> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-08-18

Pawan Jury BhilwaraRj

आरक्षण समायोजन के लिए कानूनी ड्राफ्ट
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Modified Reservation
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यह क़ानून अगड़ा-पिछड़ा में बढ़ रहे घर्षण की समस्या का बिना किसी प्रतिरोध के समाधान करता है।
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प्रस्तावित क़ानून दलितों की सहमती से आरक्षण का इस तरह पुनर्वितरण करता है कि जिन वंचित दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है, उन्हें भी इसका लाभ मिले, और जिन दलितों को आरक्षण की आवश्यकता नहीं है वे स्वेच्छा से किसी समयावधि अस्थायी रूप से आर्थिक विकल्प का चयन कर सके। और जितने व्यक्ति आर्थिक विकल्प चुन लेंगे उस अनुपात में आरक्षण कोटे में आनुपातिक रूप से अस्थायी कमी आ जायेगी।
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इस कानून में 4 खंड है। प्रधानमन्त्री इस क़ानून का एक या एक से अधिक या सभी खंड गेजेट में प्रकाशित कर सकते है।
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#Rrp27 , #ModifiedReservation
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो प्रधानमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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“प्रधानमंत्री जी, कृपया आरक्षण में आर्थिक विकल्प का क़ानून गेजेट में छापें - #ModifiedReservation , #Rrp27
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-----ड्राफ्ट का प्रारम्भ ----
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खंड – अ ; दलितों के लिए आर्थिक विकल्प के प्रावधान
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(1) प्रधानमन्त्री आरक्षित वर्ग के नागरिको के लिए 'आर्थिक विकल्प' चुनने की प्रक्रिया के संचालन तथा प्रबंधन के लिए एक सचिव की नियुक्ति करेंगे।
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(2) SC/ST/OBC वर्ग का कोई भी नागरिक तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर 'आर्थिक विकल्प' के लिए खुद को पंजीकृत करवा सकेगा। यदि प्रार्थी कि आयु 18 वर्ष से कम है तो 'आर्थिक विकल्प' चुनने का निर्णय उसकी माता करेगी। कोई व्यक्ति किसी भी दिन अपने आर्थिक विकल्प की पात्रता को बिना कोई शुल्क दिए रद्द कर सकेगा ।
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(3) यदि किसी व्यक्ति ने आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी प्राप्त की है, तो वह आर्थिक विकल्प चुनने का पात्र नही होगा। किन्तु यदि किसी व्यक्ति ने शिक्षा के लिए आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह लाभ लेने के 4 वर्ष बीतने के पश्चात् आर्थिक विकल्प चुन सकेगा ।
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(4) यदि कोई व्यक्ति आर्थिक विकल्प चुनता है, तो वह हर महीने के अंत में 50 रू प्राप्त करेगा, जब तक कि वह अपने आर्थिक विकल्प के दर्जे को रद्द नहीं कर देता। इस राशि को मुद्रा स्फीति के अनुसार समय समय पर समायोजित किया जाता रहेगा। रूपये का भुगतान हर 3 महीने में किया जाएगा।
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(5) चतुर्थ श्रेणी की सेवाओं को छोड़ते हुए, केंद्र सरकार / राज्य सरकारों या उनकी इकाइयों के अधीन ऐसी नियुक्तियों/परीक्षाओं के लिए, जिनमे चयन का आधार लिखित परीक्षा या/और शारीरिक दक्षता परीक्षा या/और अन्य कोई वस्तुनिष्ठ परीक्षा है, के लिए SC/ST/OBC वर्ग के आरक्षित कोटे के प्रतिशत का निर्धारण करने के लिए, SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको द्वारा चुने गए आर्थिक विकल्पों के प्रतिशत को SC/ST/OBC वर्ग के कोटे की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा।
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किन्तु घटायी गयी यह सीमा आरक्षित कोटे के लिए तय अधिकतम सीमा के एक चौथाई से कम नही होगी। तथा चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों / नियुक्तियों में आरक्षित कोटे की रिक्तियों की संख्या बिलकुल भी नहीं घटायी जायेगी।
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स्पष्टीकरण-1 : मान लीजिये कि किसी राज्य में ST वर्ग की जनसँख्या 1 करोड़ तथा इस वर्ग के लिए आरक्षित कोटे की अधिकतम सीमा 14% है । यदि इस राज्य के 1 करोड़ ST वर्ग के नागरिको में से 45 लाख नागरिक आर्थिक विकल्प चुनते है, तो अमुक राज्य के लिए ST वर्ग के लिए लागू आरक्षित कोटा (14 -14×0.45 = 7.7%) 7.7 प्रतिशत होगा । किन्तु यदि 1 करोड़ में से 90 लाख नागरिक आर्थिक विकल्प चुनते है, तब भी आरक्षित कोटा अधिकतम सीमा (14%) का एक चौथाई (14÷4=3.5%) यानी 3.5 प्रतिशत बना रहेगा ।
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स्पष्टीकरण-2 : अनुच्छेद (4) उन पदों की चयन प्रक्रिया पर लागू नही होगा जिन पदों पर नियुक्ति के लिए साक्षात्कार और/या अन्य किसी व्यक्तिनिष्ठ मूल्यांकन को आधार बनाया गया हो।
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(6) यदि व्यक्ति ने अपने आर्थिक विकल्प को रद्द कर दिया है तो वह आरक्षण का लाभ लेने के लिए फिर से आवेदन कर सकेगा । किन्तु यदि उसने आरक्षण का लाभ लेकर नौकरी हासिल की है तो उसका नाम आर्थिक विकल्प सूची से हमेशा के लिए हटा दिया जाएगा ।
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(7) चुने हुए आर्थिक विकल्पों के लिए भुगतान की व्यवस्था हेतु आवश्यक धन रिक्त भूमि कर से अर्जित किया जाएगा, अन्य किसी स्त्रोत से नहीं ।
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दलित क्यों इस प्रक्रिया का समर्थन करेंगे ?
