> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-03-05

Pawan Jury BhilwaraRj

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी ने भीलवाड़ा शहर का विद्युत् वितरण निजी कम्पनी "सिक्योर" के हवाले कर दिया है। और अब यह कम्पनी भीलवाड़ा के उपभोक्ताओं से मनमाना पैसा वसूलने की तैयारी कर रही है।
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अपने ट्विटर हेंडल से यह ट्वीट करें - " @PmoIndia , @RajCmo , #CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara , राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में विद्युत् के बीएमसी ( Bill , Meter and Collection ) प्रबंधन के लिए "सिक्योर" कम्पनी के साथ किये गए अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। <https://newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/>; "
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यह बेचान आपको किस तरह भारी नुकसान पहुंचाएगा ?
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१) कम्पनी भीलवाड़ा के सभी 83,000 मीटर बदलना चाहती है। कम्पनी का तर्क है कि मौजूदा मीटर सही रीडिंग नहीं देते, जबकि विभाग में काम करने वाले कई इंजीनियर्स का कहना है कि "सिक्योर" द्वारा जो मीटर लगाए जा रहे है वे 15 से 20% ज्यादा यूनिट दर्ज करेंगे !!
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कुछ दस साल पहले भीलवाड़ा में एनालॉग मीटर लगे हुए थे। विद्युत् निगम का कहना था कि, ये मीटर यूनिट्स की सही गणना नहीं करते , अत: इन मीटरों को इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स द्वारा बदल दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स आने से प्रत्येक मीटर में 10-15% यूनिट की रीडिंग बढ़कर आने लगी। वजह - इलेक्ट्रॉनिक मीटर माइक्रो लेवल पर विद्युत् का मापन करता है, कि ठीक भी है। ये इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स भी "सिक्योर" नामक कम्पनी द्वारा बनाये गए थे।
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गौरतलब है कि भीलवाड़ा विद्युत् निगम के प्रबंधन का ठेका इसी "सिक्योर" नामक कम्पनी को दिया गया है जिसने आज से 10 साल पहले भीलवाड़ा के सभी एनालॉग मीटर्स को इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स द्वारा बदला था , एवं अब यही कम्पनी कह रही है कि हमने 10 साल पहले जो मीटर लगाए थे वे ठीक नहीं है, अत: हम इन्हे फिर से बदलेंगे !! उल्लेखनीय है कि, "सिक्योर" कम्पनी ही इन मीटर्स की निर्माता भी है !! तो यह साफ़ नजर आ रहा है कि, कम्पनी अपना मुनाफा स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए तेज गति से मापन करने वाले मीटर इंस्टाल करना चाहती है।
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२) कम्पनी विद्युत् बिल के रिचार्ज के लिए चिप इश्यू करेगी। इसमें बेलेंस होगा। यदि विद्युत् उपभोग आपके चिप में मौजूद बेलेंस से अधिक हो जाता है तो विद्युत् आपूर्ति स्वत: ही बंद हो जायेगी !!
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निम्न एवं निम्न मध्य वर्ग इकोनॉमी काफी छोटी एवं अस्थिर होती है, और वे बहुधा अंतिम तारीख निकलने के बाद भी जैसे तैसे पैसो की व्यवस्था करवाके बिल आदि जमा करवाते है। किन्तु अब उन्हें इस एडजस्टमेंट की छूट नहीं मिलेगी, एवं उन्हें तत्काल रूप से पैसो का बंदोबस्त करना होगा, अन्यथा उनकी बिजली आपूर्ति तत्काल रूप से बंद हो जायेगी। इससे वे ऊँचा सूद वसूलने वाले सूदखोरों के जाल में फंसेंगे।
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३) पूरी सम्भावना है कि, कम्पनी बिल का मिनिमम चार्ज बढ़ाएगी एवं बिल मासिक होंगे। अभी बिल दो माह में आता है। चूंकि कम्पनी का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा मुनाफा बटोरना है अत: इन सब के अलावा भी कम्पनी ऐसी सभी तिकड़में लगाएगी जिससे जनता से रफ्ता रफ्ता पैसा खींचा जा सके।
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भीलवाड़ा जिले का विद्युत् मंडल 5 या 6 उप मंडलो में बंटा हुआ है। 5 ग्रामीण क्षेत्र के है एवं 1 शहरी क्षेत्र का है। ग्रामीण क्षेत्र के लगभग सभी उपमंडल घाटे में है, जबकि भीलवाड़ा शहर का उपमंडल लगातार मुनाफा बना रहा है। इस वर्ष का अब तक का मुनाफा लगभग 170 करोड़ है। मैडम जी ने कहा कि विद्युत् निगम घाटे में जा रहे है, अत: इनका प्रबंधन निजी कम्पनी को दिया जा रहा है। किन्तु उन्होंने घाटे में जाने वाले उपमंडल नहीं दिए जबकि मुनाफे में जाने वाला निगम निजी कम्पनी के हवाले कर दिया !!!
