> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-09-21

Pawan Jury BhilwaraRj

[ बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने के लिए कानूनी ड्राफ्ट ]
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EIAR - बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार आदि से आने वाले घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट।
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EIAR Act – Expelling Infiltrators and allowing Refugees from Bangladesh, Pakistan, Sri Lanka, Myanmar etc.
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भारत के नागरिको ,
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भारत में लगभग 2 से 3 करोड़ बांग्लादेशी घुसपेठिये अवैध रूप से रह रहे है। ये पूरे देश में फैले हुए है, और इनके पास आधार कार्ड से लेकर राशन कार्ड, लाइसेंस, बिजली-पानी के बिल आदि सभी दस्तावेज है। मतदाता सूचियों में भी इनके नाम दर्ज है। ये घुसपेठिये पिछले कई वर्ष से निरंतर भारत में आकर मुख्यतया पूर्वोत्तर वे बसते जा रहे है। इससे एक तरफ भारत की धार्मिक जनसँख्या का संतुलन बिगड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ ये लोग भारत पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा रहे है। और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि इन्हें चीन, पाकिस्तान, एवं सउदी अरब का समर्थन हासिल है। अत: ये घुसपेठिये भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यदि इन्हें हमारे पडोसी देश हथियारों की मदद पहुँचाने लगेंगे तो भारत को एक भीषण गृह युद्ध का सामना करना पड़ सकता है। निचे वह कानूनी ड्राफ्ट दिया गया है जो पूरे देश में फैले इन घुसपेठियो को चिन्हित करने और इन्हें देश से बाहर निकालने की व्यवस्था करता है।
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इस ड्राफ्ट की पीडीऍफ़ फाइल, sha1 हैश एवं मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक कमेंट बॉक्स में देखें। यदि आप इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो कृपया अपने पीएम को ट्विट करके कहें कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले ट्वीट का प्रारूप :
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@pmoindia I insturct you to print - <https://newindia.in/causes/eiar-2/>; sha1- 760246ad1068aa846f5295f717d6eb8a5f15d7a8 #ExpelBanglaInfiltrators
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( कृपया ऊपर दिए गए ट्वीट को कॉपी करे तथा अपने ट्विटर एकाउंट से @pmoindia पर ट्वीट करे। )
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===== घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का प्रारंभ ====
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यह क़ानून निम्नलिखित प्रशासनिक प्रक्रियाओ के निष्पादन की व्यवस्था करेगा :

(a) सरकारी अधिकारी बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार तथा अन्य देशो से आने वाले घुसपैठियों और शरणार्थियों को चिन्हित कर सकेंगे।
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(b) सरकारी अधिकारी और जूरी सदस्य यह तय कर सकेंगे कि कोई व्यक्ति एक घुसपैठिया है या एक शरणार्थी या एक प्रमाणित भारतीय नागरिक है।
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(c) यह क़ानून घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को बसने के लिए आवश्यक प्रक्रिया देता है।
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[ टिप्पणी : यह कानूनी ड्राफ्ट प्रधानमंत्री द्वारा राजपत्र अधिसूचना के रूप में छापा जा सकता है | किन्तु इस अधिसूचना को प्रकाशित करना मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसे देश में लागू करने के लिए लोकसभा या राज्यसभा के अनुमोदन की या संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं है |
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इस ड्राफ्ट के दो भाग है --
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भाग - 1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग - 2 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए अन्य निर्देश और टिप्पणियाँ
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महत्वपूर्ण खंड है -- (1.2), (1.3) , (5.4) , (6.6) , (6.8) , (6.8.1) to (6.8.5) , (8.1) , (8.2)
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दी गयी टिप्पणियाँ किसी भी अधिकारी या मंत्री या जज पर बाध्यकारी नहीं है | जूरी सदस्य, नागरिक या अन्य पक्षकार इनका उपयोग मार्गदर्शक संकेतों के रूप में कर सकते हैं | किन्तु ये टिप्पणियाँ किसी पर भी बाध्यकारी नहीं है | ]