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क्योंकि 80% से अधिक दलित गरीब है और 12 वी कक्षा पास भी नहीं है, अत: उनके लिए आरक्षण की कोई उपयोगिता नही है । एक 5 सदस्यीय परिवार यदि आर्थिक विकल्प चुनता है तो उसे बिना किसी हानि के 3000 रू का लाभ प्राप्त होगा। इस तरह ज्यादा से ज्यादा दलित आर्थिक विकल्प चुनेंगे, और उसी अनुपात में आरक्षित सीटों में कमी हो जायेगी। जब कोई दलित आरक्षण का लाभ लेना चाहेगा, तो आर्थिक विकल्प को त्याग कर फिर से आरक्षण के लिए आवेदन कर सकेगा। इस तरह व्यावहारिक रूप से आरक्षित कोटे में दलितों की सहमती से कमी आ जायेगी।
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लागत : भारत में SC/ST/OBC वर्ग के नागरिको की संख्या 80 करोड़ है । यदि इन वर्गो के सभी नागरिक आर्थिक विकल्प चुन लेते है, तब भी यह राशि 50 हजार करोड़ होती है, जो कि भारत की जीडीपी का सिर्फ 0.5% है। हमारा प्रस्ताव है कि यह राशि सिर्फ रिक्त भूमि कर से ही एकत्र की जानी चाहिए, अन्य किसी स्त्रोत से नही ।
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खंड - ब ; अति पिछड़े वर्ग तथा संपन्न वर्ग में आरक्षण का पुनर्वितरण
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[ टिप्पणी : यह खंड अति पिछड़े व संपन्न वर्ग में आरक्षण के असमान वितरण की समस्या का समाधान करता है। आरक्षण के वर्तमान प्रावधानों से दलित वर्ग के अति पिछड़े वर्ग को पर्याप्त लाभ नही मिल पा रहा है, जबकि संपन्न वर्ग (क्रीमीलेयर) आरक्षण के लाभों का ज्यादा उपयोग कर रहा है ।
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उदाहरण के लिए ST वर्ग में 10 उप जातियां जैसे भील तथा मीणा शामिल है। यदि ST वर्ग में भीलो की आबादी 50% तथा मीणा की आबादी 30% है तो भीलो को भी इसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए । किन्तु यदि ST वर्ग में आरक्षण का लाभ लेकर मीणा जाति ने 60% प्रतिनिधित्व प्राप्त कर लिया है तो इसका दुष्प्रभाव यह होगा कि ST वर्ग की अन्य जातियां पिछड़ी हुयी ही रहेगी, जबकि पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त कर चुकी जातियों का प्रतिनिधित्व बढ़ता जाएगा । इसी तरह SC/ST/OBC वर्ग में जो व्यक्ति संपन्न हो चुके है, उनके लाभों को घटाकर उसी वर्ग के शेष पिछड़े हुए व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए ।
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इस व्यवस्था को लागू करने के लिए हमें सबसे पहले एक जातिय जनगणना की आवश्यकता है, ताकि प्राप्त आंकड़ो के आधार पर न्यायोचित व्यवस्था बनायी जा सके । इस ड्राफ्ट में जातिगत आधार पर जनगणना के लिए भी निर्देश शामिल किये गए है। ]
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(8) देश के सभी हिन्दू, सिख, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियो के बारे में निम्नलिखित ब्यौरा एकत्र करने के लिए प्रधानमन्त्री जातिय जनगणना करवाएंगे -- व्यक्ति का नाम, पहचान संख्या, जाति, उपजाति, सम्बंधित SC/ST/OBC वर्ग, उसके स्वामित्व की अकृषि भूमि का ब्यौरा एवं इस भूमि का सर्कल मूल्य, पिछले तीन वर्षो में प्रस्तुत आयकर प्रतिवेदन के आधार पर या सरकारी अभिलेखों में उसके द्वारा घोषित की गयी उसकी औसत आय ।
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(8.1) यदि कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ ले चुका है तो उसे अपनी सही/सच्ची जाति की घोषणा करनी होगी । यदि वह ऐसा नही करता है तो ज्यूरी मंडल उसे 6 माह के कारावास की सजा सुना सकेगा ।
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(8.2) यदि कोई व्यक्ति आरक्षण का लाभ लेना चाहता है तो उसे अपनी सही/सच्ची जाति की घोषणा करनी होगी । यदि वह ऐसा नही करता है तो उसे भविष्य में कभी आरक्षण का लाभ नही मिलेगा ।
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(8.3) यदि कोई व्यक्ति अपनी जाति की घोषणा नही करता है तो उसे सामान्य वर्ग में माना जाएगा ।
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(9) इस खंड की धारा (15) में दी गयी तालिका के अनुसार प्रधानमन्त्री व्यक्तियों को अंक आवंटित करेंगे तथा प्रत्येक जाति एवं उपजाति के लिए औसत अंको की गणना करेंगे ।
