Pawan Jury BhilwaraRj
त्रिपुरा में निजी दस्ते द्वारा लेनिन की मूर्ती के साथ तोड़ फोड़ करना --- यदि किसी सरकारी भूमि से किसी मूर्ती को हटाया जाना है तो इसे हटाया जा सकता है। लेकिन यह जरुरी है कि सरकार द्वारा ऐसा विधिवत नोटिफिकेशन जारी करके किया जाए।
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संघ ने कार्यकर्ताओ को मूर्ती तोड़ने के लिए भड़काया है। किसी निजी दस्ते को संघ द्वारा हिंसक तोड़फोड़ के लिए उकसाना एक गलत कदम है।
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दिलचस्प बात यह है कि संघ ने अपने कार्यकर्ताओ को भारत में मौजूद ब्रिटिश किंग एवं क्वीन की मूर्तियां तोड़ने के लिए कभी भी नहीं कहा !! और न ही संघ की सरकार ने कभी इन मूर्तियों को हटाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया !! लेकिन वे संघ के कार्यकर्ताओ को लेनिन की मूर्ती तोड़ने के लिए उकसाते है !!!
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और भी शर्मनाक यह है कि, त्रिपुरा के गवर्नर तथागत रॉय एवं राम माधव सरकारी भूमि पर स्थापित मूर्ती को एक निजी दस्ते द्वारा तोड़े जाने के कृत्य की प्रशंसा कर रहे है !!
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उल्लेखनीय है कि, लेनिन / रूस ने भारत को कभी भी कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। अत: इस तरह की हरकत से रूस को बुरा लगेगा। जब कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को मदद दी थी, तब यह रूस ही था जिसने भारत का साथ दिया था ( लेसर गाइडेड बम की आपूर्ति को छोड़ते हुए )। उदाहरण के लिए भारत को असहाय बनाने के लिए कारगिल युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने अपनी जीपीएस सेवा बंद कर दी थी तो रूस ने अपना जीपीएस हमें मुहैया कराया था।
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इस हरकत के पीछे मोदी साहेब एवं संघ के कार्यकर्ताओ का मुख्य उद्देश्य रूस एवं भारत के संबंधो के बीच कड़वाहट लाना है।
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यदि इस मूर्ती को गिराना या हटाना जरुरी था तो ऐसा सरकारी आदेश द्वारा किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा करने की जगह मोदी साहेब ने संघ के कार्यकर्ताओ को इसे हिंसात्मक तरीके हटाने के लिए उकसाया। क्योंकि वे रूसीयो को नीचा दिखाना चाहते है।
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