Pawan Jury BhilwaraRj
पानी के मीटर अनिवार्य करने के लिए प्रस्तावित क़ानून
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गुजरात, राजस्थान एवं भारत के अन्य राज्य पानी की कमी से जूझ रहे है। इस संकट को दूर करने के लिए, हमारा प्रस्ताव है कि भारत के सभी जल आपूर्ति कनेक्शंस को अनिवार्य रूप से मीटरीकृत किया जाए।
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प्रूफ रीडिंग के बाद हम यह ड्राफ्ट newindia .in पर अपलोड करेंगे एवं इस विषय पर एक विज्ञापन देंगे, जिसमे नागरिको से यह अपील की जायेगी कि वे @pmoindia पर पीएम को एवं अपने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ट्विट करके इस क़ानून को लागू करने की मांग करे।
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इस कानून में जिला जल वितरण अधिकारी = DWDO ( District Water Distribution Officer ) पर राइट टू रिकॉल एवं जल वितरण से सम्बन्धित विवादों के निपटान के लिए ज्यूरी द्वारा सुनवाई का प्रावधान किया गया है।
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जिला जल वितरण अधिकारी ( DWDO ) पद संभालने के बाद इस तरह का कानून लागू करेगा जिससे प्रत्येक पानी कनेक्शन पर मीटर लगाना अनिवार्य हो। प्रत्येक कार्यालय, दूकान या फ्लेट आदि के कनेक्शन पर भी मीटर लगाए जायेंगे। किसी कोम्प्लेक्स आदि में कई फ्लेट्स के लिए एक ही मीटर होने की व्यवस्था समाप्त की जायेगी, तथा प्रत्येक फ्लेट के लिए अलग से मीटर होगा। साथ ही जिला जल वितरण अधिकारी नगर पालिका द्वारा आवंटित किये गए अन्य सभी कनेक्शंस पर भी मीटर लगवाने को सुनिश्चित करेगा।
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व्यावसायिक रूप से प्रत्येक कनेक्शन को मीटरी कृत करना पूरी दुनिया एवं भारत में 1850 में ही संभव हो चुका था !! भारत में हमेशा से जल संकट रहा है , किन्तु आज भी भारत में पानी के मीटर नहीं लगाए गए है। जबकि पानी की प्रचुरता होने के बावजूद अमेरिका में 1910 में ही सभी कनेक्शंस को मीटरीकृत कर दिया गया था !!
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उल्लेखनीय है कि, यदि भारत में सभी पानी के कनेक्शन पर मीटर लगा दिए जाते तो हमें खालिस्तान जैसे आन्दोलन का सामना नहीं करना पड़ता !!
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कृपया इस बात पर भी विशेष रूप से ध्यान दें कि, सोनिया-मोदी-केजरीवाल खुद के राजनितिक / आर्थिक फायदों के लिए हमेशा से ही युनिवर्सल वाटर मीटरिंग के कानून का विरोध करते रहे है। और कोंग्रेस-बीजेपी एवं आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता भी इस क़ानून के हमेशा से विरोधी रहे है।
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तो यदि आप देश में "युनिवर्सल मीटरिंग क़ानून" चाहते है तो कृपया सोनिया-मोदी-केजरीवाल का समर्थन करके अपना समय एवं उर्जा नष्ट न करे। समाधान के लिए इन नेताओं एवं पार्टियों का समर्थन करने की जगह आप इस क़ानून को लागू करवाने का प्रयास करें।
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युनिवर्सल वाटर मीटरिंग के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट
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[ टिप्पणी : युनिवर्सल वाटर मीटरिंग का यह कानूनी ड्राफ्ट मुख्यमंत्री द्वारा सीधा राज्य के राजपत्र ( गैजेट ) में छापा जा सकता है, मुख्यमंत्री को विधानसभा या लोकसभा से इस प्रस्ताव को पारित करवाने की आवश्यकता नहीं है। ]
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इस ड्राफ्ट के तीन भाग है -
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग- II : ड्राफ्ट में दी गयी प्रक्रिया का सारांश
