> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-09-20

Pawan Jury BhilwaraRj

बांग्लादेशी घुसपैठियो को खदेड़ने को लेकर आवश्यक क़ानून लागू न करने के बचाव में दिए जाने वाला सामान्य तर्क एवं उसका जवाब :
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"सब काम धीरे धीरे होता है। जल्दबाजी न करिये। थोड़ा शान्ति रखिये। सब कुछ होगा।"
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यह मिसाल अप्रासंगिक है, और मामले को किनारे करने के लिए दी जाती है। सभी काम धीरे धीरे या आराम से नहीं किये जाते। किसी काम को कितनी त्वरित गति से करना है यह अमुक कार्य की प्रकृति एवं परिस्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए सभी शारीरिक व्याधियों का इलाज यदि त्वरित रूप से न किया जाए तो वे जड़ पकड़ लेती है। ये घुसपैठिये पिछले कई सालो से रह रहे है। और इस काम को धीरे धीरे करने के चक्कर में ही इसे पिछले 25 सालों से टाला जा रहा है। और जितना ही हम विलम्ब कर रहे है उतना ही इनकी जड़े मजबूत हो रही है। उदाहरण के लिए यदि इन्हे 2 साल पहले खदेड़ दिया जाता तो इनके पास आधार कार्ड नहीं होते थे। किन्तु धीरे-धीरे का डायलॉग देने वालो ने तीन साल का टाइम पास करवा दिया है और अब ये व्याधि और भी विकट हो गयी है। दरअसल जब आप इस मुद्दे पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि जितनी देरी की जा सकती थी, उससे ज्यादा देरी हो चुकी है। स्थिति हमारे नियंत्रण से बाहर नहीं जा रही है बल्कि यह नियंत्रण से बाहर जा चुकी है !!
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दूसरी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि किसी काम को धीरे या तेज करने का प्रश्न तब खड़ा होता है जब किसी कार्य को "शुरू" किया जाए। यदि आप किसी कार्य की "शुरुआत" को ही टाल देते है तो, न तो काम कभी शुरू होगा और न ही यह कभी पूरा होगा। इन्हे खदेड़ने के लिए हमें जिस क़ानून की जरूरत है पहले हमें उसका ड्राफ्ट चाहिए। सरकार का तरीका यह है कि वह पहले किसी क़ानून का ड्राफ्ट तैयार करती है। फिर यह ड्राफ्ट साल छह महीने तक संसदीय कमेटी, केबिनेट आदि की बैठकों में घूमता है। कभी कभी इस प्रक्रिया में साल-दो साल गुजर जाते है। यदि क़ानून में कोई प्रशासनिक / संवैधानिक / कानूनी त्रुटि है तो इसे फिर से सम्पादित किया जाता है। सम्पादन के बाद पूरी प्रक्रिया का दोहराव होता है। ड्राफ्ट ओके होने के बाद यदि इसे संसद से पास करना है तो सदन की बैठक का इन्तजार करना होता है। फिर लोकसभा से पास होता है और राज्यसभा में जाता है। राज्यसभा के पास फिर से 6 महीने तक टाइम पास करने का पॉवर है। फिर राष्ट्रपति के पास जाता है , और राष्ट्पति भी 6 महीने का टाइम पास कर सकता है !!! मतलब जब किसी काम को धीरे धीरे करना है तो नेता सत्ता में होने के बावजूद पूरी जिंदगी निकाल सकते है। और यदि तेजी से करना है तो भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की तरह सारा काम सप्ताह भर में हो जाता है।
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और क़ानून पास होने के बाद इसके निष्पादन की बारी आती है। निष्पादन में कितना समय लगेगा यह भी ड्राफ्ट देखने से ही मालूम होगा। लेकिन इतना तो तय है कि सवा सौ करोड़ के देश में से 3 करोड़ को ढूंढ कर भगाना आसान नहीं है। क़ानून बन जाने के बाद भी इसके निष्पादन में वक्त लगेगा। यह तो नोटबंदी की तरह नहीं है कि क़ानून आने के अगले दिन में घुसपैठिये लाइन लगा कर निकलना शुरू कर देंगे। पर निष्पादन तो बहुत दूर की कौड़ी है , अभी तो "धीरे धीरे" करने की सलाहें देने वाले कच्चा ड्राफ्ट तक रखने को राजी नहीं है। वे प्रारम्भिक चरण को ही टालना चाहते है !!
