Pawan Jury BhilwaraRj
कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने हाल ही में पुलवामा हमले के बारे में क्या कहा?
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(A)
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फरवरी 2019 में पुलवामा हमले के दौरान मलिक वहां के गवर्नर थे। अब 2023 में Paid The Wire को दिए इंटरव्यू में उन्होंने मोदी साहेब एवं तात्कालीन गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने कहा है कि –
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(1) CRPF ने सिक्योरिटी रिस्क के कारण जवानो को ले जाने के लिए गृह मंत्रालय से हवाई जहाज की मांग की थी। किन्तु उन्हें जहाज देने से मना कर दिया गया था। हाई सिक्योरिटी रिस्क वाले ऐसे इलाके से इतना बड़ा काफिला सड़को द्वारा कभी नहीं भेजा जाता है।
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(2) जिस रास्ते से काफिला जाना था उसके साथ 8-10 लिंक रोड़ थे, किन्तु इनके मर्जिंग पॉइंट्स को खुला छोड़ दिया गया था। न तो मर्जिंग पॉइंट्स पर जवानों की तैनाती की गयी न ही मुख्य सड़क को सेनेटाईज किया गया था।
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(3) फरवरी में ही इंटेलिजेंस द्वारा हमला होने की आंशका का इनपुट होने के बावजूद सुरक्षा एजेंसी ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए थे। नतीजन 300 किलो RDX से लदी हुयी वेन 10 दिनों से सड़को पर खुली घूम रही थी।
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(4) हमले के बाद जब उन्होंने मोदी साहेब से कहा कि यह हमला हमारी लापरवाही की वजह से हुआ है, तो मोदी साहेब और अजीत दोवल ने उन्हें इस मामले पर चुप रहने को कहा। मोदी साहेब ने कहा कि इस मामले को वे उन पर (मोदी साहेब पर) छोड़ दें।
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(5) मोदी साहेब का मानना था कि हम इस मामले को पाकिस्तान पर डाल देंगे और इससे हमें चुनावी फायदा होगा। और उन्होंने ऐसा ही किया। (मई 2019 में लोकसभा चुनाव थे)
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इस साक्षात्कार की पूरी ट्रांसक्रिप्ट आप यहाँ पढ़ सकते है —
<https://thewire.in/politics/satya-pal-malik-full-interview-pulwama-modi>
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(B)
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वैसे हमने पुलवामा हमले के 2 दिन बाद ही इस बात को मुख्य रूप से रेखांकित कर दिया था, कि हमारे जवानो को यदि आर्म्ड ट्रक मुहैया कराए जाते तो हद से हद 4-5 जवान ही शहीद होते।
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तब पेड मीडिया इस बिंदु पर खामोश बना रहा था। पेड मीडिया यह बात अब 4 साल बाद बता रहा है। पेड मीडिया तब भी यह बात जानता था, किन्तु पेड मीडिया को इस बिंदु पर चुप रहने के लिए पैसा मिल रहा था, और अब उन्हें यह बात बताने के लिए पैसा मिल रहा है तो बता रहे है !!
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इस पूरे मामले में पहली महत्त्वपूर्ण बात यह है कि पेड मीडिया इसी तरह से काम करता है। पेड मीडिया ज्यादातर मामलो में सच ही दिखाता है, किन्तु पेमेंट यह तय करता है कि अमुक सच कब दिखाया जाएगा। इस समय यह सच परोसने की दो वजहें हो सकती है -
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(1) पेड मीडिया के प्रायोजको ने मोदी साहेब को तीसरा कार्यकाल नहीं देना तय किया है। इसी स्थिति में यह मामले से जुड़े और भी तथ्य पेड मीडिया खोद खोद कर पब्लिक डोमेन में डाल सकता है। या इसी तरह की और भी ख़बरें सामने आ सकती है, जिससे मोदी साहेब की छवि को नुकसान होगा।
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(2) हो सकता है कि पेड मीडिया के प्रायोजको का कोई काम मोदी साहेब ने लंबित करके रखा है, और वे उसे पूरा करने में शीघ्रता नहीं दिखा रहे है। तो यह खबर उनके लिए एक वार्निंग है। अब पेड मीडिया उनसे क्या चाहती है, वह मुझे नहीं पता। सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है। शायद उन्हें कश्मीर में जो लिथियम मिला है, उसके एक्सक्लूसिव राइट्स चाहिए। वो भी चिल्लर दाम में। या फिर वे SBI का निजीकरण चाहते है, या और किसी ऐसी ही खदान की मुफ्त लीज या किसी लाभकारी PSU का विनिवेश।
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(C)
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अब आगे क्या ?