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भाग- III : अधिकारियों के लिए निर्देश एवं इस सम्बन्ध में टिप्पणियाँ
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इस ड्राफ्ट के महत्वपूर्ण खंड है -
इस कानून-ड्राफ्ट के लेखको की राय में अन्य खंड अति-महत्वपूर्ण नही है और केवल सामान्य समझ के लिए है। ]
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राईट टू रिकॉल जल वितरण अधिकारी को रिकॉल करने की जो प्रक्रिया यहाँ दी गयी है , उसे विस्तृत रूप से समझने के लिए - <https://newindia> .in/causes/rtr-deo/ पर रखें गए राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का ड्राफ्ट देखें I
इस ड्राफ्ट में दी गयी ज्यूरी ट्रायल की प्रक्रियाओ को विस्तृत रूप से समझने के लिए कृपया - <https://newindia> .in/causes/jury-sys/ पर रखे गए ड्राफ्ट को देखें I
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) पदासीन जिला जल वितरण अधिकारी को या नये ज़िला जल वितरण अधिकारी की उम्मीदवारी को अनुमोदित करना :
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(1.1) यदि कोई मतदाता अपने जिले के जल वितरण अधिकारी को बदलना चाहता है, तो वह पटवारी कार्यालय में किसी भी दिन उपस्थित होकर किसी उम्मीदवार को अपना अनुमोदन दे सकता है। अनुमोदन दर्ज करवाने की इस प्रक्रिया के लिए समय , दिनांक , अवधि आदि का कोई निर्बन्धन लागू नहीं होगा। इन अनुमोदनों के आधार पर जिले के जल वितरण अधिकारी को बदला जा सकेगा।
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(1.2) जल वितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि , प्रत्येक बोरिंग , घर, कार्यालयों एवं रिहाइशी / व्यावसायिक कोम्प्लेक्स के प्रत्येक फ्लेट में लिए गए प्रत्येक कनेक्शन को मीटरीकृत किया जाये, तथा पानी के उपभोग का पर्यवेक्षण किया जाए। यदि जल वितरण अधिकारी उपरोक्त कार्यो को कार्यकुशलता से नहीं करता है तो आप मतदाता ऐसे जल अधिकारी को पद से हटाने के लिए अनुमोदन दर्ज करवा सकेंगे।
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(2) आप को ( आशय मतदाता से है ) किसी विवाद के निपटान हेतु ज्यूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से जल का उपभोग किया जाना पाया जाता है या जल विभाग के कर्मचारियों द्वारा कर्तव्य में लापरवाही या अकर्मण्यता दिखायी जाती है तो इन शिकायतों का निपटान करने के लिए ज्यूरी बुलाई जायेगी, एवं यदि ज्यूरी में आपको बुलाया गया है तो आपको नगर परिषद् में उपस्थित होकर विवाद की सुनवाई करनी होगी एवं आरोपियों पर फैसला देना होगा। यदि आप ज्यूरी में उपस्थित होने से इनकार करते है तो ग्रेंड ज्यूरी आप पर दंड लगा सकती है।
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भाग - II : ड्राफ्ट में दी गई प्रक्रिया का सार
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(3) टिप्पणी: सम्पूर्ण ड्राफ्ट का सार
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(3.1) मतदाताओ के पास जल वितरण अधिकारी को बदलने या नौकरी से निकालने की प्रक्रिया होगी एवं उसके स्टाफ के खिलाफ की गयी शिकायतों एवं पानी चोरी आदि के मामलो का निपटान नागरिको की ज्यूरी द्वारा किया जायेगा।
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(3.2) राईट टू रिकॉल जल वितरण अधिकारी की प्रक्रिया को और भी अच्छे से समझने के लिए कृपया राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी का ड्राफ्ट देखें। यह ड्राफ्ट ‘newindia dot in / causes/RtrDeo3 ’ पर देखा जा सकता है।