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भाग-1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) टिपण्णी : कानून का सार -
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(1.1) टिपण्णी : ये कानून ऐसी प्रक्रिया देता है जिससे केंद्र सरकार के अधिकारी बांग्लादेशी घुसपैठियों व शरणार्थियों को चिन्हित कर सकेंगे और साक्ष्य एकत्रित कर सकेंगे, ताकि यह साबित / ख़ारिज किया जा सके कि कोई व्यक्ति बांग्लादेशी है या प्रमाणिक भारतीय नागरिक है या वह एक घुसपैठिया है या वह कोई शरणार्थी है |
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(1.2) टिपण्णी : सम्बंधित अधिकारी आरोपी द्वारा बांग्लादेश में उसके रक्त सम्बन्धियों को किये गए फ़ोन कॉल्स की जानकारी, ब्लड ग्रुप की जानकारी और डीएनए नमूनों की जानकारी जुटाएंगे | अधिकारी संबधित देश से ऐसे सभी वांछित दस्तावेज भी जुटाएंगे , जिनसे यह साबित किया जा सके कि आरोपी बांग्लादेशी है या नहीं |
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(1.3) टिपण्णी : अधिकारी सभी उपलब्ध तथ्य एवं साक्ष्य जूरी सदस्यों के सामने रखेंगे | जूरी सदस्य इन तथ्यों, गवाहों, दस्तावेजो आदि का अवलोकन करके और यदि जरूरत हो तो पब्लिक में नार्को टेस्ट का प्रयोग करके यह सुनिश्चित करेंगे कि क्या अमुक आरोपी बांग्लादेशी है या प्रमाणिक भारतीय नागरिक या वह एक घुसपैठिया है या फिर वह एक शरणार्थी है | यदि वह एक घुसपैठिया है, तो जूरी सदस्य इसके लिए सजा निर्धारित करेंगे |
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(2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एवं राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार
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(2.1) प्रधानमंत्री घुसपैठियों और शरणार्थीयों मामलो के पर्यवेक्षण एवं अनुसन्धान के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेंगे, जिसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ( NR ) कहा जाएगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार संबंधित कार्य करने के लिए राज्य रजिस्ट्रारों , जिला रजिस्ट्रारों तथा अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करेगा |
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(2.2) यदि आप (यहाँ "आप" शब्द से आशय भारत के प्रत्येक पंजीकृत मतदाता से है ) पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के कार्य कलापों से असंतुष्ट हैं तो आप अपनी इच्छानुसार अधिकतम 5 वैकल्पिक उम्मीदवारों को इस पद के लिए अनुमोदित कर सकेंगे | यदि किसी उम्मीदवार को भारत के 45 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त हो जाता है, तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त उम्मीदवार को राष्ट्रीय रजिस्ट्रार नियुक्त कर सकते हैं | अर्थात आप यानी भारत के मतदाताओं के पास "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार" की प्रक्रिया होगी | इस प्रक्रिया की जानकारी "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार" (RTR) खंड की धाराओं में दी गयी है |
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भाग-2 : अधिकारियों और नागरिकों के लिए अन्य निर्देश और टिप्पणियाँ
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(3) प्रधानमंत्री घुसपैठियों और शरणार्थीयों मामलो के पर्यवेक्षण एवं अनुसन्धान के लिए एक राष्ट्रीय रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेंगे, जिसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ( NR ) कहा जाएगा | भारत के मतदाता पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार को “राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार” प्रक्रियाओ का प्रयोग करके बदल सकेंगे |
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(4) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार राज्य रजिस्ट्रारों एवं जिला रजिस्ट्रारों की नियुक्ति करेगा और राज्य रजिस्ट्रारों और जिला रजिस्ट्रारों के लिए राईट टू रिकॉल प्रक्रिया को भी लागू करेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार / राज्य रजिस्ट्रार / जिला रजिस्ट्रार अस्थायी तौर पर अधिकतम 2 वर्षों के लिए केंद्र / राज्य सरकार से वांछित अधिकारियों को डेपुटेशन पर नियुक्त कर सकते है या प्रति नियुक्ति पर केंद्र या राज्य सरकार से अधिकारी ले सकते है |
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(5) प्रथम चरण - फ़ोन कॉल्स और अन्य जानकारी जुटा कर बांग्लादेशियों की सूची तैयार करना
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(5.1) प्रधानमंत्री दूरसंचार विभाग को आदेश करेंगे कि वह राष्ट्रीय रजिस्ट्रार को पिछले 2 वर्षों में बांग्लादेश से किये गए और बांग्लादेश को किये गए सभी फ़ोन कॉल्स की सूची दे | इस विवरण का उपयोग करके राष्ट्रीय रजिस्ट्रार बांग्लादेशी संदिग्धों की सूची बनाएगा |