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इस समय भीलवाड़ा में 83,000 कनेक्शन है , एवं इनमे विद्युत् वितरण एवं प्रबंधन का खर्च 73 रूपये प्रति उपभोक्ता की दर से आता है। और इस दर से भी निगम 200 करोड़ सालाना का मुनाफा बना रहा है। किन्तु मेडम जी ने "सिक्योर" कम्पनी को यह ठेका 140 रूपये प्रति कनेक्शन की दर से दे दिया है !! मतलब इस समय प्रबंधन का जो खर्च आ रहा है , उससे भी लगभग दोगुनी दर में !!!
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यह भी उल्लेखनीय है कि, भीलवाड़ा शहर का जो निगम निजी कम्पनी को बेचा गया है उसकी छीजत सिर्फ 6.45% है, जबकि औसतन छीजत की दर 7% के आस पास रहती है !! छीजत की यह दर दर्शाती है कि इस मंडल में बिजली चोरी बेहद कम है। तो आखिर एक मुनाफे चलने वाले सार्वजनिक उपक्रम को कौड़ियों के भाव निजी कम्पनी के हवाले क्यों किया जा रहा है ?
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भीलवाड़ा में यह चर्चा आम है कि "सिक्योर" कम्पनी ने यह ठेका लेने के लिए शीर्ष स्तर से लेकर स्थानीय नेताओ तक को कई सौ करोड़ की घूस दी है। अत: सभी राजनैतिक पार्टियों के स्थानीय नेता एवं इनके कार्यकर्ता इस मुद्दे पर ख़ामोशी बरत रहे है।
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समाधान - हमारी मांग है कि इस अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। ऐसी कोई वजह नजर नहीं आती कि बेहद मुनाफे में चलते हुए निगम को सरकार घाटा खाकर निजी कम्पनी के हवाले कर दे। यह निगम भारत के नागरिको की सम्पत्ति है एवं नागरिको के टेक्स के पैसे से यह खड़ा हुआ है। अत: प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री से हमारी मांग है कि इस अनुबंध को अविलम्ब रद्द किया जाए।
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बिजली विभाग की कार्यकुशलता बढ़ाने , कर्मचारियों की लापरवाही एवं अधिकारियो की घूसखोरी कम करने के लिए हमारा स्थायी प्रस्ताव है कि विभाग के कर्मचारियों की शिकायतों की सुनवाई एवं निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाए। ज्यूरी सिस्टम लागू होने से बिजली विभाग के कर्मचारियों की अकर्मण्यता एवं घूसखोरी हफ्ते दो हफ्ते में ही घटकर लगभग शून्य हो जायेगी। किन्तु सभी राजनैतिक पार्टियों के शीर्ष नेता ज्यूरी सिस्टम का इसीलिए विरोध करते है ताकि प्रशासन में भ्र्ष्टाचार बढे एवं इस भ्रस्टाचार का हवाला देकर वे एक के बाद एक राष्ट्रिय सम्पत्तियाँ घूस खाकर निजी कम्पनियो के हवाले कर सके।
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कृपया प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को ट्वीट भेजकर यह मांग करें कि यह अनुबंध तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। मांग का यह प्रस्ताव मोदी साहेब को भी भेजा गया है, जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है -- <https://newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/>; कृपया इस लिंक को क्लिक करें एवं इस प्रस्ताव पर अपना वोट करें। आप फेसबुक के माध्यम से भी लॉग इन करके वोट कर सकते है।
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#CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara
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