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(3.3) किसी राज्य के मतदाता अमुक राज्य में दर्ज कुल मतदाताओं के स्पष्ट बहुमत का प्रदर्शन करके अमुक राज्य में स्थित किसी जिले में लागू राईट टू रिकॉल जिला जल वितरण अधिकारी एवं ज्यूरी प्रक्रियाओ को 4 साल तक के लिये निरस्त कर सकते है। और भारत देश के मतदाता देश में दर्ज कुल मतदाताओं के स्पष्ट बहुमत का प्रदर्शन करके किसी राज्य या जिले में लागू इन प्रक्रियाओ को 4 साल तक के लिये निरस्त कर सकते है।
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भाग III : अधिकारीयों के लिए निर्देश और टिप्पणीयां
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(4) टिप्पणी क्या है : ये टिप्पणीयां इस कानूनी ड्राफ्ट का वास्तविक हिस्सा नहीं है। कार्यकर्ता और नागरिक ड्राफ्ट को समझने हेतु इसका उपयोग कर सकते है। जूरी सदस्य इन टिप्पणीयों का उपयोग किसी मामले के फैसले के लिए सन्दर्भ के रूप में ले सकते है। किन्तु ये टिप्पणीयां किसी पर भी बाध्यकारी नहीं है।
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(5) शब्द "कर सकते है" का आशय है - किसी भी प्रकार का नैतिक-कानूनी बंधन नहीं। इसका स्पष्ट अर्थ है "कर सकते है" या "ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है"।
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(6) जल वितरण अधिकारी के लिए उम्मीदवारी
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(6.1) मुख्यमंत्री प्रत्येक जिले के लिए जल वितरण अधिकारी की नियुक्ति करेंगे। यदि जिला बड़ा है तो मुख्यमंत्री जिले को दो या अधिक संभागो में बाँट सकते है और प्रत्येक संभाग के लिए अलग से जल वितरण अधिकारी की नियुक्ति कर सकते है।
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(6.2) यदि किसी व्यक्ति के पास स्नातक डिग्री है तथा वह लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक पात्रता पूरी करता है, तो वह जल वितरण अधिकारी बनने के लिए आवेदन कर सकता है। यदि इन पात्रताओ को धारण करने वाला कोई व्यक्ति जिला कलेक्टर के समक्ष आता है और कार्यरत जल वितरण अधिकारी को प्रतिस्थापित करने के लिए स्वयं को पंजीकृत करने हेतु आवेदन करता है तो जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में ली जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर उसका आवेदन स्वीकार करेगा। आवेदन स्वीकृत होने पर जिला कलेक्टर एक सीरियल नंबर जारी करेगा और उम्मीदवार का नाम और अन्य सम्बंधित सूचना मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा। यदि उम्मीदवार चाहे तो लिखित में आवेदन करके अपनी उम्मीदवारी वापिस ले सकते है।
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(6.3) जिला कलेक्टर कार्यरत जल वितरण अधिकारी को बिना कोई शुल्क लिए उम्मीदवार के रूप में पंजीकृत करेगा। उम्मीदवारों की सूची में कार्यरत जल वितरण अधिकारी का सीरियल नंबर 1 होगा।
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(7) नागरिको द्वारा प्रतिस्थापक उम्मीदवारो या कार्यरत जल वितरण अधिकारी को अनुमोदित करना :
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(7.1) यदि कोई मतदाता पटवारी कार्यालय आकर मुख्यमंत्री द्वारा निर्धारित शुल्क देता है, और अधिकतम पांच उम्मीदवारों को जल वितरण अधिकारी के पद के लिए अनुमोदित करता है और/ या वह कार्यरत जल वितरण अधिकारी को अनुमोदित करता है तो पटवारी उसकी स्वीकृति को कंप्यूटर में दर्ज करेगा और बदले में उसे रसीद देगा। इस रसीद में नागरिक की मतदाता पहचान पत्र संख्या, दिनांक / समय और उम्मीदवार जिन्हे उसने अनुमोदित किया है दर्ज होंगे।