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(5.2) कोई भी भारतीय नागरिक निजी या सार्वजनिक रूप से बांग्लादेशी संदिग्धों की सूची दे सकता है, और उसे ये सूची संदेह के आधार पर घटते क्रम में बनानी होगी | यदि सूची में 20% से भी कम त्रुटियाँ हुई, तब राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उस व्यक्ति की इच्छानुसार उसे निजी या सार्वजनिक रूप से पारितोषिक दे सकता है |
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(5.3) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपने विवेक और प्राप्त की गयी श्रेष्ठतम के आधार पर भारत के प्रत्येक जिले में बांग्लादेशियों की अनुमानित संख्या बताएगा |
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(5.4) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार बांग्लादेश में एजेंटों की नियुक्ति करेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपने एजेंटों से भारत में रह रहे संदिग्धों के बांग्लादेश में निवास कर रहे रक्त संबंधियों के ब्लड ग्रुप और डीएनए नमूनों की जानकारी जुटाने के लिए कहेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एजेंटों से ऐसे दस्तावेज जुटाने के लिए भी कहेगा जो संदिग्धों के बांग्लादेशी मूल का होना प्रमाणित करें |
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(5.5) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार संदिग्धों के नाम, चित्र और अन्य जानकारी सरकारी वेबसाइट पर रख सकता है, और उनके बांग्लादेशी संबंधियों के नाम और अन्य जानकारी देने के लिए सभी से निवेदन भी कर सकता है।
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(5.6) दुसरे चरण में राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उन संदिग्धों की सूची तैयार करेगा जिनके बांग्लादेशी होने पर वह आश्वस्त है |
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(6) जूरी द्वारा सुनवाई ; यह सुनिश्चित करने के लिए कि संदिग्ध व्यक्ति घुसपैठिया है या शरणार्थी
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(6.1) प्रत्येक संदिग्ध की सुनवाई के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रार 30 से 55 वर्ष की आयु के मध्य के 100 मतदाताओं को 5 विभिन्न जिलो से चुनेगा | प्रथम जिला वह होगा जो उस जिले से सबसे निकट है, जहाँ से संदिग्ध पकड़ा गया है और जहाँ बांग्लादेशी जनसँख्या 10% से कम भी है। किसी जिले में बांग्लादेशी घुसपेठियो की संख्या का प्रतिशत राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अपनी जानकारी के आधार पर तय करेगा | अन्य 4 जिलें प्रथम जिले के निकटतम 4 जिलों में से होंगे और प्रत्येक जिले की बांग्लादेशी जनसँख्या 10% से कम होनी चाहिए |
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(6.2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार हर जिले से क्रमरहित ( रेंडमली ) तरीके से 20 मतदाताओं को चुनेगा |
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(6.3) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार जिलों की संख्या 10 तक बढ़ा सकता है, और ऊपर दी गयी प्रक्रिया का प्रयोग करके प्रत्येक जिले से 20 मतदाताओं को क्रमरहित तरीके से चुन सकता है | जिलों की संख्या के संबंध में अंतिम निर्णय राष्ट्रीय रजिस्ट्रार का होगा |
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(6.4) आरोपी जूरी सदस्य को बताएगा कि, क्या वह भारत में पैदा हुआ था या फिर अन्य किस देश में पैदा हुआ था | यदि वह भारत में पैदा हुआ था तो किस शहर या गाँव में पैदा हुआ था तथा उसकी स्कूली शिक्षा कहाँ हुयी थी। वह अपने माता-पिता, भाई-बहन, सगे संबंधियों इत्यादि के बारे में भी विवरण देगा | यदि वह भारत के बाहर पैदा हुआ था, तो फिर वह भारत में रहने क्यों और कब आया था |
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(6.5) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अधिकारी भी जूरी सदस्यों को यह जानकारी देंगे कि क्या अमुक व्यक्ति भारत में या भारत के बाहर पैदा हुआ था, और क्या वह एक घुसपैठिया है या फिर वह एक शरणार्थी है |
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(6.6) यदि 50 से अधिक जूरी सदस्य आरोपी का सार्वजनिक रूप से पॉलीग्राफ टेस्ट, ब्रैनमैपिंग और / या सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने की सलाह देते हैं, तब ये टेस्ट लिए जायेंगे | प्रत्येक जूरी सदस्य अपना प्रश्न सुझाएगा और प्रत्येक जूरी सदस्य प्रत्येक प्रश्न को 0-100 के बीच अंक देगा। सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रश्नों को पहले पुछा जायेगा | राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सार्वजनिक नार्को-टेस्ट और ब्रेन-मैपिंग के लिए डॉक्टर का चयन करेगा | किन्तु यदि 67 से अधिक जूरी सदस्य किसी अन्य डॉक्टर को स्वीकृत करते है, तो उसी डॉक्टर को चुना जाएगा, जिसे जूरी सदस्यों ने स्वीकृत किया है | चुने हुए डॉक्टर के पास राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बताई गयी डिग्रीयां होनी चाहिए |
