Pawan Jury BhilwaraRj
दुरात्मा अन्ना अपने अनुयायियों से कह रहे है कि वे इस आशय का शपथपत्र दें कि , वे कभी भी चुनाव नहीं लड़ेंगे -- ऐसे शपथपत्र की विधिक रूप से कोई अहमियत नहीं है , और न ही नैतिक रूप से इसके कोई मायने है। पता नहीं इन लोगो को ऐसी बकवास सूझती कहाँ से है।
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मान लीजिये कि X एक शपथपत्र दाखिल करता है कि वह कभी भी चुनाव नहीं लड़ेगा , लेकिन मान लीजिये कि अगले दिन ही वह चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल कर देता है। और तब Y अदालत में जाकर X का शपथपत्र प्रस्तुत करता है कि X ने वादा किया है कि वह कभी भी चुनाव नहीं लड़ेगा, लेकिन अब X चुनाव लड़ रहा है , अत: X पर दंड लगाकर उसका चुनावी आवेदन निरस्त किया जाना चाहिए। लेकिन जज इस अर्जी को घंटे भर में ही खारिज कर देगा !!!
क्योंकि अदालत में ऐसे शपथपत्र का कोई महत्त्व नहीं है। यह पूरी तरह से रद्दी है। क्योंकि यह शपथपत्र किसी अनुबंध या कॉन्ट्रेक्ट की श्रेणी में नहीं आता। किसी भी कॉन्ट्रेक्ट को वैध होने के लिए यह जरुरी है कि पक्षकारो के बीच किसी धनराशि या अन्य मूलय परक प्रतिभूति का आदान प्रदान किया जाए।
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पर मान लीजिये कि इस शपथपत्र के एवज में Y ने X को एक रूपये का भुगतान किया था। लेकिन तब भी चुनाव लड़ना या न लड़ना ऐसा व्यवहार नहीं है जिसे विधिक रूप से अनुबंध में शामिल किया जा सके। उदाहरण के लिए यदि X 1 लाख रूपये का भुगतान Y को इस शर्त पर करता है कि Y एक महीने बाद उसे 10 मिलीलीटर खून देगा, और यदि एक महीने बाद Y खून देने से मना कर देता है तो X अदलात में Y के खिलाफ दावा नहीं कर सकता। क्योंकि खून का आदान प्रदान या व्यवहार करना कानूनी नहीं है। खून का आदान प्रदान अपनी इच्छा पर आधारित है। और ऐसी चीजो को अनुबंध बनाकर बाध्यकारी नहीं किया जा सकता।
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तो दुरात्मा अन्ना यह हरकत सिर्फ कार्यकर्ताओं को मूर्ख बनाने के लिए कर रहे है। साथ ही वे यह गलत सन्देश भी देना चाहते है कि चुनाव लड़ना एक घटिया गतिविधि है , एवं देश के लिए समर्पित व्यक्तियों को इससे दूर रहना चाहिए।
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