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(7.2) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या उससे अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा। इस निरस्तीकरण को भी मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
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(7.3) टिप्पणी : अनुमोदनों के बारे में स्पष्टीकरण - (i) मतदाता किसी भी दिन अनुमोदन दर्ज कर सकता है और इसके लिए कोई समय सीमा नहीं है। अपनी सुविधानुसार विभिन्न मतदाता अपने अनुमोदन किसी भी दिन दर्ज कर सकते है। (ii) मान लीजिये, एक मतदाता ने उम्मीदवार A, B और C को अनुमोदित किया है। तब A, B और C की अनुमोदन संख्या 1 से बढ़ जाएगी। (iii) अब मतदाता किसी भी दिन अपना कोई भी अनुमोदन निरस्त कर सकता है। मान लीजिये कि अमुक मतदाता ने C के अनुमोदन को निरस्त किया है, तो C की अनुमोदन संख्या 1 से कम हो जाएगी और A और B के अनुमोदनों की संख्या अपरिवर्तित रहेगी। (iv) मतदाता किसी अन्य उम्मीदवार को भी किसी भी दिन अनुमोदित कर सकता है। मान लीजिये कि अमुक मतदाता D को अनुमोदित करता है, तो ऐसी स्तिथि में D की अनुमोदन संख्या 1 से बढ़ जाएगी और A और B की अनुमोदन संख्या अपरिवर्तित रहेगी।
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(7.4) पटवारी प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज अनुमोदन को अभिभावक की मतदाता संख्या, नाम और उसके द्वारा अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा।
(7.5) अनुमोदन दर्ज करने की प्रक्रिया खुली और सार्वजानिक होगी। अर्थात प्रत्येक मतदाता द्वारा दर्ज किये गए अनुमोदनों को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर रखा जाएगा और यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए खुली एवं दृश्य होगी।
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(8) जिला जल वितरण अधिकारी के बदले जाने के लिए शर्त : यदि
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(8.1) किसी नए उम्मीदवार को प्राप्त अनुमोदनों की संख्या अमुक जिले के मतदाताओ की कुल संख्या के 35% (सभी दर्ज मतदाताओ की कुल संख्या के 35%) से अधिक हो, और
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(8.2) उसे मिले अनुमोदनों की संख्या पदासीन जल वितरण अधिकारी को मिले अनुमोदनों की संख्या से उतनी अधिक है जो उस जिले में दर्ज अभिभावको की कुल संख्या के 2% के बराबर हो। और
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(8.3) उसके अनुमोदनों की संख्या सबसे अधिक हो।
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तभी और सिर्फ तभी मुख्यमंत्री पदासीन जल वितरण अधिकारी को पद से हटा सकते है और ऊपर दी गयी शर्ते पूरी करने वाले नए उम्मीदवार को जल वितरण अधिकारी नियुक्त कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(9) टिपण्णी :
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(9.1) ऊपर दी गयी धाराओं में इंगित "35%" और "2%" से आशय है "मतदाता सूचि में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 35% और 2% "। उदाहरण : यदि किसी जिले में 20 लाख मतदाता है तो 35% और 2% का अर्थ क्रमशः 700,000 और 40,000 होगा। यहाँ यह संख्या अनुमोदन दर्ज कराने वाले मतदाताओ की संख्या से अप्रभावित रहेगी। और जल वितरण अधिकारी के प्रतिस्थापन के लिए ऊपर दी गयी तीनो धाराओं (8.1) ,(8.2) ,(8.3) में दी गयी शर्तो का पूरा होना जरुरी होगा।
