Pawan Jury BhilwaraRj
मंत्रिमंडल में फेरबदल -- यह मोदी साहेब की प्रदर्शनी है। उनकी जैसी मर्जी हो वे उसे मंत्री बना सकते है। मंत्री अच्छा काम करे या बुरा , श्रेय मोदी साहेब को ही जाएगा। पर इस विस्तार में दो मंत्री काफी दिलचस्प है - निर्मला सीतारमन और आर के सिंह !
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निर्मला सीतारमण - इन्होने स्नातक जे एन यू से और वो भी अर्थशास्त्र विभाग से किया है !! विज्ञान एवं गणित विषयों को छोड़ते हुए जे एन यू के लोग भारत में सबसे ऊँचे दर्जे के राष्ट्र द्रोही है !!! और देश में झूठे फलसफे गढ़ने में जे एन यू का अर्थशास्त्र विभाग तीसरा स्थान रखता है। पहला स्थान स्टीफन और दूसरा आई आई एम का है। मतलब आप जे एन यू के अर्थशास्त्र विभाग से ऐसी कोई भी उम्मीद नहीं कर सकते जिसका सरोकार देश हित से हो।
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दूसरी विडंबना यह है कि इनके पति भी जे एन यू से ही है, और कसर पूरी करने के लिए उन्होंने अर्थशास्त्र की उच्च शिक्षा "लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स" से हासिल की। उन्होंने वहां से पीएचडी किया है !! और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स मिथ गढ़ने और झूठ फैलाने में पूरी दुनिया की सर्वोच्च संस्था है !!! और भी निखार लाने के लिए फिर उन्होंने कोंग्रेस ज्वाइन की। मतलब वे कोंग्रेस के नेता भी रहे है !! बहुत पहले की बात है जब निर्मला सीतारमण कोंग्रेस ज्वाइन करने को ही थी लेकिन उनके परिवार के कुछ प्रबुद्ध वरिष्ठ जनो ने उन्हें सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखने की सलाह दी। क्योंकि तब उनके पति कोंग्रेस में थे अत: अन्डो को अलग अलग टोकरियों में रखने के लिए उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली !!!
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एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा अलग अलग पार्टिया ज्वाइन करना आम बात है, परन्तु पति-पत्नी का ही अलग अलग पार्टियाँ ज्वाइन कर लेने की घटना दुर्लभ होती है।
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इस तरह से निर्मला ने संघ=बीजेपी ज्वाइन की और उनके पति कोंग्रेस में रहे। और 2006 में उनके पति ने प्रजा राज्यम पार्टी ज्वाइन कर ली !!! प्रजा राज्यम पार्टी एक 100% फ्रोड पार्टी थी जिसने एक सुपर फ्रोड नेता चिरंजीवी को रचा और इस पार्टी की स्थापना कोंग्रेस ने सिर्फ इसीलिए की थी ताकि कोंग्रेस से टूट कर बीजेपी / तेदेपा में जाने वाले वोटो को प्रजा राज्यम पार्टी में खींचा जा सके। इस तरह चिरिन्जिवी एक वोट कटुआ और प्रजा राज्यम पार्टी एक वोट कटुआ पार्टी थी। और भी रोचक बात यह है कि आगे चलकर प्रजा राज्यम पार्टी का फिर से कोंग्रेस में विलय हो गया !!! आजकल सीताराम जी किस पार्टी में है, मुझे पता नहीं !! और पता करने का कोई औचित्य भी नहीं है।
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तीसरी विडंबना यह है कि -- निर्मला जी ने बीबीसी में काम किया है !!! मैं इस बात पर शर्त लगा सकता हूँ कि जिसमे भारत के प्रति थोड़ा भी सम्मान एवं अपनत्व बचा है वह बीबीसी में एक सप्ताह से ज्यादा नहीं टिक सकेगा !! बीबीसी ऐसे लोगो से भरा हुआ है जो बुरी तरह से "गोरो की श्रेष्ठता" की अवधारणा में विश्वाश करते है !!! कोई ऐसी संस्था में सिर्फ तब ही काम कर सकता है जब वह इस बात पर विश्वास करता हो कि गोरो के पास "काले और भूरे" लोगो पर शासन करने का स्वाभाविक अधिकार है !!!
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उपरोक्त तीन विडंबनाओ के सिवाय वे हर तरीके से रक्षा मंत्री बनने के काबिल है -- सच्ची !!
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राजकुमार सिंह - इक्का दुक्का ख़ामियो को छोड़ते हुए इस आदमी के पास भी मंत्री बनने की पूरी काबलियत है। एक तो ये साहब कोंग्रेस के शासन में गृह सचिव थे !! फिर इन्होने फरमाया कि, भगवा आतंक एक बढ़ता हुआ खतरा है !!! और फिर इन्होने बताया कि संघ बम धमाके करवाने की गतिविधियों में शामिल रहा है !!! हालांकि इस बात की अवहेलना की जा सकती है कि 1990 में आडवाणी को गिरफ्तार भी इसी आदमी ने किया था, क्योंकि उस समय वे जिला कलेक्टर थे अत: उन्हें पीएम / सीएम के आदेशो का पालन करना था।
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किन्तु भगवा आतंक के किस्से गढ़ना और इसका जिम्मेदार संघ को ठहरा देना अपने आप में यह दर्शाता है कि ये झूठ गढ़ने और कपट करने में कितने माहिर है। मुझे नहीं पता कि क्या चल रहा है , किन्तु इस बात की कतई अवहेलना नहीं की जा सकती कि इस आदमी ने भगवा आतंक की थ्योरी चलायी और संघ को आतंकी गतिविधियों में लिप्त बताया !!!
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बहरहाल, जो भी है , यह मोदी साहेब का विशेषाधिकार है कि वे किन्हें मंत्री बनाते है और किसे नहीं। हमें उनके इस फैसले में ज्यादा दखल नहीं करना चाहिए।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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