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आगे कुछ नहीं होगा !! क्योंकि भारत में जज सिस्टम है। जज सिस्टम में सरकार पर लगाए गए आरोपो की जांच भी खुद सरकार ही करती है। मतलब, अभी जब तक मोदी साहेब Pm है वे खुद यह जांच करवाएंगे कि उनकी सरकार यानि खुद उन्होंने इस मामले में कोई गलती / षडयंत्र किया था या नहीं !!
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और जब कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी या अन्य पार्टी सत्ता में आएगी तो वे बीजेपी के खिलाफ जांच करेंगे और सबूत जुटाने के बाद बीजेपी के साथ जांच और सबूतों को रफा दफा करने के एवज में उनसे डील कर लेंगे। जब तक कोंग्रेस / आम आदमी पार्टी सत्ता में नहीं आयेगी तब तक वे इसे राजनैतिक मुद्दा बनाते रहेंगे कि पुलवामा हमले में सरकार की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए !!
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समाधान – यदि आपको मामले की सच्चाई जानना है तो वोट वापसी एवं जूरी कोर्ट के अलावा इसका कोई इलाज नही है। CBI डायरेक्टर की चोटी अभी पीएम के हाथ में है, अत: CBI या अन्य कोई एजेंसी ऐसी कोई जांच नहीं कर सकती जो पीएम एवं उनके चहेतों को कटघरे में खड़ा करे। यदि वो ऐसा करेगा तो पीएम उसे निकाल कर किसी दुसरे को यह नौकरी दे देगा।
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लेकिन यदि CBI डायरेक्टर को वोट वापसी पासबुक के अधीन कर दिया जाता है तो वह सरकार के आला अधिकारीयों एवं मंत्रियो के खिलाफ जांच खोल सकता है, और पीएम उसे निकाल नहीं पायेगा। यदि फिर भी पीएम उसे निकाल देता है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके उसे फिर से ले आयेंगे। CBI डायरेक्टर को वोट वापसी पासबुक एक अधीन करने के साथ ही इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार नागरिको की जूरी को दिया जाए।
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यदि मामला नागरिको की जूरी सुनेगी तो सारा सच सामने आ जाएगा। यदि मोदी साहेब इसमें दोषी है तो ज्यादातर सम्भावना है कि मामला जूरी के सुपुर्द किये जाने के साथ ही मोदी साहेब टीवी पर आकर भर्राए गले से हाथ जोड़ कर देश से माफ़ी मांग लेंगे कि उनसे गलती हुई है !! क्योंकि वे जूरी के सामने पेश होने का जोखिम उठाना कतई पसंद नहीं करेंगे। और यदि मोदी साहेब या उनकी सरकार इसमें दोषी नहीं है तो उनको जूरी के सामने पेश होने से कोई दिक्कत नहीं है।
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और पाठक कृपया इस बात को विशेष रूप से नोट करें कि कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी पुलवामा हमले में सरकार की भूमिका की जांच जूरी से कराने के सख्त खिलाफ है। वे भी यही चाहते है कि सरकार के खिलाफ जांच सरकार ही करें !! चोर चोर मौसेरे भाई !!
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जज सिस्टम का अनिवार्य नतीजा यह है कि ताकतवर व्यक्ति को सजा नहीं दी जा सकती, जबकि जूरी सिस्टम में दंड देने की शक्ति किसी एक व्यक्ति के पास न होकर व्यक्तियों के समूह के पास होने से एवं दंड देने की इस शक्ति का निरंतर हस्तांतरण होने के कारण ताकतवर आदमी या ताकतवर संगठित गठजोड़ भी क़ानून की गिरफ्त में आ सकता है।
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