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(9.2) उदहारण – 1 : मान लीजिए किसी जिले में 20,00,000 मतदाता है ,तथा मान लीजिए कि पदासीन जल वितरण अधिकारी को 500,000 मतदाताओ के अनुमोदन मिले है। तब यदि किसी उम्मीदवार को 20,00,000 के 35% = 700,000 मतदाताओ के अनुमोदन मिलते है, सिर्फ तभी मुख्यमंत्री उस नए उम्मीदवार को जिला जल वितरण अधिकारी नियुक्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(9.3) उदहारण – 2 : मान लीजिए किसी जिले में 20,00,000 मतदाता है तथा मान लीजिए कि पदासीन जल वितरण अधिकारी के पास 800,000 मतदाताओ का अनुमोदन है। तब किसी उम्मीदवार के अनुमोदनों की संख्या (800,000 + 2% of 20,00,000) = (800,000 + 40,000) = 840,000, होना जरुरी है। सिर्फ तभी मुख्यमंत्री उसे जल वितरण अधिकारी नियुक्त कर सकेंगे या उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है।
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(10) कोई नागरिक किसी राज्य में अधिकतम 5 जिलों का और पुरे भारत में अधिकतम 15 जिलों का जल वितरण अधिकारी बन सकता है। यदि कोई जल वितरण अधिकारी मतदाताओ के अनुमोदन द्वारा जल वितरण अधिकारी बना है अर्थात प्रत्येक जिले में उसे 35% मतदाताओ से ज्यादा मतदाताओ के समर्थन प्राप्त है , तो उसका वेतन एवं भत्ते एक जिला जल वितरण अधिकारी के वेतन एवं भत्तों से उतना गुना होगा जितने जिलो में वह जल वितरण अधिकारी के पद पर कार्यरत है। उदाहरण के लिए- यदि कोई व्यक्ति भारत के 7 जिलों में जल वितरण अधिकारी है, और सिर्फ 5 जिलों में ही उसको मिले अनुमोदनों की संख्या 35% से ज्यादा है तो उसे पांच गुणा वेतन मिलेगा न कि सात गुणा। किन्तु यदि कोई व्यक्ति 5 जिलो में जल वितरण अधिकारी है एवं 4 या 5 जिलों में प्रत्येक जिले से उसे मिले अनुमोदनों की संख्या 35% से कम है, तब उसका वेतन सिर्फ एक जिला जल वितरण अधिकारी के वेतनमान के बराबर होगा।
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(11) कार्य अवधि: कोई व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक जिले में अधिकतम 8 साल तक जल वितरण अधिकारी रह सकता है। इसके बाद वह किसी अन्य जिले में जल वितरण अधिकारी बन सकता है या अमुक जिले में किसी अन्य पद पर सेवा दे सकता है।
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(12) कोई भी सेवानिवृत्ति लाभ नहीं : यदि कोई व्यक्ति मतदाताओ के समर्थन द्वारा जल वितरण अधिकारी बना है और वह किसी भी राजकीय सेवा कैडर से नहीं आता है तो कार्य अवधी समाप्त होने पर या हटा दिये जाने पर उसे किसी भी प्रकार की सेवानिवृत्ति राशी एवं पेंशन लाभ आदि नहीं मिलेंगे। जिला / राज्य / भारत सरकार द्वारा पारित किये गए किसी कानून या प्रस्ताव द्वारा उसे सेवानिवृति लाभ दिए जा सकेंगे परन्तु यह कानून जल वितरण अधिकारी को किसी भी प्रकार के सेवानिवृत्ति लाभ के लिए कोई प्रावधान नहीं करता।
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(13) मतदाताओ द्वारा अनुमोदित जल वितरण अधिकारी का वेतनमान एवं भत्ते : मतदाताओ द्वारा अनुमोदित जल वितरण अधिकारी का वेतन एवं भत्ते वरिष्ठता एवं अन्य पात्रताओं की अवहेलना करते हुए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये जाने वाले जिला कलेक्टर के वेतनमान के समकक्ष होंगे। जल वितरण अधिकारी सरकारी आवास, सरकारी वाहन, ड्राइवर या अपने आवास पर प्राप्त की जाने वाली सेवाओं की पूर्ती के लिए किसी भी प्रकार के अतिरिक्त स्टाफ का पात्र नहीं होगा। किन्तु जल वितरण अधिकारी इन सेवाओं के बराबर निर्धारित राशि भत्ते के रूप में प्राप्त कर करेगा। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा। किन्तु मतदाताओ के अनुमोदन से नियुक्त सभी जल वितरण अधिकारी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान के समान वेतन प्राप्त करेंगे। यदि जिले के मतदाता चाहे तो वे बहुमत का प्रदर्शन करके जल वितरण अधिकारी के वेतन में अतिरिक्त वृध्दि कर सकेंगे।
