Pawan Jury BhilwaraRj
(1) मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवको को अब साफ़ तौर पर "विदेशी एजेंट" कह कर पुकारा जा सकता है।
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(2) राजनैतिक पार्टियों को विदेशियों से प्राप्त होने वाले चंदे को इतना गुप्त बनाया गया है कि, बैंक अधिकारियो तक को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं हो सकेगी, कि कौनसी पार्टी किस विदेशी से कितना पैसा खींच रही है !! कैसे ?
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(1) मोदी साहेब और संघ के स्वयंसेवको को अब साफ़ तौर पर "विदेशी एजेंट" कहा जा सकता है।
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खुद मोदी साहेब ने ऐसा कानून लागू किया है जिससे राजनैतिक पार्टी विदेशीयो से चंदा ले सकेगी एवं चंदा देने वाले का नाम भी गुमनाम रहेगा। मतलब , सिर्फ आयकर विभाग एवं बैंक के आला अधिकारी ही इस बारे में जान सकेंगे , लेकिन चुनाव आयोग एवं मतदाताओ को इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं हो सकेगी !! आर टी आई के तहत भी नहीं !!!
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कोंग्रेस / आम आदमी पार्टी ने भी इस क़ानून का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने इस क़ानून को लागू नहीं किया, लागू मोदी साहेब ने ही किया है। और संघ के सभी स्वयंसेवक भी इस क़ानून का समर्थन कर रहे है।
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साफ़ नजर आ रहा है कि मोदी साहेब एवं संघ के स्वयंसेवको ने इस क़ानून को सिर्फ इसीलिए लागू किया है, ताकि वे विदेशियों से गुमनाम पैसा ले सके !! और अब वे विदेशियों से पैसा ले भी रहे है। सबूत ? माफ़ कीजिये, लेकिन उन्होंने क़ानून ही इस तरह से बनाया है कि इसका कभी कोई सबूत नहीं जुटाया जा सकता !!
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बहरहाल, अब मोदी साहेब , श्री मोहन भागवत , बीजेपी=संघ के अन्य नेता एवं संघ के स्वयंसेवको को यदि विदेशी एवं खास तौर पर अमेरिकी एजेंट कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि इन लोगो को पैसा टोगा और बरुंडी से नहीं आने वाला है, बल्कि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक ही सबसे बड़े "दानदाता" होंगे। और सिर्फ एक जीनियस ही यह बात स्थापित कर सकता है कि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत की प्रजा के हित में क़ानून बनाने के लिए चंदा भेजेंगे , खुद के फायदे के क़ानून बनाने के लिए नहीं !!
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(2) राजनैतिक पार्टियों को विदेशियों से प्राप्त होने वाले चंदे को इतना गुप्त बनाया गया है कि, बैंक अधिकारियो तक को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं हो सकेगी कि कौनसी पार्टी किस विदेशी से कितना पैसा ले रही है !! कैसे ?
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मान लीजिये कि एक अमरीकी-ब्रिटिश धनिक SBI से पोलिटिकल डोनेशन बांड ( = घूस बांड ) लेने जाता है, एवं SBI उसे ये बांड जारी कर देता है।
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अब संघ=बीजेपी , जो कि इस प्रकार के दान=घूस की सबसे बड़ी राशि प्राप्त करने की दावेदार है , ये बांड अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक से प्राप्त कर लेती है।
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फिर संघ=बीजेपी अपना एक खाता ऐसे विदेशी निजी बैंक में खोलेगी , जिसकी शाखा भारत में है। संघ ये बांड अमुक निजी विदेशी बैंक में जमा करवा देगा।
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अब SBI इन बांड्स के बदले में अमुक विदेशी बैंक को पैसा चुका देगी, लेकिन SBI के अधिकारी यह कभी नहीं जान पायेंगे कि इन बांड्स के बदले में पैसा किस राजनैतिक दल को गया है !!!
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तो सिर्फ एक बैंक यह जान पायेगा कि संघ अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों से पैसा ले रहा है। लेकिन यह बैंक भी विदेशी है , एवं बहुधा उन्ही अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के नियन्त्रण में है जो संघ को पैसा दे रहे है !! जाहिर है, वे यह सूचना गुप्त रखेंगे !!!
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मोदी साहेब एवं संघ के स्वयंसेवको का यह मास्टर स्ट्रोक है। वे विभिन्न एनजीओ को विदेशो से मिलने वाले चंदे पर लगातार चिल्ला पों मचाते रह रहे है ताकि विदेशी संस्थाओ से आने वाले चंदे का विरोध कर रहे मतदाताओं के वोट खींचे जा सके , और इधर पीछे से उन्होंने खुद के लिए विदेशी चंदे लेने का रास्ता खोल लिया !!
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तो यूँ ही नहीं वे राष्ट्रवादी कहलाते है -- भारत माता की जय , वन्दे मातरम !!!
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