> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-03-11

Pawan Jury BhilwaraRj

बिजली के मीटर-बिल-कलेक्शन ( MBC ) का ठेका निजी कम्पनियों को देने से उपभोक्ताओ को नुकसान उठाना पड़ेगा।
.
अभी मीटर-बिल-कलेक्शन का काम सरकार द्वारा किया जा रहा है, किन्तु देश में विभिन्न राज्यों की सरकारें घूस खाकर अब यह काम निजी कम्पनियों को देने की फिराक में है। हाल ही में भीलवाड़ा शहर में MBC का ठेका एक निजी कम्पनी के हवाले किया गया है।
.
----
[ अपने ट्वीटर एकाउंट से यह ट्विट करें - " @PmoIndia , @RajCmo , #CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara , मीटर-बिल-कलेक्शन के निजीकरण अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/ " ]
.
----
.
अभी भीलवाडा में प्रति उपभोक्ता मेंटेनेंस लागत 73 लाख रू मासिक है, एवं इसे आसानी से घटाकर 20 रूपये प्रति उपभोक्ता किया जा सकता है। लागत कम होने से नागरिको को कम बिल चुकाना होगा। लेकिन सरकार ने यह ठेका एक निजी कम्पनी को 1 करोड़ 15 लाख रू में दे दिया !! इस तरह प्रति उपभोक्ता जो मुनाफा नागरिको के बिल में कम होना था, वह राशि कम्पनी एवं नेताओ की जेब में चली गयी।
.
मीटर -- भीलवाड़ा में कुल 86,000 कनेक्शन है एवं अभी इनके MBC के प्रबंधन की लागत प्रति कनेक्शन लगभग 73 लाख रूपये आती है। अभी यहाँ इलेक्ट्रोनिक मीटर लगे हुए है। अत: इनकी रीडिंग लेने के लिए स्टाफ को मीटर्स तक आना होता है। यदि इन्हें वाई-फाई एवं सिम कार्ड युक्त मीटर्स से बदल दिया जाए तो इनकी रीडिंग मैनुअली लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी। एक मीटर अपने पास के दुसरे मीटर को डेटा ट्रांसमिट कर सकेगा एवं दूसरा तीसरे को। इस तरह किसी सोसाइटी में लगे 500 मीटर अपना डेटा अपने नजदीकी मीटर को ट्रांसफर करेंगे एवं किसी एक मीटर की रीडिंग लेने से सभी 500 मीटर का डेटा मिल जाएगा।
.
मीटर रीडिंग -- रीडिंग लेने वाला कर्मचारी वाई-फाई डेटा रिसीव करने वाला उपकरण लेकर सोसाइटी में से एक राउंड लगाएगा एवं सभी मीटर्स की रीडिंग उपकरण अपने आप नोट कर लेगा। इस तरह 1 कर्मचारी एक दिन में 5 से 10 हजार मीटर्स की रीडिंग नोट कर सकता है। इसके अलावा सिम कार्ड युक्त मीटर अपना डेटा सीधे किसी केन्द्रीय इकाई को ट्रांसमिट कर सकते है। इस तरह नयी तकनीक का उपयोग करके मीटर रीडिंग की लागत काफी हद तक कम की जा सकती है।
.
बिल कलेक्शन -- इसी तरह , यदि बिल जमा करने के लिए मोबाइल वॉलेट ( एम-पैसा, भीम एप , पे टीएम आदि ) का इस्तेमाल किया जाए एवं ऑनलाइन जमा कराने पर शुरूआती दौर में डिस्काउंट दिया जाए तो ज्यादा नागरिक इनका उपयोग करने लगेंगे एवं बिल जमा कराने की लागत भी बेहद घट जायेगी। अत: इस तकनीक का उपयोग करके भी लागत में कमी की जा सकती है। ये मीटर लगने से बिजली की चोरी एवं छीजत में भी कमी आएगी
.
इन बदलावों के आने से प्रति मीटर रीडिंग एवं कलेक्शन की लागत लगभग 75% तक घटकर 20 लाख रूपये प्रति उपभोक्ता आ जायेगी। सरकार चाहती तो यह बदलाव ला सकती थी। इन तकनिकी बदलावों के आने से उपभोक्ता को कम बिल चुकाना होता। लेकिन उन्होंने यह लाभ जनता को देने की जगह निजी कम्पनी को दिया, एवं मुनाफा आपस में बाँट लिया।