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(6.7) सभी पक्षों को सुनने के बाद, प्रत्येक जूरी सदस्य अपनी राय बताएगा कि उसके विचार में आरोपी एक प्रमाणित भारतीय नागरिक है या घुसपैठिया है या फिर वह एक शरणार्थी है | प्रत्येक जूरी सदस्य यह भी बतायेगा कि यदि आरोपी एक घुसपेठिया है तो भारत में अनुचित तरीके से प्रवेश करने के लिए उसे कितने वर्षों के लिए कारावास होना चाहिए और कितना जुर्माना उस पर लगाना चाहिए, और यदि आरोपी एक शरणार्थी या भारतीय नागरिक है, तो उसको हुयी असुविधा के लिए मुआवजे की राशि कितनी होनी चाहिए। मुआवजे की राशि न्यूनतम 0 से अधिकतम 1,00,000 के मध्य होगी |
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(6.8) नागरिक, शरणार्थी या घुसपैठिया होने का निर्णयन
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(6.8.1) यदि 67% से अधिक जूरी सदस्य आरोपी को घुसपैठिया घोषित कर देते हैं तो राष्ट्रीय रजिस्ट्रार प्रत्येक जूरी सदस्य द्वारा सुझाई गयी कारावास महीनो की मध्यस्थ संख्या को चुनेगा और उसे उतने महीनों के लिए जेल में डाल देगा। कारावास अवधि पूर्ण होने पर राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उसे वापिस उस देश में भेज देगा जहाँ से वह आया था।
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(6.8.2) यदि 50% से अधिक लेकिन 67% से कम जूरी सदस्य राय देते हैं कि वह घुसपैठिया है, तब उसे कारावास नहीं होगा एवं उसे भारत में रहने दिया जायेगा। किन्तु उसके रहने का जिला राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा तय किया जाएगा |
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(6.8.3) यदि 50% या उससे कम जूरी सदस्य तय करते हैं कि वह घुसपैठिया है, तो उसे कोई सजा नहीं मिलेगी |
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(6.8.4) यदि 50% से अधिक जूरी सदस्य उसे भारतीय नागरिक घोषित करते हैं, तब उसके विरुद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं होगी और उसके विरुद्ध कोई प्रतिबंध नहीं होंगे , तथा राष्ट्रीय रजिस्ट्रार ज्यूरी सदस्यों द्वारा सुझायी गयी राशियों की मध्यस्थ राशि के बराबर मुआवज़ा देगा |
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(6.8.5) यदि 50% से अधिक जूरी सदस्य उसे गैर-भारतीय नागरिक पर एक शरणार्थी घोषित करते हैं, तब वह भारत में एक निवासी के रूप में राष्ट्रीय रजिस्ट्रार द्वारा बताये गए किसी जिले में रह सकता है, तथा बाद में वह नागरिकता के लिए भी आवेदन दे सकता है |
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(7) याचिकाएँ
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(7.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार या अपराधी, जूरी सदस्य के फैसले की अपील कर सकते है। यह अपील जिस ज्यूरी मंडल के सामने की जायेगी उस जूरी में प्राथमिक जूरी मंडल के दोगुने जिलो से जूरी मंडल चुना जाएगा, तथा प्रत्येक जिले में से राष्ट्रीय रजिस्ट्रार 20 जूरी सदस्य क्रमरहित तरीके से चुनेगा |
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(7.2) द्वितीयक जूरी के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जा सकेगी |
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(8) कारावास / सज़ा में कटौती
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(8.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अधिकारी अपराधी से सगे-संबंधियों के नाम और पते बताने के लिए कहेंगे | यदि वह अपने सगे संबंधियों या अन्य घुसपैठियों के बारे में जानकारी एवं सबूत दे देता है तो राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उसकी सज़ा 1 महीने तक घटा देगा |
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(8.2) यदि राष्ट्रीय रजिस्ट्रार अधिकारीयों को शुबहा हो तो अपराधी से अन्य घुसपैठियों के नाम उगलवाने के लिए वे उसका सार्वजनिक नार्को टेस्ट ले सकते हैं।
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(9) शरणार्थियों का भार पूरे भारत में विभाजित करने के लिए जिलो का निर्धारण
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(9.1) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार उन जिलो की सूची तैयार करेगा जहाँ शरणार्थियों की जनसँख्या कम है | ( टिप्पणी : इस तरह असम ,पश्चिम बंगाल , दिल्ली, उत्तर पूर्व राज्य , मुंबई , गुडगाँव , नॉएडा ,आदि इलाको के जिलों के नाम इस सूची में नहीं आयेंगे। क्योंकि ये क्षेत्र पहले ही अपने हिस्से के शरणार्थियों को शरण दे चुके हैं ) |
