। प्रत्येक वोटर द्वारा निर्धारित किये गए जल के हिस्से को एक सार्वजनिक वेबसाइट पर रखा जाएगा।
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(7.3) अगले महीने के लिए भी जल आवंटन की मात्रा वही रहेगी जब तक की नागरिक स्वयं इसे बदल ना दे। जब भी नागरिक इसे बदलता है उसके 3 दिन बाद इसे लागू किया जाएगा। यदि महीने के बीच में कोई बदलाव होता है तो बदलाव अमुक दिवस को उपलब्ध मासिक कोटे के अनुपात में लागू होगा। कोई भी उपभोक्ता उसको उपलब्ध आरक्षित जल की मात्रा किसी अन्य उपभोक्ता को हस्तांतरित या बिक्री कर सकता है। ये सारे हस्तांतरण सार्वजनिक वेबसाइट पर रखें जाएंगे।
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(7.3.1) धारा (7.3 ) का स्पष्टिकरण : मान लीजिये कि A का मासिक जल कोटा 6000 लीटर है। मान लीजिये कि उसने अपना जल कोटा व्यक्ति X को दे दिया था। लेकिन महिना समाप्त होने से पहले महीने की 18 तारीख को A अपना कोटा Y को दे देता है। मान लीजिये कि यह बदलाव 20 तारीख को प्रभावी होता है , एवं इस महीने में 30 दिन है। तब X को कोटे में से 20 दिनों का जल अर्थात 6,000/30 * 20 = 4,000 लीटर पानी ही मिलेगा, तथा शेष 2,000 लीटर पानी Y को दिया जाएगा।
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(7.4) जिला जल वितरण अधिकारी जल हस्तांतरण को सुविधापूर्ण बनाने के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन बना सकते है।
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(7.5) जिला जल वितरण अधिकारी निम्न जानकारियों की घोषणा करेंगे

(i) S = मुनिसिपल्टी के जल का विक्रय मूल्य
(ii) P = मुनिसिपल्टी के जल का क्रय मूल्य
(iii) W = प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित मुनिसिपल्टी जल की मात्रा
(iv) U = प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित भूगर्भ जल की मात्रा
(v) R = निर्धारित सीमा से अधिक भूगर्भ जल खींचने पर देय रोयल्टी की राशि
(vi) C = मुनिसिपल्टी के जल का वितरण मूल्य
(vii) भूगर्भ जल के लिए वितरण मूल्य शून्य होगा
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(7.5.1) यदि किसी नागरिक ने W अर्थात म्युनिसिपल्टी द्वारा व्यक्ति के लिए निर्धारित मात्रा में से किसी अन्य उपभोक्ता को की गयी हस्तांतरित मात्रा को घटाने के बाद उपलब्ध जल की मात्रा से कम जल का उपयोग किया है तो , जिला जल वितरण अधिकारी उसे जल के विक्रय मूल्य के अनुसार भुगतान करेंगे, और यदि नागरिक ने इससे अधिक जल का उपयोग किया है तो क्रय मूल्य के अनुसार पैसा वसूलेंगे।
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(7.5.2 ) अतिरिक्त भूगर्भ जल से प्राप्त रोयल्टी को उन नागरिकों के बीच वितरित किया जाएगा जिन्होंने अपने लिए आरक्षित भूगर्भ जल का हस्तान्तरण किसी अन्य उपभोक्ता को नहीं किया है।
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(7.5.3 ) जिला जल वितरण अधिकारी देय राशि को सीधे जिले के नागरिकों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में जमा करवाएंगे या हैंडलिंग चार्ज काट कर उन्हें नकद देंगे।
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(7.6) टिप्पणी : यहाँ दिए हुए सभी उदाहरण सिर्फ विषय को समझाने के लिए दिए गए है, तथा ये उदाहरण किसी भी पक्षकार पर बाध्यकारी नहीं है। मान लीजिये कि :

(i) S = मुनिसिपल्टी के जल का विक्रय मूल्य = रु 20 प्रति 1000 लीटर
(ii) P = मुनिसिपल्टी के जल का क्रय मूल्य = रु 15 प्रति 1000 लीटर