.
तो जब तकनीक के आने से सरकार एंव उपभोक्ता को लाभ होता नजर आता है तो वे इन बदलावों को स्वयं लागू नहीं करते। वे इसके लिए किसी निजी कम्पनी को ढूंढते है एवं घूस खाकर बढ़ी हुयी लागत में उन्हें यह काम सौंप देते है।
.
यह भी उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा शहर का विद्युत् निगम मुनाफे में चल रहा है एवं सालाना 200 करोड़ का मुनाफा बना रहा है।
.
इसीलिए मैं कहता हूँ कि निजीकरण एवं एफडीआई अपने आप में ही सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है, एवं यह भ्रष्टाचार पूरी तरह से कानूनी है। बल्कि सरकार इस भ्रष्टाचार को विकास से जोड़ कर वोट भी जुटाती है। और सभी पार्टियां निजीकरण एवं एफडीआई के इस भ्रष्टाचार में शामिल है। कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी हमेशा से एफडीआई के समर्थन में रही है। अत: भीलवाडा के कोंग्रेस एवं आम आदमी के स्थानीय नेता भी वसुंधरा जी के इस कदम का पूरा समर्थन कर रहे है।
.
तो जब किसी तकनीक को अपनाने से उपभोक्ता एवं सरकार को मुनाफा होता है तो सरकार ऐसे बदलावों को लागू करने से परहेज क्यों करती है ?
.
क्योंकि उर्जा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास नहीं है। राईट टू रिकॉल कानूनों का अभाव होने से उनकी रुचि सिर्फ उन्ही कामो में होती है जिससे उन्हें कमाई होती हो। यदि मुख्यमंत्री पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं होती तो यह बदलाव वर्षो पहले आ गए होते। लेकिन वे इन बदलावों को लंबित करते रहे और अंत में घूस खाकर यह बदलाव लाने का काम निजी कम्पनी को दे दिया।
.
समाधान - बिजली विभाग का भ्रष्टाचार दूर करने के लिए हमारा प्रस्ताव है कि राईट टू रिकॉल उर्जा मंत्री एवं बिजली विभाग के कर्मचारियों पर ज्यूरी प्रक्रियाएं लागू की जाएँ। इन कानूनों के आने से बिजली विभाग का भ्रष्टाचार घटकर शून्य तक आ जाएगा एवं उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। नागरिको की सम्पत्ति से खड़े किये गए इन लाभकारी संगठनों को निजी कम्पनियों के हवाले करने की जगह सिर्फ ये 2 क़ानून लाकर बिजली विभाग को दुरुस्त एवं कार्यकुशल बनाया जा सकता है। किन्तु इन कानूनों के आने से विभाग बेहतर ढंग से काम करने लगेगा, जिससे सरकार के हाथ से निजीकरण करने के नाम पर घूस खाने का मौका हाथ से निकल जाएगा। इसीलिए कोंग्रेस-बीजेपी-आम आदमी पार्टी के सभी नेता हमेशा से उर्जा मंत्री एवं मुख्यमंत्री पर राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओ का हमेशा से विरोधी रहे है।
.
अपने ट्वीटर एकाउंट से यह ट्विट करें -

" @PmoIndia , @RajCmo , #CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara , मीटर-बिल-कलेक्शन के निजीकरण अनुबंध को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/ "
.
एमबीसी के निजीकरण के खिलाफ वोट करने के लिए यह लिंक क्लिक करें -- newindia.in/causes/CancelPrivatisationOfAvvnlBhilwara/
.
===============