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(10) प्रधानमन्त्री SC, ST एवं OBC वर्ग की सभी जातियों को आवंटित अंको के आधार पर घटते हुए क्रम में सूचीबद्ध करेंगे । वे SC, ST तथा OBC वर्ग की सूचियों को निम्नांकित विधि से 4 भागो में विभाजित करेंगे –
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समूह-1 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिन्दु के बराबर या अधिक का औसत।
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समूह-2 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिंदु और मध्य बिंदु के 0.75 के गुणन के बीच का औसत।
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समूह-3 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिंदु के 0.25 तथा 0.5 के गुणन के बीच का औसत।
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समूह-4 : अमुक जाति के अंको के मध्य बिन्दु के 0.25 के गुणन से कम का औसत।
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(11) आरक्षित कोटे से अर्हित (क्वालीफाई) उम्मीदवारों की 4 वरीयता सूचियाँ बनायी जायेगी तथा चौथे समूह से 4 उम्मीदवार, तीसरे समूह से 3 उम्मीदवार, दुसरे समूह से 2 उम्मीदवार तथा पहले समूह से एक उम्मीदवार का चयन किया जाएगा।
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(12) प्रधानमंत्री SC, ST तथा OBC वर्ग की जातियों के लिए इसी प्रकार की समूह आधारित सूचियाँ तैयार करेंगे, तथा आरक्षण के लिए उम्मीदवारों को उपरोक्त वर्णित विधि के अनुसार वरीयता देंगे।
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(13) यदि किसी जाति के अंको का औसत देश के अंको के औसत से अधिक हो जाता है तो उस जाति को SC/ST/OBC की श्रेणी से हटा दिया जाएगा।
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(14) अंक सूचियों को हर वर्ष अद्यतन एवं समायोजित किया जाएगा।
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(15) अंक निर्धारक सूचकांक तालिका
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(15.01) प्रधानमन्त्री, उच्चतम न्यायलय के न्यायधीश, उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश, केंद्र सरकार में नियामक, रिजर्व बेंक गवर्नर एवं डिप्टी गवर्नर, बेंक चेयरमेन - 50 लाख अंक
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(15.02) उच्च न्यायलय के न्यायधीश, मुख्य सत्र न्यायधीश, केंद्र सरकार के अधीन उप सचिव, राज्य सरकारों के नियामक तथा मुख्यमंत्री - 40 लाख अंक
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(15.03) सत्र न्यायधीश एवं केंद्र सरकार के मंत्री - 10 लाख अंक
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(15.04) अन्य निचली अदालतों के न्यायधीश एवं राज्य सरकारों के मंत्री - 5 लाख अंक
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(15.05) सांसद एवं अधिनस्थ सचिव पद से ऊपर पदक्रम के अधिकारी - 1 लाख अंक
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(15.06) विधायक एवं पंचायत सरपंच - 15 हजार अंक
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(15.07) सार्वजनिक उपक्रमो (PSU) को छोड़ते हुए केंद्र तथा राज्य के सभी विभागों के प्रथम श्रेणी के अधिकारी - 20 हजार अंक
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(15.08) केंद्र तथा राज्यों के अधीन सभी द्वितीय श्रेणी के अधिकारी - 10 हजार अंक
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(15.09) केंद्र तथा राज्य सरकारों के अधीन सभी तृतीय श्रेणी के अधिकारी - 5 हजार अंक
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(15.10) उपरोक्त वर्णित सभी अधिकारियों को सम्मिलित करते हुए केंद्र, राज्य एवं सार्वजनिक उपक्रमों के सभी श्रेणी के अधिकारी - वार्षिक आय÷100
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(15.11) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 10 लाख गुना अधिक संपत्ति धारण करने वाले व्यक्ति - 1 करोड़ अंक
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(15.12) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 1 लाख गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 10 लाख अंक
