Pawan Jury BhilwaraRj
फेसबुक डेटा लीक एवं केम्ब्रिज एनालिटिक्स ; बेतुका मुद्दा
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यूजर अपनी इच्छा से अपना डेटा फेसबुक पर रखता है। और इनमे से ज्यादातर राजनैतिक पोस्ट "पब्लिक" होते है, न कि "फ्रेंड्स ओनली"
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तो कोई भी डेटा माइनिंग कम्पनी इसे इकठ्ठा कर सकती है।
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अत: इस तरह इकट्ठे किये गए डेटा का प्रभाव शून्य है। वे सीआईए की तरह ईवीएम हैक नहीं कर रहे है।
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तो इसे राजनैतिक मुद्दा बनाना निरर्थक है।
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मूल मुद्दा यह है कि -- फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके लोगो का राजनैतिक मानस बदल सकती है।
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इसीलिए हमें फेसबुक , ट्विटर , व्हाट्स एप आदि को बेन करना चाहिए एवं पूरी तरह से भारतीय सोशल मीडिया कम्पनियो को बढ़ावा देना चाहिए।
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फेसबुक से डेटा चोरी करके चुनावी नतीजे प्रभावित नहीं किये जा सकते। फेसबुक ज्यादातर यूज व्यावसायिक कम्पनियो को डेटा बेचकर पैसा कमाने में करता है। इसके अलावा इसका प्रयोग जासूसी नजर रखने के लिए भी किया जाता है। लेकिन डेटा का यह इस्तेमाल सिर्फ फेसबुक ही नहीं बल्कि गूगल भी करता है। और गूगल के पास यूजर का डेटा जुटाने की क्षमता फेसबुक से कई गुना अधिक है।
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सोशल मीडीया मुनाफा नहीं बल्कि घाटा बनाने वाला कारोबार है। अत: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म डेटा नहीं बेचेगा तो वह घाटा बनाने लगेगा। लेकिन यदि फेसबुक डेटा बेचता है तो भी वह घाटे में ही रहता है। विज्ञापन आदि से होने वाली आय से फेसबुक का घाटा पूरा नहीं होता। फेसबुक , गूगल आदि कम्पनियाँ घाटा बनाती है, लेकिन इनका राजनैतिक प्रभाव होने के कारण ये टिकी हुयी है। आप फेसबुक पर असीमित पोस्ट, वीडियो फोटो आदि अपलोड कर सकते है, इतना डेटा सुरक्षित रखने के लिए काफी खर्च होता है। तो कोई यूजर अपना एकाउंट बनाने एवं डेटा सुरक्षित रखने के लिए फेसबुक को कितना पैसा चुकाता है ? शून्य !! फिर भी फेसबुक टिकी हुयी है !!! क्योंकि इसे सीआईए का समर्थन हासिल है।
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सबसे बड़ी समस्या है --- फेसबुक नागिरको को एकतरफा खबरें देकर अपने यूजर्स को राजनैतिक रूप से प्रभावित करता है। इसके लिए फेसबुक बूस्टिंग एवं फिलटरिंग का इस्तेमाल करता है।
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फिलहाल स्थिति यह है कि फेसबुक डेटा बेचे या न बेचे, आपको फेसबुक ही यूज करना पड़ेगा। क्योंकि भारत में फेसबुक की एकाधिकार है।
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हमें फेसबुक पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। किन्तु अभी ऐसा करने की हमारी हैसियत नहीं है। जूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल क़ानून आये बिना फेसबुक पर रोक लगाना मुमकिन नहीं है। जूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल आने से ही भारतीय सोशल मीडिया कम्पनियां खड़ी हो सकेगी।
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