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जहां तक हमारी बात है, तो हमने इन घुसपेठियो को खदेड़ने के लिए जो ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है , उसे लोकसभा या राज्यसभा से पास करने की जरूरत ही नहीं है। इस पर प्रधानमंत्री हस्ताक्षर करके सीधे गैजेट में प्रकाशित कर सकते है। गैजेट में आने से यह देश में लागू हो जायेगा। तो जिसकी भी मंशा इन्हे खदेड़ने की है वह सबसे पहले इसका ड्राफ्ट सामने रखेगा। ताकि यह जाना जा सके कि क्या यह क़ानून घुसपेठियो को चिन्हित करने और उन्हें खदेड़ने के लिए पर्याप्त है तथा इस क़ानून को लागू करने के लिए किस प्रक्रिया की आवश्यकता है।
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हम "धीरे धीरे" का तर्क देने वालों से पूछना चाहते है कि क्या उन्होंने या उनका समर्थन प्राप्त किसी पार्टी या किसी संगठन ने अब तक इन्हे खदेड़ने का कानूनी ड्राफ्ट सामने रखा है ? नहीं रखा है !! तो आप उनसे इसका ड्राफ्ट क्यों नहीं मांगते ? संघ=बीजेपी (गंगाधर =शक्तिमान ) से हम पिछले 4 वर्ष से आग्रह कर रहे है कि इसका ड्राफ्ट तो देंवे , ताकि हम प्रक्रिया देख सके। किन्तु ड्राफ्ट की बात आते ही वे इसे सिरे से उड़ा देते है। और कांग्रेस ने तो हमेशा से यही कहा है कि हमारा इस मुद्दे में इंट्रेस्ट ही नहीं है। इस मुद्दे पर बात करनी है तो कोई दूसरी पार्टी पकड़ो।
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तो जो भी लोग इस मुद्दे पर यह सलाहें देते है कि -- "थोड़ा इन्तजार करो" , उन्हें हमारा जवाब है कि बिलकुल हम इन्तजार करने को तैयार है, लेकिन कम से कम वे इसका ड्राफ्ट तो सामने रखें !! जब आप ड्राफ्ट सामने रखेंगे तो हम इस बात से मुतमईन हो जाएंगे कि आपने काम शुरू कर दिया है , और हम यह भी जान सकेंगे कि क्या ड्राफ्ट में सुझाई गयी आपकी प्रक्रिया इन्हे देश से बाहर खदेड़ने के लिए सटीक है या नहीं है। यदि आप तुरंत इसका ड्राफ्ट सामने नहीं रखते तो एक टाइम फ्रेम तो दीजिये कि कब तक आप इसका ड्राफ्ट सामने रखेंगे ? एक सप्ताह, एक महीना, एक साल !!! कब तक ? 25 साल तो हो चुके है !! ड्राफ्ट देने में कितना टाइम और चाहिए आपको ? 50 साल 100 साल ?
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ड्राफ्ट सामने आने बाद ही यह मालूम होगा कि इसे संसद से पास करना है या संविधान संशोधन लाना है या केबिनेट से पास करना है। पर ये सब विषय तब निकलकर आएंगे जब आप ड्राफ्ट सामने रखेंगे। जीएसटी का प्रारंभिक ड्राफ्ट 2012 में सार्वजनिक किया गया था। लागू 2017 में हुआ है। और अभी तक यह सुचारु नहीं हुआ है। इसे और दो वर्ष सुचारु होने में लगेंगे !!
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हमने अपना लिखित ड्राफ्ट 2009 में प्रकाशित कर दिया था। इसे हम फिर से संशोधित कर रहे है। संशोधन करके 2 दिवस के भीतर यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा। तो मेरा आप कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि आप जिस भी पार्टी / संगठन से सम्बद्ध है , उनसे बांग्लादेशी घुसपेठियो को देश से बाहर खदेड़ने का ड्राफ्ट सामने रखने को कहें। यदि वे ड्राफ्ट नहीं देते है तो आपको इस बात को समझने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए कि उनकी मंशा इन्हे खदेड़ने की नहीं है। दरअसल वे इस मुद्दे का दोहन दो तरीके से कर रहे है -- चुनावों में वे इससे वोट बटोरते है और सत्ता में आने के बाद वे सऊदी अरेबिया के धनिको से इन्हे न खदेड़ने के एवज में नोट बटोरते है।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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