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(14) (14) मतदाताओ द्वारा अनुमोदित व्यक्ति को मुख्यमंत्री द्वारा जल वितरण अधिकारी नियुक्त करना : इस सम्बन्ध में फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। मुख्यमंत्री मतदाताओ द्वारा अनुमोदित व्यक्ति को ओएसडी (OSD = Officer on Special Duty) के रूप में या जल वितरण अधिकारी के रूप में नियुक्ति दे सकते है। मुख्यमंत्री का फैसला अंतिम होगा।
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(15) सभी पानी के कनेक्शंस को मीटरीकृत करना :
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(15.1) जल वितरण अधिकारी नगर परिषद् या जिला शासन द्वारा दिए गए प्रत्येक कार्यालय, निवास, फ्लेट, एवं प्रत्येक इकाई के पानी कनेक्शन पर अनिवार्य रूप से मीटर लगवाने की व्यवस्था कर सकता है। जल वितरण अधिकारी प्रत्येक निजी बोरिंग को भी मीटरीकृत कर सकेगा।
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(15.1.1) जल वितरण अधिकारी एक सीमा निर्धारित करेगा जिसमे प्रत्येक पानी कनेक्शन को मीटरीकृत किया जाना है। यदि कतिपय इकाइयां अपने कनेक्शन को मीटरीकृत नहीं करती है तो जल वितरण अधिकारी अवहेलना करने वाली इकाइयों पर दंड लगाने के प्रावधान निर्धारित करेगा।
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(15.2) टिपण्णी : जल वितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक उपभोक्ता का उपभोग कम से कम एक वाटर मीटर द्वारा दर्ज किया जाए। यदि किसी व्यक्ति या इकाई को एक से अधिक मीटर की आवश्यकता है तो वह एक से अधिक मीटर लगा सकता है। .
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(15.3) किसी रिहाइशी या व्यावसायिक कोम्प्लेक्स में यदि N इकाइयाँ है तो ऐसे कोम्प्लेक्स में कम से कम N + 1 मीटर होंगे। प्रत्येक इकाई के लिए एक अलग से मीटर होगा, एवं एक कॉमन कनेक्शन सकल उपभोग के लिए होगा।
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(15.4) प्रत्येक रिहाइशी / व्यावसायिक कोम्प्लेक्स में किये गए बोरवेल एवं वाटर पम्प को बिजली आपूर्ति के लिए भी अलग से बिजली का मीटर लगाना आवश्यक होगा।
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(15.5) जल वितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक रिहाइशी एवं व्यावसायिक कोम्प्लेक्स एसे विनियम बनाएं जिससे प्रत्येक उपभोक्ता / इकाई को उसके द्वारा उपभोग किये जा रहे पानी एवं पानी के लिए खर्च की जा रही बिजली का बिल ही चुकाना पड़े , अधिक नहीं। ऐसे रिहाइशी / व्यावसायिक कोम्प्लेक्स के कॉमन कनेक्शन के बिल को सभी इकाइयों में बराबर विभाजित किया जा सकेगा।
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(15.6) जल वितरण अधिकारी प्रत्येक पानी के मीटर एवं प्रत्येक पानी के मीटर के लिए इस्तेमाल में आ रहे बिजली के मीटरों की मासिक रीडिंग लेगा एवं इन्हे नगर परिषद् की वेबसाइट पर रखेगा। जल वितरण अधिकारी इसके लिए आवश्यक मोबाइल एप , वेबसाइट आदि भी बना सकेगा।
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(J) जल आवंटन और पानी के मीटर के मामलों पर जूरी प्रक्रिया
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(J.1) टिपण्णी : प्रस्तावित जूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए ‘ newindia dot in /causes/DJSM ‘ देखें
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(J.2) यदि जिला जल वितरण अधिकारी या उनके किसी कर्मचारी व किसी जल उपभोक्ता के बीच कोई विवाद होता है या किसी जल उपभोक्ता पर जुर्माना निर्धारित किया जाना है तो जिला जल वितरण अधिकारी इन विवादों के निपटान के लिए जूरी प्रक्रियाओं का प्रयोग करेंगे। इस भाग में जूरी के गठन से सम्बंधित नियम दिए गए है।