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(9.2) राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सीमावर्ती जिलो एवं ऐसे जिलो को जहाँ आर्थिक अवसर कम है सूची में से हटा देगा | ( टिप्पणी : सीमावर्ती जिले सुरक्षा की दृष्टी से संवेदनशील होते है तथा कम आर्थिक अवसरो वाले शहर शरणार्थियों को जीवन यापन के लिए पर्याप्त अवसर नही दे सकेंगे।)
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(9.3) शरणार्थियों को उन जिलो में ही निवास करना होगा जिन्हें सूची में दर्ज किया गया है।
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(RTR) घुसपैठियों और शरणार्थीयों मामलो के लिए "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय रजिस्ट्रार"
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(RTR.1) यदि भारत का कोई मतदाता राष्ट्रीय रजिस्ट्रार बनना चाहता है, तो वह व्यक्तिगत रूप से अपने जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित हो सकता है | जिला कलेक्टर उससे सांसद के चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर का आवेदन शुल्क लेकर राष्ट्रीय रजिस्ट्रार पद के लिए उसकी उम्मीदवारी स्वीकार करेगा और उसे एक विशिष्ट एक सीरियल नंबर जारी करेगा |
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(RTR.2) कोई भी मतदाता पटवारी कार्यालय में 3 रू शुल्क देकर अधिकतम 5 उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रजिस्ट्रार पद के लिए अनुमोदित कर सकता है | पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में डालेगा और उस व्यक्ति का मतदाता पहचान पत्र संख्या, समय / दिनांक और उसके द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नामो को दर्ज करके एक रसीद देगा | पटवारी नागरिक द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ रखेगा |
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(RTR.3) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा।
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(RTR.4) यदि किसी उम्मीदवार को 43 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त है और यह अनुमोदन यदि पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के अनुमोदनों से 1 करोड़ अधिक भी है, तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन पाने वाले व्यक्ति को नए राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है | इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा |
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(RTR.5) यदि पदासीन राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के पास 35 करोड़ से कम अनुमोदन है तो प्रधानमंत्री उसे बदल सकते है |
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(RTR.6) प्रधानमन्त्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे नागरिक अपने अनुमोदन एस.एम.एस या एटीएम या मोबाइल फ़ोन एप्प के माध्यम से दर्ज / रद्द करवा सके |
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(RTR.7) टिप्पणी : भविष्य में प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है, जहाँ मतदाता किसी उम्मीदवार को (-100 से 100) तक के अंक दे सके | इस तरह मतदाता के पास विकल्प होगा कि वह स्वीकृती या अस्वीकृती के साथ अंक भी दे सके। यदि मतदाता ने अंक नहीं दिए है और सिर्फ स्वीकृति / अस्वीकृति दी है तो अस्वीकृति का अर्थ शून्य अंक तथा स्वीकृति का अर्थ 100 अंक होगा | यदि किसी उम्मीदवार को मिले सकारात्मक अंक सभी दर्ज मतदाताओं के 33% से अधिक है तो उसके नकारात्मक अंको को ख़ारिज कर दिया जाएगा। जिस उम्मीदवार के पास अधिकतम अंक होंगे और जिसके पास संभावित अधिकतम अंको के 51% से अधिक भी अंक होंगे उसे राष्ट्रीय रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया जा सकेगा |
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(CV) जनता की आवाज (Citizens’ Voice):
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(CV.1 ) यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस कानून से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र (फोटो) एवं अन्य विवरण के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2 ) किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो, तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा । मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा। हाँ / नही की गिनती प्रधानमंत्री या किसी अधिकारी या अन्य पर बाध्यकारी नहीं होगी |
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===== घुसपैठियों को निकालने और शरणार्थियों को शरण देने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट का समापन ====