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(15.13) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 10 हजार गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 1 लाख अंक
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(15.14) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 1 हजार गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 10 हजार अंक
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(15.15) प्रति व्यक्ति सम्पत्ति दर से 100 गुना अधिक मूल्य की संपत्ति धारण करने वाला व्यक्ति - 1 हजार अंक
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खंड – स ; उच्चतम न्यायलय में साक्षात्कार के आधार पर नियुक्तियों के प्रावधान
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[ टिप्पणी : यह खंड उच्चतम न्यायलय में न्यायधीशों की नियुक्ति के बारे में है । यह खंड जिन पदों की नियुक्ति लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाती है, उनमे SC/ST/OBC वर्ग के लिए अनिवार्य आरक्षण सुनिश्चित करता है। यदि नियुक्ति साक्षात्कार के माध्यम से की जाती है तो प्रधानमन्त्री सरकारी आदेश से ऐसे पदों पर आरक्षण लागू कर सकेंगे। ]
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(16) सैन्य विभाग के अलावा यह कानून संघीय सरकार द्वारा वित्त पोषित तथा संघीय सरकार के अधीन कार्यरत सभी संस्थाओं /विभागों / इकाइयों , सभी न्यायालयों तथा विश्वविद्यालयों पर लागू होगा।
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(17) यदि कोई संस्था किन्ही पदों पर नियुक्ति के लिए सामान्य चुनावी प्रक्रिया के स्थान पर साक्षात्कार या व्यक्तिनिष्ठ प्रक्रिया या किसी अवस्तुनिष्ठ प्रक्रिया का प्रयोग करती है तो प्रधानमन्त्री को यह अधिकार होगा कि वे अमुक पदों की चयन प्रक्रिया के लिए जातिगत आधार पर SC/ST/OBC वर्ग हेतु आरक्षण लागू करने के लिए सरकारी आदेश जारी कर सकेंगे ।
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(18) अब से उच्चतम न्यायलय में 7% पद SC के लिए, 14% पद ST के लिए तथा 25% पद OBC के लिए आरक्षित रहेंगे । प्रतिशत द्वारा निर्धारित पदों का पूर्णांक प्राप्त करने के लिए प्रथम 5 वर्षो तक छोटी संख्या तथा अगले 5 वर्षो तक बड़ी संख्या को आधार बनाया जाएगा । यदि उच्चतम न्यायलय में न्यायधीशों की नियुक्ति का आधार अवस्तुनिष्ठ चयन होता है तो यह अधिनियम ऐसी नियुक्तियों पर लागू होगा । यदि नियुक्ति का आधार सामान्य चुनाव है तो आरक्षण जारी रहेगा । यदि चयन का आधार वस्तुनिष्ठ है, तो आरक्षण लागू नहीं होगा।
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खंड – द ; गैर हिन्दू धर्मावलंबियो के आरक्षण लाभों पर रोक के लिए प्रावधान
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[ टिप्पणी : यह खंड अहिंदू धर्मावलम्बियों को आरक्षण के लाभ से वंचित करता है। ड्राफ्ट में उत्पत्ति के आधार पर जैन, बौद्ध तथा सिक्ख धर्मावलंबियो को हिन्दू धर्म की श्रेणी में ही रखा गया है। ]
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(19) SC, ST तथा OBC वर्ग के नागरिको को प्राप्त आरक्षण के लाभ सिर्फ हिन्दू, जैन, बौद्ध एवं सिक्ख धर्म के SC, ST एवं OBC वर्ग के नागरिको के लिए ही उपलब्ध रहेंगे ।
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(20) SC, ST तथा OBC वर्ग के नागरिको को प्राप्त आरक्षण के लाभ हिन्दू, जैन, बौद्ध एवं सिक्ख धर्म के SC, ST एवं OBC वर्ग के नागरिको के अलावा अन्य किसी भी धर्म के नागरिको के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे ।
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(21) जनता की आवाज
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(21.1) यदि कोई मतदाता इस कानून के किसी भी खंड की किसी भी धारा में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(21.2) यदि कोई मतदाता धारा 21.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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-----ड्राफ्ट की समाप्ति----