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(J.3) जल वितरण अधिकारी प्रत्येक जिले में एक जूरी प्रशासक नियुक्त करेंगे, जिसे जिला जूरी प्रशासक कहा जाएगा। जिला जल वितरण अधिकारी जूरी प्रशासक को किसी भी दिन बदल सकते है।
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(J.4) विवादों का निपटारा
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(J.4.1) प्रत्येक मामले के लिए जिला जूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से रेंडमली 30 से 55 वर्ष की आयु के कुछ उन नागरिक चुनेगा जो कि पिछले 10 वर्षों में कभी जूरी मंडल में ज्यूरर बन कर नहीं आये है एवं अतीत में उनको किसी भी मामले में दोषी नही पाया गया है।
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(J.4.2) जूरी सदस्यों की संख्या : जूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 12 और अधिकतम 100 हो सकती है। यदि जिला जल वितरण अधिकारी द्वारा लगाए हुए जुर्माने की राशि 1 लाख से कम है तो जूरी सदस्यो की संख्या 12 होगी और उसके बाद हर एक लाख ज्यादा जुर्माने की रकम के लिए एक जूरी सदस्य और बढ़ाया जाएगा। जूरी सदस्यों की संख्या अधिकतम 100 हो सकती है। यदि मामला जुर्माने का नही है , बल्कि किसी अधिकारी के खिलाफ दुर्व्यवहार या भ्रष्टाचार का आरोप है तो जूरी सदस्यों की संख्या 50 होगी ।
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(J.4.3) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने विवेक एवं कानूनी सीमा के अनुसार जुर्माने की राशि निर्धारित करेंगे । जिला जल वितरण अधिकारी 67% जुरी सदस्यो द्वारा अनुमोदित जुर्माने की राशि को तय किया गया जुर्माना मानेंगे।
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(J.4.4) यदि 67% से अधिक जुरी सदस्य ये घोषित करते है कि, अभियुक्त अधिकारी को पद से निलंबित किया जाना चाहिए तो जिला जल वितरण अधिकारी अभियुक्त कर्मचारी को निलंबित करेंगे ।
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(S) देश अथवा राज्य के नागरिको द्वारा राईट टू रिकॉल जल वितरण अधिकारी के क़ानून को निलंबित करने की प्रक्रिया :
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(S.1) राज्य के मतदाता ( सभी मतदाता, न कि सिर्फ वे मतदाता जिन्होंने वोट किया है ) मुख्यमंत्री द्वारा स्थापित की गयी प्रक्रिया का उपयोग करते हुए इस कानून को किसी जिले / राज्य में 4 वर्ष तक के लिए निलंबित कर सकते है। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित होना चाहिए कि अमुक राज्य के कुल मतदाताओं ( न कि सिर्फ उन मतदाताओं ने जिन्होंने अनुमोदन की प्रक्रिया में भाग लिया है ) का बहुमत स्पष्ट रूप से इस निलंबन का समर्थन करता है। साथ ही राज्य के मतदाता अपने बहुमत का प्रयोग करते हुए इस निलंबन को 4 वर्षो की अवधि में असीमित आवृतियों तक बढ़ा सकेंगे।
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(S.2) देश के मतदाता ( सभी मतदाता, न कि सिर्फ वे मतदाता जिन्होंने वोट किया है ) प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित की गयी प्रक्रिया का उपयोग करते हुए इस कानून को किसी जिले / राज्य में 4 वर्ष तक के लिए निलंबित कर सकते है। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित होना चाहिए कि देश के कुल मतदाताओं ( न कि सिर्फ उन मतदाताओं ने जिन्होंने अनुमोदन की प्रक्रिया में भाग लिया है ) का बहुमत स्पष्ट रूप से इस निलंबन का समर्थन करता है। साथ ही देश के मतदाता अपने बहुमत का प्रयोग करते हुए इस निलंबन को 4 वर्षो की अवधि के लिए असीमित आवृतियों तक बढ़ा सकेंगे।