(iii) W = प्रति व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित मुनिसिपल्टी जल की मात्रा = 5000 लीटर
(iv) U = प्रति व्यक्ति के लिए प्रति महीना आरक्षित भूगर्भ जल की मात्रा = 4000 लीटर
(v) R = निर्धारित सीमा से ज्यादा भूगर्भ जल खींचने पर रोयल्टी की रकम = रु 20 प्रति 1000 लीटर
(vi) C = मुनिसिपल्टी के जल का वितरण मूल्य
(vii) भूगर्भ जल के लिए वितरण मूल्य शुन्य होगा
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(7.6.1) मान लीजिए एक व्यक्ति A के पास 4 लोगों का परिवार है। तो उनके परिवार के लिए आरक्षित जल की मात्रा 20,000 लीटर होगी। मान लीजिए वो प्रति माह 8,000 लीटर जल इस्तेमाल करते है एवं उन्होंने अपने लिए आरक्षित जल की मात्रा में से कुछ भी किसी अन्य उपभोक्ता को हस्तांतरित नहीं किया है। तो जिला जल वितरण अधिकारी उनको (12,000 * P ) = 12000 * ( रु 15/1000 ) = रु 180 और इसमें से 8,000 लीटर पर जल वितरण मूल्य 40 रुपये काट कर भुगतान करेगा।
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(7.6.2) मान लीजिए एक व्यक्ति A के पास कोई भी बोर वेल नहीं है, एवं उसके पास 4 लोगों का परिवार है। इसलिए इनके परिवार के लिए भूगर्भ जल की आरक्षित मात्रा उस महीने के लिए 16,000 लीटर होगी। मान लीजिए वो अपनी पूरी आरक्षित जल की मात्रा X को हस्तांतरित कर देता है। तो X सीधे A को इसका मूल्य अदा कर सकता है। इस हतान्तरण का मूल्य A और X आपस में निर्धारित करेंगे , एवं इसमें जिला जल वितरण अधिकारी का कोई क्षेत्राधिकार नहीं होगा।
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(7.6.3) मान लीजिए X के पास एक कारखाना है और X ने 20,00,000 लीटर मुनिसिपल्टी के जल का हस्तांतरण अधिकार हासिल किया हुआ है। मान लीजिए X ने इतनी ही मात्रा में जल का इस्तेमाल किया है। तो जिला जल वितरण अधिकारी उनसे सिर्फ वितरण मूल्य वसूलेंगे अर्थात (20,00,000 * रु 5 /1000) = रु 1000 । किन्तु यदि उन्होंने 30,00,000 लीटर जल इस्तेमाल किया है, तो उन्हें 30,00,000 लीटर जल का वितरण मूल्य और 10,00,000 लीटर का विक्रय मूल्य अर्थात (30,00,000 * रु 5/1000 + 10,00,000 * रु 20 / 10000 = रु 15000 + रु 20000 = रु 35000 रूपये का भुगतान करना होगा।
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(7.6.4) मान लीजिए X के पास एक कारखाना है और X ने 20,00,000 लीटर भूगर्भ जल का हस्तांतरण अधिकार हासिल किया है। मान लीजिए X उतना ही जल इस्तेमाल करता है , तो जिला जल वितरण अधिकारी X पर कोई शुल्क नहीं लगाएंगे। किन्तु यदि X 30,00,000 लीटर जल इस्तेमाल करता है , तो X 10,00,000 लीटर जल राशि पर रोयल्टी अर्थात (10,00,000 * रु 20 /1000 ) = रु 20000 जिला जल वितरण अधिकारी को अदा करेगा।
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(7.7) जिला जल वितरण अधिकारी जल उपभोक्ताओं से मिलने वाले और उनको दिए जाने वाले भुगतान के विषय में विस्तृत कानून बनाएगा।
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(7.8) नागरिक अपने जिले के जल वितरण अधिकारी को राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं का प्रयोग करके बदल सकेंगे, एवं जल अधिकारी / उसके स्टाफ आदि के खिलाफ दर्ज शिकायतों एवं समस्त विवादों का निपटारा नागरिको के ज्यूरी मंडल द्वारा किया जाएगा। राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम प्रक्रियाओं का विवरण "यूनिवर्सल वॉटर मीटरिंग" क़ानून के अंतर्गत दिया गया है।
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=========क़ानून ड्राफ्ट का समापन ========