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(S.3) टिपण्णी : यहाँ "S" सम्प्रभुता ( Sovereignty ) का द्योतक है। आशय यह है कि, किसी भी जिले में लागू प्रक्रिया को राज्य / देश के मतदाता बहुमत का प्रदर्शन करके निलंबित कर सकते है, तथा किसी जिले / राज्य में लागू प्रक्रिया को देश के मतदाताओं का बहुमत निलंबित कर सकता है।
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(RV) [ सीमांकित मतदान या रेंज वोटिंग के लिए टिप्पणी ]
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अबाध्यकारी निर्देश - इस विधेयक के लागू होने के बाद चुनाव आयोग मतदाताओ को यह अनुमति दे सकेगा कि वे किसी उम्मीदवार को 0 से 100 के बीच अंक दे सके या फिर सामान्य रूप से हाँ / नहीं का अनुमोदन कर सके। यदि मतदाता द्वारा सामान्य अनुमोदन किया जाता है तो इस अनुमोदन को 100 अंको के समकक्ष माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता उम्मीदवार को अंक देता है तो मतदाता द्वारा दिए गए अंक ही मान्य होंगे। उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किये गए सभी अंक ही उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या मानी जायेगी। पदासीन अधिकारी के कुल अंको की मान्य संख्या दी गयी दोनों परिस्थितियों में से उच्च अंक को निर्दिष्ट करने वाली संख्या को माना जाएगा -- (अ) पदासीन अधिकारी को प्राप्त कुल मत * 67, (ब) चुनाव के बाद पदासीन अधिकारी द्वारा प्राप्त अंक।
प्रतिस्थापक चुनाव तब आयोजित किया जाएगा जब किसी उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या ( पदासीन अधिकारी के कुल अंको की संख्या + अमुक निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या * 100 / 10 ) के बराबर हो। तथा पदासीन अधिकारी का प्रतिस्थापन तब होगा जब उम्मीदवार को पदासीन अधिकारी से अधिक वोट मिलते है , और नए उम्मीदवार को पदासीन अधिकारी को पिछले चुनावों में मिले वोटो से 10% अधिक वोट मिलते है, या फिर नए उम्मीदवार को निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% मतों से ज्यादा मिलते है। इस विधेयक की धारा ( CV.1 ) का उपयोग करते हुए यदि देश के कुल मतदाताओं के 51% नागरिक इस व्यवस्था को लागू करने के "हाँ" दर्ज कर देते है तो चुनाव आयोग इस प्रणाली को लागू कर सकता है या नही भी कर सकता है। यह कथित सीमांकित मतदान प्रणाली या रेंज वोटिंग सिस्टम ऐरो की कथित असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice):
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(CV.1 ) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]
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यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस विधेयक की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस विधेयक से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र (फोटो) एवं अन्य विवरण के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) [ तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश ]
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किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दी गयी धारा (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह मतदाता अपना पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में उपस्थित होगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा । मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा।
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---------- जिला जल वितरण अधिकारी को बदलने के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट का समापन ----------